Married to My Ex's Cousin Ch. 3

नक्ष का कजिन

Posted by Divya Verma • Jul 31, 2026 01:41 PM

स्टेज

मिस्टर और मिसेज़ मेहरा चमकदार स्पॉटलाइट के नीचे खड़े थे, उनके चेहरे गर्व से चमक रहे थे।

"लेडीज़ एंड जेंटलमेन, आज रात यहाँ आने के लिए आप सभी का शुक्रिया," मिस्टर राजन मेहरा ने शुरू किया, उनकी नज़र भीड़ पर घूम रही थी। "आज की शाम हमारे परिवार के लिए बहुत खास है।"

पूरे हॉल में तालियों की गूँज गूँज उठी।

राजन ने अपना हाथ उठाकर ध्यान आकर्षित किया, और जारी रखा, "हमें बहुत खुशी हो रही है कि हम अपनी सबसे बड़ी बेटी, लावण्या की कई सालों के बाद विदेश से वापसी का ऐलान कर रहे हैं।"

एक और तालियों की लहर लोगों में फैल गई।

उसी पल, पार्टी के दूसरी तरफ, बार एरिया के पास, एकांश राजन के शब्दों की आवाज़ सुनकर अपने होश में वापस आया।

उसने तुरंत इशिका को दूर धकेला और अपना सिर तेज़ी से स्टेज की तरफ घुमाया।

उसकी बर्फीली नज़र लावण्या और नक्ष पर जम गई, एक खामोश तनाव उसके शांत, बेपरवाह बाहरी आवरण के नीचे उबल रहा था।

वो मेहरा परिवार के साथ पहले ही काफी नरमी बरत चुका था। और फिर भी, न सिर्फ उन्होंने उसे इस नकली पार्टी का न्योता भेजने की हिम्मत की, बल्कि उसे इस तरह अपमानित करने की जुर्रत भी की?

क्या वे सच में सिंह परिवार को इतना कम समझते थे?

इसी बीच, मिसेज़ मेहरा आगे बढ़ीं, शालीनता से मुस्कुराते हुए। "और हमें ये बताते हुए और भी खुशी हो रही है कि लावण्या अब मेहरा परिवार की संपत्ति की वारिस है।"

तालियाँ और जोर से बजने लगीं, लेकिन इशिका का पेट इस एलान को सुनकर मरोड़ खा गया। उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था, उसकी आँखों में अविश्वास भर गया।

इशिका के विचार चक्कर खाने लगे।

उसके दादाजी ने लावण्या को बेदखल कर दिया था… और अब वो गुज़र गए? मेरे माता-पिता मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं?

नहीं। मैं ऐसा नहीं होने दूँगी। मैं अपने हक के लिए लड़ूँगी। इशिका की नज़र स्टेज पर जमी रही।

लावण्या के बगल में खड़ा था नक्ष मल्होत्रा, लंबा और हैंडसम था। ये नज़ारा देख इशिका का खून खौल गया।

'वो कितने करीब लग रहे हैं। तुझे लगता है ये लंबे समय से साथ हैं?' पास ही किसी आवाज़ ने फुसफुसाया।

दूसरों ने जोड़ा, "नक्ष बहुत अच्छी तरह से कनेक्टेड है। वो बहुत सारे प्रभावशाली लोगों को जानता है।" उनके शब्द इशिका के दिल को चीर रहे थे। उसने बड़बड़ाती भीड़ पर नज़र डाली—उनकी प्रशंसा भरी नज़रें उसके पेट में बढ़ती गाँठ को हवा दे रही थीं।

इसी बीच, एकांश अपनी कुर्सी पर वापस बैठ गया, उसकी आँखें सिकुड़ गईं जैसे वो लावण्या और नक्ष को देख रहा था। ये नज़ारा उसके अंदर कुछ अंधेरा और कड़वा हिला रहा था।

"मेहरा परिवार सच में बेशर्म है," उसने अपनी साँसों में बुदबुदाया। "इन्हें एक दर्दनाक सबक सिखाने की ज़रूरत है। अगर मेरी माँ का वादा न होता, तो मैं इस बेकार पार्टी पर एक मिनट भी वेस्ट न करता।"

इशिका ने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं, उसके नाखून उसकी हथेलियों में गड़ रहे थे जैसे उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था। 'मुझे इस आदमी का ध्यान खींचना होगा—चाहे कुछ भी हो,' उसने सोचा।

वो एकांश के थोड़ा और करीब आ गई।

एकांश की नज़र इशिका पर घूमी। एक पल के लिए, लगा जैसे उसने उसे देख लिया हो। लेकिन फिर, उससे मुँह फेर लिया, जैसे उसे कोई फर्क न पड़ता हो।

ये बेपरवाही चुभ गई। इशिका का दिल सिकुड़ गया। उसे अक्सर मुंबई की सॉफ्ट ब्यूटी कहा जाता था।

फिर भी यहाँ, वो खुद को पूरी तरह से अदृश्य महसूस कर रही थी।

एक पल के लिए, उसने पीछे हटने का सोचा, लेकिन नक्ष का लावण्या के साथ खड़ा होने का ख्याल उसके इरादे को फिर से जगा गया। उसने अपने कंधे सीधे किए और एकांश की तरफ एक बहादुर कदम बढ़ाया।

"हे, हैंडसम," उसने पुकारा, एक कॉन्फिडेंट मुस्कान उसके होंठों पर सजी हुई थी। "मेरे प्रपोज़ल के बारे में क्या सोचा?"

बिल्कुल बेशर्म आवाज़ से चिढ़कर, एकांश ने अपनी आँखें खोलीं। उसकी नज़र उसकी आकर्षक आकृति पर पड़ी, फिर नीचे की तरफ गई।

एक चिढ़ी हुई साँस छोड़ते हुए, उसने पूछा, "अब क्या चाहिए तुम्हें?"

इशिका ने एक चमकदार मुस्कान जबरदस्ती लगाई। "मैं तुमसे शादी करना चाहती हूँ।"

जब एकांश ने ये शब्द सुने, उसके मुँह का कोना हल्का सा हिला।

उसने उसे पहचान लिया—वो मेहरा परिवार की दूसरी बेटी थी। लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्यों उसके परिवार ने उसे यहाँ बुलाया ताकि उसे अपमानित कर सके… और साथ ही अपनी बेटी को उसके साथ फ़्लर्ट करने भेजा।

क्या वो अपने परिवार के कहने पर ऐसा कर रही है… या ये उसकी अपनी स्कीम है?

वो कन्फ्यूज़ था। वो मुम्बई अपनी माँ के परिवार से मिलने और उनके एक पुराने वादे को पूरा करने आया था। वो यहाँ इस बकवास के लिए नहीं आया था।

सोच में खोया, वो अनजाने में थोड़ी देर के लिए चुप रहा लेकिन इशिका ने उसकी खामोशी को पूरी तरह से गलत समझ लिया। उसे लगा वो आखिरकार कुछ आगे बढ़ रही है। उसका चेहरा खिल गया जैसे वो थोड़ा और करीब झुकी।

"असल में, ये काफी अच्छी डील है," उसने गर्व से शुरू किया। "मैं इस साल बाईस साल की हूँ, और मैंने यूनिवर्सिटी ऑफ़ वेल्स से ग्रेजुएशन किया है। मैं काबिल हूँ—घर और काम दोनों में। मैं अपने पति को पैम्पर करूँगी। मैं पैसे भी कमा सकती हूँ। मैं हेल्दी हूँ, और मेरी कोई बुरी आदत नहीं है। सबसे बढ़कर, मैं बदलने वाली लड़की नहीं हूँ।"

एकांश वापस हकीकत में आया, उसकी हैरान करने वाली बातों पर वो कुछ नहीं बोल पाया।

उसने अपनी आँखें मलीं, फिर उसे ऐसे घूरा जैसे वो कोई दूसरी भाषा बोल रही हो।

इशिका ने अपना हाथ उठाया जैसे कसम खा रही हो। "मैं कसम खाकर कह सकती हूँ कि आज से, मैं तुम्हारे साथ अच्छा ही बर्ताव करूंगी और हर वादा निभाऊँगी जो मैंने अभी किया है—"

एकांश ने उसे तेज़ी से बीच में रोका, पूरी तरह से धैर्य खो चुका था। "शट अप।"

वो खड़ा हो गया, उसका चेहरा चिढ़ से काला था। वो कुछ कदम दूर चला गया, लेकिन उसका दिमाग उलझा हुआ था। एक पल बाद, वो रुका और उसकी तरफ देखा।

"अगर तुम सच में मुझसे शादी करना चाहती हो," उसने ठंडेपन से कहा, "तो कल रजिस्ट्रार ऑफिस के खुलते ही आ जाना।"

और इतना कहकर, वो चला गया।

एक पल के लिए, इशिका जड़ होकर खड़ी रह गई, वो इस रूड आदमी के शब्दों को समझ नहीं पा रही थी। क्या उसके कान उसके साथ खेल रहे थे? या शराब उसके दिमाग में खलबली मचा रही थी?

उसे शक हुआ कि उसने बहुत पी लिया था और ये उसकी इमेजिनेशन थी। लेकिन उसने वो दृश्य अपने दिमाग में बार-बार चलाया और उसके होंठों को अपनी याद में बार-बार हिलते देखा।

वो अभी भी सन्न थी कि संजना ने उसके कंधे को थपथपाया।

संजना ने उसे एक हमदर्दी भरी नज़र दी। "उससे परेशान मत हो। अब जब मैंने उसे अच्छे से देखा, तो वो इतना हैंडसम भी नहीं है। और सच कहूँ, वो थोड़ा बहुत लंबा है।"

संजना बकबक कर रही थी। उसे दिलासा देने की कोशिश कर रही थी।

एक पल बाद, इशिका ने अपना सिर श्योरिटी से हिलाया। "नहीं। उसने मुझसे शादी करने के लिए हाँ कह दी," उसने एक सन्न फुसफुसाहट में कहा।

संजना एक पल के लिए खामोश रही—फिर ज़ोर से हँसने लगी।

"नक्ष की कज़िन-इन-लॉ बनने की बधाई हो!"

इशिका आखिरकार अपने होश में वापस आई। "क्या… क्या तुझे लगता है वो सच में मुझसे शादी करेगा?" उसने हिचकिचाते हुए पूछा।

संजना ने इशिका के नरम गाल को चिकोटी काटी। "क्यों नहीं? अगर मैं आदमी होती, तो मैं तुमसे पहली नज़र में प्यार कर बैठती। चल, एक ड्रिंक लेते हैं और तेरी शादी का जश्न मनाते हैं," उसने खुशी से कहा।

इशिका ने गंभीरता से सोचा कि संजना ने कितनी पी ली थी जब वो दूर थी। लेकिन फिर हैंगओवर ने असर दिखाया—उसका सिर भारी हो रहा था, उसके विचार धुँधले।

स्टेज पर, राजन मेहरा ने भीड़ में एकांश और इशिका को देखा। एक मुस्कान उनके होंठों पर आ गई जैसे वो उन्हें गौर से देख रहे थे, उनकी आँखों में संतुष्टि की चमक थी।

उनके बगल में, मालिनी मेहरा ने झुककर पूछा, "किस बात पर मुस्कुरा रहे हो?"

"मैंने सिंह परिवार के एकांश को देखा," राजन ने शांति से जवाब दिया। "मुझे उम्मीद थी कि वो आज रात कोई हंगामा करेगा। लेकिन देखो—उसकी नज़र इशिका पर है। ये अच्छी खबर है, नहीं?"

मालिनी का चेहरा बिगड़ गया। "मुझे उस बदमाश की माँ से किए गए वादे पर पछतावा है। मैंने सोचा था जब वो गुज़र गईं, तो कोई याद नहीं रखेगा। लेकिन वे तो पीछे ही पड़ गए। सच कहूँ, सिंह परिवार हमारे स्टेटस के आसपास भी नहीं है।"

राजन ने सिर हिलाया। "सच है। लेकिन अगर वो आगे आकर हम पर वादा तोड़ने का इल्ज़ाम लगाएँगे, तो हमारी ****्यूटेशन को नुकसान होगा। कोई भी परिवार फिर हम पर भरोसा नहीं करेगा।"

वो रुके, फिर एक ठंडी मुस्कान के साथ जोड़ा, "इसलिए हम इशिका को बलि का बकरा बनाएँगे।"

दंपति ने चुपके से एक साथ हँसी साझा की, जैसे किस्मत ने उन्हें मासूमियत में लिपटा एक सुविधाजनक हल सौंप दिया हो।

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मिलते हैं अगले चैप्टर में…

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