Married to My Ex's Cousin Ch. 2

लावण्या- जायदाद की वारिस

Posted by Divya Verma • Jul 31, 2026 01:41 PM

संजना ने एक पल अपनी दोस्त को देखा। इशिका अब बिल्कुल किनारे पर थी।

वो अपनी दोस्त इशिका की मदद करना चाहती थी, उस कमीने नक्ष और उस चुड़ैल लावण्या से बदला लेना चाहती थी। एक पल की खामोशी के बाद, वो इशिका के करीब झुकी।

उसने अपनी उंगली उस आदमी की तरफ इशारा करते हुए कहा, "वो आदमी हैंडसम है, है ना?" उसने फुसफुसाते हुए कहा। इशिका ने वाइन का एक घूँट लिया और उस शख्स को देखा। वो आदमी काफी हैंडसम था। वो लंबा और आकर्षक लग रहा था, किसी अमीर परिवार के यंग मास्टर की एलिगेंस बिखेर रहा था।

लेकिन इसका क्या फायदा? उसने अपना छोटा सा सिर हिलाया।

"चाहे वो कितना भी अच्छा क्यों न दिखता हो, आज रात मैं डिस्ट्रैक्शन के मूड में नहीं हूँ," इशिका ने कहा।

संजना शरारती ढंग से मुस्कुराई। "अरे, ये सिर्फ उसके हैंडसम चेहरे की बात नहीं है। क्या तुझे पता है वो असल में कौन है?" उसने फिर पूछा।

इशिका के चेहरे का भाव नहीं बदला; बल्कि वो कन्फ्यूज़ लग रही थी। ये देखकर, संजना ने बम गिरा दिया, "वो नक्ष का कज़िन है।"

इशिका ठिठक गई, वाइन का गिलास उसके हाथ में हल्का सा काँप गया।

"नक्ष का कज़िन?" उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी आँखें अब हैरानी से खुली हुई थीं। "पक्का?"

संजना ने कॉन्फिडेंस से सिर हिलाया। "बिल्कुल, मैंने उसे नक्ष के साथ कुछ साल पहले देखा था," उसने कॉन्फिडेंस से कहा।

लेकिन उसकी नज़र में एक झिझक भी थी जो उसके यकीन को धोखा दे रही थी।

इशिका ने एक भौंह उठाई, उसकी उत्सुकता अपने आप ही थोड़ी जाग गई। संजना की आवाज़ साज़िश भरे अंदाज़ में धीमी हो गई। "सुना है, उसके पास मल्होत्रा फैमिली बिज़नेस का पच्चीस परसेंट हिस्सा है, और वो विदेश में एक और कंपनी मैनेज करता है। वो सालों से मुंबई से बाहर था, लो प्रोफाइल रखता था। लेकिन अब? वो वापस आ गया है।"

इशिका गहरी सोच में डूब गई, जैसे सारे टुकड़े अपनी जगह पर आ रहे हों। उसे धुंधला-सा याद था कि नक्ष ने एक-दो बार किसी कज़िन का ज़िक्र किया था, लेकिन उस वक्त वो बेमानी लगा था। अब, इस रहस्यमयी शख्स का आइडिया बड़ा होकर सामने खड़ा था।

"एक बिज़नेस टाइकून, हाँ?" उसने बुदबुदाते हुए कहा।

इशिका की नज़र वापस उस कोने में बैठे आदमी की तरफ गई। एक ख्याल अचानक उसके दिमाग में कौंध गया।

नक्ष ने उसे लावण्या के लिए डंप किया… सिर्फ पावर और पैसे की वजह से। क्या हो अगर वो उस आदमी को जीतने में कामयाब हो जाए?

वो सिर्फ अमीर नहीं लग रहा था — उसकी आभा ही स्टेटस चिल्ला रही थी। और वो नक्ष से कहीं ज़्यादा आकर्षक था।

उस पर, वो नक्ष का कज़िन था। अगर वो उसके करीब आ सके, तो ये नक्ष के मुँह पर एक जोरदार तमाचा होगा।

नहीं, सिर्फ नक्ष नहीं। ये उसकी बहुत ही शर्मीली बहन के लिए भी एक करारा थप्पड़ होगा। थोड़ी देर सोचने के बाद, इशिका ने अपना मन बना लिया, और अब वो दृढ़ नज़र आ रही थी। वो संजना की तरफ मुड़ी।

"तेरे ख्याल में क्या होगा अगर मैं उससे शादी कर लूँ?" उसने पूछा।

संजना, जो अभी पी ही रही थी, ड्रिंक उसके गले में अटक गई, ज़ोर से खाँसने लगी। "क्या?!" वो बुदबुदाई, उसकी चौड़ी आँखें इशिका पर जम गईं, "क्या तू सीरियस है?"

इशिका ने खुशी से मुस्कुराते हुए कहा।

"अगर मैं नक्ष की पत्नी नहीं बन सकी, तो शायद उसके कज़िन की पत्नी बन सकती हूँ। बस उनके चेहरे की कल्पना कर।"

एक पल के लिए, संजना सन्न रह गई। फिर उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान फैल गई।

"मैं तेरे साथ हूँ! उसके कज़िन की शक्ल परफेक्ट है। नक्ष भी उस आदमी जितना हैंडसम नहीं है। और उसके कज़िन की दौलत और ताकत मल्होत्रा परिवार के बराबर है।"

वो एक पल रुकी, फिर आगे कहा,

"इशिका, तुझे कोई शानदार इंसान ढूँढना होगा, वरना मेहरा कॉरपोरेशन में तेरी पोज़ीशन हमेशा लावण्या से नीचे रहेगी। इसलिए मुझे लगता है उसका कज़िन तेरे लिए परफेक्ट मैच है!"

संजना की बातों ने इशिका के इरादे को और मज़बूत कर दिया।

अगर लावण्या के पास मल्होत्रा परिवार का सपोर्ट था, तो मेहरा कॉरपोरेशन में इशिका की पोज़ीशन दाँव पर लग जाएगी।

"ठीक है, मैं अभी उसका दिल जीतने जा रही हूँ!"

इस एलान के साथ, इशिका ने संजना का पर्स पकड़ा और तुरंत अपना मेकअप ठीक करने लगी।

उसका चेहरा पहले के रोने से बर्बाद हो गया था — मस्कारा स्मज हो गया था, आईलाइनर फीका पड़ गया था, गालों पर धब्बे थे। वो कैसे एक आदमी को जीतने की उम्मीद कर सकती थी, जब वो खुद ऐसी बेहाल दिख रही थी?

कुछ ही मिनटों में, वो वापस रेडिएंट, फ्रेश, और बेहद खूबसूरत लगने लगी।

संजना ने पलक झपकाई, इशिका के अचानक बदलाव पर हैरान होकर।

उसने मन ही मन सोचा, ईशी, अभी कुछ पल पहले तुम ब्रेकअप पर रो रही थीं... और अब, कुछ सेकंड बाद, तुम शिकार पर निकल रही हो?

उसने आखिरकार पूछा, "क्या तू सच में इस बारे में श्योर है?"

इशिका ने सिर हिलाया, "हाँ, अब मुझे यही करना है। मेरे लिए ऑल द बेस्ट।" उसने अपने बालों को एक तरफ कंधे पर डाला, फिर आधी भरी रेड वाइन का गिलास उठाया। एक नशीली और प्यारी सी शक्ल के साथ, वो गर्व से उस आदमी की तरफ बढ़ी।

जितना वो उस आदमी के करीब आती गई, उसका बेहद हैंडसम चेहरा उतना ही साफ दिखने लगा। उसकी साफ भौंहें और शानदार नाक का पुल किसी को भी आकर्षित करने के लिए काफी था।

"हाय, हैंडसम। कोई दिक्कत अगर मैं तुम्हारे साथ बैठूँ?" उसने पूछा। वो एक पल रुकी लेकिन कोई जवाब नहीं आया।

माथा सिकोड़ते हुए, इशिका ने अपना हाथ बढ़ाकर उसके कंधे को दो बार थपथपाया।

जब उस आदमी ने धुँधली रोशनी में अपनी नशीली आँखें खोलीं, तो इशिका के दिमाग में एक ही शब्द कौंधा — डेविल।

एकांश ने उसे ठंडी उदासीनता से देखा, और कुछ नहीं बोला।

पास से, इशिका एक पल के लिए बेज़ुबान हो गई। क्या ये आदमी पत्थर से तराशा हुआ है? वो हैरानी से सोचने लगी। वो जानती थी कि वो खूबसूरत है और आकर्षक भी, लेकिन इस आदमी ने एक शब्द भी बोलने की जहमत नहीं उठाई?

उसे तुरंत चिढ़ महसूस हुई।

फिर, बिना किसी हिचकिचाहट के, उसने बेधड़क एक कुर्सी खींची और उसके सामने बैठ गई।

एकांश ने उसे एक तिरछी नज़र से देखा। "क्या चाहिए तुम्हें?" उसने पूछा, उसकी आवाज़ में चिढ़ थी।

इशिका ठिठक गई, और उसकी रूखाई देखकर हैरान हो गई। उसके चेहरे पर दिख रही चिढ़ उसकी बर्दाश्त के बाहर थी।

लेकिन उसने अपने अंदर के जज़्बातों को ज़बरदस्ती दबाया, और धीरे-धीरे उसे एक आकर्षक मुस्कान से बदल दिया।

"क्या तुम्हें पहली नज़र के प्यार पर यकीन है?" उसने मीठी आवाज़ में पूछा।

एकांश ने एक भौंह उठाई, उसके बेहद अलग-थलग भाव में हल्की-सी मज़ाक की चमक आ गई।

"पहली नज़र का प्यार, हाँ?" उसने दोहराया, उसकी आवाज़ में शक था।

उसने अपनी नज़र धुँधले हॉल में घुमाई। पास में कई जवान आदमी खड़े थे — हैंडसम, अच्छे कपड़ों में, सजे-धजे। फिर उसकी आँखें वापस उस पर आ गईं।

धीरे-धीरे, जानबूझकर, उसने उसे सिर से पाँव तक देखा। उसकी नज़र तेज़, चीरती हुई थी — लगभग जैसे वो उसके आर-पार देख रहा हो।

इशिका की रीढ़ में एक ठंडी सिहरन दौड़ गई। एक पल के लिए, उसे लगा जैसे वो किसी बर्फ के तहखाने में आ गई हो।

आखिरकार, उसने बेरहम ठंडे शब्दों से खामोशी तोड़ी,

"Do me a favor… (मेरे ऊपर एक एहसान करो…) और मुझे परेशान करना बंद करो।"

क्या, वो क्या? उसने खुद को देखा। क्या मैं बेवकूफ लग रही हूँ?

शक ने उसके मन में पैर जमा लिया क्योंकि उसे लगा कि शायद उसमें कुछ कमी है। लेकिन वो आगे बढ़ी।

"लोग कहते हैं कि तुम अपनी ज़िंदगी के प्यार को पहचान लेते हो जैसे ही उसे देखते हो। मुझे ऐसा ही लग रहा है।"

उस आदमी का चेहरा काला पड़ गया, उसके चेहरे पर चिढ़ साफ दिखी। वो थोड़ा पीछे झुका। "ठीक है। समझ गया। तुम अब जा सकती हो।"

वो आदमी उठा और जाने लगा।

इशिका का दिल बैठ गया ये देखकर, और अगले ही पल, वो झट से खड़ी हुई और उसकी बाँह पकड़ ली।

जब वो आदमी उसकी तरफ मुड़ा, तो उसने अपना चेहरा उठाकर उसकी नज़रों से मिलाया। अचानक, वो अपने पंजों के बल खड़ी हुई और उसके होंठों को अपने होंठों से रख दिए।

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