The time between us Ch. 2

The time between us - Chapter 2

Posted by Jahnavi Sharma • Jul 26, 2026 11:19 AM

ईहा रॉय, जो एक 21वीं सदी की साइंटिस्ट थी, टोक्यो में अपने एक एक्सपेरिमेंट के दौरान हुई दुर्घटना के चलते 1510 में रत्नसागर पहुंच चुकी थी। उस समय वहां के महाराज रुद्रांशवीर थे। ईहा के पास उसकी एडवांस स्मार्ट वॉच थी। वॉच ने पहले ही ईहा को समय में पीछे आने के बारे में बता दिया था लेकिन ईहा को बस यह किसी तरह का टेक्निकल ग्लिच लग रहा था, उसे यही लग रहा था कि यहां किसी तरह की शूटिंग हो रही है।

ईहा की गलतफहमी तब दूर हुई, जब रुद्रांश ने उसकी आंखों के सामने एक शख्स को बेरहमी से मार डाला। उसने अपना परिचय दिया और साथ ही उसने ईहा को अपनी तलवार की नोक पर ले लिया था। इसी के साथ ईहा को समझ आ गया था कि यह किसी तरह का मजाक या शूटिंग नहीं चल रही है, वह सच में वक्त में पीछे आकर फंस गई है और साथ ही एक ऐसे राजा की तलवार की नोक पर है, जो अपनी सनक के चलते पूरे इतिहास में बदनाम था।

जैसे ही रुद्रांश ने ईहा को तलवार की नोक पर लिया और उससे उसके बारे में पूछा, तब ईहा को माहौल की गंभीरता का एहसास हुआ।

रुद्रांश के बारे में ईहा ने पढ़ा था और वह अच्छे से जानती थी कि अगर वह जवाब देते वक्त थोड़ा सा भी डरी या हड़बड़ाई तो रुद्रांश उसकी बात पर कभी यकीन नहीं करेगा, वैसे भी वह घबराने वाली या शर्मीले स्वभाव की कोई कॉलेज स्टूडेंट नहीं थी। वह एक कॉन्फिडेंट साइंटिस्ट थी।

ईहा ने गहरी सांस ली और उसे समझाते हुए बोली, “लिसन मिस्टर, आई मीन महाराज... प्लीज शांत हो जाइए। ट्रस्ट मी मुझे नहीं पता कि मैं यहां पर कैसे आ गई, यह बस एक तरह का टेक्निकल ग्लिच हुआ है। और मैं किसी तरह की आकाशगामी नहीं हूं। मेरा नाम ईहा है। मैं एक साइंटिस्ट हूं, आप मुझे किसी तरह की वैद्या समझ सकते हैं। अब प्लीज यह तलवार हटाइए इससे एक्सीडेंट हो सकता है। और अगर मेरी जान चली गई तो क्या आप रिस्पांसिबिलिटी लेंगे?”

ईहा के सफाई देने के बावजूद रुद्रांश ने अपनी तलवार नहीं हटाई, वह उसकी आंखों में आंखें डाल कर देख रहा था।

“तुम्हारी आंखों में भय नहीं है। रत्नसागर का कोई भी प्राणी हमारी तलवार की नोक के आगे कांपने लगता है, या तो तुम बहुत बहादुर हो या कोई बहुत बड़ी मूर्ख...” रुद्रांश ने अपनी ठंडी आवाज में कहा।

“व्हाट डू यू मीन बाय दैट... मैं मूर्ख हूं? मैं एक साइंटिस्ट हूं और मैं आपको लॉजिकली हर चीज समझाने की कोशिश कर रही हूं और आप हैं कि उल्टा मुझे ही सुनाए जा रहे हैं। और मेरी आंखों में डर क्यों होगा, मैंने कोई क्राइम थोड़ी ना किया है?” ईहा ने हल्के हैरत भरे लहजे में कहा, उसने हिम्मत जुटाकर तलवार को धीरे से अपनी उंगली से हटाने की कोशिश की और पूरी हिम्मत के साथ कहा, “और हां, देखा जाए तो किसी को डराने से कोई फायदा नहीं होता है, अब आप अपने इस कैदी को ही ले लीजिए। इसकी हालत भी तो बहुत खराब थी, आपने इसे इतना टॉर्चर किया और यहां तक इसकी जान ले ली, लेकिन फिर भी आप इससे कोई इनफॉरमेशन, मेरा मतलब है जानकारी नहीं निकलवा पाए।”

आज से पहले किसी ने भी इतनी बेबाकी से रुद्रांश से बात नहीं की थी, उसे इस लड़की का यह अंदाज काफी अजीब लगा, वह रुक गया था और ईहा को घूरते हुए बोला, “तुम्हें कैसे पता हमें इससे कोई जानकारी चाहिए?”

“कॉमन सेंस महाराज, कॉमन सेंस... आप इसे मारना नहीं चाह रहे थे, बल्कि तड़पा रहे थे,और तड़पाया तभी जाता है जब हमें सामने वाले से कुछ जानना हो। लेकिन अफसोस कि आपके गुस्से ने इसकी जान ले ली।” ईहा जवाब में बोली।

ईहा पूरे कॉन्फिडेंस के साथ जवाब दे रही थी, पर वो नहीं जानती थी कि उसका ये कॉन्फिडेंस और लॉजिक उस सनकी महाराज के सामने कोई काम नहीं आएगा।

ईहा ने चुपके से अपनी स्मार्ट वॉच की तरफ देखा और उसको रुद्रांश की तरफ कर दिया था। उसकी स्मार्ट वॉच रुद्रांश की हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को स्कैन कर रही थी।

जल्द ही रुद्रांश का डेटा स्क्रीन पर झलक रहा था, “ब्लड प्रेशर 135, पल्स रेट 95, क्रॉनिक इन्सोम्निया, एग्रेसिव टेंडेंसीज।”

ईहा ने सिर हिलाया और फिर रुद्रांश की आंखों में आंखें डाल कर कहा, “महाराज, आप काफी समय से सोए नहीं हैं ना? आपकी आंखों के नीचे के ये काले घेरे और यह चिड़चिड़ापन, मुझे लगता है आपको एक अच्छी थे****ी और नींद की जरूरत है ना कि इस खून-खराबे की।”

हालांकि ईहा ने यह डेटा अपनी वॉच के जरिए स्कैन किया था लेकिन वह उसके बारे में काफी कुछ जानती थी। यह सब रुद्रांश को हैरान कर रहा था पर अगले ही पल उसकी यह हैरानी गुस्से में बदल गई थी, उसने फिर से अपनी तलवार को ईहा की तरफ किया और उसका गला पकड़ कर उसे दीवार से सटा लिया था। उसकी पकड़ मजबूत थी।

“तुम्हारा इतना दुस्साहस कि तुम हमारी व्यक्तिगत स्थिति पर टिप्पणी करो,” रुद्रांश ने ईहा की आंखों में देखते हुए तेज सांस लेते हुए कहा, उसकी गर्म सांसें ईहा को अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थीं।

उसने पलक झपका कर रुद्रांश की तरफ देखा, वह इतिहास में एक सनकी और क्रूर बादशाह के तौर पर ही नहीं बल्कि साहस और अपने खूबसूरत चेहरे की वजह से भी जाना जाता था। उसके होठों के ऊपरी हिस्से पर एक तिल था और उसकी हल्की काली आंखें बिना किसी भाव के ईहा को देख रही थीं।

“तुम जो भी हो, तुम्हारी यह चमकती घड़ी और विचित्र वस्त्र तुम्हें मौत से नहीं बचा पाएंगे लड़की, और ये आंखों पर क्या लगा रखा है? क्या ये किसी नए प्रकार का गहना है या भविष्य देखने का उपकरण?” रुद्रांश ने सिर हिला कर कहा और वह ईहा से कुछ कदम दूर हट गया था। उस समय तक भारत में चश्मे का आविष्कार पूरी तरह से नहीं हुआ था।

उसकी आधी बातें ईहा के दिमाग के ऊपर से जा रही थी। अगले ही पहल रुद्रांश ने तेज आवाज में आदेश देते हुए कहा, “सैनिकों, इसे सबसे नीचे वाली कालकोठरी में डाल दो, कल सुबह इसका न्याय होगा।”

रुद्रांश का आदेश मिलते ही सैनिक तेज कदमों से चलकर ईहा के करीब आने लगे, उन्हें अपने पास आते देखकर ईहा घबरा गई थी, अगले ही पल सैनिकों ने उसे पकड़ लिया था।

ईहा ने छटपटाते हुए कहा, “हेय... छोड़ो मुझे... यू कांट डू दिस टू मी... दूर हटो, हाथ मत लगाओ मुझे, दिस इज असॉल्ट और मैं तुम्हारे खिलाफ पुलिस कंप्लेंट करूंगी।”

ईहा के इतने चिल्लाने के बावजूद रुद्रांश ने उसे अनसुना कर दिया था, वह मुड़ा और बिना पीछे देखे वहां से चला गया, वहीं सैनिकों ने ईहा की बांह पकड़ी और उसे घसीटते हुए ले जाने लगे।

“कम से कम मेरा बैग तो दे दो... मेरे इक्विपमेंट्स...” ईहा चिल्लाई, लेकिन किसी ने उसकी बात को नहीं सुना और उसे एक अंधेरे गलियारे में ले जाया गया।

कुछ ही घंटे बाद ईहा एक पत्थर की बनी कोठरी में बंद थी, वहां केवल एक छोटी सी खिड़की थी, जिससे चांद की रोशनी अंदर आ रही थी। ईहा फर्श पर बैठी अपनी वॉच को देख रही थी।

थोड़ी देर पहले रुद्रांश ने ईहा के साथ जो भी किया था उसके बाद ईहा को उस पर गुस्सा आ रहा था और साथ ही खुद पर भी, जो वह इतनी अजीब स्थिति में फंस गई थी।

“ब्रिलिएंट, दैट्स ग्रेट ईहा रॉय... तुम सच में एक जीनियस हो। आई एम प्राउड ऑफ यू, तुमने टाइम ट्रैवल करने का तरीका ढूंढ लिया लेकिन लैंडिंग एक साइको किलर के टॉर्चर रूम में करने की क्या जरूरत थी,” ईहा ने दांत पीसते हुए कहा, वह खुद को मन ही मन कोस रही थी।

अपनी वॉच को देखते हुए ईहा ने प्रोजेक्टिव इंटरफेस को ऑन किया। एक छोटा सा होलोग्राफिक मैप हवा में तैरने लगा था, जो उस सदी के लोगों के लिए सच में चौंकाने वाली बात थी। हवा में एक पूरी फिल्म जैसी दिखाई दे रही थी।

“एआई स्टेटस बताओ,” ईहा ने धीमी लेकिन सख्त आवाज में कहा।

वॉच में से एक मशीनी आवाज आई, “ईहा, हम 15वीं सदी के दक्षिण उत्तरी भारत के एक अज्ञात क्षेत्र में हैं, वर्तमान स्थान का राजनीतिक नाम रत्नसागर है। मेरी बैटरी 15% है और मुझे अभी सोलर चार्जिंग की जरूरत है।”

ईहा ने अपनी मुट्ठियों को कसकर बंद कर लिया। वह खुश थी कि उसने एक ऐसी वॉच बनाई थी जिसके अंदर बहुत सारा डेटा था और साथ ही उसे चलाने के लिए उसे किसी इंटरनेट से कनेक्ट नहीं करना पड़ता था, ऊपर से वह सोलर एनर्जी से चार्ज हो सकती थी लेकिन फिलहाल दुख की बात यह थी कि वह इस वक्त एक अंधेरी कोठरी में बंद थी।

“सिर्फ 15%? मतलब मुझे किसी धूप वाली जगह पर जाकर तुम्हें चार्ज करना होगा लेकिन मैं कैसे जाऊंगी और उस राजा का क्या? वह रुद्रांशवीर? वह बहुत खतरनाक लग रहा था, हिस्ट्री में उसके बारे में सच लिखा हुआ है,” ईहा ने गहरी सांस लेकर पूछा।

“स्क्रीन के अनुसार महाराज रुद्रांशवीर के मस्तिष्क में न्यूरोलॉजिकल असंतुलन है। वह अत्यधिक तनाव और पैरानोईया का शिकार हैं,” एआई ने जवाब दिया।

(नोट : पैरानोइया एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति बिना किसी ठोस सबूत के दूसरों पर बिना वजह शक करता है और साथ ही उसे अंदर ही अंदर यह डर लगता है कि वे उसे नुकसान पहुंचा देंगे। उन्हें हर वक्त इस बात का एहसास रहता है कि हर कोई उनके खिलाफ साजिश कर रहा है।)

ईहा रुद्रांश की हालत समझने की कोशिश कर रही थी, तभी इसी बीच कोठरी के दरवाजे पर उसे किसी के कदमों के आने की आहट सुनाई दी। अगले कुछ सेकंड्स में एक भारी लोहे का दरवाजा खुलने की तेज आवाज गूंजी।

ईहा का पूरा ध्यान दरवाजे की तरफ चला गया था और वह भूल गई थी कि उसने अपनी वॉच के जरिए एक होलोग्राफिक इमेज हवा में बना रखी है। उसने दरवाजे की तरफ देखा तो वहां पर रुद्रांश खड़ा था। इस बार उसके हाथ में तलवार के बजाय एक मशाल थी, उसने मशाल को दीवार पर वहां रखे स्टैंड पर टिका दिया था। वह कोठरी के अंदर आया और तभी उसकी नजर हवा में नीली चमकीली तस्वीर की तरफ गई।

उसे देखते ही रुद्रांश की आंखें फैल गई थीं, उसने अविश्वास भरे भाव के साथ कहा, “डायन... तुम डायन हो... यह... यह क्या माया है? तुम हवा में चित्र कैसे बना पा रही हो?”

उसकी बातें सुनकर ईहा ने अपना सिर झटका और तुरंत अपनी कलाई घुमा दी, जिससे वह होलोग्राफिक इमेज गायब हो गई थी। उसने आंखें घुमाकर कहा, “महाराज, वह जादू नहीं साइंस है और आप जैसे ****्टेटर को यह कभी समझ नहीं आएगा।”

रुद्रांश ने ईहा की तरफ देखा। वह अपने कदम धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ाने लगा था। वह ईहा के इतने करीब था कि वह उसके शरीर से आती फूलों की खुशबू को महसूस कर सकती थी।

“यह कौन से लोक की भाषा बोल रही हो और तुम बार-बार ऐसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों कर रही हो जिसका कोई मतलब नहीं है?” रुद्रांश ने ईहा की तरफ देखते हुए पूछा।

“दूसरे लोक की नहीं महाराज, दूसरे समय की भाषा बोल रही हूं,” ईहा उसे समझाते हुए बोली, अब रुद्रांश भी उसकी बात शांति से सुन रहा था तो ईहा भी उससे सामान्य तरीके से बात कर रही थी।

लेकिन तभी ईहा ने देखा कि रुद्रांश का हाथ अपनी तलवार पर कसा हुआ था। अगर उसे वहां जिंदा रहना था तो इसके लिए जरूरी था कि वह रुद्रांश को इस बात पर यकीन दिला दे कि वह बुरे इरादे से वहां नहीं आई थी।

“आप मुझे मारना चाहते हैं तो मार दीजिए लेकिन एक बात याद रखें कि अगर मैं मर गई तो आप कभी नहीं जान पाओगे कि आपके उस सेनापति ने किसके कहने पर विद्रोह किया था,” ईहा ने कुछ कदम पीछे हटते हुए कहा।

उसे लगा कि वह रुद्रांश को जरूरी जानकारी दे सकती है, यह सोचकर रुद्रांश उसे यहां से बाहर निकाल देगा लेकिन उसकी यह चाल उसी पर उल्टी पड़ गई थी। अचानक रुद्रांश की भौंहें चढ़ गई थीं और उसने अपनी तलवार म्यान से बाहर निकाल ली थी।

“हमें तो पहले ही पता था कि तुम उसके साथ मिली हुई हो। गद्दार... बताओ हमें और कौन है तुम्हारे साथ,” रुद्रांश ने तेज आवाज में कहा और तलवार फिर से ईहा की गर्दन पर रख दी थी।

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आपका लास्ट पार्ट पर रिस्पॉन्स अच्छा रहा। मेरे ड्राफ्ट में तीन टाइम ट्रैवल नोवेल्स है। ये हिट रही, तो बाकी दो भी पब्लिश करूंगी। थैंक्स फॉर योर लव एंड सपोर्ट। बाकी ईहा के लॉजिक महराज के आगे काम नहीं आयेंगे। पढ़कर समीक्षा करके जाना सब।

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