The time between us Ch. 1

The time between us - Chapter 1

Posted by Jahnavi Sharma • Jul 26, 2026 11:17 AM

“आज मैं कुछ ऐसा करने वाली हूं, जिसके बाद साइंस तो क्या पूरी दुनिया हिल जाएगी। आज का दिन इतिहास के सुनहरे पन्नों में लिखा जाएगा।” एक लड़की ने मुस्कुराते हुए कहा, जो इस वक्त टोक्यो की एक एडवांस्ड साइंस लैब के अंडरग्राउंड एरिया के अंदर खड़ी हुई थी।

उसकी नज़रें अपने सामने मौजूद एक बड़ी सी मशीन के ऊपर जमी हुई थी, जो गोल आकृति की और काफी बड़ी मशीन थी। उसके अंदर बहुत सारे कण आपस में टकरा रहे थे। उसकी आवाज उसे किसी पॉप म्यूजिक की तरह लग रही थी।

“बी रेडी ईहा रॉय... क्योंकि यहां से गलती की कोई गुंजाइश नहीं है।” ईहा ने कॉन्फिडेंट चेहरे के साथ कहा, उसकी नज़रें सामने स्क्रीन पर टिकी हुई थी और फिर उसने एक नज़र अपनी कलाई पर बंधी घड़ी की तरफ देखा। वह कोई ऐसी-वैसी घड़ी नहीं थी, बल्कि प्रोजेक्ट क्रोनोस के तहत बनाई हुई एक ऐसी स्मार्ट वॉच थी, जो अपने अंदर न जाने कितना डेटा समेट कर रखती थी। उस घड़ी की खासियत थी, कि ईहा उसके डेटा को बिना इंटरनेट के एक्सेस कर सकती थी।

ईहा एक साइंटिस्ट थी। देर रात तक काम करने की वजह से उसके चेहरे पर थकान थी पर आँखों में कुछ कर गुजरने का जज्बा था। उसके साथ काम करने वाले कलीग्स लगभग वहां से जा चुके थे, लेकिन ईहा अपने फाइनल स्टेप पर थी और वह काम खत्म करके ही वहां से जाना चाहती थी।

ईहा ने गहरी सांस ली और स्क्रीन पर उंगलियां चलाते हुए धीरे से बुदबुदाते हुए कहा, “स्टेबलाइजिंग द बीम... न्यूट्रिनो काउंट एट 98%...”

ईहा ने अपने पतले सिल्वर फ्रेम्ड बड़े से चश्मे के जरिए उस मशीन के अंदर देखा लेकिन अचानक सब कुछ गड़बड़ होने लगा। उसे संभालने के लिए ईहा जल्दी-जल्दी अपनी उंगलियां चलाने लगी लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ। मॉनिटर की लाइट लाल हो गई थी और वहां अचानक एक नीला भंवर बनने लगा था।

“ओह नो... यह नहीं होना चाहिए था। यह क्या हो रहा है? यह सब तो डेटा में नहीं था।” ईहा ने घबरा कर कहा।

वह कुछ कदम पीछे हट गई थी लेकिन उसे ऐसा लगा जैसे ग्रेविटी वहां पर खत्म हो गयी हो। ऐसे लग रहा था जैसे कोई उसे हजारों टुकड़ों में तोड़ रहा हो और फिर वापस जोड़ रहा हो।

ईहा जोर से चिल्लाई, “मिशन अबॉर्ट! मिशन अबॉर्ट! सिस्टम शटडाउन!” उसे लगा सिस्टम बंद होते ही वो वही रुक जाएगा।

ईहा ने चिल्लाते हुए मशीन को कमांड देने की कोशिश की लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आवाज़ को मशीनों ने निगल लिया हो। वह उस भंवर में खींचते चली जा रही थी।

अगले ही पल एक भयानक धमाका हुआ और ईहा को ऐसे लगा, जैसे वह किसी ऊंची इमारत से गिर रही हो। घबराकर उसने अपनी आँखों को कसकर बंद कर लिया था। उसके आसपास अंतिम अंधेरा था और आखिर में एक ठोस ज़मीन।

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हवा में खून, पसीने और पुराने लोहे की गंध थी। दीवार पर मशालें जल रही थी, जिनकी रोशनी में कुछ ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था।

कमरे के बीचों-बीच एक आदमी लकड़ी के खंभे से बंधा हुआ था और उसका शरीर घावों से भरा हुआ था। उसके चेहरे पर गहरे डर के भाव थे और वह कांप रहा था।

उसके सामने एक आदमी खड़ा हुआ था, जो रत्नसागर का महाराज रुद्रांशवीर था। उसने गहरे नीले रंग का रेशमी अंगरखा पहन रखा था, जिस पर सोने की कढ़ाई थी। उसके बाल बिखरे हुए थे और आँखों में एक अजीब सी ठंडक नज़र आ रही थी, जो उसे धुंधली सी रोशनी में भी साफ दिखाई दे रही थी।

रुद्रांश की आँखों में कोई भी दया का भाव नहीं था और उसे देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे उस आदमी ने किसी पर दया करना छोड़ दिया हो। उसके कपड़े और अंदाज़ शाही था।

सामने खंभे पर बंधा हुआ घायल आदमी इस बात का सबूत था कि उसे बुरी तरह टॉर्चर किया जा रहा था।

“हमने तुमसे बस एक साधारण सा सवाल पूछा था सेनापति, एक छोटा सा जवाब देने में तुम हमारा इतना समय कैसे बर्बाद कर सकते हो।” रुद्रांश ने अपनी ठंडी आवाज़ में कहा।

उसने पास सजे हथियारों से एक खंजर उठाया और बिना किसी दया भाव के उस खंजर को सामने बंधे हुए सेनापति के गाल पर चलाना शुरू कर दिया था। चोट लगते ही वह दर्द से जोर से कराह उठा। उसके गाल से खून की धार बह निकली थी।

“हमने पूछा हमारे खिलाफ क्या चल रहा है? तुम्हें कुछ सन्दिग्ध आदमियों के साथ देखा गया था। तुम्हारा मुंह खुलेंगा या फिर आज हम इसे हमेशा के लिए बंद कर दे?” वह जोर से चिल्लाया।

“क्ष... क्षमा कर दीजिए महाराज।” सेनापति ने गिड़गिड़ाती आवाज़ में कहा। डर के मारे वो ठीक से बोल भी नहीं पा रहा था।

“तुम जानते हो ना कि तुम गलत व्यक्ति के सामने दया की भीख मांग रहे हो। ऐसा कोई भी शब्द हमारे शब्दकोष में नहीं हैं।” रुद्रांश ने उसे गर्दन टेढ़ी करके देखते हुए कहा, उसके चेहरे पर एक अजीब लेकिन डरावनी मुस्कुराहट थी।

जैसे ही रुद्रांश ने खंजर चलाने के लिए अपना हाथ उठाया, कालकोठरी की छत के ऊपर से एक नीली तेज़ रोशनी आई और बिजली कड़कने की आवाज़ सुनाई दी। एक धमाके की आवाज़ के साथ एक मानव आकृति सीधे रुद्रांश और उसके कैदी के बीच में आ गिरी थी।

धूल का एक तेज गुब्बार उठा। उस स्थिति में डरने के बजाय रुद्रांश बिजली की तेज़ी से पीछे हटा और उसने जल्दी से अपनी तलवार निकाल ली थी। वहीं दरवाज़े पर खड़े सैनिक इस तेज़ आवाज़ को सुनकर जल्दी से अंदर आ गए थे।

ज़मीन पर ईहा गिरी हुई थी और सब कोई उसे हैरानी भरी निगाहों से देख रहा था। मशालों की तेज रोशनी उसकी तरफ की गई।

ईहा ने खांसते हुए अपना सिर ऊपर किया और हड़बड़ाती आवाज़ में बोली, “व्हाट द हेल... माय हेड... इतना अजीब लग रहा है। चेक... चेक ऑक्सीजन लेवल... इतना पॉल्यूशन और बदबू क्यों आ रही है और जापान में कब से इतना पॉल्यूशन होने लगा?” बोलते हुए ईहा अपनी घड़ी में देखने लगी।

घड़ी की स्क्रीन चमक रही थी और उस पर जो दिखाई दे रहा था। उसे देखकर ईहा हंस पड़ी थी, जैसे उसने कोई मीम देख लिया हो।

“टेंपरेरी शिफ्ट... साल 1510...” ईहा उसमें देखते हुए बोली। उसने सिर हिलाया और कहा, “लगता है इसका सेंसर खराब हो गया है।”

ईहा की स्मार्ट वॉच उसे बिल्कुल सही संकेत दे रही थी कि वह इस वक्त फ्यूचर से शिफ्ट करके 1510 ईस्वी में आ गई है, लेकिन ईहा को यह किसी तरह का टेक्निकल एरर लग रहा था।

ईहा ने अपने कपड़ों से धूल झाड़ी और फिर उसकी नज़र सामने खड़े शख्स पर गई। वही रुद्रांश और बाकी लोग उसे ऐसे देख रहे थे जैसे न जाने उन्होंने कौन सा अजूबा देख लिया था। उन्होंने ऐसे कपड़े अपनी ज़िंदगी में कभी नहीं देखे थे।

एक लड़की जो हाइट में 5 फुट 6 इंच के करीब थी, उसने लूज़ डेनिम पैंट्स और ऊपर क्रॉप टॉप पहना हुआ था। उसने अपने कपड़ों पर व्हाइट कोट पहना हुआ था, जो अक्सर साइंटिस्ट काम करते वक्त पहनते थे। उसके गले में लेब में एक्सेस करने का कार्ड लटका था, जिसमें उसकी पहचान लिखी हुई थी। उसके बालों का रंग भी उन्हें बहुत अजीब लग रहा था, जो गोल्डन ब्राउन कलर का था और उसके वेवी हेयर जो उसकी कमर से ऊपर तक के थे। उससे भी ज़्यादा उन्हें हैरान कर रही थी ईहा के हाथ में पहनी हुई वह चमकती घड़ी और आंखों पर लगा चश्मा।

सैनिकों ने ईहा को देखते ही तुरंत अपने कदम पीछे ले लिए थे तो वहीं रुद्रांश ने अपनी तलवार को उसके सामने तान दिया था। वह सख्त आवाज़ में बोला, “कौन हो तुम? पाताल से निकली हुई कोई मायावी या फिर मेरे शत्रुओं का भेजा हुआ कोई नया खिलौना?”

उसकी बातें सुनकर ईहा एक पल के लिए ठिठक गई थी। उसने रुद्रांश की तरफ देखा। रुद्रांश को ही नहीं बल्कि उसे भी रुद्रांश के कपड़े अजीब लग रहे थे। आसपास तलवारें और वह दीवारें, मशालें सब उसे हैरान कर रही थी। उसका वैज्ञानिक दिमाग तेज़ी से कैलकुलेशन कर रहा था। मशालें, वह पत्थर की दीवारें और क्रूर सा दिखने वाला राजा, जो हाथ में तलवार लेकर खड़ा था और साथ में एक खंभे से बंधा हुआ कैदी।

“हॉली क्रैप... यह कोई मूवी का सेट है क्या?” ईहा ने रुद्रांश से सीधे-सीधे पूछा, “आई एम रियली सॉरी, मेरा इस तरह बीच में घुसने का कोई इरादा नहीं था। मुझे लगता है कि मैं गलती से यहां पर आ गई हूं, उसका कारण मुझे भी नहीं समझ में आ रहा है। क्या आप बता सकते हो कि यह कौन सी जगह है?” ईहा को वो जगह कोई मूवी सेट लग रही थी।

रुद्रांश उसकी बात का जवाब देने के बजाय उसके हर एक शब्द को समझने की कोशिश कर रहा था क्योंकि उसके आधे शब्द इंग्लिश के थे और वह रुद्रांश को समझ नहीं आ रहे थे।

“मैं कुछ पूछ रही हूं? लगता है मेरे बीच में इंटरप्ट करने की वजह से आप ज़्यादा ही गुस्सा हो गए। कोई बात नहीं, मैं इनसे पूछ लूंगी।” ईहा ने ज़बरदस्ती हंसकर कहा और फिर खंभे की तरफ देखा। उस आदमी के गाल से टपक रहा खून किसी तरह से शूटिंग प्रॉप या फिर नकली नहीं लग रहा था।

“1 मिनट! आपने इन भाई साहब को ऐसे बांध क्यों रखा है? देखिए यह ह्यूमन राइट्स के खिलाफ है, और शूटिंग में भी ये सब अलाऊ नहीं होता हैं.. आपके खिलाफ वर्क प्लेस पर हैरेसमेंट करने का केस हो सकता है।” ईहा बोली। वह सेनापति की मदद करने के लिए उसकी तरफ बढ़ने लगी तभी रुद्रांश ने अपनी तलवार बीच में लगा दी थी।

“यह कैसी विचित्र भाषा बोल रही हो तुम? तुम्हारी बोली में कोई जादू है या तुम पागल हो?” रुद्रांश ने सख्त आवाज़ में कहा और तलवार की नोक ईहा की ठुड्डी पर टिका दी थी।

“पागल मैं नहीं, तुम हो! मैं पहले ही कन्फ्यूज़ हूं कि मैं कहां आ गई हूं, ऊपर से तुम मुझे डरा रहे हो।” ईहा ने झुंझला कर कहा। उसके माथे पर पसीने की बूंदें उभर आई थी।

“गुस्ताख लड़की... तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई रत्नसागर के महाराज के साथ इतनी बदतमीजी से बात करने की? सीधे उत्तर दो, तुम यहां कैसे प्रकट हुई? क्या तुम कोई आकाशगामी हो?” रुद्रांश गुस्से में तेज़ आवाज़ में बोला।

“लगता है कैरेक्टर में कुछ ज्यादा ही घुस गए हो। पर मै तुम्हारी टीम का हिस्सा नहीं हूं.. कैमरामैन और डायरेक्टर कहां है? मुझे उनसे बात करनी है।” ईहा ने इस बार झुंझला कर कहा।

रुद्रांश ने सेनापति की तरफ देखा और फिर ईहा की तरफ। वह उसे मारने ही वाला था कि अचानक एक अनजान लड़की ऊपर से आ गई थी और अजीब बातें कर रही थी।

“तो तुम्हारी साथी है यह? यह मत सोच लेना कि इसके आने से तुम्हारी जान बच पाएगी।” रुद्रांश दांत पीसते हुए बोला।

ईहा कुछ बोल पाती इससे पहले रुद्रांश ने सेनापति का सिर धड़ से अलग कर दिया था और जिस तरह से उसका सिर जमीन पर आकर गिरा था, ईहा जोर से चिल्लाई। वहां खून ही खून फैल गया था।

“क्या तुम पागल हो? अगर यहां कोई मूवी शूट नहीं हो रही है तो तुम कौन हो?” ईहा आंखें बड़ी करके बोली।

उसके लिए यह यकीन कर पाना मुश्किल था कि उसके सामने एक आदमी की गर्दन काट दी गई थी। वह कोई पुतला नहीं था। एक जीता जागता इंसान था और उसके अंदर से खून निकल रहा था। उसे देखकर उसकी आंखें फैल गई थी। ईहा जल्दी से घबराकर नीचे बैठी और उसने उसे छूकर चेक किया। उसे छूने के बाद ईहा को कंफर्म हो गया था कि वह गलत नहीं सोच रही थी।

उनकी बातें और आसपास का माहौल देखकर ईहा को एक चीज़ तो समझ आ गई थी कि यह किसी तरह का ड्रामा नहीं था। वह तलवार असली थी। सामने खड़ा इंसान जिस तरह शुद्ध भाषा में बात कर रहा था, उसने किसी को जान से मारा डाला था, और वो किसी तरह की शूटिंग का हिस्सा नहीं था।

ईहा की सांसें मानो रुक सी गई थी। उसने एक नज़र फिर से अपनी घड़ी की तरफ देखा, जो अभी भी उसे 1510 में होने का इशारा कर रही थी। ईहा ने अपनी मुट्ठियां बांध ली थी और धीरे से बुदबुदाते हुए कहा, “अगर यह 1510 है और मैं रत्नसागर में हूं, तो क्या मेरे सामने खड़ा यह इंसान उस वक्त का सबसे तानाशाह और क्रूर शासक महाराज रुद्रांशवीर है?”

जैसे ही ईहा को सच का एहसास हुआ, उसके चेहरे पर घबराहट के भाव उभर आए थे। साथ ही उसे यह भी समझ आ गया था कि उसकी घड़ी में किसी तरह का टेक्निकल ग्लिच नहीं हुआ था। वह बिल्कुल सही समय बता रही थी और वह टाइम ट्रेवल करके भूतकाल में पहुंच चुकी थी।

“अगली बारी तुम्हारी है। तुम्हें यहां किसने भेजा है... जवाब दो वरना तुम्हारा सिर धड़ से अलग करने में हमें एक क्षण का भी समय नहीं लगेगा!” रुद्रांश ने तेज़ आवाज़ में कहा और तलवार को ईहा की गर्दन के बिल्कुल करीब कर लिया था।

इसी के साथ ईहा को होश आया। उसे अच्छे से पता था कि अगर उसने रुद्रांश को फिलहाल अपने जवाब से संतुष्ट नहीं किया, तो उसका सिर धड़ से अलग होना तय था।

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ये कहानी मैने कम्पीटिशन में डाली है, और इसके लिए मुझे ज्यादा से ज्यादा रीडर चाहिए। प्लीज कहानी को आगे तक कंटिन्यू करे, आपको पसंद आएगी। ये पहला पार्ट है तो पढ़कर समीक्षा जरूर कीजियेगा। इस बार कुछ नया ट्राय किया है, उम्मीद है आपको पसंद आयेगा। आगे के चार भाग भी साथ में डाले है।

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