Chapter 3 (You are selected!)
सुबह का समय था जब सिंघानिया कॉर्पोरेशन के बिल्डिंग में सना ब्लूटूथ के जरिये किसी से बात कर रही थी।
उसने अपनी बात पूरी ही की थी कि इतने में सामने से एक बेहद ठंडी आवाज आई, "सना, माइंड योर वर्ड्स। बोलने से पहले याद रखो कि किसके बारे में क्या बोल रही हो।"
सना ने चिढ़ कर कहा, "तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है यार! उसने तुम्हारे साथ..."
सामने वाले शख्स ने उसकी बात पूरी होने से पहले ही कहा, "उसे अन्दर भेजो।"
इतना बोल कर उसने कॉल कट कर दिया। उसने सना के जवाब देने तक का इंतज़ार नहीं किया।
सना ने गुस्से में अपने फोन को घूरा और फिर चिढ़ कर रेहान से कहा, "तुम अंदर जा सकते हो।"
इतना बोल कर वो पैर पटकते हुए वहाँ से चली गई। रेहान को कुछ भी समझ नहीं आया कि अभी-अभी क्या हुआ लेकिन फिलहाल उसे अपने इंटरव्यू पर फोकस करना था इसलिए वो चुपचाप CEO के केबिन में चला गया।
कमरे में घना सन्नाटा था। वहाँ अजीब सी ठंडक थी जो एसी की हवा से नहीं, किसी इंसान की मौजूदगी से फैली थी।
सामने एक बड़ी सी मेज़ थी और उसके पीछे वही शख्स बैठा हुआ था जिससे रेहान की नज़रें लिफ्ट में टकराई थीं, वही काली सूट में, ठंडी आँखों वाला शख्स। ये था यहाँ का CEO, अर्णव सिंघानिया। रेहान का दिल उसे देख कर धक्क से रह गया।
अर्णव ने उस देखे बिना ही कहा, "बैठो।"
रेहान ने खुद को संयमित किया और टेबल के सामने रखी हुई कुर्सी पर बैठ गया।
वो कुछ बोलने ही वाला था कि अर्णव ने उसकी तरफ देख कर कहा, "तुम लिफ्ट वाले लड़के हो, है न?"
रेहान का गला सूख गया, पर उसने हिम्मत करके कहा, "जी, लेकिन मैं नहीं जानता था कि आप…"
अर्णव ने ठंडी आवाज़ में कहा, "जानने की ज़रूरत भी नहीं है।"
फिर उसने रेहान के हाथ में पकड़े हुए फाइल की ओर इशारा करके कहा, "CV?"
रेहान ने हाँ में सिर हिला कर जल्दी से अपना फोल्डर आगे बढ़ाया। अर्णव ने एक नज़र रेहान को बड़े ही ध्यान से ऊपर से नीचे तक देखा और फिर अपनी नज़रें उस फाइल में गड़ा लीं।
वो बड़े ही ध्यान से हर डॉक्यूमेंट को देख रहा था। उसके हाथ में पकड़ी कलम बार-बार उसकी उंगलियों के बीच घुम रही थी।
कुछ देर बाद उसने रेहान की ओर देख कर कहा, "तो मिस्टर रेहान मलिक, तुम ऑर्फनेज में पले बड़े हो।"
रेहान ने धीमी आवाज़ में कहा, "Yes sir!"
अर्णव ने फिर से उसकी फाइल देखते हुए कहा, "Hmmm, qualification तो अच्छी है तुम्हारी और ऑर्फनेज में रहते हुए भी इतना हुनर, इतनी लगन, इंप्रेसिव! लेकिन क्या तुम पहले भी कभी किसी के पर्सनल असिस्टेंट रहे हो?"
रेहान ने हिचकिचाते हुए कहा, "No sir, it's my first time."
अर्णव ने अपनी भौंहें उठा कर कहा, "तो क्या तुम ये काम कर पाओगे?"
रेहान ने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ कहा, "सर, हर experienced पर्सन कभी ना कभी फ्रेशर ही होता है और वो experienced तभी बनता है जब उसे मौका मिलता है।"
उसका जवाब सुन कर अर्णव ने होठों पर एक तिरछी मुस्कान आ गई।
उसने अपने मन में ही कहा, "तुम्हारी बातें आज भी वैसी ही हैं, वी। आखिर इन्हीं पर तो फिदा हुआ था मैं, पर आज तुम्हारी पहचान अलग क्यों है? क्या वो सब सच था? क्या वो बातें सच थीं जो तुम्हारे बारे में कही गई थीं?"
उसे जवाब ना देता देख कर रेहान ने धीरे से कहा, "Sir!"
उसके बुलाने से अर्णव होश में आया और अगले ही पल उसने रेहान से कहा, "You are selected."
उसके शब्द सुन कर रेहान को झटका सा लगा। उसने चौंक कर कहा, "सर?"
अर्णव ने उसकी आँखों में देख कर कहा, "मैंने कहा, आज से तुम मेरे पर्सनल असिस्टेंट हो।"
रेहान ने अपने सारे emotions को साइड में रख कर कहा, "थैंक यू सर, थैंक यू सो मच!"
अर्णव ने बिना किसी भाव के कहा, "Tomorrow at 7 sharp."
रेहान ने बड़ी सी मुस्कान के साथ कहा, "ऑफ कोर्स, सर!"
अर्णव ने अपनी कुर्सी पर पसरते हुए कहा, "यू कैन लीव नाऊ।"
रेहान ने खड़े होकर कहा, "ओके सर, गुड डे।"
फिर वो उठ कर वहाँ से बाहर चला गया।
उसके बाहर जाते ही अर्णव ने एक दर्द भरी मुस्कान के साथ कहा, "मेरी जिंदगी की रोशनी चुरा कर तुम मुझे गुड डे विश कर रहे हो!"
वहीं केबिन के बाहर,
रेहान नौकरी मिलने की वजह से बहुत ज्यादा खुश था और वो खुशी से मुस्कुराते हुए सना के बगल से होते हुए आगे निकल गया।
उसने अपनी खुशी में इस बात पर भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया कि ऑफिस के सभी एम्प्लॉयज, जो कुछ देर पहले तक तो आराम से अपना काम कर रहे थे, वो सब अब उसे ऐसे देख रहे थें जैसे कोई भूत देख लिया हो।
वहीं सना उसकी मुस्कान देख कर समझ गई थी कि अर्णव ने उसे हायर कर लिया है इसलिए वो सीधे अर्णव के केबिन में चली गई।
उसने तेज आवाज में अर्णव से सवाल करते हुए कहा, "अरु, ये क्या किया तूने!"
अर्णव ने आराम से कहा, "क्या किया?"
सना ने चिढ़ कर कहा, "तूने उसे ये जॉब क्यों दी? क्यों खुद के लिए ये तकलीफ चुनी?"
अर्णव ने सर्द आंखों के साथ कहा, "ये मेरे लिए भले ही तकलीफ हो सना लेकिन उसके लिए एक जाल है, एक ऐसा जाल, जिसमें एक बार फंसने के बाद वो चाह कर भी उससे बाहर नहीं निकल सकता।"
उसकी आवाज में एक जुनून था, एक सनक थी जो सना भी महसूस कर सकती थी।
उसने अर्णव के कंधे पर हाथ रख कर कहा, "अरु, तू क्या करने की सोच रहा है?"
अर्णव ने खड़े होते हुए कहा, "इसकी हिस्ट्री पता करो।"
सना ने मुँह बना कर कहा, "इसमें पता करने जैसा क्या है! हम दोनों ही जानते हैं कि ये कौन है और किस बैकग्राउंड से है।"
अर्णव ने कहा, "हां, हम दोनों जानते हैं लेकिन मुझे ये जानना है कि ये नकली पहचान के साथ यहां क्यों आया, आखिर इसे यहाँ आने के लिए इस नकली नाम का सहारा क्यों लेना पड़ा। यहाँ तक कि इसके सारे डॉक्यूमेंट भी असली लग रहे हैं।"
जारी है...