दर्द का रिश्ता: रूहानी इश्क़ की दास्तान - Chapter 2
एक बड़ा सा आलीशान बंगला, जो उस वक़्त अंधेरे में डूबा हुआ था। गहरी काली रात, जो अपने अंधकार को चाहो दिशाओं में फैला रही थी। बंगले में जलती लाइटों से उसमें कुछ रोशनी थी और उसी हल्की रोशनी में एक प्यारा सा मासूमियत से भरा चेहरा नज़र आ रहा था, जो इस वक़्त दर्द पसरा हुआ था। सूनी, उदास, भूरि-भूरि आँखें जो अंधेरे में भी अलग से चमक रही थीं।
वो रेलिंग से टिककर खड़ी थी और एकटक आकाश में अपनी चाँदनी बिखेरते चाँद को देख रही थी। उसकी उन गहरी, भूरि-भूरि आँखें, जिनमें जाने कितना दर्द, कितने ही राज़ कैद थे। उस चेहरे पर दर्द पसरा हुआ था, फिर भी ऐसी कशिश थी कि कोई भी उसे एक नज़र देखकर उसका दीवाना हो जाए।
जितनी सुंदर वो थी, उतनी ही ज़्यादा उदास नज़र आ रही थी। लब एकदम खामोश थे, ऐसा लग रहा था मानो बरसों से वो यूँही खामोश हो, जैसे बहुत कुछ हो उनके पास कहने को पर शायद वो शख्स नहीं था जिससे वो अपने दिल की गहराइयों में छुपे राज़ों को बाँट सके।
रात के अंधेरे में वो उस आलीशान विला के बड़े से कमरे की बालकनी में खड़ी जाने अपनी उदास आँखों से क्या ढूँढने की कोशिश कर रही थी। चेहरे पर बेइंतेहा दर्द झलक रहा था पर आँखों में नमी नहीं थी, शायद नमी सुख चुकी थी या दर्द सहते-सहते उसकी आदत सी हो गयी थी उसे।
करीब एक घंटे तक वो यूँही खड़ी सुनी आँखों से चाँद को देखती रही, जैसे आँखों से ही उससे कितनी ही बातें कर गयी हो। शायद लोगों से भरी इस दुनिया में उसके पास ऐसा कोई नहीं था जिसे वो अपना कह सके, जिससे अपना दर्द, अपनी उदासी को बाँट सके। उसकी तन्हाई और अकेलेपन का साथी और उसे मिले हर दर्द का साझेदार ये चाँद ही था।
उस लड़की ने अब हौले से अपनी पलकों को झुका लिया। इसके साथ ही बन्द पलकों से एक-एक आँसू की बूँद निकलकर उसके गोरे-गोरे गालों को भिगो गयी। लब हल्के से खुले और दर्द भरी आह्ह्ह के साथ एक धीमी सी आवाज़ निकली, "आ.......दि.........!"
वही दूसरी तरफ इस जगह से कुछ डेढ़-दो किलोमीटर दूर एक बहुमंजिला इमारत के एक टू बी एच के फ्लेट का रूम जो अंधेरे से सराबोर था। उस कमरे में बस हल्की सी रोशनी थी, जो कि वहाँ लगे लैंप से आ रही थी।
वही बेड पर एक लड़का बैठा था। उसने लोवर टीशर्ट डाला हुआ था। गहरी काली आँखें, जिनमें किसी के लिए बेइंतेहा मोहब्बत के साथ उस प्यार का इंतज़ार झलक रहा था। हैंडसम से चेहरे पर अजीब सी बेचैनी और सूनापन पसरा हुआ था। उसके हाथ में एक फोटो थी।
किसी लड़की की फोटो थी वो। वो लड़का सूनी आँखों से उस तस्वीर को देख रहा था। कुछ देर खामोशी से उस फोटो को एकटक निहारने के बाद उस लड़के ने अपनी चुप्पी तोड़ी और उस फोटो को देखते हुए कहना शुरू किया,
"कहाँ हो तुम नवु? इतनी खफ़ा हो की इतने सालों में एक बार मुझे याद तक नहीं किया............ मानता हूँ गलती की है मैंने, अपने फ्यूचर को बनाने के सफर में मैं तुम्हे भूल गया। पर ये सच नहीं है नवु............ मैं तुम्हे कभी भूला नहीं था, तुम हर पल मेरे साथ थी, मेरे पास थी, मेरे दिल में धड़कनों के रूप में धड़क रही थी।
मैंने बहुत कोशिश की थी तब भी तुम्हारे बारे में जानने की पर किसी ने मुझे कुछ बताया ही नहीं। मैं भी busy था, तुम्हारे लायक बनना था इसलिए इस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं दे पाया। ......... जब लौटकर आया और पता चला कि मेरी पोस्टिंग वहाँ हुई है जहाँ मेरी नवु है, तो कितना एकसाइटेड था मैं कि अपनी नवु के पास आकर उसको सरप्राइज दूंगा। कितनी खुश होगी न मेरी नवु ये देखकर की अगर वो लॉयर बनने वाली है तो उसका आदि भी ACP है।
तुम्हारे लिए मैंने IPS बनने का सपना देखा था और तुम्हारे लायक बनने के लिए इतने सालों से जी जान लगाकर मेहनत कर रहा था और जब मैंने खुदको तुम्हारे लायक बनाया और तुम्हारे पास आया तब पता चला कि मेरी नवु तो यहाँ है ही नहीं।
मैं कितना खुश था कि मैं तुम्हे सरप्राइज दूंगा और तुम कितनी खुश हो जाओगी? जब यहाँ पहुँचा तो सबसे पहले तुम्हारे घर आया था कि तुम्हे मिलकर तुम्हे और अंकल-आंटी को सरप्राइज दूंगा पर वहाँ जाकर पता चला की तुम अंकल ने हमारे जाने के बाद ही घर बदल दिया था।
बहुत ढूंढा मैंने तुम्हे, पिछले दो महीने से कहाँ-कहाँ नहीं तलाशा है मैंने तुम्हे कि कही तो तुम्हारी कुछ खबर मिले। पर न तुम्हारा कुछ पता चल रहा है और न ही अंकल-आंटी के बारे में कुछ पता चल रहा है। पता नहीं कहाँ चले गए है आप सब? न किसी का फोन लग रहा है और न ही कही कुछ खबर मिल रही है।
पता नहीं क्यों पर जबसे तुम्हारी खबर आनी बन्द हुई है एक बेचैनी सी रहती है, जैसे कुछ गलत हो रहा है........ जैसे मेरी नवु किसी मुसीबत में है........... जैसे मेरी नवु खुश नहीं है......... क्या तुम किसी दर्द में हो? कहाँ हो नवु? बस एक बार मुझसे बात करलो........... कोई इशारा तो दो जिससे मैं तुम्हारे पास पहुँच सकूँ............
अगर जो मेरा दिल कह रहा है वो सच है............ अगर ये बेचैनी ये डर इसलिए है क्योंकि तुम किसी मुश्किल में हो तो एक बार अपने आदि को आवाज़ दे दो................ बस एक बार तुम्हे देखना चाहता हूँ मैं............. जहाँ भी हो बस एक बार मेरे सामने आ जाओ, वादा करता हूँ दोबारा कभी तुम्हे अकेला छोड़कर नहीं जाऊंगा........... अगर तुम किसी मुसीबत में हो तो मैं वादा करता हूँ एक बार मुझे अपने तक पहुँचने का रास्ता दिखा दो उसके बाद मैं तुम्हे हर मुश्किल से बाहर निकाल लूँगा।
बस एक बार मैं तुम्हे देखना चाहता हूँ........... उसके बाद मैं तुम्हे कभी खुदसे दूर नहीं जाने दूंगा। बस एक बार अपनी मीठी-मीठी आवाज़ में आदि कहकर पुकार लो, मैं तुम्हारे पास आ जाऊंगा........... तरस गया हूँ यार मैं अपनी नवू की आवाज़ सुनने के लिए जो जब प्यार से मुझे पुकारती थी तो दिल को अंजाना सा सुकून मिलता था, जिसकी बातें मेरे कानों मैं मिश्री के तरफ घुल जाती थी.............
तड़प रहा हूँ मैं तुम्हारी शैतानियाँ देखने के लिए............... कितना वक़्त बीत गया यार और तुमने मुझे परेशान नहीं किया है.............. पता है तुम्हारी शरारतें मेरे दिल का चैन थी, ज़िंदगी चहक उठती थी तुम्हारी खिलखिलाहट से.............. तुम्हारी शरारतें ही तो मेरी ज़िंदगी की रौनक थी और अब विरान हो गयी है मेरी ज़िंदगी........... बहुत खलती है यार तुम्हारी कमी ............. लौट आओ न वापिस............... वादा रहा दोबारा तुम्हे कभी अकेला छोड़कर नहीं जाऊंगा। ............... लौट आओ नवू बस एक बार यार........... अपने आदि के पास लौट आओ............. बहुत याद आती है तुम्हारी.............. और इंतज़ार नहीं हो पा रहा मुझसे............. मेरा सब्र खत्म होता जा रहा है............... बहुत प्यार करता हूँ यार मै तुमसे ........... मैं नहीं रह सकूँगा तुम्हारे बिना ............. लौट आओ नवू...............।"
आदि की आँखों से आँसू की एक बूंद आज़ाद होकर उसके गालों पर लुढ़क गयी। नव्या की जुदाई का दर्द, उससे मिलने की तड़प उसकी आँखों मे साफ नजर आ रही थी।
नव्या के लिए उसकी बेइंतेहा मोहब्बत उसकी बातों मे महसूस किया जा सकता था। कहते है लड़के बहुत स्ट्रांग होते है, वो कभी रोते नहीं, पर हम ये भूल जाते है कि वो भी इंसान है और रोना कमज़ोरों की निशानी नहीं है। जब दर्द होता है, इतना दर्द कि इंसान सहन न कर सके तो आँखे छलक ही आती है फिर चाहे वो आदमी हो या औरत कोई फर्क नहीं पड़ता।
वैसे ही आदि बहुत स्ट्रांग था, एक काबिल ACP था, पर नव्या के लिए उसका प्यार और उसकी जुदाई का दर्द उसकी आँखों मे आँसू बनकर छलक आया था। आदि नव्या को याद करते हुए उस वक़्त मे खो गया जब उसकी मोहब्बत, उसकी दोस्त, उसकी नवू उसके पास हुआ करती थी।
To be continued...