दर्द का रिश्ता: रूहानी इश्क़ की दास्तान Ch. 1

दर्द का रिश्ता: रूहानी इश्क़ की दास्तान - Chapter 1

Posted by Aarya Rai • Jul 01, 2026 01:46 PM

"नव्या, बाहर आओ यार! स्कूल के लिए देर हो रही है। अगर लेट हुए तो पनिशमेंट मिलेगी।" एक लड़का जो एक दो मंजिले घर के बाहर खड़ा था, करीब 12-13 साल का लग रहा था....

दूध सा गोरा रंग। वाइट शर्ट और वाइट पेंट पहना हुआ था, उस पर टाई भी लगाई हुई थी। गहरी काली आँखे, माथे पर लहराते सिल्की-सिल्की बाल, पतले लाइट रेड कलर के लब, वो बहुत ही हैंडसम और क्यूट लग रहा था।

साइकिल के हैंडल को अपनी हथेली से थामे और पीठ पर बैग लटकाए वो बार-बार अपनी कलाई पर बंधी घड़ी देखते हुए उस घर के बन्द गेट को देख रहा था। चेहरे पर हल्का गुस्सा झलक रहा था। वो लगातार नव्या को आवाज़ लगा रहा था।

कुछ ही देर बाद उसके कानों में एक मीठी सी खनकती आवाज़ पड़ी, "आदि.........."

आवाज़ सुनकर आदि ने नज़रे उठाई, फर्स्ट फ्लोर की बालकनी से एक लड़की झांक रही थी। दूध सा गोरा रंग, भूरि-भूरि मछली जैसी आँखे, पतली नाक, गुलाब की पंखुड़ियों से कोमल चैरी जैसे लब जिन पर इस वक़्त मोहिनी मुस्कान छाई हुई थी। कमर तक लहराते सुनहरे सिल्की बाल जिनको हाई पोनी में बांधा हुआ था।

वाइट शर्ट और उस पर घुटनों तक की वाइट स्कर्ट, उस पर टाई, वो बिल्कुल प्यारी सी डॉल लग रही थी। शायद ही इतनी सुंदर लड़की किसी ने पहले कभी देखी हो। मासूमियत से भरा प्यारा, सुंदर सा चेहरा।

लड़की को देखकर लड़का, मतलब आदि की आँखे छोटी-छोटी हो गयी। उसने उसको घूरते हुए कहा, "अभी तक वहाँ क्या कर रही हो? जल्दी बाहर आओ, लेट हो रहे हैं। अगर तुम्हारे वजह से मुझे पनिशमेंट मिली तो आगे से मैं कभी तुम्हारा इंतज़ार नहीं करूँगा।"

"ओफ्फो आदि, कितना गुस्सा करते हो। अभी बहुत वक़्त है, बस दो मिनट रुको, में अभी आती हूँ।" नव्या ने मुस्कुराकर कहा और अंदर कमरे में चली गयी। उसने बैग को अपनी पीठ पर टांगा और भागते हुए कमरे से बाहर निकल गयी।

वो सीढ़ियों से दौड़ती हुई नीचे आई और दरवाजे के तरफ दौड़ गयी, तभी पीछे से एक लेडी की आवाज़ आई, "नव्या, ऐसे कहाँ भागी जा रही हो, पहले कुछ खा तो लो।"

आवाज़ सुनकर नव्या पलटी। पीछे ही महिमा जी खड़ी थी, मतलब उसकी माँ। नव्या ने उन्हें देखकर मुस्कुराकर कहा,  "माँ, मुझे भूख नही है।"

"ऐसे कैसे भूख नही है? खाली पेट घर से नही निकलते, चलो बैठकर थोड़ा सा खा लो।" महिमा जी ने थोड़ी सख्ती से कहा तो नव्या ने मुँह लटकाकर कहा, "माँ, बाहर आदि आ गया है, अगर में अभी बाहर नही गयी तो वो मुझे छोड़कर चला जाएगा।"

"आदि को मैं अंदर ही बुला लेती हूँ, तुम खाना खाओ चुपचाप।" उन्होंने उसको डपटते हुए कहा और दरवाजे के तरफ बढ़ गयी। बाहर आदि साइकिल पर सवाल उसके आने का इंतज़ार कर रहा था।

जब नव्या नही आई तो वो फिरसे चिल्लाया, "नव्या, और कितनी देर लगाओगी, जल्दी बाहर आओ वरना मैं जा रहा हूँ तुम्हे छोड़कर।"

"आज फिर नवु आपको इंतज़ार करवा रही है " एक आवाज़ उसके कानों में पड़ी तो उसने नज़रे सामने के तरफ घुमाई। दो आदमी जो लगभग 35-40 के लग रहे थे, दोनों ने ट्रैक सूट पहना हुआ था, शायद जोगिंग से आ रहे थे, वो लबों पर मुस्कान सजाए उसके तरफ बढ़ गए।

आदि ने दोनों को देखकर मुँह फुलाकर कहा,  "देख लीजिये पापा, आपकी लाडली रोज़ मुझे ऐसे ही इंतज़ार करवाती है, वक़्त पर तैयार तो हुआ ही नही जाता उससे।"

"नवु की शिकायत आप हमसे तो मत ही कीजिये। वैसे भी अभी स्कूल का टाइम नही हुआ है, आ जाएगी वो भी। आप ही जल्दी आकर उनपर बेवजह गुस्सा करते रहते है, वरना हमारी नवु तो एकदम वक़्त पर तैयार हो जाती है।"

अश्विन जी ने आदि को उल्टा डपट दिया। उसने मुँह फुलाकर अब उनके बगल में खड़े अंकल मतलब किशोर जी को देखकर कहा, "देख रहे है अंकल, आपके दोस्त को हमेशा मैं ही गलत लगता हूँ। उनकी लाडली की कोई गलती तो उन्हें दिखती ही नही है।"

"कोई बात नही, हम है न। हम जानते है हमारा आदि बहुत ज़िम्मेदार है, नव्या ही आपको हमेशा तंग करती रहती है। इतनी बड़ी हो गयी पर बचपना अभी भी नही गया है। आप ही है जो उनकी सारी शैतानियों को बर्दाश करके उन्हें संभाल लेते है।" किशोर जी ने उसके गाल को छूकर मुस्कुराकर आगे कहा,

"आपके वजह से हम उनके तरफ से निश्चिंत रहते है क्योंकि हम जानते है कि आप उन्हें हर मुश्किल से बाहर निकाल लेंगे, उनका साथ कभी नही छोड़ेंगे, जैसे आज तक उनका ख्याल रखते आ रहे है वैसे ही आगे भी उनका ध्यान रखेंगे।"

उनकी बात सुनकर अब आदि के लबों पर प्यारी सी मुस्कान फैल गयी।

"दोस्ती की है अंकल, निभानी तो पड़ेगी ही। जैसे आपकी और पापा की दोस्ती आज भी इतनी मजबूत है, वैसे ही हमारी दोस्ती भी अटुट है। आप दोनों के तरह हम भी हमेशा हर मुश्किल मे एक दूसरे का साथ देंगे। वैसे भी आपने ही तो कहा था कि नव्या को मुझे हमेशा हर मुश्किल से बचाकर रखना है मैं तो बस आपकी बात का मान रख रहा हूँ।"

उसकी बात सुनकर दोनों आदमियों के लबों पर प्यारी सी मुस्कान फैल गयी। वो बात कर ही रहे थे कि पीछे से एक आंटी की आवाज़ आई जो आदि का नाम पुकार रही थी।

आवाज़ सुनकर तीनों ने नज़रे घुमाई तो पीछे ही एक आंटी खड़ी थी। हाथ मे टिफ़न पकड़े वो आदि के तरफ बढ़ रही थी। ये उसकी मम्मी है, नंदिनी जी।

नंदिनी जी आदि के पास आ गयी फिर टिफ़न उसको पकड़ाते हुए हल्के गुस्से से बोली, "इतने लापरवाह क्यों हो तुम? मैंने कहा था ना की दो मिनट रुक जाओ, लंच पैक कर देती हूँ। पर तुम्हे कभी मेरी सुननी ही नही है। इतनी जल्दी रहती है तुम्हे, किस लिए? ताकि यहाँ खड़े होकर नव्या का इंतज़ार कर सको?"

उन्होंने तो आदि को अच्छे से फटकार लगा दी। आदि ने टिफ़न लिया और मुँह फुलाकर कहा, "तो और क्या करूँ? आपको पता भी है जब तक नवु की बच्ची को मैं 50 बार आवाज़ न लगा लूँ वो बाहर निकलने का नाम नही लेती है। मैं जल्दी आकर खड़ा हो जाता हूँ तब तो वो मुझे लेट करवा देती है, अगर टाइम पर आऊंगा फिर तो पक्का गार्ड अंकल हमें अंदर भी नही घुसने देंगे।"

"नवु की ज्यादा बुराई मत करो, वो वक़्त पर स्कूल के लिए निकलती है तुम्हारे तरफ एक घंटा पहले तैयार होकर दूसरों का सर दर्द नही करती।" नंदिनी जी ने एक बार फिर उसको फटकार लगा दी।

आदि मुँह बनाकर धीरे से बोला, "हाँ, आप लोगों को तो उसकी कोई गलती दिखती ही नही है चाहे वो कुछ भी क्यों ना कर ले पर आप उसको कुछ कह दे, ये हो ही नही सकता। मैं ही पागल हूँ जो उसकी शिकायत आपसे कर रहा हूँ।"

आदि ये बोल ही रहा था कि महिमा जी बाहर आ गयी, उन्होंने नंदिनी जी की बात सुन ली थी तो उन्होंने उनके तरफ बढ़ते हुए कहा, "नंदिनी ये गलत बात है तुम बेवजह मेरे बेटे को डांटती रहती हो। गलती उसकी नही नवु की है, सुबह उससे उठा जाता नही है और रोज़ मेरे बेटे को लेट कर देती है। अगर आदि उसे बुलाने न आए तो वो रोज़ घर पर ही रह जाएगी।"

अब तो आदि के लबों पर बड़ी ही मुस्कान फैल गयी। आखिर अब कोई उसका साथ देने वाला भी था यहाँ।

नंदिनी जी ने नाराज़गी से उन्हें देखते हुए कहा, "महिमा तुम बेवजह मेरी बेटी के पीछे पड़ी रहती हो, बेचारी देर रात तक पढ़ती है तो नींद नही खुलती होगी।"

"पढ़ती नही है टीवी देखती है रात रात भर बैठकर। पढ़ता तो आदि है फिर भी देख लो सुबह सुबह उठकर वक़्त पर तैयार हो जाता है।" महिमा जी ने तुरंत ही विरोध किया। उनको लड़ता देख दोनों अंकल ने आदि को देखकर मुस्कुराकर कहा, "लो, अब इन दोनों की बहस शुरु हो गयी। अब तो तुम पक्का लेट होने वाले हो।"

आदि ने मुँह लटकाकर उन्हें देखा तो दोनों आदमी हंस पड़े। अब किशोर जी ने अंदर जाते हुए कहा, "तुम रुको मैं नव्या को भेजता हूँ।"

इतना कहकर वो अंदर चले गए और अश्विन जी दोनों औरतों को शांत करने लगे।

किशोर जी अंदर गए तो देखा नव्या अपनी प्लेट का राइस जल्दी जल्दी वापिस बाउल मे डाल रही थी।

"ये क्या हो रहा है यहाँ?" किशोर जी की सख्त आवाज़ जैसे ही नव्या के कानों मे पड़ी उसके हाथ हवा मे रुक गए। उसने नज़रे उठाकर देखा फिर किशोर जी को देखकर क्यूट सा फेस बनाकर बत्तीसी चमका दी।

"मुझे लेट हो रहा है, आदि वेट कर रहा है बाहर, माँ ऐसे जाने नही देगी इसलिए............"

इतना कहकर वो चुप हो गयी और लबों पर मुस्कान सजाए उन्हें देखने लगी।

किशोर जी उसके पास आए और उसके सर पर हल्के से मारते हुए बोले, "कितनी शैतान है आप। अगर आदि की इतनी ही चिंता रहती है तो सुबह जल्दी उठकर तैयार हो जाया कीजिये न। अब उनके लिए बिना खाना खाए निकल रही है।"

"पापा मेरी नींद नही खुलती तो मैं क्या कर सकती हूँ? वैसे भी आदि मुझे स्कूल में खाना खिला देता है वो मुझे भूखे नही रहने देता। आपको पता है वो रोज़ मेरे लिए दो पराठे रोल करके लाता है और एक रास्ते मे खिलाता है तो दूसरा स्कूल पहुँचते ही खिलाता है उसके बाद अपनी क्लास मे जाता है।"

नव्या ने मुस्कुराकर उन्हें सब बताया और बैग टांगकर खड़ी हो गयी। फिर उनके गले लगकर बोली, "बाय पापा।"

"बाय बेटा पर आदि को इतना भी परेशान मत किया कीजिये। थोड़ा तो ज़िम्मेदार बनिये, अगले साल दसवीं मे चली जाएंगी पर अब भी बच्चों जैसे शैतानियाँ करती है," उन्होंने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा।

नव्या उनसे अलग हुई और मुस्कुराकर बोली, "आपका बेटा है तो सही इतना समझदार वो मेरी हर शरारत को झेल लेता है फिर मुझे समझदार बनने की क्या ज़रूरत है?"

इतना कहकर वो उछलती हुई गेट के तरफ दौड़ गयी। किशोर जी पीछे से उसको देखते हुए बोले, "आदि आज है तो तुम्हे संभाल लेता है पर कुछ वक़्त बाद वो यहाँ से चला जाएगा तब आप कैसे सब संभाल पाएंगी।"

वो कुछ परेशान नजर आने लगे। वही नव्या ने गेट के पास रखे शू रैक से शूज़ उठाए और पहनकर बाहर निकलते हुए चिल्लाकर बोली, "मैं आ गयी!"

उसकी आवाज़ सुनकर सबने उसके तरफ नज़रे घुमाई। आदि ने उसको आँखे छोटी करके घूरा तो नव्या ने क्यूट सी शक्ल बनाकर कहा, "Sorry।"

आदि ने नज़रे फेर ली पर कुछ बोला नही। नव्या उसके पास आई फिर अपनी स्कर्ट की पॉकेट मे हाथ घुसाते हुए उसे देखकर बोली, "अच्छा अब गुस्सा बादमे करना पहले हाथ आगे करो।"

आदि ने उसे गुस्से से घूरा तो नव्या ने प्यारी प्यारी आँखों को टिमटिमाते हुए उसे देखा। आदि ने मुँह बनाकर हाथ आगे कर दिया तो नव्या ने अपनी स्कर्ट की जेब से हाथ बाहर निकाला और उसके सीधे हाथ की कलाई पर एक प्यारा सा बैंड पहना दिया।

आदि ने हैरानी से उसे देखा तो नव्या ने मोहिनी मुस्कान लबों पर बिखेरते हुए कहा, "तुम फिरसे भूल गए न बुद्धू, आज फ्रेंडशिप डे है और तुम मेरे एकलौते दोस्त हो तो मैंने खास तुम्हारे लिए ये अपने हाथों से बनाया है।"

जैसे ही वो चुप हुई महिमा जी ने नव्या को देखकर हैरानी से कहा, "तो कल देर रात तक आप अपना रूम बन्द करके रही कर रही थी?"

नव्या ने उन्हें देखकर हाँ मे सर हिला दिया।

"हाँ। जब मेरा दोस्त इतना खास है तो उसके लिए बैंड भी तो स्पेशल होना चाहिए न?"

"देख लो। दोस्त कहते हो खुदको नवु का और तुम्हे ये तक याद नही था कि आज फ्रेंडशिप डे है। मेरी बच्ची इतनी समझदार है उसने खुद तुम्हारे लिए बैंड बनाया और तुम उसी पर गुस्सा करते रहते हो।" नंदिनी जी ने एक बार फिर उसपर गुस्सा किया। उनकी बात सुनकर आदि का चेहरा उतर गया उसने मुँह लटकाकर कहा,

"मुझे भी याद है। पर फ्रेंडशिप डे कल है आज नही।"

"हाँ फ्रेंडशिप डे कल है, आज नही पर स्कूल मे तो सब आज ही एक दूसरे को बैंड पहनाएंगे न। अगर तुम्हारी कलाई पर बैंड नही दिखा और किसी और लड़की ने तुम्हे अपना बैंड पहनाकर अपना दोस्त बना लिया तो? इसलिए मैंने तुम्हे सबसे पहले बैंड पहना दिया है अब तुम बूक्ड हो। कोई और तुम्हे बैंड नही पहना सकता और तुम किसी और से दोस्ती भी नही कर सकते।"

नव्या ने आदि की बात खत्म होते ही झट से जवाब दिया। उसकी बात सुनकर सब उसको हैरानी से देखने लगे।

आदि आँखे बड़ी बड़ी करके उसे देख रहा था तभी उसके पीछे से एक आवाज़ आई, "आदि तुम अभी तक यहाँ क्या कर रहे हो? जितनी जल्दी मे तुम भागे थे मुझे तो लगा था तुम स्कूल पहुँच भी चुके होगे।"

आवाज़ सुनकर तीनों ने पीछे नज़रे घुमाई तो आदि के ही, जैसा लड़का बस उससे थोड़ा बड़ा लग रहा था वो साइकिल पर सवार उसके पास आकर खड़ा हो गया था। ये आदि का बड़ा भाई है आर्यन जो उससे दो साल बड़ा है और अभी 11th मे पढ़ता है।

आर्यन की बात सुनकर आदि ने मुँह फुलाकर उसे देखते हुए कहा, "भाई आप मेरा मज़ाक उड़ा रहे है, एक तो इस चुहिया के वजह से मुझे इतनी जल्दी निकलना पड़ता है, जब तक आधे घंटे तक यहाँ खड़े होकर उसे आवाज़ ना लगाओ महारानी से घर से बाहर कदम नही रखा जाता और आप सब इसे डांटने के जगह मेरे पीछे पड़े रहते है।"

"आदि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे चुहिया कहने की?" आदि के चुप होते ही नव्या गुस्से से चीखी, आदि ने उसे देखा और चिढ़कर बोला, "तुझे तो लेडी कुंभकरण कहना चाहिए चुहिया तो गलत ही कह दिया।"

"आदि मैं तुझे छोड़ूंगी नही।" नव्या गुस्से मे उसके मुँह को नोचने के लिए आगे बढ़ी पर आदि ने अपना सर पीछे कर लिया तो नव्या खिसियाकर रह गयी और जबड़े भींचते हुए बोली,

"ठीक है, मैं इतनी ही बुरी हूँ तो जा किसी और से दोस्ती कर ले। अबसे तुझे मेरा इंतज़ार करने की ज़रूरत नही है, मैं भी किसी और से दोस्ती कर लूँगी वो मुझे रोज़ टाइम पर स्कूल छोड़ भी आएगा और वापिस ले भी आएगा और तेरी तरह मुझपर चिल्लाएगा भी नही।"

नव्या ने गुस्से मे नाक सिकोड़कर कहा और पैदल आगे बढ़ने को हुई पर आदि ने उसकी कलाई पकड़ ली और उसको वॉर्न करते हुए बोला, "सोचिये भी मत। मेरे अलावा किसी को हक नही कि तुझे अपनी साइकिल के पीछे बिठाए। तेरा दोस्त मैं था, मैं हूँ और मैं हूँ रहूँगा।"

"मुझे नही चाहिए तेरा जैसा दोस्त। सड़ियल टट्टू कहिका जब देखो मुझपर चिल्लाता रहता है।" नव्या ने मुँह बनाकर कहा।

दोनों की बहस शुरु होते देख आर्यन ने आगे बढ़ते हुए कहा,  "लड़ते रहो तुम दोनों मैं तो चला क्योंकि मुझे लेट होने का कोई शौक नही है। वैसे भी तुम्हारा काम ही है पहले एक दूसरे से लड़ना फिर मनाते घूमना।"

आर्यन वहाँ से निकल गया। लेट होने का नाम सुनकर आदि और नव्या दोनों ने एक दूसरे को देखा तो नव्या ने मुँह बनाकर चेहरा फेर लिया। अब आदि ने आराम से कहा,  "अब बादमे लड़ लेना अभी चलो वरना लेट हो जाएंगे।"

नव्या ने तिरछी नज़रों से उसे देखा फिर उसके पीछे जाकर बैठ गयी। आदि ने साइकिल स्टार्ट की तो महिमा जी ने पीछे से कहा, "नव्या तुमने लंच लिया?"

नव्या ने पीछे मुड़कर उन्हें देखा फिर मुस्कुराकर बोली,  "आदि मेरे लिए लंच लेकर आता है माँ। आप परेशान मत होइए, मैं आंटी के हाथ का खाना खाकर ही रोज़ लंच करती हूँ।"

उसकी बात सुनकर दोनों आंटिया मुस्कुरा उठीं। महिमा जी ने नंदिनी जी को देखकर मुस्कुराकर कहा, "कितनी गहरी दोस्ती है दोनों की! कभी कभी सोचती हूँ अगर आदि नही होता तो नवु का क्या होता?"

"ऐसे कैसे आदि नही होता? याद नही हमने उनके जन्म से पहले ही डिसाइड किया था कि हमारे बच्चों की दोस्ती भी बिल्कुल हमारे तरह होगी। हाँ, उनकी दोस्ती अभी से हमसे ज्यादा मजबूत है और आदि नव्या का हमेशा साथ देगा। देखना दोनों हमेशा यूँही साथ रहेंगे और जब वो बड़े हो जाएंगे तो मैं अपने आदि के लिए तुम्हारी नवु का हाथ मांग लूंगी। फिर हम दोस्त से रिश्तेदार बन जाएंगे।"

नंदिनी जी की बात सुनकर महिमा जी ने मुस्कुराकर उन्हें देखा। वही अश्विन जी ने उन्हें देखकर मन मे कहा, "इसमें कोई शक की बात नही है कि दोनों बच्चों की दोस्ती बहुत गहरी है लेकिन कुछ वक़्त बाद उन्हें एक दूसरे से अलग होना होगा। पर हमें पूरा विश्वास है कि उन दोनों की दोस्ती पर इन दूरियों का कोई असर नही पड़ेगा और अगर आगे चलकर दोनों बच्चे राजी हो जाते है तो हम भी अपनी नवु को अपने घर की बहु बनाकर हमेशा के लिए अपने पास ले आएंगे।"

कुछ देर मे सब अपने अपने घर के तरफ बढ़ गए। दोनो के घर अगल बगल थे। जहाँ अश्विन जी और किशोर जी बचपन के दोस्त थे वही महिमा जी और नंदिनी जी बचपन के दोस्त है और आज भी उनकी दोस्ती वैसी ही है। बाकी बातें आगे पता चलेगी।

नव्या और आदि वहाँ से निकल गए। नव्या ने आदि के कंधों को थामा हुआ था और आदि साइकिल चला रहा था। कुछ आगे पहुँचकर आदि ने पीछे सर घुमाकर कहा, "नवु बैग मे पीछे वाली चैन मे पराठे रखे है, खा लो।"

नव्या ने मुस्कुराकर हामी भरी और चैन खोलकर उसमे से एक रोल निकालकर खाते हुए बोली, "आदि तुम्हे कैसे पता चलता है कि मैं खाना नही खाकर आती? तुम रोज़ मेरे लिए पराठे रोल करके क्यों लेकर आते हो?"

"क्योंकि मैं तुम्हे बहुत अच्छे से जानता हूँ कि तुम जानबूझकर बिना खाए आती हो क्योंकि तुम्हे मेरे हिस्से के पराठे खाने मे ज्यादा मज़ा आता है। फिर जब मुझे पता है कि तुम बिना कुछ खाए आ जाती हो तो मैं तुम्हे भूखा कैसे रहने दे सकता हूँ?" आदि ने मुस्कुराकर जवाब दिया तो नव्या भी मुस्कुराकर पराठे खाने लगी।

कुछ आगे चलकर आदि ने फिरसे सवाल किया, "नवु तुम साइकिल चलाना क्यों नही सीखती? अगर तुम सीख लोगी तो हम साथ मे साइकिल चला कर स्कूल आया करेंगे, कितना मज़ा आएगा।"

"मुझे तुम्हारे पीछे बैठकर आने मे ज्यादा मज़ा आता है। जब तुम हो तो मुझे साइकिल चलाना सीखने की क्या ज़रूरत है?" नव्या ने मुस्कुराकर जवाब दिया और हाथ आगे बढ़ा दिया तो आदि ने अपनी पॉकेट से हैंकी निकालकर उसके तरफ बढ़ा दिया।

नव्या ने अपने हाथ और होंठों को साफ किया और वापिस उसके कंधे को थामकर बैठ गयी। कुछ देर मे साइकिल स्कूल के गेट से अंदर गयी। आदि ने साइकिल पार्क की तो नव्या नीचे उतर गयी।

आदि भी नीचे उतरा और बैग से एक और पराठे का रोल निकालकर उसको पकड़ा दिया। नव्या खाते हुए उससे बात करते हुए उसके साथ चलने लगी। एक रूम के बाहर जाकर आदि रुक गया।

नव्या अब तक अपना पराठा खत्म कर चुकी थी उसने फिरसे आदि की हैंकी मे अपना हाथ साफ किया। आदि ने वॉटर बोतल निकालकर उसके तरफ बढ़ा दिया।

नव्या ने थोड़ा सा पानी पीकर बोतल वापिस उसको दे दी और मुस्कुराकर बोली, "अब मैं जाऊँ?"

"Hmm पर याद रखना किसी से लड़ाई नही करनी है तुम्हे। पिछले बार तुम्हारे वजह से मुझे भी डाँट पड़ गयी थी।" आदि ने उसको समझाया।

नव्या ने मुँह बनाकर उसको देखते हुए कहा, "तो गलती मेरी नही उस छिपकली की थी। मेरे सामने कह रही थी कि वो तुम्हे फ्रेंडशिप बैंड बांधेगी और तुमसे दोस्ती कर लेगी, मैंने उसे इतना समझाया की आदि सिर्फ मेरा दोस्त है वो और किसी से दोस्ती नही करता पर वो सुन ही नही रही थी।

कह रही थी कि तुमसे दोस्ती करके वो हमारी दोस्ती तोड़ देगी तो मुझे गुस्सा आ गया और फिर मैंने उसकी धुलाई कर दी। तुम्ही तो कहते हो की किसी की गलत बात बर्दाश नही करनी चाहिए। वो हमारी दोस्ती तोड़ना चाहती थी तो मैं चुप कैसे रहती? उसको सबक सिखाना भी तो ज़रूरी था।"

नव्या ने मासूमियत के साथ सब उसे बता दिया। उसकी बात सुनकर आदि के लबों पर प्यारी सी मुस्कान फैल गयी, अब वो और भी प्यारा लग रहा था।

आदि ने उसके गाल को प्यार से छूकर मुस्कुराकर कहा, "तुम्हे किसी की बात पर ध्यान देने की ज़रूरत नही है और न ही मेरे लिए किसी से लड़ने की ज़रूरत है। कोई कुछ भी कहे मेरी दोस्त तुम थी, तुम हो और हमेशा तुम्ही रहोगी। हमारे बीच कभी कोई आ ही नही सकता। चलो अब अंदर जाओ मुझे भी अपनी क्लास मे जाना है।"

नव्या अब खुश होकर उसके गले से लग गयी फिर लंच में मिलने का कहकर अपनी क्लास मे चली गयी। आदि नव्या से एक क्लास छोड़कर दूसरी क्लास मे घुस गया।

जैसे ही आदि ने क्लास मे एंट्री की लड़कियों का झुंड उसके सामने आकर खड़ा हो गया। सबके हाथ मे फ्रेंडशिप बैंड था और वो आदि को घेरे खड़ी थी, वही आदि ने एक नजर उन्हें देखा फिर अपना सीधा हाथ ऊपर कर दिया।

जैसे ही उसकी कलाई पर बंधे फ्रेंडशिप बैंड पर उनकी नजर पड़ी सबका चेहरा उतर गया। वही लड़कों के चेहरे पर मुस्कान फैल गयी।

सारा स्कूल जानता था आदि और नव्या की दोस्ती के बारे मे। आदि good looking था जिस वजह से स्कूल की लड़कियाँ उसके पीछे दीवानी थी पर आदि हर बार नव्या के साथ नजर आता था। दोनों की दोस्ती देखकर जहाँ कुछ लोगों की जल जाती थी वही कुछ बहुत खुश होते थे।

बहुत गहरी दोस्ती थी दोनों की, एक दूसरे के पास किसी को भी आने नही देते थे।

जैसे आदि के क्लास का हाल था वैसा ही कुछ हाल नव्या की क्लास मे भी था। नव्या के पीछे भी लड़कों की लाइन लगी रहती थी पर उसे तो बस आदि ही दिखता था।

नव्या ने जैसे ही क्लास मे कदम रखा सब लड़के उसके तरफ बढ़ने लगे पर नव्या ने उनको गुस्से से घूरा तो सब अपनी अपनी जगह रुक गए।

नव्या जाकर सेकंड वाली खाली बैंच पर बैठ गयी। उसके पीछे के बैंच पर एक लड़का बैठा था। वो उठकर नव्या की सीट पर आ गया तो नव्या ने उसको गुस्से से घूरते हुए कहा,  "क्या है? मेरी सीट पर क्यों आए हो?"

"नव्या कल फ्रेंडशिप डे है." लड़के ने कुछ घबराते हुए जवाब दिया तो नव्या ने भौंह उचकाकर सवाल किया, "तो?"

"तो मैं तुम्हारे लिए फ्रेंडशिप बैंड लाया था, क्या तुम मेरी फ्रेंड बन सकती हो?"

"नही," नव्या ने सपाट लहजे मे इंकार कर दिया तो लड़के का चेहरा छोटा सा हो गया, उसने मुँह लटकाकर कहा,  "क्यों? मैंने तुम्हे आदि से दोस्ती तोड़ने के लिये तो नही कहा, बस मुझसे दोस्ती करने के लिए कहा है। क्या तुम मुझसे दोस्ती नही कर सकती?"

"नही कर सकती, एक बार कह दिया समझ नही आता?" नव्या को अब गुस्सा आ रहा था। उस लड़के ने अब नव्या को देखकर नाराज़गी से कहा,

"तुम बहुत मतलबी हो, जब भी तुम्हे ज़रूरत पड़ती है मैं तुम्हे अपना दोस्त मानकर हमेशा तुम्हारा साथ देता हूँ, तुम्हारी मदद करता हूँ पर तुम मुझसे दोस्ती करने से भी मना कर देती हो। आदि के आगे पीछे घूमती रहती हो? ऐसा क्या है उसमें? मैं भी तुम्हारा ध्यान रख सकता हूँ फिर तुम मुझसे ढंगसे बात क्यों नही करती? मुझे एक मौका तो दो।"

नव्या ने अब उसको गुस्से से घूरते हुए कहा, "आदि सबसे अलग है, उसमें और तुममे कोई कंपेरिज़न ही नही हो सकता। वो मेरा दोस्त है और हमेशा रहेगा। रही बात तुम्हारी तो मैं नही आती तुम्हारे पास, तुम्ही बार बार बहाने से मेरी मदद करने आ जाते हो।

मैं पहले ही कह चुकी थी। मेरा दोस्त सिर्फ आदि है और उसकी जगह कोई नही ले सकता। अब जाओ यहाँ से वरना मैं अपना सारा गुस्सा तुमपर निकाल दूँगी जो तुम्हारी बातों से आया है।"

बेचारा लड़का जिसका नाम अक्षय था वो पीछे जाकर मुँह फुलाकर बैठ गया और अपने हामे पकड़े फ्रेंडशिप बैंड को देखकर धीमी आवाज़ मे बोला, "देखना एक दिन ऐसा ज़रूर आएगा जब तुम्हारा आदि तुम्हारे पास नही होगा, तब तुम्हे मेरी ज़रूरत पड़ेगी और एहसास होगा मेरी इंपोर्टेंस का।"

नव्या ने उसकी बात सुनी तो गुस्से मे क्लास से बाहर निकल गयी। कुछ देर बाद वो आदि के क्लास मे घुस गयी, उसे वहाँ देखकर आदि उठकर उसके पास आ गया।

नव्या झटके से उसके गले लग गयी, आदि के साथ साथ बाकी सब बच्चे भी हैरान हो गए। लड़कियों की आँखे गुस्से से छोटी छोटी हो गयी।

आदि पल मे समझ गया कि नव्या का मूड खराब है, जब भी उसको बहुत गुस्सा आता या वो बहुत उदास होती तो यूँही आकर उसके गले से लग जाती थी।

आदि उसे लेकर क्लास से बाहर चला गया। नव्या उसके सामने नज़रे झुकाकर खड़ी हो गयी।

आदि ने प्यार से उसके गाल को छूकर कहा, "क्या हुआ नव्या?"

"तुम मुझे कभी छोड़कर तो नही जाओगे न?" नव्या ने भारी गले से कहा और नम आँखों से उसे देखने लगी। आदि ने उसकी बात सुनी तो वो हैरान हो गया फिर उसके आँसुओं को देखकर उसको बेचैनी होने लगी। उसने उसके आँसुओं को साफ करते हुए कहा, "बिल्कुल नही, मैं कभी तुमसे दूर नही जाऊंगा पर तुम अचानक ये सवाल क्यों कर रही हो? और रो क्यों रही हो?"

"उस अक्षय ने अभी कहा कि एक दिन तुम मुझसे दूर चले जाओगे, उस दिन मुझे उसकी इंपोर्टेंस समझ आएगी," नव्या ने रोनी सूरत बनाते हुए कहा, वही उसकी बात सुनकर आदि के लबों पर मुस्कान ठहर गयी। उसने उसके गाल को खींचते हुए मुस्कुराकर कहा,

"बस उसने कह दिया और तुम रोने लगी? इतनी मासूम क्योंकि हो तुम। वो कोई भगवान है जो वो जो कहेगा वो होकर ही रहेगा?"

नव्या ने ना मे सर हिला दिया तो आदि ने आगे कहा, "फिर इतना उदास क्यों हो गयी उसकी बात सुनकर? और उसने ऐसा कहा ही क्यों?"

नव्या ने उसकी शर्ट मे अपने आँसुओं को पोंछ दिया फिर गाल फुलाते हुए बोली, "उसने मुझसे पूछा कि क्या वो मेरा दोस्त बन सकता है तो मैंने मना कर दिया कि मेरा दोस्त सिर्फ आदि है इसलिए उसने कहा कि एक दिन तुम मुझे छोड़कर चले जाओगे तब मुझे उसकी इंपोर्टेंस पता चलेगी।"

"तो तुमने उससे दोस्ती करने से मना ही क्यों किया? वो अच्छा लड़का है फिर तुम्हारा इतना साथ भी तो देता है। तो दोस्ती करने मे बुराई ही क्या है?" आदि का सवाल सुनकर नव्या ने उसे देखा और मासूमियत से बोली, "पर मेरे दोस्त तो तुम हो ना? मैं तुम्हारे अलावा किसी और से दोस्ती कैसे कर सकती हूँ।"

"ज़रूरी नही कि कोई एक ही आपका दोस्त हो। वो हर इंसान हो आपका साथ दे, ज़रूरत पड़ने पर आपके पास मौजूद रहे, आपको खुश रखने की हर मुमकिन कोशिश करे। जिसके लिए आप सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट हो जो हर मुश्किल मे आपका साथ दे वो आपका दोस्त होता है। अक्षय अच्छा लड़का है तुम्हारा इतना साथ देता है तो मुझे लगता है कि तुम्हे उससे दोस्ती कर लेनी चाहिए।"

"पर अभी तक तुमने मुझे फ्रेंडशिप बैंड नही बांधा है फिर मैं उससे कैसे बंधवा सकती हूँ। मेरे बेस्ट फ्रेंड तुम हो तो सबसे पहले तुम्ही मुझे फ्रेंडशिप बैंड बाँधोगे न... " नव्या ने मायूसी से अपनी कलाई को देखते हुए कहा।

आदि ने अपने पॉकेट मे हाथ डालकर बैंड निकाला और उसके हाथ को पकड़कर उसकी कलाई पर बांध दिया फिर मुस्कुराकर बोला, "लो अब जाकर उससे भी बंधवा लो। और अब उससे लड़ना मत, सच्चे दोस्त बहुत मुश्किल से मिलते है उन्हें यूँ खोना नही चाहिए। चलो अब अपनी क्लास मे जाओ मैं तुम्हे लंच मे मिलता हूँ।"

नव्या अब एकदम से खुश हो गयी। उसके गले लगी फिर अपनी क्लास मे भाग गयी। वो जाकर अक्षय के सामने खड़ी हो गयी और अपना हाथ आगे करके मुस्कुराकर बोली,  "बांध दो बैंड, मैं तुम्हे monday को पहना दूँगी, अभी मेरे पास है नही।"

उसकी बात सुनकर अक्षय ने हैरानी से उसे देखा तो नव्या ने मुस्कुराकर आगे कहा, "आदि ने कहा तुम अच्छे हो और अच्छे दोस्तों को खोना नही चाहिए। इसलिए अबसे तुम भी मेरे दोस्त हो पर आदि मेरा बेस्ट फ्रेंड है और हमेशा रहेगा इसलिए दोबारा कभी ये मत कहना की वो मुझसे अलग हो जाएगा। वरना मैं तुम्हे बहुत मारूंगी।"

नव्या ने झूठा मुठा गुस्सा दिखाया तो अक्षय मुस्कुरा उठा। उसने उसकी कलाई पर बैंड बांध दिया तो नव्या ने उससे हाथ मिलाते हुए मुस्कुराकर कहा, "आजसे हम दोस्त हुए।"

अक्षय ने सर हिला दिया। नव्या ने उसके बैग को उठाकर अपनी सीट पर रख दिया और मुस्कुराकर बोली, "अब हम दोस्त है तो साथ मे बैठ सकते है।"

अक्षय अब और भी खुश हो गया और उसके साथ बैठ गया। लंच होते ही नव्या क्लास से बाहर भाग गयी। गार्डन मे एक बैंच पर बैठ गयी और इंतज़ार करने लगी।

कुछ देर मे आदि वहाँ आया और लंच बॉक्स उसके सामने खोलकर रख दिया तो नव्या ने मुस्कुराकर आ कर दिया। आदि उसकी अदा पर मुस्कुरा दिया उसने बाइट तोड़कर उसको खिला दिया।

आदि उसे भी खिला रहा था और खुद भी खा रहा था। दूर खड़ा अक्षय लबों पर मुस्कान सजाए उन्हें ही देख रहा था। उसने दोनों को देखकर मुस्कुराकर कहा, "तुम दोनों की दोस्ती सबसे अलग है, इतनी गहरी दोस्ती मैंने आज तक नही देखी, जैसे आदि तुम्हारा ध्यान रखता है और कोई रख ही नही सकता शायद तभी वो तुम्हारे लिए इतना स्पेशल है। पर मुझे खुशी हुई कि अब मैं भी तुम्हारा दोस्त हूँ। देखना मैं भी हर सिचुएशन मे तुम्हारा साथ दूँगा।

मुझे आदि की जगह नही लेनी बस अपनी एक जगह बनानी है। आज मैंने यूँही कह दिया था कि आदि तुमसे दूर चला जाएगा पर अब मैं पूरे दिल से ये विश माँगता हूँ कि आदि हमेशा तुम्हारे साथ रहे और तुम दोनों की दोस्ती हमेशा यूँही बनी रहे।"

To be continued...

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