तेरे इश्क का धोखा - Chapter 3
तेरे इश्क़ का धोखा
एपिसोड 3: कैंटीन का तूफ़ान
सुबह का समय था।
रॉयल ग्लोबल कॉलेज हमेशा की तरह छात्रों की आवाज़ों से भरा हुआ था। लेकिन आज ऋचा का मूड थोड़ा खराब था।
कारण था—कबीर।
कल पूरे कॉलेज में उसने उसे "भाभी" बुलाकर मज़ाक बना दिया था।
"अगर आज वो मुझे मिला ना, तो उसकी खैर नहीं।" ऋचा बड़बड़ाई।
तान्या हँस पड़ी।
"तुम दोनों की लड़ाई देखने में बहुत मज़ा आता है।"
"मेरी नहीं, उसकी लड़ाई है।"
दोनों हँसते हुए कैंपस में आगे बढ़ गईं।
दूसरी तरफ...
शौर्य अपने दोस्तों कबीर, रुद्र और युवान के साथ पार्किंग एरिया में खड़ा था।
कबीर के चेहरे पर शरारती मुस्कान थी।
"भाई, आज फिर भाभी से मिलना है?"
शौर्य ने उसे घूरा।
"एक बार और भाभी बोला ना, तो पार्किंग में गाड़ दूँगा।"
सभी दोस्त हँस पड़े।
"लेकिन मानना पड़ेगा," युवान बोला, "ऋचा बाकी लड़कियों जैसी नहीं है।"
शौर्य ने कोई जवाब नहीं दिया।
लेकिन उसके दिमाग में वही लड़की घूम रही थी।
लंच ब्रेक।
कॉलेज की सबसे भीड़भाड़ वाली जगह—
कैंटीन।
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कैंटीन में लंच ब्रेक चल रहा था।
ऋचा अपनी ट्रे लेकर बैठी ही थी कि सामने वाली सीट पर शौर्य और उसका पूरा गैंग आकर बैठ गया।
"फिर आ गए तुम लोग?" ऋचा ने चिढ़कर कहा।
कबीर मुस्कुराया, "हम नहीं आए, किस्मत हमें यहाँ ले आई।"
"बहुत फिल्मी हो।"
शौर्य चुपचाप फ्रेंच फ्राइज खा रहा था।
उसके चेहरे पर वही शरारती मुस्कान थी।
ऋचा ने उसे घूरा।
"अब क्या प्लान बना रहे हो?"
"कुछ नहीं।"
"झूठ।"
जैसे ही ऋचा पानी पीने लगी, शौर्य ने गलती से अपनी सॉस की बोतल को धक्का दे दिया।
छपाक!
लाल सॉस सीधा ऋचा की सफेद शर्ट पर गिर गया।
पूरा टेबल एकदम शांत हो गया।
ऋचा ने नीचे देखा।
फिर अपनी शर्ट।
फिर शौर्य को।
"शौर्य सिंघानिया..."
उसकी आवाज़ खतरनाक रूप से शांत थी।
"जी?"
"मैं तुम्हारा खून कर दूँगी।"
अगले ही पल कबीर ने अपना फोन निकाला और तेज़ आवाज़ में गाना चला दिया—
🎵 तेरे सामने आ जाने से ये दिल मेरा धड़का है ये ग़लती नहीं है तेरी ये इश्क का है जज़्बा है मेरा बस चले तो छुपा लूं तुझे मैं पलकों के सा ये में अपने मगर तू समझती नहीं है सनम तेरे बिन ये सांसें भी चलती नहीं तेरे सामने आ जाने से...
रुद्र और युवान भी तुरंत उठ गए।
"वाह भाई, क्या रोमांटिक सीन है!"
"लाल रंग तो प्यार का रंग होता है!"
"कितनी फिल्मी एंट्री मारी है।"
पूरा कैंटीन हँसी से गूँज उठा।
ऋचा का चेहरा गुस्से से लाल हो गया।
"कबीर! गाना बंद करो!"
लेकिन कबीर और भी जोर से गाने लगा।
"भाभी जी शर्मा गईं!"
"मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगी!" ऋचा चिल्लाई।
वह उठी और सॉस की छोटी प्लेट उठाकर सीधे कबीर के पीछे भागी।
"बचाओ!" कबीर कैंटीन में दौड़ने लगा।
पूरा कैंटीन मज़ा लेने लगा।
उधर शौर्य पहली बार खुलकर हँस रहा था।
इतना कि उसकी आँखों में आँसू आ गए।
ऋचा वापस उसकी तरफ आई।
"और तुम क्यों हँस रहे हो?"
"क्योंकि तुम बहुत फनी लग रही हो।"
"ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है।"
शौर्य ने अपनी जेब से रूमाल निकाला और उसकी शर्ट पर लगा थोड़ा सॉस साफ करने की कोशिश की।
अचानक दोनों कुछ सेकंड के लिए चुप हो गए।
उनकी नज़रें मिलीं।
दिल की धड़कन जैसे एक पल को रुक गई।
लेकिन तभी पीछे से कबीर चिल्लाया—
"ओहो! अब तो बैकग्राउंड में बारिश भी चाहिए!"
पूरा गैंग फिर हँसी से फूट पड़
शौर्य ने कुर्सी खींची और सामने बैठ गया।
"तो मत उठो।"
ऋचा चौंकी।
"क्या?"
"हम भी यहीं बैठ जाते हैं।"
अगले ही पल पूरा गैंग उसी टेबल पर बैठ गया।
अब एक तरफ ऋचा और तान्या।
दूसरी तरफ शौर्य और उसके दोस्त।
माहौल अजीब हो गया।
"तो ऋचा जी..." कबीर बोला।
"आपका और हमारे भाई का रिश्ता कहाँ तक पहुँचा?"
"कबीर!"
शौर्य और ऋचा दोनों एक साथ चिल्लाए।
पूरा टेबल हँसी से गूँज उठा।
"देखा?" कबीर बोला।
"सिंकिंग कितनी अच्छी है।"
"चुप कर।" शौर्य ने कहा।
ऋचा ने खाना खाना शुरू किया।
लेकिन तभी उसे महसूस हुआ कि कोई उसे देख रहा है।
उसने सिर उठाया।
शौर्य उसे ही देख रहा था।
"क्या है?"
"कुछ नहीं।"
"तो देख क्यों रहे हो?"
"तुम्हें परेशानी हो रही है?"
"हाँ।"
"अच्छा है।"
रुद्र और युवान हँस पड़े।
ऋचा का मन किया कि प्लेट उसके सिर पर मार दे।
तभी कबीर को एक आइडिया आया।
"चलो गेम खेलते हैं।"
"नहीं।" ऋचा बोली।
"हाँ।"
"नहीं।"
"हाँ।"
"नहीं।"
"हाँ।"
"तुम पाँच साल के बच्चे हो क्या?"
पूरा टेबल फिर हँस पड़ा।
आखिर सबने ट्रुथ एंड डेयर खेलने का फैसला किया।
सबसे पहले बोतल घूमी।
और जाकर रुकी—
ऋचा पर।
"येस!" कबीर खुशी से चिल्लाया।
"ट्रुथ या डेयर?"
"ट्रुथ।"
"डर गई?"
"नहीं।"
"तो डेयर चुनो।"
"नहीं चुनना।"
कबीर कुछ सोचने लगा।
फिर उसकी आँखों में शरारत चमकी।
"बताओ, कॉलेज का सबसे हैंडसम लड़का कौन है?"
ऋचा ने तुरंत कहा—
"कोई नहीं।"
"गलत जवाब।"
"यही सही जवाब है।"
"ठीक है।"
कबीर ने शौर्य की तरफ इशारा किया।
"इसे रेट करो।"
शौर्य ने माथा पकड़ लिया।
"मुझे इसमें मत घसीटो।"
ऋचा मुस्कुराई।
"ठीक है।"
उसने शौर्य को ऊपर से नीचे तक देखा।
पूरा टेबल उसकी तरफ देखने लगा।
"6 में से 10।"
"क्या?" कबीर उछल पड़ा।
"सिर्फ 6?"
"हाँ।"
"भाई, इसका अपमान हो गया।"
शौर्य शांत था।
लेकिन उसकी आँखों में चुनौती थी।
"और बाकी 4 नंबर क्यों काटे?"
ऋचा बोली—
"बहुत घमंडी हो।"
पूरा टेबल शांत हो गया।
फिर अचानक...
शौर्य हँस पड़ा।
"पहली बार किसी ने मुझे ऐसा कहा है।"
"सच कड़वा होता है।"
"और तुम बहुत बोलती हो।"
"और तुम बहुत परेशान करते हो।"
दोनों एक-दूसरे को घूरने लगे।
बाकी सब मज़े ले रहे थे।
तभी कैंटीन में अचानक लाइट चली गई।
पूरा हॉल अंधेरे में डूब गया।
कई लड़कियाँ चिल्ला उठीं।
कुछ सेकंड बाद अफरा-तफरी मच गई।
ऋचा उठने लगी।
लेकिन भीड़ में उसका संतुलन बिगड़ गया।
वह गिरने ही वाली थी कि किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
कुछ पल बाद लाइट वापस आई।
ऋचा ने देखा—
उसका हाथ शौर्य के हाथ में था।
दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब खड़े थे।
आसपास बैठे छात्रों की आँखें फटी रह गईं।
कबीर ने धीरे से कहा—
"अब तो शादी पक्की है।"
"कबीर!" दोनों फिर एक साथ चिल्लाए।
और पूरा कैंटीन हँसी से गूँज उठा।
लेकिन उसी समय...
कैंटीन के दरवाज़े पर खड़ी एक लड़की यह सब देख रही थी।
उसकी मुट्ठियाँ भींची हुई थीं।
चेहरे पर गुस्सा था।
वह थी—
नैना मल्होत्रा।
शौर्य की बचपन की दोस्त।
और वह उसे किसी और के साथ देखना बिल्कुल पसंद नहीं करती थी।
"तो यही है ऋचा खन्ना..." उसने धीरे से कहा।
"जिसकी वजह से शौर्य बदल रहा है।"
उसकी आँखों में खतरनाक चमक उभरी।
"अब देखते हैं..."
"ये लड़की कितने दिन टिकती है।"
उधर ऋचा को बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि एक नई दुश्मन उसकी जिंदगी में कदम रख चुकी है।
और यह दुश्मनी आने वाले दिनों में...
उसकी पूरी दुनिया हिलाने वाली थी।
क्रमशः... ❤️🔥🔥