तेरे इश्क का धोखा - Chapter 2
तेरे इश्क़ का धोखा💔💔💔
एपिसोड 2: मैसेज वाला रहस्य और रैगिंग का धमाका🌹🌹🌹
सुबह-सुबह ऋचा की आँख खुलते ही उसका ध्यान फोन पर गया।
वही अनजान मैसेज।
"खेल अभी शुरू हुआ है, ऋचा।"
उसने रात भर कई बार उस नंबर पर कॉल की थी, लेकिन फोन स्विच ऑफ था।
"ये शौर्य सच में पागल है क्या?" उसने बड़बड़ाते हुए कहा।
उसी समय उसकी माँ कमरे में आईं।
"कॉलेज नहीं जाना क्या?"
"जाना है माँ।"
लेकिन ऋचा के दिमाग में सिर्फ वही मैसेज घूम रहा था।
कॉलेज पहुँचते ही तान्या दौड़ती हुई उसके पास आई।
"गर्ल! तुम्हारा चेहरा ऐसा क्यों लग रहा है जैसे किसी ने तुम्हारा रिजल्ट छुपा दिया हो?"
ऋचा हँस पड़ी।
"कुछ नहीं।"
"झूठ। जल्दी बता।"
ऋचा ने फोन निकालकर मैसेज दिखा दिया।
तान्या की आँखें बड़ी हो गईं।
"ओह माय गॉड!"
"ये तो सीधा-सीधा फ्लर्टिंग है।"
"फ्लर्टिंग?" ऋचा चौंकी।
"हाँ। अमीर लड़के ऐसे ही शुरू करते हैं।"
"बकवास मत कर।"
दोनों हँसने लगीं।
उधर कॉलेज के मैदान में।
शौर्य अपने दोस्तों कबीर, युवान और रुद्र के साथ बैठा था।
कबीर ने पूछा—
"भाई, कल रात मैसेज भेज दिया?"
शौर्य ने कॉफी पीते हुए कहा—
"हाँ।"
"फिर?"
"कुछ नहीं।"
"कुछ नहीं मतलब?"
"बस मज़ा आ रहा है।"
सभी दोस्त हँस पड़े।
रुद्र बोला—
"इतने सालों में पहली बार किसी लड़की ने तुम्हारी बोलती बंद की है।"
शौर्य ने उसे घूरा।
"चुप।"
उसी समय कॉलेज में नए छात्रों की रैगिंग शुरू हो गई।
सीनियर लड़कों का एक ग्रुप फर्स्ट ईयर वालों को परेशान कर रहा था।
ऋचा और तान्या कैंटीन की तरफ जा रही थीं।
तभी एक सीनियर ने रास्ता रोक लिया।
"रुको।"
"फर्स्ट ईयर?"
"हाँ।" तान्या बोली।
"तो रैगिंग होगी।"
ऋचा ने आँखें घुमाईं।
"ये स्कूल नहीं है।"
सीनियर मुस्कुराया।
"फिर भी होगी।"
"चलो दोनों, स्टेज पर।"
कुछ ही देर में पूरा कैंटीन छात्रों से भर गया।
सभी नए छात्रों की रैगिंग देख रहे थे।
ऋचा और तान्या को बीच में खड़ा कर दिया गया।
एक सीनियर बोला—
"अब तुम दोनों एक-दूसरे को प्रपोज करो।"
पूरा कैंटीन हँस पड़ा।
तान्या ने धीरे से कहा—
"मुझे शर्म आ रही है।"
ऋचा बोली—
"मुझे नहीं।"
वह तुरंत घुटनों पर बैठ गई।
"तान्या जी..."
पूरा हॉल हँसी से गूँज उठा।
"क्या आप मुझसे शादी करेंगी?"
तान्या भी एक्टिंग करने लगी।
"हाँ ऋचा... मैं तैयार हूँ।"
सब लोग हँस-हँसकर लोटपोट हो गए।
सीनियर्स भी हँसी रोक नहीं पाए।
लेकिन तभी...
एक और सीनियर आया।
"अब असली टास्क।"
उसने ऋचा की तरफ इशारा किया।
"तुम्हें कॉलेज के सबसे खतरनाक लड़के को जाकर गुलाब देना होगा।"
"कौन?"
सीनियर मुस्कुराया।
"शौर्य सिंघानिया।"
पूरा कैंटीन शांत हो गया।
तान्या घबरा गई।
"मत करना।"
लेकिन ऋचा का स्वभाव अलग था।
"कर दूँगी।"
"क्या?"
"हाँ।"
सब लोग मैदान में पहुँच गए।
शौर्य अपने दोस्तों के साथ बैठा था।
तभी उसने देखा—
ऋचा उसकी तरफ चली आ रही है।
उसके हाथ में लाल गुलाब था।
कबीर फुसफुसाया—
"भाई, कुछ होने वाला है।"
ऋचा सीधे शौर्य के सामने पहुँची।
"ये लो।"
शौर्य ने भौंह उठाई।
"ये क्या है?"
"गुलाब।"
"दिख रहा है।"
"तो रख लो।"
आसपास खड़े सभी छात्र साँस रोके देख रहे थे।
शौर्य कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा।
फिर अचानक गुलाब ले लिया।
पूरा मैदान हैरानी से भर गया।
लेकिन अगले ही पल शौर्य मुस्कुराया।
"अब मेरी बारी।"
उसने अपने दोस्त कबीर से पूरा गुलदस्ता लिया।
और ऋचा के हाथ में दे दिया।
"ये लो।"
ऋचा हैरान।
"इतने सारे क्यों?"
"ताकि अगली बार कॉफी गिराओ तो माफी माँगने के लिए फूल कम न पड़ जाएँ।"
पूरा मैदान ठहाकों से गूँज उठा।
ऋचा का चेहरा लाल हो गया।
"तुम बहुत परेशान करते हो।"
"और तुम बहुत बहादुर हो।"
शौर्य ने मुस्कुराकर कहा।
पहली बार उसकी मुस्कान थोड़ी अलग लगी।
उसी शाम।
ऋचा लाइब्रेरी में बैठी पढ़ रही थी।
तभी उसके फोन पर फिर मैसेज आया।
Unknown Number
"आज गुलाब अच्छे लगे?"
ऋचा चौंक गई।
उसने तुरंत रिप्लाई किया।
"तुम हो कौन?"
कुछ सेकंड बाद जवाब आया।
"जिसे तुम पूरे दिन याद करती हो।"
ऋचा का चेहरा लाल हो गया।
"पागल आदमी।"
उसने टाइप किया—
"शौर्य?"
लेकिन जवाब नहीं आया।
इसी बीच लाइब्रेरी के बाहर।
कबीर फोन हाथ में लिए हँस रहा था।
रुद्र ने पूछा—
"क्या कर रहा है?"
कबीर बोला—
"कुछ नहीं।"
"मतलब?"
"मैं ही मैसेज भेज रहा हूँ।"
"क्या?"
"हाँ।"
असल में कल रात शौर्य ने सिर्फ पहला मैसेज भेजा था।
लेकिन आज सारे मैसेज कबीर भेज रहा था।
उसे ऋचा और शौर्य को परेशान करने में मज़ा आ रहा था।
रात को।
सिंघानिया मेंशन।
शौर्य अपने कमरे में बैठा था।
तभी कबीर वहाँ आया।
"भाई, तेरी गर्लफ्रेंड का क्या हाल है?"
शौर्य ने घूरा।
"कौन गर्लफ्रेंड?"
"ऋचा।"
"पागल है क्या?"
कबीर हँसने लगा।
"तो फिर उसके बारे में इतना क्यों सोचता है?"
शौर्य कुछ नहीं बोला।
उसी समय उसकी नजर टेबल पर रखी एक पुरानी फाइल पर गई।
उस फाइल पर लिखा था—
"खन्ना परिवार"
शौर्य का चेहरा अचानक गंभीर हो गया।
उसने फाइल खोली।
अंदर ऋचा और उसके परिवार की तस्वीरें थीं।
एक पुराना राज़...
जो सालों से छुपा हुआ था।
शौर्य ने तस्वीर को देखते हुए धीमे से कहा—
"तुम्हें अभी सच नहीं पता, ऋचा।"
"और जब पता चलेगा..."
"तब तुम मुझसे नफरत करोगी।"
उसकी आँखों में दर्द साफ दिखाई दे रहा था।
उधर अपने घर में ऋचा सोने जा रही थी।
तभी फोन फिर बजा।
एक नया मैसेज।
"सावधान रहना, ऋचा..."
"इस कॉलेज में हर कोई तुम्हारा दोस्त नहीं है।"
इस बार नंबर अलग था।
ऋचा डर गई।
"ये कौन है?"
अगले दिन सुबह कॉलेज पहुँचते ही ऋचा को लगा कि सब लोग उसे देखकर मुस्कुरा रहे हैं।
"क्या मेरे चेहरे पर कुछ लगा है?" उसने तान्या से पूछा।
तान्या हँसी रोकते हुए बोली, "नहीं, लेकिन कैंटीन में तुम्हारा और शौर्य का गुलाब वाला सीन वायरल हो गया है।"
"क्या?!"
ऋचा का मुँह खुला रह गया।
तभी सामने से कबीर आया।
"भाभी जी, नमस्ते।"
"क्या कहा तुमने?" ऋचा गुस्से से बोली।
कबीर तुरंत भागने लगा और ऋचा उसके पीछे दौड़ पड़ी।
पूरा कॉरिडोर हँसी से गूँज उठा।
भागते-भागते कबीर सीधे शौर्य से टकरा गया।
"भाई! बचा ले।"
शौर्य ने भौंह उठाई।
"अब क्या किया तूने?"
"कुछ नहीं..."
तभी ऋचा वहाँ पहुँची।
"ये लड़का पागल है!"
शौर्य ने मुस्कुराकर पूछा, "और तुम इसके पीछे क्यों भाग रही हो?"
"क्योंकि ये मुझे भाभी बुला रहा है।"
कुछ सेकंड की चुप्पी के बाद शौर्य हँस पड़ा।
पहली बार सबने उसे खुलकर हँसते देखा।
ऋचा भी कुछ पल के लिए उसे देखती रह गई।
लेकिन उसी समय दूर खड़ी एक लड़की गुस्से से यह सब देख रही थी।
उसकी आँखों में जलन साफ दिखाई दे रही थी।
वह धीरे से बोली—
"ऋचा खन्ना... अब खेल शुरू होगा।" 🔥
क्रमशः... ❤️🔥
उसे नहीं पता था...
कि कोई उसकी मदद करना चाहता था।
और कोई उसकी जिंदगी बर्बाद करना।
और सबसे बड़ा खेल अभी शुरू भी नहीं हुआ था...
क्रमशः... ❤️🔥🔥