I Will Find My Love Ch. 2

तुम मेरी हो- Chapter 2

Posted by Aliza khan • Apr 17, 2026 03:12 PM

उस आदमी की बात सुन आरना ने सोचा… अब मैं क्या करूँ?

जब उसके पास और कोई ऑप्शन नहीं बचा तो वो जल्दी से थोड़ी ऊंँची हुई और उसने उस आदमी के होंठों पर हल्का-सा किस कर दिया।

उनके पीछे के झुंड में मौजूद लोगों ने सदमे में आ कर ज़ोर से आह भरी।उन्होनें यह कभी नहीं सोचा था कि उनके बिग बॉस को इस तरह एक लड़की के जरिए किस कर दिया जाएगा।

क्या उसे यह पता भी था कि उसने अभी किसको किस किया था?

उस लड़की के होंठ न केवल नर्म और मुलायम थे, पर उन में से एक बहुत अच्छी स्मेल भी आ रही थी, और जैली की तरह की तरह मुलायम होने के कारण वे उसे और खुबसूरत बना रहे थे।

आरना के अचानक किस कर देने पर उस आदमी के शरीर कि मांसपेशियाँ एक दम से तन गईं और वो गहरी सांस लेने लगा।

उसे हकीकत में वो आरना का किस करना बुरा नहीं लगा न ही.... वो लड़की।

वो छोटी सी थी और बहुत सुंदर भी।

उसकी सुंदर और कोरी आँखें अब धुंधली और अस्थिर होने लगीं थी। यहाँ तक कि उसका छोटा-सा चेहरा जो पहले बहुत ब्राइट था उस पर भी अब ड्रग्स का असर दिखने लगा था। आरना ने अपने होंठ उसके साथ ज़ोर से दबाये और उसे आँख मारी।

"मिस्टर यह हमारा मौका है एक-दूसरे को जानने का।अब जब मैंने आपके होंठों पर अपने निशान छोड़ दिये हैं, तो अब से आप मेरे हो!"

अब से आप मेरे हो!

उस आदमी के कानो में लड़की के बोले गए वर्ड्स गूंज रहे थे।उसने अपने मुँह को सिकोड़ा चूँकि बहुत सारी औरते लड़किया थी जो सालों से उसके पीछे पड़ीं थीं, पर यह पहली बार है जब किसी ने इतनी ढिठाई से यह ऐलान कर दिया था कि वो उसका है।

उसने आरना की तरफ़ एक नए नज़रिए से देखा। उसकी आँखें कोरी और सुंदर थीं जिनमें से आकर्षण झलक रहा था जब भी वो इधर-उधर देख रही थी।

बहुत दिलचस्प। उस आदमी ने सोचा।

उसकी बड़ी हथेलियाँ बिल्कुल अलग से दिख रही थीं जब उसने आरना की पतली कमर से उसे पकड़ लिया।उसके मुँह का कोना थोड़ा मुड़ गया, और उसने थोड़ी कुटिलता से कहा,"अगर मैं तुम्हारा हूँ तो, मुझे यह कैसे नहीं पता?"

आरना का कोमल और मुलायम बदन उस आदमी के बलवान शरीर से सटा हुआ था और वो दोनों एक रूप से जुड़े हुए थे।उसकी खुशबू हवा के साथ उसके छोटे नाकों में घुस गयी, जिससे उसका पूरा शरीर खुशबू से भर गया। वो बिल्कुल भी खराब स्मेल नहीं थी, बल्कि, यह बहुत आश्चर्यजनक तरीके से अच्छी थी।

आरना का जवान चेहरा अंजाने में ही सही मगर लाल होता जा रहा था।वो केवल 18 साल की थी और वो कभी भी किसी आदमी के साथ इस तरह अजीब हालत में नहीं आई थी।

सचमुच, मर्द हमेशा बेईमान होते हैं। हम्म, बुरे आदमी, कितना घमंडी बदमाश है! आरना ने सोचा।

उन घटिया से दिखने वाले गुंडे उस तक पहुँच ही गए थे, आरना, इसे छोड़ दो!"

यह देखते हुए कि गुंडों ने उसे पकड़ लिया है, आरना ने जल्दी से अपनी कोमल बाहें उस आदमी के गले में डाल दीं, जैसे कि वो उससे लिपटी हुई एक ऑक्टोपस हो, वो बोली, "मिस्टर, प्लीज मुझे अपने कमरे तक उठा कर ले चलो, मैं आपको धीरे-धीरे समझाऊंँगी कि, आप मेरे कैसे बनोगे!"

उसने अपनी छोटी आँखों का इस्तेमाल करते हुए उसकी तरफ़ एक ठंडी मुस्कान से देखा, और फिर अपनी आँखें उठा कर उन गुंडों की तरफ़ एक भावरहित नज़र डाली।

गुंडे वहीं पर जम गए। उन्हें ज़िंदगी में काफी अनुभव था और वो जानते थे कि उनके सामने कौन खड़ा था। वो हमेशा इकोनॉमिक और बिजनेस की किताबों के इंपोर्टेंट न्यूज में नज़र आता रहता था। वो आदमी मुंबई की की जान था और उन्होनें उसे लगातार मीडिया में देखा था।

माहिर ओब्रॉय। 

गुंडे वहाँ से तुरंत भाग गए क्योंकि उन्हें मुसीबत नज़र आ रही थी माहिर ओब्रॉय के रूप में...

माहिर ने आरना को उठाया और प्रेसीडेंटल सूट की ओर बढ़ गया।वह उसकी मजूबत बाहों से नीचे कूद गई, और बड़े आराम से अपने दोनों पैरों को ज़मीन पर रखते हुए खड़ी हो गई उसने अपने हाथ हिलाए, और फिर उसकी तरफ मुस्कुराते हुए देखा।उसकी आवाज़ कोमल और मीठी थी,"मिस्टर, मुझे बचाने के लिए शुक्रिया, आप सचमुच बहुत अच्छे इंसान हैं!"

"अच्छा इंसान?",माहिर ने अपनी भौं को चढ़ाया। वो आगे बढ़ा और उसने उसको अपने लम्बे शरीर से दबा दिया,"क्या तुमने कुछ थोड़ी देर पहले मेरे लिए अलग ढंग से बात नहीं की थी?"

उसकी कद-काठी काफी लंबी थी। जब वो आगे उस पर झुका, तो उसने उसके चारों तरफ एक बड़ी दीवार के जैसी परछाई बना ली। आरना को तुरंत एहसास हुआ कि वो एक मुश्किल जगह पर खड़ी है और वो तुरंत पीछे हट गई। क्योंकि उसकी नाज़ुक कमर पहले ही दीवार से सटी हुई थी।उसके पास बचने का कोई रास्ता नहीं था।

उसने अपनी ऊंँची, लंबी टाँगें को उसके आस-पास अड़ा लिया, जिससे वो दोनों बहुत नज़दीक आ गए।उसके चेहरे के भाव एक-दम दोषरहित दिख रहे थे उसे जब उसने बहुत नज़दीक से देखा तब भी।

आरना ने अपना सिर थोड़ी मुश्किल से ऊपर किया और माहिर को देख, "मैंने ऐसा तो नहीं… कहा था … कि आप बुरे इंसान हैं"।

"अनजान बनने की कोशिश कर रही हो?", माहिर  ने उसे घूरा और अपनी आँखों को छोटा कर लिया,"तुम्हें यकीन नहीं है कि मैं तुम्हें अभी बाहर फेंक दूंगा?"

आरना ने अचानक महसूस किया कि वो एक कुए से खाई में गिर गयी है।

"मुझे यकीन है।"आरना ने कहा।

आरना ने उसके अविश्वसनीय घमंड पर अपनी भौंह चढ़ाई और उसकी तरफ टेढ़ी नज़र से देखने से पहले उसे ऑर्डर देने वाले तरीके से कहा, "जाओ और बिस्तर पर लेट जाओ!"

माहिर की आँखें गहरी हो गईं, स्याह काली आँखें जिन में से बेहद खतरनाक और कातिलाना तेज़ निकल रहा था।वो शांत था। उसकी तरफ से एक ठंडी नज़र से वो पलक झपकते ही मर सकती थी।

अगर यह कोई और समय होता, तो आरना बिना कुछ कहे उसे अपनी किस्मत समझ कर मान लेती; वो दूसरे लोगों को उकसाने वालों में से नहीं थी, वो बस वहाँ से चली जाती, पर इस बार वो ऐसा नहीं कर पाई।वो बस अपनी गर्दन को सीधा कर के आगे बढ़ने की हिम्मत कर सकती थी।

आरना ने माहिर की मज़बूत छाती पर अपने कोमल हाथों को दबाते हुए, उसने उसे बड़े से बिस्तर पर धक्का दे दिया। फिर उसने हल्के से करहाते हुए अपने होंठ घुमाए और बोली, "अपनी टांगें खोलो"!

"....."( सोचने का सिंबल)

माहिर सोच में पड़ गया यह क्या कह रही है।

आरना को यह देख कर कि माहिर का हिलने का कोई भी इरादा नहीं था, उसने खुद उसकी मदद करने की सोची।उसने ज़बरदस्ती उसकी टांगों को एक बड़े '8' की तरह मोड़ दिया।

क्योंकि मुंबई का सबसे इज़्ज़तदार आदमी अपनी टांगों को फैला कर लेटा हुआ था, माहिर की नसें थोड़ी तन गईं।

आरना ने उसकी ताकतवर कमर को चौड़ा किया और एक रानी की तरह बोली, "क्योंकि तुम मेरे हो, इसलिए मेरी मर्ज़ी चलेगी"!

आरना ने उसके सूट के बटन खोले और उसके कोट को दोनों तरफ फैला दिया, जिससे उसकी चमकदार कमीज़ दिखने लग गई। उसके नीचे, उसकी कसी हुई मांसपेशियाँ तनी हुई थीं और उसकी सुडौल कमर नज़र आ रही थी। उसने एक बहुत ही महंगी बेल्ट पहनी हुई थी, उसका बदन इतना मजबूत और हॉट था कि अपने आपको रोक पाना मुश्किल था और उसके दम से किसी की भी नाक से खून बह सकता था।

आरना को उम्मीद नहीं थी कि उसका शरीर इतना अट्रैक्टिव होगा, उसका छोटा-सा चेहरा शर्म से लाल हो गया।

अब जब ड्रग्स ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था, उसका शरीर और तपने लगा था, जैसे उसकी हड्डियों को चींटियाँ काट रही हों।

उसने जल्दी से अपने नीचे वाले होंठ को काटा, जिससे कि वो सजग रह सके। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि सचमुच वो आदमी उसे इतना आकर्षक लग रहा था।

कोई फायदा नहीं!माहिर ने आरना की सोच पर रोक लगाया।

आरना ने माहिर के एक गहरी व्यंगतमक आवाज़ को सुना, "ऐसा कैसे है कि तुम खुद ही खेल कर मजे ले रही हो?"

"....", क्या?

जारी रहेगा अगले भाग में.....

Coming soon in next chapter..

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