Beauty of Bride Ch. 2

Beauty of Bride - Chapter 2

Posted by Shubhi Gupta • Apr 12, 2026 06:40 AM

रात के उस सुनसान रास्ते पर गाडी अचानक रुकते ही माहौल बदल गया था. हवा जैसे थम गई हो, और अंधेरे में छिपा खतरा अब साफ नजर आने लगा था. सामने कुछ गाडियां आडी- तिरछी खडी थीं, उनके पास खडे आदमी बंदूकें थामे इंतजार कर रहे थे जैसे उन्हें पता था कि शिकार यहीं से गुजरेगा. वीर प्रताप सिंह ने धीरे- धीरे अपनी आंखें खोलीं. उसकी आंखों में कोई घबराहट नहीं थी, बल्कि एक ठंडी, खतरनाक चमक थी. ये लोग ऐसे नहीं मानेंगे. उसने धीमे से कहा. फिर बिना किसी जल्दबाजी के बोला विक्रम. गाडी में पटाखे हैं? ड्राइवर सीट पर बैठा विक्रम हल्का सा मुस्कुराया“ छोटे हुकुम सा भर भर के हैं. वीर ने गर्दन हल्की सी झुकाई, जैसे कोई फैसला पहले ही ले चुका हो“ तो फिर देर Kiss बात की. चलो. आतिशबाजी करते हैं. उसकी आवाज में ऐसा सुकून था जैसे कोई त्योहार मनाने जा रहा हो, न कि मौत का खेल खेलने. बिना धमाके की शादी कैसी. और शादी जब वीर प्रताप सिंह की हो. तो धमाका होना तो बनता है. वीर धीरे से गाडी से उतरा और आराम से बोनट पर बैठ गया. उसके बैठने के अंदाज में ऐसा रौब था, जैसे सामने खडे लोग कोई खतरा नहीं बल्कि एक मामूली रुकावट हों. विक्रम ने डिग्गी खोली और एक लकडी की पेटी बाहर निकाली जिसमें बम भरे थे. सामने खडे आदमी अब चौकन्ने हो चुके थे. उनकी उंगलियां ट्रिगर पर थीं, लेकिन आंखों में हिचक साफ दिख रही थी. वीर ने एक- एक को देखा. जैसे किसी को पहचानने की कोशिश कर रहा हो. फिर उसके होंठों पर हल्की मुस्कान आई“ मैं भी देखूं. किसमें इतनी हिम्मत आ गई. जो वीर प्रताप सिंह की दुल्हन को छीनने आया है. उसने अपना हाथ आगे बढाया. विक्रम ने बिना देर किए एक बम उसके हाथ में रख दिया. वीर ने बम की पिन अपने दांतों से खींची. और बिना पलक झपकाए सामने फेंक दिया. धडाम इतना जोरदार धमाका हुआ कि जमीन तक कांप उठी. एक पल के लिए सब कुछ रुक गया. जैसे वक्त थम गया हो. और अगले ही पल चीखें. अफरा- तफरी. धुआं. एक के बाद एक धमाके होने लगे. आग की लपटें अंधेरे को चीर रही थीं. लोग भाग रहे थे, गिर रहे थे, चिल्ला रहे थे. उन्होंने सोचा था बात बंदूक से होगी. लेकिन यहां तो जवाब आग से दिया गया था. कुछ ही मिनटों में रास्ता साफ हो चुका था वीर शांत खडा सब देख रहा था. चेहरे पर कोई पछतावा नहीं. बस हल्की, संतुष्ट मुस्कान. उसने जेब से सिगरेट निकाली और होंठों के बीच दबा ली. लाइटर ढूंढा. नहीं मिला. उसने सिगरेट विक्रम की तरफ बढाई जाओ. जला कर लाओ. विक्रम समझ गया. वो आगे बढा. और जलती हुई लपटों के पास जाकर सिगरेट सुलगाई. वापस आकर उसने सिगरेट वीर को पकडा दी. वीर ने लंबा कश लिया. धुआं धीरे धीरे हवा में घुल गया. कोई बचा तो नहीं? उसने ठंडी आवाज में पूछा. विक्रम ने झुककर जवाब दिया नहीं छोटे हुकुम सा आपका निशाना कभी नहीं चूकता. वीर ने कुछ नहीं कहा. बस हल्का सा मुस्कुरा दिया. वो वापस गाडी में बैठ गया. उसकी नजर एक पल के लिए पीछे गई जहां पाखी बेहोश पडी थी. उसके मासूम चेहरे पर चांदनी पड रही थी. वीर के चेहरे पर एक पल को कुछ बदला. लेकिन अगले ही पल उसने आंखें बंद कर लीं. फार्महाउस पहुंचने तक मुझे डिस्टर्ब मत करना. गाडी फिर से चल पडी. इस बार गाडी सीधे फार्महाउस के अंदर जाकर रुकी. रात और गहरी हो चुकी थी. चारों तरफ सन्नाटा था. वीर बिना कुछ बोले गाडी से उतरा और अंदर जाने लगा. तभी विक्रम बोला“ छोटे हुकुम सा छोटी हुकुम रानी सा तो गाडी में ही हैं. वीर रुक गया. धीरे से पलटा. उसकी नजरें सख्त हो गईं तुझे उसकी बहुत चिंता हो रही है? विक्रम तुरंत झुक गया“ नहीं छोटे हुकुम सा सोना चाहती है तो सोने दे. हमें कोई शौक नहीं है उसे उठाने का. जब जागेगी खुद आ जाएगी. इतना कहकर वीर अंदर चला गया. विक्रम कुछ देर वहीं खडा रहा. फिर उसने गाडी की खिडकी से अंदर झांका. पाखी शांत लेटी थी, जैसे दुनिया से बेखबर. विक्रम ने धीमे से कहा“ ये लडकी. और ये शादी. कुछ समझ नहीं आ रहा. फिर वो भी सिर हिलाकर अंदर चला गया. उधर. विनोद त्रिपाठी और सुशीला के घर में हडकंप मचा हुआ था. सुशीला सिर पकडकर बैठी थी“ हे भगवान. ये क्या हो गया. विनोद इधर उधर टहल रहा था. उसके चेहरे पर डर साफ था. सुशीला अचानक गुस्से में बोली“ सब आपकी गलती है! अगर आपने जिद ना की होती तो आज ये दिन नहीं देखना पडता! विनोद झल्ला गया“ तुम्हें दुख Kiss बात का है? शादी हो गई. या नहीं हुई? सुशीला चीखी“ मुझे पैसे की चिंता है! अगर उन्होंने पैसे मांगे तो? कमरे में सन्नाटा छा गया. कुछ पल बाद सुशीला बोली“ हमें यहां से निकलना होगा. अभी. दोनों ने जल्दी जल्दी सामान पैक किया. लेकिन जैसे ही बाहर निकले सामने कुछ आदमी खडे थे. एक आदमी आगे आया और बंदूक सीधे सुशीला के सिर पर रख दी“ चलो. साहब ने बुलाया है. कुछ देर बाद. एक बडी हवेली में विनोद और सुशीला घुटनों के बल बैठे थे. सामने बैठा था देवराज मल्होत्रा उसकी आंखों में गुस्सा भरा था. औकात भूल गए हो क्या? उसकी आवाज गूंजी. विनोद डर के मारे उसके पैरों में गिर गया“ माफ कर दीजिए. लेकिन देवराज ने उसे जोर से धक्का दे दिया. उधर फार्महाउस में. वीर अपने कमरे में गहरी नींद में था. उसे जैसे याद ही नहीं था कि अब उसकी शादी हो चुकी है. सुबह की हल्की धूप कमरे में फैलने लगी. गाडी में पडी पाखी को धीरे- धीरे होश आया. उसने आंखें खोलीं. मैं यहां. वो धीरे- धीरे गाडी से बाहर निकली. घूंघट उठाने लगी. लेकिन अचानक रुक गई“ नहीं. मामी जी मारेंगी. वो धीरे- धीरे अंदर की तरफ बढी. एक गार्ड के पास जाकर बोली—“ पति जी. मेरा घूंघट हटा दीजिए. गार्ड घबरा गया“ छोटी हुकुम रानी सा आपकी शादी वीर हुकुम सा से हुई है“ अच्छा. पाखी ने मासूमियत से कहा. फिर हंसते हुए बोली“ तुम्हारी मूंछें बहुत बडी हैं. अच्छा हुआ तुम मेरे पति नहीं हो. गार्ड उसे जाते हुए देखता रह गया. अंदर. पाखी हर किसी को“ पति जी” कहती जा रही थी. हर बार उसे एक ही जवाब मिलता छोटे हुकुम सा अंदर हैं. आखिर वो उस कमरे तक पहुंच गई. दरवाजा आधा खुला था. अंदर वीर सो रहा था. पाखी धीरे धीरे उसके पास गई. उसने छोटे- छोटे हाथों से उसका कंधा हिलाया“ पति जी. उठ जाइए. कोई जवाब नहीं. उसने फिर कहा“ पति जी. उठ जाइए न. तीसरी बार बोलते ही वीर की नींद खुल गई. वो झटके से उठ बैठा. और जैसे ही उसकी नजर पाखी पर पडी उसकी आंखों में गुस्सा भर गया. तुम यहां क्या कर रही हो? पाखी घबराकर बोली“ क्या आप मेरे पति जी हैं? मेरा घूंघट हटा दीजिए. बस यही सुनना बाकी था. वीर का गुस्सा फट पडा हिम्मत कैसे हुई मेरी इजाजत के बिना यहां आने की! उसकी आवाज इतनी तेज थी कि पाखी का शरीर कांप गया. शादी कर ली इसका मतलब ये नहीं कि तुम मेरी पत्नी बन जाओगी! कुछ नहीं लगती तुम मेरी! समझी? पाखी की आंखों में आंसू भर आए. उसके होंठ कांपने लगे. जाओ यहां से वीर ने और जोर से चिल्लाया. पाखी डरकर पीछे हट गई. और फिर भागती हुई बाहर चली गई. वो बाहर जाकर सोफे के पीछे छुप गई. उसका पूरा शरीर कांप रहा था. वो फूट- फूट कर रोने लगी. उसकी सिसकियां पूरे कमरे में गूंज रही थीं. उसके अंदर का वही पुराना डर. फिर से जाग चुका था. जो सालों से उसके अंदर दबा हुआ था.

100%