Chapter 505
Deewangi Teri 🍁🍁 "रिश्ते बनते हैं जिस्म से… या रूह से?" - Chapter 507
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“नूर बहुत अच्छी लड़की है।” उन्होंने ठंडे गर्व से कहा, “और मेरा बेटा… कोई आशिक मिजाज नहीं है।” कमरे की हवा भारी हो चुकी थी। “जो तुम सोचती हो… अपने तक रखो।” उन्होंने आखिरी वार किया—