Beyhadh Wala Ishq - Chapter 3
विराट-देखो ना भ ईया रैगिंग भी। नहीं की और भाषण दे रही है ,
झांसी की रानी रूल बता रही है क्या सही है क्या गलत है रिया हँसते हुए बोलती है। ..
तभी सीनियर का हैड देव दिक्षित आता है ,कौन है भाई झांसी की रानी पीछे से एक लड़के की गर्दन पकड़ते हुए अपने हाथों से दबाते हुए आगे आता है।
राहुल अक्षित के पास खड़ा होता है और कहता है ओह नो अब क्या होगा संध्या क्या,
अक्षित-क्यों क्या हुआ कौन है ये,
राहुल-देव दिक्षित सब डरते है इससे बहुत मारता है सबको ,पूरे कॉलेज में इसी की चलती है,..
संध्या-मै ह़ु बोलो ,वैसे ये घटिया रूल आपने बनाए है क्या..
अक्षित संध्या के पीछे आकर चुप कर धीरे से बोलता है। (अक्षित नहीं चाहता संध्या किसी प्रोब्लम में फंसे)
देव संध्या को देखते ही उस लड़के की गर्देन छोड़ देता है और संध्या की ओर देखता रहता है,..
अपनी ओर देखते देख देव को संध्या कहती है ,क्या हुआ इन सब के जैसे बोलती बंद हो ग ई तुम्हारी गलत काम करते शर्म तो आती नहीं कॉलेज पढ़ने आते हो या गुंडागर्दी करने,और हाँ तुम भी सुनो और तुम सब भी ना तो मै ये रैंगिंग करू़गी ये सब बकवास ना मेरा दोस्त और ना ये बाकी स्टूडेंट करना है जो तुम्हें करलों,..
चलो गाईज संध्या सबको कहती है।
पर वहाँ से कोई नहीं हिलता है सबको देव का डर होता है ,तो संध्या अक्षित का हाथ पकड़कर साथ राहुल कॉलेज की ओर बढ़ते है। ..
तभी प्रिति और रिया उन्हे रोकते हुए कहती है ,तुम बिना रैंगिंग के और बिना देव की प्रमिशन के एंन्ट्री नही कर सकती हो,
संध्या उन्ह़े हटाते हुए ,पीछे मुड़कर देव की ओर देखते हुए है कहती है। है हिम्मत तो रोक कर दिखाओ ,तुम्हारे देव क्या उसका बाप भी नहीं रोक सकता। पैसे देकर आते है कॉलेज पढ़ने तुम्हारे रूल फोलो करने नहीं समझी ..और संध्या, अक्षित राहुल के साथ वहां से चली जाती है धीरे धीरे सब स्टूडेंट जाने लगते है
संजीव-भाई ये सब क्या है
हां देव सब जा रहे रिया बोलती है कोई रूक ही नही रहा
प्रिति-बिना रैंगिंग के..
विराट-देव हुआ क्या है बोलो कुछ,
देव-जाने दो और सब स्टूडेंट्स से जाओ जाओ यहाँ से रैंगिंग नहीं होगी ,
सब एक दूसरे की ओर देखते है ये सब क्या हो रहा है।
देव हँसते हुए पहली बार कोई शेरनी टकराई है मान ग ए,वैसे नाम क्या है उसका..
रिया-संध्या ..
संध्या.. नाइस नेम और मुस्कुराते हुए वहां से चला जाता है। ..
प्रिति-इसे क्या हुआ,यार रैंगिंग का मजा ही खराब हो गया
विराट-कुछ तो हो गया है भाई को। नहीं तो किसी म़े हिम्मत कहाँ बोलती बंद करादे,
संजीव-कहीं भा तो नही ग ई हमारे देव भाई को और सब एक दूसरे की ओर देख मुस्कुराते हुए चलो पता करते है,!!
फस्ट लेक्चर में कुछ ज्यादा खास नहीं पढ़ाया ना आज । संध्या कहती है पार्क में बैठे हुए अक्षित से,
अक्षित-पहला। दिन है यार
राहुल-हाँ अब पूरी बुक थोड़ी होती कॉलेज है स्कूल नहीं
संध्या-पता है कॉलेज है..
राहुल-वैसे कमाल कर दिया तुमने देव की बोलती बंद पूरे कॉलेज में यही बात हो रही थी इस लड़की ने सबको बचा लिया रैंगिंग से और तो और देव ने कुछ नहीं कहा,
संध्या-कहता क्या गलत जो कर रहे थे,
अक्षित-जो हमारी संध्या से सहन नहीं होता है।
राहुल-पहली बार किसी ने ये किया है ,..पर बच कर रहना उन सब से लीडर है वो...
संध्या-और हम नीडर और तीनों हँसते है..
वैसे अक्षित तुम्हारी रैंगिग क्या कमाल की होती (हँसते हुए)
राहुल-लड़के तो तैयार ही रहते है पर ये अक्षित मै नहीं करूंगा,
दोनों हँसना बंद करो तब भी हँस रही थी संध्या तुम,ऐसे कैसे किसी को भी प्रपोज और वो करदूं..
संध्या-ओके बाबा ,सोरी,वैसे गलत था और हमारा अक्षित ऐसा थोड़ी है कोई। स्पेशल ही होगी जिसे प्रपोज करेगा और इसका वो राहुल को ताली देते हुए फिर हँसती है।
अक्षित-हाँ होगी..
संध्या-वैसे तुमने कालर क्यों पकड़ा..उसका
अक्षित-तुम्हारे बारे म़े बकवास करेगा कोई तुम्हें कुछ कहेगा तो मुंह भी तोड़ सकते है..
संध्या मुस्कुराते हुए अक्षित की ओर देखती है..
राहुल-और तुम्हें कोई कुछ कहेगा तो मैडम सब कुछ तोड़ सकती है..वाक ई दोस्ती को नजर न लगे अब तो मै भी हिस्सा हूं ना इस टीम का..
अक्षित-,हाँ..
संध्या-तो और दोस्ती पल भर की नहीं सालो की है हाथ तो लगाए जान लेंगे चाहे वो कोई भी हो..
बस कर मेरी झांसी की रानी अक्षित बोलता है..
संध्या-,हाँ बहुत हो ग ई बाते चलो ना बहुत भूख लगी है कुछ खिलाओ ना सुबह से कुछ नहीं खाया..
अक्षित-चलो कैंटीन चलते है। ..
राहुल-बैठो क्या खोओगे?
संध्या -कोफी एंड सैंडविच सेम अक्षित राइट
अक्षित-हम्म...
तीनों खा रहे होते है ..वह़ी कैटीन में देव अपने दोस्तों के साथ बैठा.होता है। ..
वहां वेटर देव के लिए पानी लाता है पर पेर लड़खडा़ने की वजह से पानी देव पर गिर जाता है ,
वेटर-सोरी भ ईया..
देव उसके चांटा लगा देता है..
संध्या का ध्यान जाता है यार पानी गिरने पर वो उठने लगती है अक्षित बैठी रहो यार..
राहुल-इनका तो रोज का है यार हम क्या कर सकते है...
देव-देख कर नहीं कर सकते काम
वेटर -भ ईया वो आपका हाथ
विराट एक ओर थप्पड़ लगाता है वेटर के भाई से जुबान लड़ाता है ,और उस फुटे गिलास पर वेटर को फैंकता है जो उसके। हाथ में चुभ जाता है और विराट और संजीव उसे लातों से पीटते है,रिया प्रिति हँस रही होती है!!
ये सब देख संध्या को गुस्सा आता है और वो अक्षित राहुल के रोकने पर भी नहीं रूकती है और देव के पास आकर एक थप्पड़ लगाती है और फिर एक ओर जोर से ओर उसकी गाल पर जड़ देती है।
पूरी कैंटीन में सन्नाटा छा जाता है ये सब देखकर ,सब संध्या की ओर देखते है..!!
संध्या-तुम सब खुद को समझते क्या हो ,
विराट -तुमने भाई को मारा कहते आगे बढ़ता है
तभी अक्षित- हा और ना मै सिर हिलाता है।
शर्म आनी चाहिए पानी ही गिरा ना ऊपर इस पर इतना सब और पास के टेबल पर पड़ा पानी का जग ऊठाकर देव पर सारा पानी फेंक देती है।
देव मुंह से हाथ से पानी हटाते हुए संध्या की ओर देखता है।
संध्या-कुछ बिगड़ा पानी ही है ढूब नही मरोगे तुम,लो उन भ ईया से गलती से गिरा मैनै जानबूझकर गिराया क्या करोगे बोलो..छी कहते वेटर को उठाने लगती है..
संजीव गुस्से में संध्या की ओर बढ़ता है जैसे ही संध्या पर हाथ उठाने लगता है देव.हाथ पकड़ लेता है और खुद सजीव के एक लगा देता है जिससे वो टेबल पर जा गिरता है।
संध्या घूरते हुए सबको वेटर को उठाती है ,उठो भ ईया,
अक्षित-यार कांच चुभ गया है खून बह रहा है।
फस्ट टेड भागकर राहुल लाता है।
संध्या वेटर से भ ईया ठीक हो जाएगा कांच निकालकर पट्टी करके हल्का सा मुस्कुराते हुए कहती है। .
अक्षित-ध्यान रखना,
वेटर हाँ मै सर हिलाकर चला जाता है ,संध्या देव और उसके दोस्तों की ओर देखते न तो कोई गलती करके भी सोरी कहता है और ना उन्हें किसी के दर्द का अहसास होते है भरी पड़ी है दुनिया ऐसे लोगों से भी,
अक्षित-चल यार यहां से ,कुछ खाते है इन सब के कारण मूड क्यों खराब कर रहे है। ..
राहुल-हमारा आर्डर भी ठंडा हो रहा है चलो..
संध्या-मै जा रही हूं तुम खाओ कहते संध्या कैटीन से चली जाती है। अक्षित राहुल भी उसके पीछे संध्या संध्या करके चले जाते है।
विराट-इस लड़की की इतनी हिम्मत हमें सुनाऐगी कुछ भी अभी बताता हूं इसे कहते आगे बढ़ते हुए कहता है तभी देव गुस्से में उसे पिटने लगता है। प्रिति संजीव उसे छुुड़ाने की हिम्मत करते है
सजीव -छोड़ो भाई छोड़ो.।
विराट के मुंह से खून आने लगता है ..
विराट को छोड़ मेज पर हाथ मारते हुए सीट...और विराट की ओर बढ़ते उसे पट्टी करता है ,माफ करना यार वो गुस्से में हाथ उठ गया दर्द हो रहा है ना ,पर यार ऐसा नहीं बोलना था हाँ आगे से नहीं बच्चा उस झांसी की रानी के बारे मे नहीं और ये सब नही समझ ग ए,
कहते हुए संजीव हास्पिटल ले जा इसे कहते हुए वहाँ से चला जाता है। ..
संजीव-उस लड़की के लिए भाई,लगता है भाई तो
गए,
विराट-हम्म कभी हाथ नहीं उठाया आज इतनी पिटाई वाक ई कुछ हो गया इन्हें..
देव के चारों दोस्त एक दूसरे की ओर देखते है..
क्रमशः