Love Trap Ch. 3

Love Trap - Chapter 3

Posted by Riya Sharma • Mar 12, 2026 01:29 PM

कनक ने हिम्मत की और धीरे धीरे डाइनिंग टेबल के पास आकर खड़ी हो गई, उसे समझ ही नही आ रहा था की वो कहा बैठे वो बस इंतजार कर रही थी तो युग के बोलने का...!" लेकिन युग का ध्यान सिर्फ न्यूज पेपर मे था, तभी शंभू ने लाकर बाउल को टेबल पर रखा और कनक की और देखकर कहा..." भाभी आप यहां बैठिए ना...!" कनक ने जेसे ही भाभी सुना तो उसने शंभू को देखा और जेसे ही कुछ बोलने को हुई की उसकी नजर युग पर गई जो शंभू को ही घूरे जा रहा था!"

" शंभू ने युग की और देखा और कहा..." माफी कीजिएगा साहब जी...!" इतना बोल शंभू ने अपनी गर्दन झुका ली! युग ने शंभू से अपनी नजर हटाई और कनक की और देखकर कहा..." खड़ी ही रहना है क्या...? बैठ जाओ ! इतना बोल युग ने प्लेट उठाई और नाश्ता लेने लगा, नास्थे में पोहा देखकर कनक का मुंह बन गया था!" वो चुप चाप बैठी बस एकटक प्लेट को घूर रही थी, एक तो वो दो आदमियों के बीच और ऊपर से अनजान लोग, उसके अन्दर तक की रूह में सिरहन दौड़ रही थी!" कनक चुप चाप बैठी प्लेट को देख ही रही थी, की तभी  युग के कान में उसकी आवाज आई...." नास्था करो तुम !" युग की आवाज सुनकर कनक ने नजरे ऊंची की और उसे देखा और जल्दी से थोड़ा सा पोहा प्लेट में लिया, उसे तो कैसे खाना था ये भी समझ नही आ रहा था!" युग बड़े ही आराम से और धीरे धीरे खा रहा था!"  कनक ने एक चमच्च को लिया और खाने लगी, वो जेसे जेसे खा रही थी, उसका मुंह बन रहा था, उसने थोड़ा सा खाया और उठ गई, लेकिन अचानक ही उसकी नजर युग पर गई तो, वो वापस से बैठ गईं!"

" तुम्हारे घर का एड्रेस दो मैं तुम्हें घर छोड़ दूंगा...." – युग ने कनक को देखा और बड़े ही आराम से कहा!"

" कनक ने जेसे ही अपने जानें का सुना तो उसने युग को देखा और कहा..." नही हम ख़ुद से चले जायेंगे" आपने हमारी जान बचाई उसके लिए आप का शुक्रिया! इतना बोल कनक उठी और जाने लगी की तभी युग ने उसका हाथ पकड़ा और कहा!" मेने बोला ना मैं छोड़ दूंगा वैसे तुम कहा से हो...? और रात को भाग क्यों रही थी,  किससे बच रही थी तुम...?  युग के एक एक सवाल पर कनक के हाथो की मुठिया भींच रही थी, और साथ ही उसके हाथ पैर कांपने लगे थे!"  युग ने जब कनक को ना बोलते देखा तो उसने कनक से वापस कहा..."  मैं पूछ नही रहा  बता रहा हूं, इसलिए तुम रेडी हो जाओ!"  और अगर अब तुम नही बताओगी तो हम पुलिस स्टेशन लेकर चलता हूं!"

"  पुलिस का नाम सुनते ही कनक के हाथ पैर ठंडे पड़ गए, उसके शरीर में कम्पन सी होने लगी थी, कनक ने अपने लहंगे में उंगलियां फसाई और कहा...." – हमारा इस दुनिया में कोई नही है, ना ही हमारा कोई ठिकाना है, हमे कुछ लोग पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, उनसे बच के हम भाग रहे थे, प्लीज हमे कहीं नही जाना, हमे पुलिस स्टेशन नही जाना आप टैंशन मत लीजिए हम यहां से कहीं चले जाएंगे !" प्लीज इतना बोल कनक ने युग को देखा और कहा..." बस हमे यहां से बाहर जाने का रास्ता बता दीजिए हम चले जायेंगे!"

" युग ने कनक को देखा और कहा..." – जब तक  तुम चाहो यहां रह सकती हो...!" और तुम जब तक ठीक भी नही होती कही नही जाओगी, इसलिए रूम में जाकर आराम करो, और हा चेंज.... इतना बोल युग चुप गया उसने कनक को देखा और कहा..." तुम्हारे लिए कपड़े ...? अच्छा रुको में अभी मंगवा देता हूं तुम रूम में जाकर रेस्ट करो!"  इतना बोल युग ने अपनी पॉकेट से फोन लिया और किसी को फोन करने लाग कनक ने कुछ देर तो उसे देखा और वाह से वापस ऊपर आकर उसी तुम में आकर बैठ गई, उसे कुछ समझ ही नही आ रहा था!" उसकी नजर खिड़की पर गई तो, वो बेड से उठी और वाह से खिडकी के पास आकर खड़ी हो गई, वो एकटक लगातार बाहर देख रही थी!"  उसकी आंखो मे हल्की सी नमी आ गई थी, उसने खिडकी से अपना सिर टिका लिया और खुद से कहा...."  क्या क्या देखना पड़ेगा भगवान जी, एक अच्छी लाइफ मांगी थी, लेकिन आपने तो लाइफ ही खराब कर दी, किसके घर वाले ऐसे होते हैं जो अपने ही बच्चो के...!" इतना बोल कनक चुप हो गई!" तो वाही उसकी नजर नीचे से आ रहे एक लड़के पर गई जिसके हाथ में कुछ बैग्स थे, उस लड़के को देख कनक ने खिड़की बंद की और बेड पर आकर वापस बैठ गई!

" तो वाही युग सोफे पर बैठा कोई काम कर रहा था, उसके पैरो पर रखा लैपटॉप जिसमे लगातार उसकी उंगलियां चल रही थी!" तभी किसी ने आने की आवाज सुनकर युग ने लैपटॉप बंद किया और मोबाइल हाथ में ले लिया, तभी उसकी नजर सामने से आते हुए लड़के पर गई जिसके हाथ में दो बैग्स थे!"  युग ने उस लड़के को देखा और कहा..." इतना टाइम लग गया क्या तुम्हें सार..... सार ने जेसे ही युग की बात सुनी और कहा,...." यार भाई मेरे कपड़े होते तो कबका ले आता लेकिन आपने तो एक लड़की के कपड़े लाने को कहा है, वैसे कोन है वो लड़की....?"   सार के इतना बोलने पर युग ने उसके कंधे पर मारा और कहा!" जितना बोला जाए उतना ही किया करो एडवांस मत चलो, और ये कपड़े उस लड़की को दे देना!"  इतना बोल युग वाह से बाहर निकल गया!" सार ने युग को देखा और एक नजर अपने हाथो पर डाल कर खुद से ही बड़बड़ाने लगा।" आखिर युग के घर में कोन ऐसी लड़की आ गई,जिसके लिए मुझे कपड़े लाने पड़े!"  चलो मिलते है इनसे भी इतना बोल सार सीढ़ियों से ऊपर जाने को हुआ ही था की उसे शंभू नजर आ गया, उसने उसे देख और कहा...!" वो न्यू लङकी आई है वो कौनसे रूम मैं है!" सार के पुछते ही शंभू ने कहा..." साहब जी के  बगल वाले रूम में है सार भैया, सार ने शंभू को देखा और वाह से रूम में चला गया!"

To be continue....

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