Chapter 157
अनचाहा गठबंधन ✨ - Chapter 157
विशाखा सब कुछ सुन रही थीं। उनके हाथ काँप रहे थे। चेहरा सन्न हो गया था। दिमाग सोचने-समझने की शक्ति खो बैठा था। वही हाल बाकी सब का था। विशाखा का भरोसा ऐसे चूर-चूर हुआ कि वो अपनी जगह जम-सी गई थीं।
अब आगे…
सना कमरे में बैठी अभी भी गेम खेल रही थी। तभी उसे दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आई। वो फोन साइड में रख कर खुश होते हुए बोली, “लगता है ईवा मर गई… वॉव, मेरा सपना पूरा होगा।”
वो चहकते हुए उठी और दरवाज़ा खोला, लेकिन सामने खड़े शख्स को देख उसकी हँसी गायब हो गई। वो गुर्रा कर बोली, “तुम यहाँ…?” सामने कोई और नहीं, तीर्थ था, जिसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
सारा उसे अजीब तरह से देख कर मन में बोली, “ये मुस्कुरा क्यों रहा है मुझे देख कर? इसे तो ईवा के जाने के गम में रोना चाहिए था लेकिन ये तो ...”
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