एक विवाह ऐसा भी - Chapter 2
नंदिनी का रिश्ता एक रिश्ता करवाने वाली ने बताया था, परिवार संपन्न था। हालांकि सभी लोग उन्हें गंभीर और कुछ हद तक अभिमानी लगते थे, लेकिन वे सुशिक्षित और सबसे बढ़कर बेहद आकर्षक थे इस वजह से नंदिनी के परिवार को ये रिश्ता सही लगा,
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सिमी - दी ये साहिल जीजू आपको कुछ अजीब नहीं लगते, अपने ही शादी के प्रोग्राम में के अलग अलग नजर आ रहे हैं , ना किसी से बात कर रहे रहे हैं ओर ना कुछ खा रहे हैं, जब भी बात करने जाओ अजीब नज़रों से घूरने लगते हैं ,मुझे तो वो अपनी नंदिनी दी के लिए बिल्कुल पसंद नहीं, जीजू तो अनिरुद्ध जीजू जैसे होते जो सबके साथ हंसे मुस्कुराए, ओर मेरी सभी फरमाहिश पूरी करे, नंदिनी दी को तो बिल्कुल अनिरुद्ध जीजू से पति मिलने चाहिए, मुझे ये साहिल जीजू बिल्कुल पसंद नहीं आए,
सिमी यूं तो सबसे छोटी है घर में ,ओर सबकी लाडली भी, खास कर अनिरुद्ध की, इसी वजह से वह
कई बार मजाक मस्ती में भी ऐसी ऐसी बातें बोल देती है,लेकिन कई बार उसकी कुछ बातें भी सही होती हैं,
पलक - हट पागल , कुछ भी बोलती है, जरूरी नहीं है कि साहिल किसी से बात नहीं करते या हंसी मजाक नहीं करते तो वो अच्छे नहीं हैं, कुछ लोगों का नेचर ही ऐसा होता है कम बोलने वाला ओर सिरियस टाइप, लेकिन ये जरूरी नहीं है कि वो हमारी नंदिनी के लिए सही नहीं है, अब हमारी नंदिनी को ही देख लो, वो भी तो कम बोलती है ज्यादा लोगों से घुल मिल नहीं पाती तो क्या हमारी नंदिनी खराब है नहीं ना, सिमी हर किसी का नेचर एक दूसरे से अलग होता है जिसे हम बदल नहीं सकते , समझी पागल,, पलक प्यार से सिमी के सिर पर एक प्यारी सी चपत लगाते हुए उसे समझाने लगी,
सिमी अपना सिर हिलाते हुए वहां से चली गई लेकिन पलक वहीं खड़ी साहिल को देखने लगी, पलक ने भी ये देखा था, हालांकि वह उससे पहले एक-दो बार मिल चुकी थी, तब पलक समझ गई कि वे अजनबी थे और कुछ लोग अजनबियों से बहुत जल्दी घुल-मिल नहीं पाते ।
उसने कभी भी साहिल को खुलकर बात करते नहीं देखा था। जब रिश्ता नहीं था तब तो पलक समझती थी लेकिन अब उनके बीच एक रिश्ता बन चुका था। फिर भी, उसने साहिल को चुप चुप ही ज्यादा तरह देखा था, । अनिरुद्ध ने भी इस ओर इशारा किया था। लेकिन किसी ने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
मेहंदी की रस्म से लौटते समय, सिमी , अनिरुद्ध और पलक के साथ अपनी कार में थी, सिमी कुछ सोचकर बोली,
सिमी सोचने लगी - "दुखी होने और बेहद दुखी होने में, या यूं कहें कि अनमना होने में फर्क होता है।"वह लगातार अपनी चिंताएं व्यक्त कर रही थी।
पलक - अच्छा ठीक है, कृपया घर जाकर अब नंदिनी के सामने ऐसी कोई बात मत कहना। वह पहले से ही इन सब से भावुक रही रही है, तुम्हारी ये सब बातें सुनकर उसे अच्छा नहीं लगेगा, ओर उसके मन में साहिल के लिए वहम पैदा होने लगेंगे, इससे उनके रिश्ते में परेशानी होने लगेगी,
सिमी - मैं तो बस बता रही हूं ,, उसने बुरा सा मुंह बनाते हुए कहा
अनिरुद्ध ने उसके फुले मुंह को देखते हुए कहा - अरे मेरी शहजादी को गुस्सा दिला दिया तुमने,,
सिमी की साइड लेते हुए अनिरुद्ध ने पलक को बनावटी गुस्सा दिखाते हुए कहा ,
पलक - आपकी शहजादी की ज़ुबान आजकल बहुत चल रही है,
अनिरुद्ध ने पलक की बात सुनकर बस मुस्कुरा कर रह गया नंदिनी ओर सिमी उसे बहुत प्यारी थी, इसी वजह से वो उनकी तरफदारी के लिए उनकी ओर हो जाता था
पलक - अपनी बारी पर तो उसे पता नहीं क्या करना है । मुझे तो अभी से टेंशन उसकी है , ये तो अपने ससुराल में तर्क दे देकर सबको पागल कर देगी, लेकिन पलक को नंदिनी की वाकई चिंता थी वो सिमी। की तरह नहीं थी की कुछ भी बात हो बोल दे , वो बस चुप रहती थी
सिमी - हां, हां, आप तो कहेगी ही कि आपकी एक ही धैर्यवान बहन है, नंदिनी , इस दौर में इतना सीधा होने का कोई फायदा नहीं, आप जितना सीधा होंगे लोग आपको उतना ही परेशान करेंगे,ऐसे सीधे लोगों को आज कि ये दुनिया बेच खाती ही यहां सीधे लोगों की कद्र नहीं होती है दी, "
सिमी की बात ओर पलक का रिएक्शन देखकर अनिरुद्ध अपनी हंसी रोक नहीं पाया,
पलक - आप हंस रहे हैं, यहां मुझे टेंशन हो रही है ओर आपको हंसी सूझ रही है,
अनिरुद्ध - शाबाश मेरी शेरनी, अपनी ऐसी ही दलिलो से लोगों का मुंह बंद कर देना, बिल्कुल सही कहा है तुमने,
पलक - मैं आपको बता रही हूं, ये आप सही नहीं कर रहे हैं हर उटपटांग बातों में आप इसका साथ देते हैं, अनिरुद्ध की बात पर तो पलक का दिमाग ही घूम गया था, कहा उसका साथ देने के लिए तो वो सिमी की तरफदारी कर रहे थे, मां सही कहती हैं इस लड़की का अपने ससुराल में एक दिन में नहीं टिकना होगा, अगर ऐसी ही ज़ुबान चलती रही तो,
अनिरुद्ध - इसी खुशी में चलो आइस्क्रीम खाते हैं ,, पलक को शांत करने के लिए अनिरुद्ध को फिलहाल यही सही लगा ,
सिमी - येएएएएएए,, यूं आर दी बेस्ट जीजू,,,,, आइस्क्रीम की बात सुनकर सिमी खुशी से चहक उठी ,,
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घर आकर बड़ी मुश्किल से पलक ने कुछ देर पहले उसने नंदिनी को सुलाया था। वह कल से सबसे बिछडने का सोचकर ही रो रही थी और सबको रुला रही थी। उसकी इस हालत से निश्चित होकर पलक सिर दबाए रसोई की ओर चली गई। अनिरुद्ध उसके कमरे में ही था। उसे नहीं पता था कि वह सो रहा है या जाग रहा है।
जब भी वे यहाँ आते थे, अनिरुद्ध और वह उसी कमरे में ठहरते थे जो शादी से पहले पलक का कमरा हुआ करता था।
उसकी शादी के बाद वो कमरा नंदिनी का हो गया था, लेकिन जब भी वो ओर अनिरुद्ध यहां रहने आते तो अनिरुद्ध ओर वो उसी कमरे में ठहरते थे,ओर नंदिनी ओर सिमी माही के कमरे में ठहरती थी,
इस वक्त अनिरुद्ध उसी कमरे में था, लेकिन वो माही के कमरे में भी जिसमें नंदिनी ओर सिमी अभी यह रही थी,
कल नंदिनी की शादी थी, इसी वजह से वो सबसे बिछडने का सोच सोचकर रोए जा रही थी, इसी वजह से पलक आज उसके पास ठहर गई थी, कि एक वहीं तो थी जो नंदिनी को संभाल सकती थी,
लेकिन इस वक्त सिर में तेज दर्द की वजह से उसे नींद नहीं आ रही थी, हो चाय बनाने के लिए वो रसोई में आ गई , चाय का पानी चूल्हे पर रखकर आज मेंहदी के प्रोग्राम के बारे में सोच रही ,कि कब अनिरुद्ध रसोई में उसके करीब आया पलक को पता ही नहीं चला, जब तक वो दो मजबूत बाजुओं के घेरे में वो कैद ना हो गई, अनिरुद्ध की इस हरकत से वो बुरी तरह चौकी,
पलक - उफ्फ डरा दिया आपने तो , वो अपने दिल पर हाथ रखकर अपनी बेकाबू होती धड़कनों को काबू में करती हुई बोली ,
अनिरुद्ध उसकी बात सुनकर हंस पड़ा - किस सोच में गुम थी, कि मेरे आने का पता ही ना चला, वो उसके कंधे पर अपनी थोड़ी टिकाकर बोला, मेरे पास क्यों नहीं आई, वो मोहब्बत से चूर होकर बोला, इससे पहले पलक कुछ बोलती अनिरुद्ध की दहकती सांसों की महक ओर ओठों की गर्माहट पलक को अपने गले पर महसूस होने लगी, अनिरुद्ध की इस हरकत से पलक जी जान से कांप उठी, वो अपनी सांसों को काबू पाकर बड़ी मुश्किल से बोली
पलक - नंदिनी बहुत रो रही थी, बस इसी लिए आज उसके पास सोने का इरादा कर के वहीं उसके पास रूक गई, उसकी बातों में उदासी साफ झलक रही थी, भगवान करे वो अपनी शादी शुदा जिंदगी में हमेशा खुश रहे, मैंने दिल से उसके लिए प्रार्थना की है, वह अपने भोलेपन से ओर सौम्य स्वभाव, शांत प्रवृत्ति और धैर्य से सभी का दिल जीत ले उसने सच्चे दिल से कहा।
शुरू से ही, वह नंदिनी के साथ सबसे ज़्यादा "अटैच" रही थी। और नंदिनी भी पलक के बिना एक पल भी नहीं रखती थी। उसे आज भी याद था जब दस साल पहले शादी के बाद उसने घर छोड़ा था, तब भी नंदिनी कितने दिनों तक बीमार रही थी। ओर वह भी कुछ समय के लिए आती ओर फिर चली जाती, बहुत मुश्किल से उस समय नंदिनी को सबने संभाला था,
पलक की सोचो से दूर अनिरुद्ध अपनी मनमानी करते हुए बोला,
अनिरुद्ध - इतनी खूबसूरत दिखकर भी मुझसे दूर रहकर मेरे नाजुक दिल को नहीं जलाना चाहिए तुम्हें। वह प्यार से उसके कंधे पर अपने होंठ रखते हुए बोला।
लेकिन इस बार उसे उसके मोहब्बत भरे स्पर्श को वैसे महसूस नहीं कर पाई । ओर वह मुड़ी और उसके सामने आ गई।
एक नज़र पलक ने अनिरुद्ध की ओर देखा, जिसकी आंखों में मोहब्बत का खुमार छाया हुआ था, जो अपनी मोहब्बत भरी नजरों से उसे ही देख रहा था , लेकिन उसके चेहरे पर बढ़ती गंभीरता को देखकर उसके मुस्कुराते होंठ कस गए।
अनिरुद्ध - क्या बात है ,, मोहब्बत से चूर वो उसके चेहरे पर आई बालों की लटों को उसके कान के पीछे करते हुए बोला,
पलक - आप...आप दोबारा शादी क्यों नहीं कर लेते?”
आज उसे अपनी इस कमी का एहसास फिर से बहुत तीव्रता से हो रहा था। उसकी कमीज़ के बटनों को देखते हुए, वह वही सवाल दोहरा रही थी जो उससे कई बार पूछा जा चुका था। अचानक, पलक को अपने इस सवाल पर घबराहट महसूस हुई।