एक विवाह ऐसा भी Ch. 1

एक विवाह ऐसा भी - Chapter 1

Posted by SADHNA JAYASWAL श्री राधे 🙏🥰 • Feb 20, 2026 12:04 PM

"आप… आप ऐसे क्यों देख रहे हैं मुझे?"

वह, जो पहले उसकी नज़रों का मतलब कुछ और समझ रही थी, अब जब उसने उसे घूरकर देखा, तो उलझन में पड़ गई। और फिर यह उलझन चिंता में बदल गई कि उसे अपना मुँह खोलना पड़ा। वह पलकें तक नहीं झपका रहा था।

"तुम आज फिर से यहाँ क्यों आ गई हो?"

उसके सवाल के साथ ही उसने अचानक उसकी कलाई कसकर पकड़ ली, वह दाँत  पीसते  हुए उसे घूर कर देखने लगा ।

नंदिनी की साँसें जैसे थम सी गईं। पकड़ इतनी मज़बूत थी कि उसे लगा उसकी हड्डियाँ चटक जाएँगी। ऊपर से वह कठोर आवाज़… डर से उसकी आँखें फैल गईं।

"..क..क्या कह रहे हैं आप? मैं तो पहली बार आई हूँ यहाँ…"

वह समझ ही नहीं पा रही थी कि यह वही व्यक्ति है, जिसकी तस्वीर देखकर उसे अपनापन सा महसूस होने लगा था।

ज़िंदगी भर उसने यही सोचा था कि वह किसी का विश्वास, किसी की अमानत है। और अब जब वह अपने सपनों और उम्मीदों के साथ उसके कमरे में खड़ी थी, तो सामने खड़ा आदमी ऐसा व्यवहार कर रहा था जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।

कमरे में आते ही वह उसके सामने पलंग पर बैठा लगातार उसे घूर रहा था। और जो शब्द उसके मुँह से निकल रहे थे, वे किसी अजनबी जैसे थे।

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घर का माहौल

अनिरुद्ध - "जल्दी भी करो! सब तैयारी हुए या नहीं?"

अनिरुद्ध तीसरी बार कमरे का दरवाज़ा खटखटा चुका था, जहाँ उसकी पत्नी और बाकी बहनें तैयार हो रही थीं।

अनुज - "अनिरुद्ध भैया को तो एक घंटा पहले ही बता देना चाहिए था…"अनुज ने मुस्कराते हुए कहा।

अनिरुद्ध उनका सबसे बड़ा जीजा था, और पूरे घर में सबसे आदरणीय। सब न सिर्फ़ उनका सम्मान करते थे बल्कि उनसे आत्मीयता भी रखते थे।

अनुज - "जीजा जी मेरा ख़याल है अभी मैं पापा से कह देता दूँ कि आप ही आकर सबको बाहर बुला लें,"

अनुज हँसते हुए बोला और ड्रॉइंग रूम में जाकर त्रिलोकनाथ जी (परिवार के मुखिया) के पास बैठ गया, जहाँ सभी पुरुष पहले से तैयार बैठे थे।

अनुज ने अंदर का सारा हाल  त्रिलोकीनाथ जी को सुनाया, अनुज की बात सुनकर  त्रिलोकीनाथ जी का चेहरा तन गया।

त्रिलोकीनाथ जी - "कल ही कहा था समय से तैयार हो जाना, मेहमानों के फ़ोन दो बार आ चुके हैं।"

इतने में दरवाज़े से चूड़ियों की खनक सुनाई दी और पलक वहां आई।

हरे रंग की रेशमी साड़ी, गजरे से सजे बाल और माथे पर बिंदी में वह सचमुच लाजवाब लग रही थी। अनिरुद्ध जो वहीं था, उसकी  नज़रें कुछ पल के लिए पलक पर ठहर सी गईं, लेकिन पलक बेपरवाह होकर अनिरुद्ध के सामने से चली आई।

पलक -"आप लोगों ने गाड़ियाँ क्यों नहीं निकालीं? हम सब तैयार हैं,"उसने बड़े आत्मविश्वास से त्रिलोकनाथ जी की ओर देखते हुए कहा।

त्रिलोकीनाथ जी -"जब तुम लोगों की तैयारियाँ पूरी होंगी, तभी निकलेंगे। चलो जल्दी करो,"त्रिलोकनाथ जी बोले।

पलक ने सिर झुकाया और एक बार फिर वो अनिरुद्ध को इग्नोर कर लौट गई। शादी को दस साल हो गए थे लेकिन पलक की यही बेपरवाही अब भी अनिरुद्ध को उसका दीवाना बना देती थी।

कुछ देर बाद सभी शादी के प्रोग्राम में जाने के लिए निकले लगे ,

पलक -"भगवान का शुक्र है, आज पिताजी की डाँट से बच गई,"वह कार की अगली सीट पर बैठते हुए बुदबुदाई।

वह और नंदिनी कभी कभी त्रिलोकनाथ जी को पिताजी कहते थे, जबकि घर के बाकी बच्चे उन्हें पापा  कहकर पुकारते थे।

अनिरुद्ध की खामोशी देखकर पलक ने हैरानी से उसकी तरफ देखा। वह हमेशा की तरह ब्लैक थ्री पीस सूट  में बेहद आकर्षक लग रहा था। लेकिन उसकी खामोशी बहुत अर्थपूर्ण लग रही थी ,

पलक - आपने  मेरी तरफ देखा तक नहीं," वह अनिरुद्ध का ध्यान अपनी ओर खिंचे की कोशिश कर रही थी ,

अनिरुद्ध ने बिना पलक झपकाए उसे अनसुना कर दिया। जो बनावटी था, लेकिन उसकी शिकायत पर  अनिरुद्ध के होंठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई। घनी दाढ़ी होने के बावजूद, उम्र बढ़ने के साथ-साथ उसके गालों के डिंपल और भी गहरे हो गए थे।

अनिरुद्ध - तुम्हें फिक्र है मेरी, उसके गम्भीर आवाज को सुनकर पलक हैरान रह गई थी ,

पलक हैरानी से - अरे आपने अब देखा मुझे,

अनिरुद्ध नाराजगी जताते हुए - यही तो मसला है, शादी के 10 साल बाद भी तुम्हें मेरी नजरें खुद पर महसूस नहीं होती, लेकिन क्या करूं यही बेपरवाही तो मुझे तुम्हारे ओर करीब ला देती है ,

एक गहरी नज़र पलक के खूबसूरत चेहरे पर डालते ही उसकी नज़रों का मतलब समझकर पलक का चेहरा मारे शर्म के गुलाबी ओर धड़कने तेज हो गई थी,

पलक के चेहरे का नूर देखकर अनिरुद्ध पलक के कान में धीरे से सरगोशी करते बोला

अनिरुद्ध - खेर अच्छी लग रही हो, ओर मेरे दिल के करीब लग रही हो , वो एक धीमी सी मुस्कान लिए पलक को अपनी नजरों की कैद में लिए बोलने लगा,  जिससे पलक ओर भी गुलाबी होने लगा, अपने चेहरे को छुपाने के लिए पलक ने अपना चेहरा खिड़की के ओर मोड़ लिया,

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बहुत सुंदर, यही आपकी सबसे बड़ी बेटी है।" एक रिश्तेदार महिला ने पलक को बुलाया और प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए मुस्कुराते हुए उसने सरिता जी (मां )को देखते हुए कहा ,  जो उसकी ओर आँखें फाड़कर देख रही थी।

सरिता जी उस रिश्तेदार की खोजती नजरें पहचान कर बोली -

सरिता जी - "जी ! यही हमारी बड़ी बेटी है, भगवान का आशीर्वाद है ,ओर वह शादीशुदा है," सरीता जी ने मुस्कुराते हुए कहा।

औरत - अच्छा,, कितने बच्चे हैं बेटा,  उस औरत के कहने पर पलक का चेहरा धुआं धुआं सा होने लगा, वहीं उसकी मां की मुस्कुराहट कहीं खो सी गई थी,

पलक खुद को संभाल कर बड़ी मुश्किल से बोली - अभी नहीं है,

औरत बनावटी फिक्र दिखाते हुए -  ओहो कितना समय हो गया है शादी को, वो महिला जैसे आज ही सब जान लेना चाहती थी, इसलिए बात कुरेद कुरेद कर निकाल रही थी इस बात से अंजान कि उनकी इन बातों से उन मां बेटी का दिल किस अजियत का शिकार हो रहा था,

ओर पलक जानती थी अब अगला सवाल यही होगा, किसी भी प्रोग्राम में उसकी शादी का जान लोग अक्सर यही सवाल करते थे ,उसके लिए अब वहां रूकना बहुत मुश्किल सा लग रहा था,

सरिता जी - जाओ बेटा देखो बहन बुला रही होगी, उसकी मां जानती थी उसके लिए ये बात किस तरह कि तकलीफ पहुंचा रही होगी, उसे ओर सवाल जवाब से बचाने के लिए उसे यहां से भेजना ही सही लगा,

वह बिना एक पल भी गँवाए धुआं धुआं चेहरा लिए वहां से चली गई थी,  लेकिन फिर,  उस पूरे प्रोग्राम में, वह ये चंद शब्द भूल नहीं पाई थी। इसीलिए अब वह जितना हो सके ऐसी महफ़िलों में जाने से बचती थी। लेकिन यहाँ तो बात उसकी बहन की थी। हां उसकी बहन की शादी होने वाली थी , जिसमें वह बहुत खुश नजर आ रही थी लेकिन कुछ लोगों को उसकी ये खुशी बर्दाश्त नहीं होती थी तभी तो बहाने बहाने से उससे ऐसे सवाल पूछे जाते थे जो जिससे उसका दिल छन्नी हो जाता था ,

किसी ओर की  शादी होती  तो शादी को नज़रअंदाज़ कर सकती थी। लेकिन बात उसकी बहन की थी और बहन भी वो जो उसके सबसे ज्यादा करीब थी।

त्रिलोकीनाथ जी और सरीता जी के पाँच बच्चे थे, चार बेटियां और एक बेटा था। सबसे बड़ी पलक थी, उसके बाद अनुज, माही  , फिर नंदिनी , ओर सिमी । पलक की शादी त्रिलोकीनाथ जी के दोस्त के घर तय हुई थी। यह एक प्रेम विवाह था। ओर माही की शादी भी एक अच्छे परिवार में हुई थी  माही की शादी भी पसंद की शादी थी, वो ओर उसका पति दोनों मेडिकल कॉलेज में साथ पढ़ते थे, उसी दोरान दोनों ने एक दूसरे को पसंद कर लिया, अपने हाऊस जाॅब के बाद दोनों ने अपने परिवार में बताया, दोनों के परिवार इस रिश्ते से खुश थे सो जल्दी ही दोनों की शादी हो गई, शादी के कुछ साल बाद दोनों को एक अच्छा काम ओफर हुआ,

जिस वजह से माही अपने पति के साथ U.S.A में  रहने चली गई, ओर यहां आना तो जैसे ना के बराबर सा हो गया था, वहीं नंदिनी एक खूबसूरत  समझदार लड़की थी। लेकिन थोड़ी गंभीर भी , लेकिन सबका ख्याल रखने वाली , नंदिनी हमेशा अपनी परेशानी अपने तक ही रखती , वह किसी को अपने मन की बात जल्दी किसी से नहीं कहती थी ,इसी वजह से पलक उसके लिए कभी कभी परेशान सी रहती थी, नंदिनी भी जाॅब करती थी लेकिन शादी की वजह से उसने जाब छोड़ दिया था , ओर सिमी सबसे छोटी थी जो अभी स्कूल में थी, अनुज जो इकलौता था अपनी जिम्मेदारी समझते हुए वो पढ़ाई के साथ जाॅब भी करता था,

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