Ziddi ishq tera Ch. 3

Ziddi ishq tera - Chapter 3

Posted by Ira Rajput • Feb 07, 2026 10:34 AM

इतनी सारी आवाज एक दम सुन कर पीहू घबरा जाती है और उसका पर फिसल जाता है। उसे देख कर सब घबरा जाते है। और ऊपर की तरफ भगाते है,

पीहू ने गिरने के डर से आँखें बंद कर ली थी , लेकिन जब उसे लगता है कि वो गिरी नहीं तो वो धीरे से आँखें खोलती है, तो उसके सामने एक हैंडसम सा फेस दिखता है , जो दिखने में 21 साल के आस पास होगा। जो उसे ही देख कर मुस्करा रहा था

"वो शख्स पीहू को सीधा खड़ा कर के"मुझे पता है तू बंदरिया है तभी तो इतनी उछलती है, बोल कर हंसने लगता है।

उस सख्श की बात सुन कर पीहू उस से दूर हो कर उस लड़के को घूर कर देखती है।

तब तक आलोक जी और सुमन जी को छोड़ कर सब उनके पास आ जाते , और एक साथ घबराई हुई आवाज में पूछते है (प्रिंसेस, गुड़िया) आप ठीक हो।

सब की आवाज सुन कर पीहू उन सब की तरफ देखती है सामने सब को देख के मासूम ओर रोतुला सा चेहरा बना कर," डैडी, छोटे डैडी, मम्मा, छोटी मॉम देखो भाई हमें चिड़ा रहे है। यह बोल कर पीहू रोने लग जाती है

और अपने डैडी mr. हर्षित सिंघानिया के गले लग जाती है पीहू की बात सुन कर सब उस लड़के मतलब अक्ष सिंघानिया को घूर कर देखते है,

हर्षित जी, "अक्ष तुम पीटना चाहते हो,

अभिनव जी,"अक्ष तुम क्यों गुड़िया को परेशान करते

प्रिया जी पीहू को घूरते हुए," बस बस ये भी कम शैतान नहीं है हमेशा उछाल कूद करती रहतीं है"।

संध्या जी,"दीदी आप गुड्डू को कुछ मत बोलिए वो तो छोटी है लेकिन ये लड़का तो बड़ा है"

ये बोल कर अक्ष के कान पकड़ लेती है।

अक्ष कान छुड़ाते हुए,"aahhhaa मॉम क्या कर रही हो दर्द हो रहा है छोड़िए ।

पीहू जो हर्षित जी के गले लग कर रो रही थी वो सब से बच कर अक्ष को जीभ निकल कर चिड़ा देती है ,ओर फिर से रोने लगती है ।

प्रिया जी अक्ष को छोड़ते हुए,"अरे क्या कर रही हो  संध्या छोड़ो अक्ष को ।

ओर फिर पीहू को आँखें दिखाते हुए ,अगर नौटंकी हो गई हो तो चलो ,नाश्ता ठंडा हो रहा है, प्रिया जी की बात सुनकर सब नीचे आ जाते है ,

"दादा जी"पीहू के सर पर हाथ रख कर, लाडो आप ठीक है ,

पीहू उनकी बात सुन कर , अपनी गर्दन हिला कर जी दादू हम ठीक हैं।

"दादी जी" प्यार से उसके गाल पर हाथ रखकर, चलो नाश्ता कर लो ।

पीहू गर्दन हिला कर हां करती है।

सभी डाइनिंग टेबल पर आ जाते है सर्वेंट सबको नाश्ता सर्वे करते हैं। , दादा जी " पीहू आपने अपनी पैकिंग कर ली है। आपको कल मुंबई के लिए निकलना है , दादा जी की बात सुन कर सब खाना खाते हुए रुक जाते है , और दुखी हो जाते हैं,

पर दादाजी , मुझे नहीं जाना , में आप सब के बिना कैसे रहूंगी , मुझे यही आप सब के साथ रहना है, और वैसे भी यहां भी तो अच्छे कॉलेज हैं, में अक्ष भाई के कॉलेज में एडमिशन ले लूंगी।

पीहू ये बोलते टाइम sad हो जाती है ।

उसको ऐसे देख कर सब sad हो जाते है , सब उम्मीद से दादा जी को देखने लगते है , दादा जी भी उसको ऐसे देख के पिघल जाते है,

लेकिन खुद को संभल कर , नहीं लाडो आप आगे की पढ़ाई मुम्बई से ही करेगी , और आप अकेली थोड़ी जाएगी साक्षी भी तो आपके साथ जाएगी।

आपका admission ओर रहने का सब हम कर चुके हैं,

और वहां आप दोनों अकेले थोड़ी रहेगी, आप हमारे दोस्त के घर रहोगी।

पीहू हां में गर्दन हिला देती है, सब समझ जाते है वो sad है।

लेकिन कोई कुछ नहीं कर सकता था , दादा जी के फैसले के आगे कोई कुछ नहीं बोल सकता था।

वैसे भी सब को पता था ये सब पीहू की भलाई के लिए ही हो रहा था।

हर्षित जी दादाजी की तरफ को देखते हैं दादाजी पलके झपका कर गर्दन हिला देते हैं, जैसे कह रहे हो सब ठीक हो जाएगा।

हर्षित जी, अपने मन में, सॉरी बच्चा डैडी को आपको खुद से दूर भेजना पड़ रहा है लेकिन जो मुसीबत आपके ऊपर है उसके लिए मुझे ये करना होगा।

"मेरी बच्ची को सुरक्षित रखने के लिए अगर मुझे उसे खुद से दूर भी करना पड़े तो में कर दूंगा।

हर्षित जी का गला रुंध गया था। उन्होंने पीहू के मासूम चेहरे को देखा जो अब उदास होकर अपनी प्लेट में रखे सैंडविच को टुकड़ों में तोड़ रही थी। सिंघानिया खानदान की लाडली, जिसे कभी घर की दहलीज से बाहर अकेले कदम नहीं रखने दिया गया, आज उसे हजारों मील दूर भेजा जा रहा था।

हर्षित जी ने मन ही मन सोचा, "काश! मैं तुम्हें बता पाता कि तुम्हारी ये मुस्कान हमारे दुश्मनों की आँखों में खटक रही है। काश! मैं तुम्हें उस काले साये के बारे में बता पाता जो पिछले कई दिनों से तुम्हारा पीछा कर रहा है।"

तभी डाइनिंग हॉल में अजीब सा सन्नाटा छा गया। पीहू ने धीरे से अपनी नज़रे उठाईं और अक्ष की तरफ देखा। अक्ष, जो हमेशा उसे चिढ़ाता था, आज चुपचाप सिर झुकाए बैठा था। उसने भी अपनी बहन को दूर भेजने का फैसला भारी मन से स्वीकार किया था।

संध्या जी ने माहौल को हल्का करने के लिए कहा, "अरे लाडो, तुम उदास क्यों हो रही हो? मुंबई तो सपनों का शहर है! और फिर साक्षी भी तो तुम्हारे साथ होगी। तुम दोनों वहां खूब शॉपिंग करना, घूमना और देखना... वहां का कॉलेज दिल्ली से भी बड़ा होगा।"

पीहू ने एक फीकी मुस्कान दी, "मम्मी, कॉलेज बड़ा हो या छोटा... वहां आप सब तो नहीं होंगे न? सुबह मुझे कौन जगाएगा? अक्ष भाई से लड़ाई किए बिना मेरा दिन कैसे बीतेगा?"

अक्ष ने झट से कहा, "ओए बंदरिया! ज़्यादा इमोशनल मत हो। तू जाएगी तो कम से कम मेरा रूम तो सुरक्षित रहेगा, वरना तू तो मेरे परफ्यूम और गैजेट्स पर ही कब्ज़ा जमाए रखती है।"

सब ने हंसने की कोशिश की, लेकिन उस हंसी के पीछे एक अनजाना डर और जुदाई का गम साफ झलक रहा था। हर्षित जी ने अपनी जेब में रखे उस गुमनाम लेटर को कस कर भींच लिया, जिसमें पीहू को लेकर धमकी दी गई थी। उन्होंने मन ही मन कसम खाई— "जब तक सूरज-चाँद रहेंगे, सिंघानिया परिवार अपनी प्रिंसेस पर एक आंच भी नहीं आने देगा। चाहे इसके लिए हमें उसे अपनी आँखों से ओझल ही क्यों न करना पड़े।"

"दोस्तों, पीहू की विदाई की घड़ी नज़दीक है। लेकिन क्या मुंबई जाना वाकई सुरक्षित है? कौन है वो दुश्मन जिससे सिंघानिया परिवार इतना घबराया हुआ है? और क्या मुंबई में पीहू का सामना उस 'ज़िद्दी आशिक़' से होगा?

जानने के लिए जुड़े रहिये— 'ज़िद्दी इश्क़ तेरा'।

100%