तुम तो धोखेबाज़ हो - Chapter 2
शादी की ये पहली रात वरूण के लिए किसी भारी पत्थर की तरह सीने पर रखी हुई थी। अचानक से शादी हुई, और उससे भी बड़ा झटका..अहाना तो अहान निकला।
कमरे की हल्की रोशनी में वरूण की आँखें छत पर टिकी थीं, मगर दिमाग कहीं ओर भटक रहा था। उसे वो याद आ रहा था..जो उसके लिए सात समंदर पार करके वापस लौट रहा है।
सिद्धार्थ!
घबराहट में वरूण की धड़कनें तेज हो गईं।
तभी अहान ने उसके गाल पर हल्के से थपकी दी और शरारती लहजे में बोला, “कहाँ खो गए सैंया जी, हम कब से आप से कुछ पूछ रहे हैं, क्या आपको अब भी हमारे अंदर कोई दिलचस्पी नही?”
वरूण ने फिर से उसके प्यारे गोल चेहरे को देखा और संकोच करते हुए बोला, “वो..अ..अभी हमारी नई-नई शादी हुई है न तो थोडा अजीब लग रहा है...तुम थोड़ा दूर रहो अभी।”
कहते हुए उसने अहान का हाथ अपने गाल पर से हटाया और उसे खुद से अलग करने लगा।
अहान ने भी कोई ज़बरदस्ती नही की, वो बस मुस्कुराया, एक कदम पीछे हटा और बोला, “ठीक है, आपको अगर टाईम चाहिए तो कोई बात नही, हम इंतज़ार भी कर लेंगे, पर अब आपका साथ नही छोड़ेंगे।” ये कहकर वो मुस्कुराया और बेड पर जाकर लेट गया।
वरूण वहाँ खडा उसे देखता रहा और मन में बोला, “देने वाले ने तो बिन मांगे ही हूर दे दिया है लेकिन वो लंगूर भी तो पीछे पडा है, अगर उसे इस शादी के बारे में पता चल गया तो मेरा क्या होगा?... वो तो मुझे कच्चा चबा जाएगा!”
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“कल जब मिलोगे तो सचमुच खा जाऊँगा तुम्हें!”
कार की पिछली सीट पर बैठा सिद्धार्थ खुद से ही मुस्कुरा उठा।
आँखों के सामने वरुण का चेहरा था। जिससे वो मन ही मन बातें कर रहा था।
“कल की सुबह तुम्हारी लाईफ में बहुत बडा सरप्राईज़ लेकर आने वाली है! आई नो, तुम भी मेरा बेसब्री से इंतज़ार कर रहे होंगे, बस आज की रात ओर..फिर कल तो हम मिल ही जाएंगे।”
तभी अचानक झटके से कार रुक गई। सिद्धार्थ अपने ख्यालों से बाहर आया और आगे बैठे ड्राईवर से बोला, “व्हाॅट इज़ दिस, अचानक से कार क्यों रोक दी तुमने?”
“सर..वो..लगता है कार में कोई खराबी आ गई है।”
यह सुनकर सिद्धार्थ ने झुंझलाते हुए गेट खोला और बाहर निकलते हुए बोला, “ग्रेट! एक कार भेजी वो भी खटारा।” उसने गुस्से में गेट फिर से बंद कर दिया।
ड्राईवर भी बाहर आते हुए बोला, “सर इसमें पेट्रोल खत्म हो गया है, आप थोडी देर यहीं रुकिए मैं आसपास देखता हूँ किसी शॉप पर मिल जाता है तो।” वो दौडकर वहाँ से चला गया।
सिद्धार्थ को इस वक्त अपने पिता पर बेहिसाब गुस्सा आ रहा था। उन्होंने उसे कभी कुछ नही समझा, बस जब देखो ताने देते रहे। उनका बहुत बडा बिजनेस है लेकिन वो एक अंडरवर्ल्ड माफिया भी हैं। उन्हीं की कंपनी में वरूण एक साधारण सा एम्प्लॉयी है, जिससे सिद्धार्थ को प्यार हो गया है। लेकिन वरूण तो सिद्धार्थ से डरता है, क्योंकि सिद्धार्थ भी अपने पिता की ही तरह है, लेकिन वरूण से प्यार होने के बाद वो खुद को बदलने लगा, विदेश गया ताकि अपना खुद का बिजनेस खड़ा कर सके, और आज उसने वो कर दिखाया।
तभी दो बाईक्स तेजी से वहाँ से गुजरीं, लेकिन आगे जाकर रुक गईं। सिद्धार्थ का ध्यान उस तरफ नही था। उन दोनों बाईकर्स के सिर पर हेलमेट थे। उन्होंने पीछे की तरफ गर्दन घुमाई, सिद्धार्थ अपनी कार से टेक लगाकर खडा था।
“ओह माय बेबी! पूरे एक साल बाद!” उन दोनों बाईकर्स में से एक बोला।
“इंतज़ार के बाद मिलन का तो मज़ा ही कुछ ओर है।” दूसरा बाईकर खिलखिलाया।
फिर वो दोनों अपनी बाईक से उतरे और अपने हेलमेट भी उतार दिए। दोनों की शक्ल-सूरत एक जैसी ही थी, जुड़वा थे। दोनों ने ब्लैक कलर की जींस और व्हाईट टीशर्ट पहनी थी, जिस पर ब्लैक कलर की जैकेट थी। दोनों में अंतर तो कुछ भी नही था बस एक के बाल छोटे थे तो दूसरे के घने कानों तक आते हुए। छोटे बाल वाले का नाम रियांश था और बड़े बाल वाले का नाम, राघव।
दोनों आकर सिद्धार्थ के सामने खडे हुए और एक ही सुर में बोले, “हैल्लो!”
उन दोनों को देखकर सिद्धार्थ की आँखें बडी हो गईं, “ओह गॉड! ये दोनों चिपकू कहाँ से आ गए?” वो झटपट कार का गेट खोलने लगा लेकिन राघव ने आकर उसका हाथ पकड लिया।
“इतनी जल्दी भी क्या है!”
सिद्धार्थ ने चिढकर अपना हाथ छुडा लिया, “तुम दोनों क्यों आए हो यहाँ पर?”
रियांश ने उसका चेहरा अपनी तरफ करते हुए कहा, “ओह माय बेबी! ये कैसा सवाल है? आए हम नही आए तो तुम हो, वो भी पूरे एक साल बाद, कहाँ गायब हो गए थे?”
सिद्धार्थ ने उसका हाथ पकडकर झटका, “तुमसे मतलब।”
राघव ने उसकी गर्दन में हाथ फंसा उसे अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “हमें मतलब नही होगा तो फिर किसे मतलब होगा? तुम क्या जानो, ये एक साल तुम्हारे बिना हमने कैसे बिताया है?”

“मुझे जानना भी नही है, लीव मी।” सिद्धार्थ ने अपनी गर्दन छुडाई तो उधर से रियांश ने उसकी गर्दन पर बाहें लपेट लीं।
“ऐसे-कैसे छोड दें तुम्हें, बडी मुश्किल से तो हाथ आए हो, माय बेबी।” रियांश ने उसे देखकर गर्दन टेढी की और आँखें टिमटिमा दीं।
सिद्धार्थ गुस्से में उसकी बाहें झटकते हुए बोला, “मैं तुम्हारा बेबी नही हूँ।”
पीछे से राघव उसे बाहों में भरते हुए बोला, “क्योंकि तुम तो मेरे बाबू हो, है न?”
सिद्धार्थ की शक्ल अब रोने जैसी हो गई। जिसे देख सामने खडे रियांश को हँसी आने लगी। उसने सिद्धार्थ के गाल खींचते हुए कहा, “अले ले ले, बेबी को लोना आ लहा है।”
पीछे से राघव भी हैरानी से मुहँ गोल करते हुए बोला, “क्या हुआ बाबू..तुम रो क्यों रहे हो? मैंने तो अभी सिर्फ पकड़ा ही है, तुम्हारा रेप थोडे ही किया है।” ये कहकर वो भी हँस दिया।
बस अब सिद्धार्थ का गुस्सा फूट पड़ा।
उसने पूरा जोर लगाकर दोनों को दूर धकेला और गरज कर बोला, “अब अगर तुम दोनों ने मुझे जरा सा भी टच किया न तो मैं भूल जाऊँगा कि तुम दोनों किसकी औलादें हो, काट कर फेंक दूंगा दोनों को।”
अब राघव और रियांश दोनों ही सीरियस हो गए। फिर दोनों एक-साथ सिद्धार्थ के सामने आए और बोले....
“हम दोनों को जब कोई चीज पसंद आ जाती है तो हम उसे पाकर ही रहते हैं, फिर चाहे इसके लिए हमें कुछ भी करना पड़े।”
दोनों की आवाज़ में सिद्धार्थ के लिए एक चेतावनी थी, जिसे सिद्धार्थ ने हवा में उड़ाते हुए कहा, “तुम दोनों कुछ नही कर सकते, यू हेव नो आईडिया ऑफ माय पावर।"
राघव ने बड़ी सी मुस्कान चेहरे पर लाकर कहा, “आईडिया तो अभी तुम्हें नही है कि हम क्या चीज हैं?”
रियांश ने भी उसी लहजे में कहा, “और जब तक तुम्हें ये पता चलेगा तब तक तो तुम हमारे हो चुके होंगे।”
सिद्धार्थ ने अपनी पैंट की जेब में दोनों हाथ डालकर बड़े ही घमण्ड में कहा, “मैं ऑलरेडी किसी ओर का हो चुका हूँ।”
यह सुनकर रियांश और राघव ने एक-दूसरे की तरफ देखा, थोड़े हँसे और फिर खुलकर हँसने लगे।
सिद्धार्थ को कुछ समझ नही आया, पागल हो गए हैं क्या ये दोनों?
इतने में ड्राईवर पेट्रोल लेकर आ गया, उसे देखकर सिद्धार्थ वापस कार में बैठते हुए बोला, “जल्द से जल्द इसे कार में डालो और चलो यहाँ से, ये दोनों पागल बहुत ही खतरनाक हैं।”
ड्राईवर ने भी राघव और रियांश को देखा, जो अब भी गला फाड़-फाड़कर हँस रहे थे।
ड्राईवर डर गया और फटाफट कार में पेट्रोल डालने लगा।
सिद्धार्थ ने तो खिड़की का काँच ऊपर चढ़ा लिया और कान में ब्लूटूथ हेडसेट लगा लिये। उन दोनों की गला फाड़ हँसी उसे सुननी ही नही थी।
पेट्रोल भरकर ड्राईवर भी जल्दी से आगे बैठ गया और कार स्टार्ट कर दी।
पीछे खड़े राघव और रियांश ने अब हँसना बंद किया।
“बेचारा! सोच रहा है कि उसका वरूण अब भी उसका है।” राघव ने अफसोस भरे लहजे में कहा।
“पर उसे क्या मालूम, आज ही उसका वरूण घोड़ी चढ़ गया और अपने लिए दुल्हन ले आया।” रियांश बोला।
“बड़ा ही धोखेबाज़ निकला वो।” अब दोनों एक ही सुर में बोले और फिर हँस दिए।
जारी है......
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