तुम तो धोखेबाज़ हो Ch. 1

तुम तो धोखेबाज़ हो - Chapter 1

Posted by Sanyogita • Feb 01, 2026 10:23 AM

चेतावनी : ये कहानी काल्पनिक है, एक समलैंगिक प्रेम कहानी है, मतलब BL Story यानी लड़कों की लव स्टोरी। इसलिए जिसे भी इससे एतराज़ हो, वो ना पढ़े।

----------

शादी के भव्य मंडप के बीच एक साधारण और मासूम सा दिखने वाला पच्चीस साल का लडका, काफी गुस्से में बोल रहा था, “नही माँ! मैं ये शादी नही कर सकता।” उसने मंडप की तरफ देखा जहाँ लाल जोडे में सजी-धजी एक दुल्हन खडी थी, चेहरे पर उसके घूंघट था।

उस लडके की माँ उमा..विनती भरी रोनी सूरत बनाकर बोली, “ऐसा मत बोल वरूण, तेरे भाई के भाग जाने से हमारी काफी बदनामी हो चुकी है, अब अगर तू भी हमारी लाज नही रखेगा तो हम समाज में क्या मुहँ दिखाएंगे? कर ले न ये शादी।” उन्होंने वरूण की बाहँ पकडी तो वो झुंझलाते हुए अपनी बाहँ छुडाने लगा।

“नही माँ, आप समझो मेरी बात को, मैं ये शादी नही कर सकता, मैं किसी की ज़िन्दगी बर्बाद नही कर सकता...”

तभी उसके पिता कैलाश गरजते हुए बोले, “क्यों नही कर सकता? पहले से ही शादी करके बैठा है क्या?”

उमा उन्हें शान्त कराते हुए बोली, “आप शान्त रहिए, ये मान जाएगा, मेरी बात कभी नही टालेगा।” उन्होंने फिर से वरूण की तरफ देखा और उसे पकडकर थोडा साइड में ले गईं।

“राजवीर तो हम सबकी नाक कटाकर भाग गया है, तेरे पापा बहुत गुस्से में हैं, तू मान जा इस शादी के लिए।” उमा ने प्यार से वरूण के सिर पर हाथ फेरा।

वरूण अब बैचेन सा होकर थोडा झिझकते हुए उनसे बोला, “माँ..मैं ये शादी..इसलिए नही कर सकता..क्योंकि..क्योंकि मैं गे हूँ! मुझे लडकियां नही बल्कि लडके पसंद हैं।”

यह सुनकर उमा सन्न रह गई। मन तो हो रहा था कि इसे थप्पड पे थप्पड लगा दे लेकिन फिर कुछ सोचकर उन्होंने अपने गुस्से को दबा लिया। वरूण उनकी ऐसी प्रतिक्रिया देखकर थोडा सहम गया लेकिन फिर भी हिम्मत करके उनके सामने खडा रहा।

उमा ने साडी के पल्लू से अपने आँसू पोंछे और बोली, “अगर राजवीर इस शादी से नही भागता न तो मैं तेरे सामने इतना नही गिड़गिड़ाती, तू जहाँ चाहता वहीं तेरी शादी कराती लेकिन इस वक्त हमारी इज्जत का सवाल है, तेरे पापा ने अहाना के चाचा-चाची को वचन दिया है कि उनकी भतीजी हमारे घर की ही बहू बनेगी।”

इधर अहाना के चाचा धीरज आगे आए और कैलाश से बोले, “कैलाश जी, ये क्या हो रहा है? वादे तो बहुत बड़े-बड़े किए थे आपने, अब क्या हुआ? जिसके साथ मेरी भतीजी की शादी तय हुई थी वो तो भाग गया, और आपका दूसरा बेटा मान नही रहा है।”

अहाना की चाची रचना भी बोली, “कैसे पिता हैं आप? आपके दोनों बेटे आपके खिलाफ जा रहे हैं और आप कुछ नही कर पा रहे, हमारी और अपनी इज्जत का कुछ ख्याल है या नही आपको?”

अब कैलाश को बहुत गुस्सा आया। वो गुस्से में उमा और वरूण की तरफ गए। पीछे खडे धीरज और रचना शातिर अंदाज में मुस्कुरा दिए।

कैलाश ने आकर सीधा वरूण की बाहँ पकडी और गुस्से में ही बोले, “शादी तो तुझे करनी ही पडेगी वरना यहाँ से तेरी, मेरी और तेरी माँ..तीनों की लाश ही जाएगी।”

यह सुनकर वरूण की जान हलक में आ गई। उमा भी डर गई लेकिन अब वो कुछ नही बोलीं क्योंकि जो काम उनका रोना नही कर पाया वो कैलाश का गुस्सा कर रहा था। वरूण भीगी बिल्ली बना उनके साथ चल दिया और मंडप में बैठ गया। अहाना को भी उसकी चाची रचना ने जल्दी से मंडप में बिठा दिया।

मंत्र पढे जा रहे थे। बाराती इस शादी का ये अद्भुत तमाशा देख रहे थे। कैलाश गंभीर होकर खडे थे, उमा तो अंदर ही अंदर खुश थीं क्योंकि वरूण ने शादी ना करने की जो वजह बताई थी उसे सुनकर तो उनका हार्ट फेल होते-होते बचा था लेकिन अब जैसे भी हो, वरूण की शादी एक लडकी से हो रही थी, ये सोचकर उन्होंने भगवान को ढेर सारा धन्यवाद दिया। इधर वरूण के चेहरे पर मजबूरी नाच रही थी लेकिन माँ की ममता और पिता के गुस्से के कारण वो एकदम चुप बैठा शादी की रस्मे निभाए जा रहा था।

फेरे पूरे होने वाले थे। रचना ने फूल बरसाते हुए अपने पास खडे धीरज से कहा, “हमारा ये बोझ उतर तो गया लेकिन अगर कल को इन्हें असलियत पता चल गई तो?”

धीरज ने बेपरवाही भरे भाव से कहा, “हम क्यों टेंशन लें? ये तो अहाना की ही इच्छा थी कि उसे शादी करनी है, अब हमने करवा दी, रही हम दोनों की बात तो इसकी विदाई होते ही हम दोनों भी इस शहर से विदा हो जाएंगे, मैंने सब प्लानिंग कर रखी है।”

रचना अपने पति की चालाकी पर बडे ही गर्व से मुस्कुरा दी।

शादी हुई और विदाई भी हो गई। वरूण और अहाना अपने घर आ गए। सारी रस्में होने के बाद उमा ने मुस्कुराकर अहाना से कहा, “बेटा, हमारे यहाँ दुल्हन को कमरे में उसका पति अपनी गोद में उठाकर ले जाता है।”

वरूण ने अजीब सी शक्ल बनाई और अपने पिता कैलाश को देखने लगा। वो इधर-उधर देखते हुए वहाँ से चले गए। उमा उसके मन की बात समझ गई और मुस्कुराकर बोली, “उनकी शक्ल देखकर लगता नही है कि वो लेकर गए होंगे लेकिन वो भी लेकर गए थे।”

वरूण ने अहाना की तरफ देखकर कहा, “नही माँ, इस रस्म को रहने दो, मैं हाथ पकडकर ही ले जाऊँगा।” हाथ के नाम पर भी उसने केवल अहाना की चूड़ियां ही पकडीं।

उमा अब थोडा सख्ती भरे भाव से बोली, “चुपचाप उठाकर ले जा इसे वरना मैं तेरे पापा को...”

उन्होंने इतना ही कहा था कि वरूण ने तुरंत अहाना को अपनी गोद में उठा लिया और कमरे की तरफ ले जाने लगा। उमा ने खुश होकर दोनों की बलाईयां ले लीं।

वरूण जल्दी-जल्दी अहाना को गोद में उठाए कमरे के अंदर लाया और बेड पर रख दिया। उसे रखने के बाद खडे-खडे ही आढा-टेढा होने लगा जैसे कितना भारी काम किया हो उसने।

“ये लडकी तो कुछ ज्यादा ही भारी है।” वो खुद में ही बडबडाया। फिर वो अलमारी की तरफ अपने कपडे निकालने के लिए गया।

“घूंघट नही उठाओगे हमारा?”

उसे सुनकर वरूण एक पल के लिए रुका लेकिन फिर परवाह ना करते हुए बोला, “तुम अपना घूंघट खुद ही उठा लो क्योंकि मुझे तुम्हारे अंदर कोई दिलचस्पी नही है।” ये कहते हुए उसने अलमारी खोली।

“हम इतने भी बुरे नही हैं, तुम्हारे भाई ने तो देखते ही पसंद कर लिया था।”

वरूण अपने कपडों को इधर-उधर करते हुए बोला, “फिर भी तो भाग गया वो।”

“क्योंकि उन्हें हमारी असलियत पता चल गई थी, लेकिन वो जाते-जाते हमें इतना बता गए कि उनका छोटा भाई गे है।”

वरूण को अब झटका लगा। वो तुरंत उसकी तरफ घूमा और नजरें सिकोडकर बोला, “मेरे भाई ने तुम्हें बता दिया था कि मैं गे हूँ, फिर भी तुमने मुझसे शादी कर ली!”

“तुम गे हो यही जानकर तो हमने शादी की है तुमसे।”

वरूण गुस्से में उसकी तरफ आकर बोला, “ये क्या बकवास कर रही हो तुम?”

“बकवास नही कर रहे, सच बोल रहे हैं” ये कहते हुए अहाना ने अपना घूंघट हटा दिया। वरूण तो उसके प्यारे से गोल चेहरे को अपलक देखता ही रह गया लेकिन अहाना ने तो पूरी चुनरी को ही सिर पर से हटा दिया। वरूण ने ध्यान दिया कि अहाना के बाल ज्यादा बड़े नही थे, बस कंधों तक ही थे और वो भी हल्के घुंघराले। अहाना ने जैसे ही चोली के बटन खोलने शुरू किए ये देखकर वरूण ने चिल्लाकर आँखें बंद कर लीं, “अर्रे..ये क्या कर रही हो, इतनी जल्दी मच रही है तुमको?”

अहाना ने चोली उतारकर वरूण के मुहँ पर फेंक दी। वरूण ने उसे पकडा, देखकर अजीब सी शक्ल बनाई और छोड दी। फिर उसकी नजर सामने अहाना पर गई, उसे देखकर वरूण की आँखें हैरत से फटी रह गईं। अहाना कोई लडकी नही बल्कि लडका था, जिसका असली नाम था अहान। उम्र उसकी बीस के आसपास होगी, गोरा रंग, भूरी आँखें, गुलाबी होंठ..शक्ल देखकर तो कोई भी उसे लडकी ही समझ ले तभी तो उसने अपने ऊपरी कपडे उतारे।

अहान अब बेड पर से उतरकर वरूण के पास आया और उसके दोनों गालों पर हाथ रखके बोला, “क्यों सैंया जी, क्या अब भी हमारे अंदर दिलचस्पी नही है तुम्हें?”

उसके छूने से वरूण के शरीर में करंट सा दौड गया। होंठों पर अपने-आप ही हल्की सी मुस्कान तैर गई, वो खोया हुआ सा अहान को देखने लगा लेकिन अगले ही पल उसे कुछ याद आया और उसके चेहरे पर घबराहट भरे भाव आ गए।

“अगर उसे पता चला कि मैंने शादी कर ली है तो..वो तो मुझे जान से मार ही डालेगा।”

वरूण मन ही मन घबराकर बोला।

***********

एयरपोर्ट पर एक अट्ठाईस साल का हैंडसम और डेशिंग लडका, ब्लैक कलर का थ्री पीस सूट पहने, आँखों पर ब्लैक चश्मा लगाए, बडे ही कॉन्फिडेंस में चलते हुए आ रहा था। उसके होंठों पर एक कातिल मुस्कान थी। तभी उसका फोन बजा, उसने उठाकर कान पर लगाया, दूसरी तरफ से आवाज़ आई.....

“सॉरी सिद्धार्थ, मैं तो तुम्हें रिसीव करने नही आ पाऊँगा..”

वो लडका जिसका नाम सिद्धार्थ था एकदम बेफिक्री वाले लहजे में बोला, “इट्स ओके डैड, आई नो आप बहुत बिज़ी रहते हैं, मैं आ जाऊँगा अपने-आप, डोंट वरी।” ये कहकर उसने कॉल कट कर दिया। उसके फोन पर जो वॉलपेपर था उसमें वरूण की ही फोटो थी। सिद्धार्थ ने उसे मुस्कुराकर देखा और बोला, “मैंने अपने दम पर सब-कुछ हासिल कर लिया है मेरी जान, अब तुम्हें मुझसे कोई शिकायत नही रहेगी, मैंने अपना वादा निभा दिया, अब तुम्हारी बारी, म्वाहह!” उसने वरूण की फोटो को प्यार से चूम लिया।

"तुम तो धोखेबाज़ हो, वादा करके भूल जाते हो"

यह गाना सुनकर सिद्धार्थ ने उस तरफ देखा, सड़क पर एक लड़का-लड़की इस गाने पर रील बना रहे थे।

उन्हें देखकर सिद्धार्थ मुस्कुराने लगा और खुद भी इस गीत को गुनगुनाते हुए आगे बढ़ गया।

जारी है......

100%