Yatra: Short Story Collection (Completed) Ch. 1

श्री लोक 1

Posted by Divya Verma • Dec 31, 2025 06:31 PM

सुबह के ठीक दस बजे की हल्की धूप में एक सिल्वर रंग की एक्टिवा लाइब्रेरी के सामने आकर तेजी से रुकती है। उस पर बैठी लड़की जैसे ही अपना हेलमेट उतारती है, उसका चेहरा नजर आता है — बड़ी-बड़ी चमकती आँखें और चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर रही है। यही है हमारी कहानी की हीरोइन — त्रिशिका।

वो एक प्यारी सी कॉलेज गर्ल है। उसकी बड़ी-बड़ी भूरी (ब्राउन) आँखें, घनी पलके, छोटी सी तीखी नाक, और उसके डार्क ब्राउन रेशमी बाल जो कमर तक आते हैं — आज भी रोज़ की तरह लहरा रहे हैं। उसके हार्ट-शेप होठ, उसे मासूमियत भरी एक खास खूबसूरती देते हैं। उसने आज गहरे नीले रंग का कुर्ता पहन रखा है, जिसके साथ सफेद रंग की लूज़ स्ट्रेट पैंट है। उसकी सादगी ही उसकी पहचान है — वो बिना किसी बनावट के भी सबसे अलग, एक बार्बी डॉल जैसी लग रही है।

त्रिशिका कॉमर्स सेकंड ईयर की स्टूडेंट है, मगर दिल से एक इतिहास प्रेमी। बाकी स्टूडेंट्स के लिए रविवार मतलब रेस्ट-डे, लेकिन त्रिशिका के लिए यह सबसे खास दिन होता है — जब भीड़ कम होती है, शांति ज़्यादा, और उसकी प्यारी लाइब्रेरी उसे बस यूँ ही बाँहें खोलकर बुलाती है।

पर यह कोई आम लाइब्रेरी नहीं है। जिस कॉलेज में त्रिशिका पढ़ती है, वह कभी प्राचीन काल में एक भव्य महल हुआ करता था — ऊँची छतें, पत्थरों में तराशी गई आकृतियाँ, और हर दीवार में गूंजती इतिहास की कहानियाँ। बाद में सरकार ने इस महल को कॉलेज में बदल दिया, लेकिन इसकी लाइब्रेरी अब भी समय की परतों में लिपटी एक रहस्यमयी दुनिया की तरह खड़ी है।

वहाँ हर शेल्फ, हर किताब कोई न कोई कहानी कहती है — खासकर इतिहास की किताबें, जिनमें त्रिशिका खो जाना चाहती है। स्कूटी पार्क कर के जैसे ही वह लाइब्रेरी के लकड़ी के भारी दरवाज़े तक पहुंचती है, उसकी आँखों में चमक और भी बढ़ जाती है। भीतर कदम रखते ही उसे पुरानी किताबों की सौंधी खुशबू मिलती है, जो किसी इत्र से कम नहीं लगती। काउंटर के पास बैठी लाइब्रेरियन मैम त्रिशिका को देखकर मुस्कराती हैं।

“गुड मॉर्निंग, त्रिशिका!”

त्रिशिका भी मुस्कान के साथ जवाब देती है, “गुड मॉर्निंग, मैम!” और फिर रोज़ की तरह अपनी मनपसंद ऐतिहासिक किताबों की ओर बढ़ जाती है।

जैसे ही त्रिशिका बुकशेल्फ़ की ओर बढ़ती है, उसकी नज़र रोज़ की तरह उसी एक पुरानी, रहस्यमयी किताब पर पड़ती है — जो मज़बूत काँच की अलमारी में रखी हुई थी। उसे तुरंत वह दिन याद आ जाता है, जब उसने लाइब्रेरियन से उस किताब को पढ़ने की इच्छा जताई थी।

लेकिन उस दिन लाइब्रेरियन का चेहरा थोड़ा सख्त हो गया था। उन्होंने कहा था, "इस किताब पर ज़्यादा ध्यान मत दो, बेटा। यह हर किसी के पढ़ने के लिए नहीं है।"

बस तभी से, त्रिशिका की उस किताब को पढ़ने की चाह और भी गहरी होती चली गई। उस दिन के बाद से ही वह हर बार कोई न कोई रास्ता ढूँढ़ती रही है — बस एक बार उस किताब के पन्नों को पलटने के लिए।

आज भी उस किताब को देखते ही वह खुद से मुस्कुराते हुए कहती है — "चल त्रिशिका... आज फिर लग जा काम पर! आखिर तू भी देखे कि इसमें ऐसा क्या है, जिसकी वजह से इसको पढ़ने नहीं दिया जाता।"

फिर त्रिशिका बुकशेल्फ से एक किताब निकालकर अपनी डेस्क पर जाकर पढ़ने लगती है, लेकिन जैसे ही उसने किताब का पहला पन्ना पलटा, उसके फोन ने वाइब्रेट करना शुरू कर दिया। त्रिशिका ने हल्के झुंझलाए अंदाज़ में स्क्रीन की ओर देखा।

"Avya Calling..."

त्रिशिका ने तुरंत कॉल रिसीव कर लिया, क्योंकि वह जानती थी कि जब तक वह कॉल नहीं उठाएगी, तब तक आव्या कॉल करती ही रहेगी। कॉल रिसीव करते ही दूसरी तरफ से आवाज़ आई —

"त्रिशिका! आज भी तू मुझे छोड़ गई! तू मेरा थोड़ा सा भी वेट नहीं कर सकती? हे भगवान! आपने कैसी बेस्टी को परोस दिया है मेरे जीवन में!"

ये सुनकर त्रिशिका के चेहरे पर मुस्कान तैर गई। वह मुस्कराते हुए बोली — "ओ मैडम! मैं आधा घंटा तेरे घर के बाहर स्कूटी रोककर हॉर्न बजा रही थी। और तेरा फोन तो हमेशा साइलेंट ही रहता है — और तुझे तो पता है, मुझमें इतना सब्र नहीं कि तुझे दो घंटे उठाने में लगाऊँ। तू तो सोने में कुंभकर्ण को भी पीछे छोड़ दे!"

आव्या ने रूठने के अंदाज़ में कहा, "यार शिकू! तुझे तो उन हिस्टॉरिकल किताबों के आगे मेरी जैसी क्यूट सी बेस्ट फ्रेंड भी दिखाई नहीं देती! मैं तुझसे बहुत बड़ा वाला गुस्सा हूँ!"

त्रिशिका मुस्कराते हुए बोली, "ठीक है बाबा, अगली बार तुझे रात में उठाने आ जाऊंगी। पर अब तो आ जा!"

आव्या का स्वर थोड़ा धीमा हो गया, "नहीं यार, आज मम्मी के साथ मार्केट जाना है। शाम तक लौटूंगी। और हाँ, मेरी शेल्फ में कुछ किताबें रखी हैं, वो लेते आना प्लीज़। और ध्यान रखना कि मैं अभी भी तुझसे गुस्सा हूँ।"

त्रिशिका बोली, "ठीक है। आते वक्त तेरी फेवरेट शॉप से तेरी फेवरेट आइसक्रीम भी ले आऊंगी, और कुछ?"

आव्या जानती थी कि त्रिशिका उसके कहने का मतलब समझ गई है। वह चहकते हुए बोली, "थैंक्यू शिकू!"

और ये कहकर उसने झट से फोन काट दिया। त्रिशिका ने भी सिर ना में हिलाकर फोन वापस टेबल पर रख दिया।

अब उसकी नजर लाइब्रेरियन पर थी। जब से वह अपनी डेस्क पर आई थी, तब से ही वह लाइब्रेरियन पर नज़र बनाए हुए थी — क्योंकि जिस बॉक्स में वह किताब रखी थी, उसकी चाबी लाइब्रेरियन के डेस्क की ड्रॉअर में थी। तभी अचानक, लाइब्रेरियन को कॉल आता है। वो कॉल सुनते ही सिर हिलाकर बाहर जाने लगती हैं।

यह देखकर त्रिशिका खड़ी होकर चुपके से लाइब्रेरियन को देखने लगती है। उसे लाइब्रेरियन कॉलेज की बिल्डिंग की ओर जाते दिखती हैं। त्रिशिका समझ जाती है कि प्रिंसिपल मैम ने ही कुछ काम के लिए बुलाया होगा (अक्सर प्रिंसिपल मैम लाइब्रेरी का काम संडे को ही देखती हैं, और जो बुक्स लाइब्रेरी में ऐड होनी होती हैं, उन सब की फॉर्मेलिटी भी संडे को ही होती है। और हर संडे कॉलेज कुछ घंटों के लिए ओपन रहता है)।

ये देखकर उसकी आँखों में चमक आ जाती है। वह तुरंत लाइब्रेरियन की डेस्क के पास जाती है और वहाँ से चाबी का गुच्छा हाथ में ले लेती है। फिर उस किताब के पास जाकर, एक-एक चाबी ट्राई करने लगती है। बहुत सी चाबियाँ ट्राई करने के बाद आखिरकार वह लॉक खुल ही जाता है। त्रिशिका तुरंत उस किताब को निकालकर, फिर वहाँ जाकर बैठ जाती है जहाँ से वो किसी को आसानी से दिखाई न दे।

त्रिशिका बड़ी उत्सुकता से उस किताब को देखने लगती है। किताब दिखने में ही राजसी लग रही थी — उसका थीम डार्क ब्लू और गोल्डन था। उसकी बॉर्डर पर लोहे की सुंदर आकृति की परत लगी हुई थी, जो उसकी दिव्यता को और बढ़ा रही थी। उस पर बड़े-बड़े गोल्डन अक्षरों में लिखा था —

"श्री लोक"

जैसे ही त्रिशिका किताब का तीसरा पेज खोलती है, उसमें से एक रोशनी फैलती है — और त्रिशिका को एकदम से झटका लगता है।

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क्या है इस किताब में ऐसा, जिसकी वजह से इसे लॉक में बंद रखा गया है?

इस किताब में से रोशनी क्यों निकली?

त्रिशिका को झटका क्यों लगा?

और अगर लाइब्रेरियन ने त्रिशिका को यह किताब पढ़ते देख लिया तो...?

क्या होगा इसका अंजाम? जानने के लिए पढ़ते रहिए हमारी कहानी — "श्री लोक" — जिसे लिखा है A.R. Writer ने ।

नॉट- ये एक शोर्ट स्टोरी कलेक्शन है इसमे अलग अलग जोनरा (genre) की बहुत सारी स्टोरीज़ होंगी। और अगली स्टोरी के बारे में, उससे पहले की स्टोरी में प्रमोशन शुरू कर दिया जाएगा I

Story में आगे क्या होगा जानने के लिए Stay Tuned!

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