डरावनी भूतिया कहानियां Ch. 2

सिरकटी दुल्हन, भाग- 2

Posted by Mamta Meena • Dec 22, 2025 03:11 AM

अगले दिन भी सारा दिन ऐसे ही शादी की तैयारी में गुजर गया और उस रात भी लगभग एक बजे अचानक मेरी नींद खुल गई। तो मैंने टाइम देखा एक बज रहा था। यह देखकर मैं सोचने लगा यार यह कैसी आदत है रोज इसी टाइम मेरी नींद खुल जाती है। चलो थोड़ा पानी ही पी लेता हूं। यह सोचकर मैं पानी पीने के लिए गया और जैसे ही पानी पीने लगा, तो फिर से मुझे अपने घर के बाहर गेट के पास सड़क किनारे वही औरत खड़ी हुई दिखाई दी।

अब उसे देखकर मैं बहुत ज्यादा हैरान रह गया कि चलो दो दिन की तो बात सही, आखिर इसी वक्त किसी को क्या प्रॉब्लम आती है जो रोज यह औरत यहां खड़ी हुई दिखाई देती है। अब मैं सोचने लगा कि देखता हूं आखिर यह गांव में किस साइड से आई है। यह सोचकर मैं अपने खाट पर लेटे हुए उस तरफ ध्यान रखने लगा।

तभी कुछ देर बाद मैंने देखा कि धीरे-धीरे वह औरत हमारे घर के आगे सड़क पर घूमने लगी। तो ऐसे में सड़क पर से ही उसकी पायल के घुंघरू बजने की आवाज़ और उसकी चूड़ियों के खनकने की आवाज भी मुझे साफ सुनाई दे रही थी। लेकिन अंधेरे में वह ठीक से मुझे दिखाई भी नहीं दे रही थी। वह बस हमारे घर के आसपास घूमती रही। जिसकी वजह से पता नहीं क्यों, लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैं उस तरफ ही देखे जा रहा था और लगभग चार बजे तक वह औरत ऐसे ही घूमती रही।

और जैसे ही चार बजने को आए, तो वह जो हमारे घर से थोड़ी दूरी पर जंगल है, जहां पर गांव के लोग फ्रेश वगैरा होने जाते थे, उस तरफ चली गई और न जाने कहां गायब हो गई। यह देखकर मेरी तो हैरानी का ठिकाना ही नहीं रहा। धीरे-धीरे सुबह भी हो गई थी। रात की बात याद आते ही मुझे हैरानी होने लगी। फिर मैंने सोचा होगा कुछ ऐसा। वैसे भी गांव के बारे में मुझे ज्यादा पता नहीं है। मैं क्यों इन फालतू की बातों के बारे में सोचकर अपना दिमाग खराब करूं? और ऐसे में मैंने इस बात को भी नजरअंदाज कर दिया। वह दिन भी गुजर गया था और रात को बस वही जो और दिन होता था, अचानक रात के एक बजे मेरी नींद खुल गई और आज भी वही औरत मुझे अपने घर के बाहर खड़ी हुई दिखाई दी।

यह देखकर अब मुझसे रोका नहीं गया और मैं उठकर उस तरफ चला गया, जहां गेट के किनारे वह औरत खड़ी हुई थी। अब मैं उसकी तरफ देखकर बोला, "कौन है आप और यहां रोज-रोज आकर खड़ी क्यों हो जाती हैं?" मेरा यह कहना था कि उसने घूमकर मेरी तरफ देखा। तो मेरे तो पैरों तले जमीन खिसक गई। क्योंकि मैंने अपनी आंखों के सामने उस वक्त जो देखा, वह बड़ा डरावना और भयानक था। जो औरत मेरे सामने खड़ी हुई थी, उसके सिर नहीं थे, सिर्फ धड़ था।

वैसे भी और दिन तो वह अंधेरे में मुझे ठीक तरह से दिखाई नहीं देती थी, लेकिन आज तो उसे अपने बहुत करीब से देखकर मेरे तो होश उड़ गए थे। मैं बहुत ज्यादा घबरा गया और यह देखकर मैं जैसे ही वापस भागने को हुआ, तो लड़खड़ाते हुए नीचे जमीन पर गिर गया और थर-थर कांपते हुए उस औरत की तरफ देखने लगा। वही उस डरावनी औरत का जो सिर्फ धड़ था, वह दुल्हन के कपड़े पहने हुए था, बिल्कुल दुल्हन की तरह सजा था, जिससे ऐसा लग रहा था जैसे वह डरावनी औरत कोई दुल्हन है, मतलब कोई दुल्हन की आत्मा है।

तभी उस डरावनी औरत ने पहले तो दो कदम मेरी तरफ बढ़ाए, जिससे उसकी पायल के घुंघरू की बजने की आवाज सुनाई देने लगी और फिर हाथ की चूड़ियों की आवाज भी साफ सुनाई दे रही थी। यह देखकर बड़ी मुश्किल से हिम्मत करके मैं फिर से हिम्मत करके आगे बढ़ाते हुए बोला, "कौन है आप?" यह कहना था कि वह तेजी से मेरे घर के सामने सड़क पर भागने लगी और भागते ही भागते जो जंगल था, उसके पास में जो कच्चा रास्ता था, उस पर भागते हुए चली गई और जो सामने एक पहाड़ी थी, उस तरफ भाग गई। यह सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि मैं कुछ समझ ही नहीं पाया।

वहीं हमारे घर के बाहर एक कुत्ता था, जो उस डरावनी दुल्हन को देखकर बार-बार भौंक रहा था और उस दुल्हन को भागते देखकर भोंकते हुए ही उसके पीछे चला गया और उसके भौंकने की आवाज दूर-दूर तक सुनाई देने लगी। यह देखकर मैं बहुत ज्यादा डर गया था और वापस जल्दी से आकर अपनी खाट पर लेट गया।

अब कभी सोचता, जो कुछ मैंने देखा, वह मेरे मन का भ्रम था या कुछ तो डरावना था। उस औरत के सिर तो थे ही नहीं। तो फिर कभी सोचता, यार वैसे भी वह मुझसे थोड़ी दूरी पर थी, अंधेरे में थी, जिसकी वजह से हो सकता है उसका सिर मुझे ठीक तरह से दिखाई ना दिया हो। ऐसे थोड़ी, हो सकता है कि कोई बिना सिर के घूमे। ऐसे तरह-तरह के उल्टे-सीधे ख्याल मेरे दिलो-दिमाग में आ रहे थे। परंतु घबराहट बहुत ज्यादा हो रही थी। ऐसे में उस रात मैं ठीक से सो भी नहीं पाया था।

अगले दिन मेरा मन कर रहा था कि मैं अपने घर वालों को सब कुछ बता दूं, लेकिन फिर सोचने लगा कि बड़ी मुश्किल से तो मेरे दादा-दादी, चाचा, चाची सब लोग अनुश्री की शादी यहां करने पर राजी हुए हैं। वरना गांव में जो बातें फैली हुई हैं, दुल्हनों की मौतों की, उसकी वजह से चाचा, ताऊ, दादा जी कोई भी पहले अनुश्री की यहां पर शादी करने के लिए तैयार नहीं हुआ था। अब अगर मैं यह बातें भी उन्हें बता दूंगा, तो वह लोग और भी ज्यादा परेशान हो जाएंगे, फिर अनुश्री की शादी किसी भी हालत में यहां नहीं करने देंगे। इसलिए मैंने किसी को भी कुछ भी बताना ठीक नहीं समझा। वैसे अपनी आंखों के सामने इतना सब कुछ देखने के बाद भी अब भी मुझे यह सब कुछ अपने मन का भ्रम भी लग रहा था।

धीरे-धीरे शादी की तैयारी में वह दिन भी गुजर गया था और इन सब के बीच मैंने इन बातों पर ध्यान नहीं दिया। उस रात भी, एक रात की तरह, अचानक लगभग एक बजे ही मेरी नींद खुल गई। तो कल की बात याद करके मुझे बहुत ज्यादा घबराहट होने लगी। फिर हिम्मत करके मैं बोला, यार ऐसा कुछ नहीं होता। यह सोचकर अब रोजाना की तरह उस वक्त भी मैंने थोड़ा पानी पिया और जैसे ही गेट की तरफ देखने लगा, मुझे घुंघरू के बजने की आवाज़ साफ सुनाई देने लगी थी। चूड़ियों के खनकने की आवाज़ भी सुनाई दे रही थी। तो मैंने देखा कि दूर से ही वह आवाज आ रही थी और जंगल के पास से जो कच्चा रास्ता था, वहां से होकर वह दुल्हन चलते हुए हमारे घर की तरफ आ रही थी।

तो ऐसे में उस सुनसान और शांत माहौल में उसके पायल और चूड़ियों की आवाज मुझे सुनाई दे रही थी। तो मैं भागते हुए वापस अपनी खाट पर लेट गया। अब वह दुल्हन जैसे-जैसे आगे बढ़ती आ रही थी, मैं उस पर नजर रखे हुए था। तभी मैंने देखा कि अब वह हमारे घर के गेट के पास सड़क किनारे नहीं रुकी, सीधे ही हमारे घर के आंगन के अंदर आ गई। तो उसे आंगन के अंदर आते हुए देखकर मेरे होश उड़ गए। अब तो मैंने सोच लिया था कि अगर वह यहां से गुजरेगी, तो मैं उसे जाने नहीं दूंगा, देखूंगा वह कौन है, क्या चाहती है और अब तो उसे ठीक से ही देखकर रहूंगा। यही सोचते जा रहा था कि तभी आंगन के अंदर जाकर दो कदम आंगन में चलने के बाद अचानक वह वापस जाने के लिए मुड़ गई और आंगन से बाहर चली गई।

अब वह घर के आसपास ही घूमती रही और फिर जंगल के पास वाले कच्चे रास्ते पर जाकर न जाने कहां चली गई थी। अब अपनी आंखों के सामने यह सब कुछ देखकर मुझे यह तो लग रहा था कि कुछ ना कुछ तो अजीब है, कुछ ठीक नहीं है। लेकिन मैं था शहर में पला-बढ़ा, तो भूत-प्रेत यह सारी बातें हमेशा से अंधविश्वास लगती थीं। ऐसे में इतनी जल्दी इन सब बातों पर यकीन मुझे नहीं होने वाला था। लेकिन अगर यकीन करने की कोशिश करता, तो कोई ना कोई बात ऐसी दिमाग में आ जाती, की फिर मैं इन सब बातों पर यकीन नहीं कर पाता था।

घर में शादी की रस्में भी शुरू हो चुकी थीं और पड़ोस के लोग शादी की रस्मों में शामिल होने के लिए तो आ रहे थे, लेकिन वही बातें बना रहे थे। शादी की रस्में बढ़ती ही जा रही थीं। तभी एक दिन मैं घर के आंगन में ही सोया हुआ था। नाच-गान होने के बाद देर रात पड़ोस की औरतें भी अपने घर गई हुई थीं। सब लोग थके हुए थे। घर में शादी विवाह की तैयारी चल रही थी और पूरे घर को दुल्हन की तरह सजाया हुआ था। रंग-बिरंगी लाइटें जली हुई थीं।

कि अचानक उन पायल और चूड़ियों के बजने की आवाज सुनकर हड़बड़ाते हुए मेरी आंखें खुल गईं। मैंने चारों तरफ देखा, लेकिन कुछ भी नजर नहीं आया। मैंने सोचा, शायद मेरे मन का भ्रम होगा। यह सोचकर मैं करवट बदलकर सो गया था। शादी की तैयारी में इतनी ज्यादा थकान हो जाया करती थी कि ऐसे ही जल्दी ही नींद आ गई।

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