डरावनी भूतिया कहानियां Ch. 1

सिरकटी दुल्हन, भाग- 1

Posted by Mamta Meena • Dec 22, 2025 03:09 AM

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम सार्थक है और मैं मध्य प्रदेश के दतिया जिले का रहने वाला हूं। आज मैं अपने जीवन में घटी एक ऐसी सच्ची घटना के बारे में आपको बताना चाहता हूं, जिसे सुनकर आप बहुत ज्यादा घबरा जाएंगे। उसे सुनने से ही आपके दिल की धड़कन बढ़ जाएगी। एक ऐसी कहानी जिसे सुनोगे तो आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे जबकि वह घटना जब मेरे साथ घटी थी, तो उस वक्त मुझ पर क्या गुजरी थी, मुझसे बेहतर कौन समझ सकता है?

यह बात उस वक्त की है जब मेरी छोटी बहन अनुश्री की शादी होने वाली थी। अनुश्री का रिश्ता एक अच्छे खानदान में तय हो गया था। हम लोग बचपन से ही शहर में रहे थे, शहर में ही पले-बढ़े थे। शहर में ही अनुश्री का रिश्ता तय हुआ था, लेकिन लड़के वालों की डिमांड थी कि शादी गांव से की जाए। ऐसे में लड़के वालों की डिमांड को पूरा करने के लिए मेरे घर वाले अनुश्री की शादी गांव से करना चाहते थे।

परंतु उस वक्त हमारे गांव में एक डर जो चारों तरफ फैला हुआ था, वह यह था कि दुल्हन की उसकी शादी से एक दिन पहले की रात को हत्या कर दी जाती थी। उसकी लाश अगले दिन सिर से कटी हुई मिलती थी। यह सब कौन कर रहा था, क्यों हो रहा था? ना तो गांव के लोग इस बारे में पता लगा पा रहे थे, ना पुलिस लगा पा रही थी। क्योंकि जिसकी भी लाश मिलती थी, उसके कमरे का दरवाजा अगर अंदर से लॉक होता था, तब भी लाश मिलती थी। और अगर उसके पास में चाहे कितने भी लोग सोए हुए हों, लेकिन किसी को कानों-कान भी खबर नहीं होती थी कि उस दुल्हन की इतनी बेरहमी से हत्या कब कर दी जाती थी।

वैसे यह सभी हत्याएं एक जैसे ही हो रही थीं। ऐसे में पुलिस भी काफी ज्यादा परेशान हो गई थी। कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर यह हो क्या रहा है। पहले हमारे गांव में ऐसा कुछ नहीं होता था, लेकिन पिछली लगभग सात शादियों में ऐसा हो चुका था। जब पहली दुल्हन की मौत हुई थी, तो सब लोगों ने सोचा कि किसी ने जानबूझकर उसकी हत्या की है। ऐसे में हर कोई इसे एक मर्डर का केस मान रहा था। पुलिस भी इसी एंगल से जांच कर रही थी।

लेकिन जब दूसरी मौत भी इसी तरह की हुई, तो कुछ लोग तो कह रहे थे कि कोई और ही चक्कर है, कोई बुरी हवा का वही कुछ लोग इसे भी मर्डर मान रहे थे। लेकिन जब लगातार सात मौतें हो गईं, तो अब तो लोग बहुत ज्यादा घबरा गए थे। यह जो हुआ था, उसकी वजह से गांव में बहुत ज्यादा डर फैला हुआ था। लोग अब अपने रिश्तेदारी में जाकर अपनी बेटियों की शादी कर रहे थे।

मेरे पापा से इस बारे में किसी ने कहा, तो पापा भी परेशान हो गए और इस शादी को करने से साफ इनकार कर दिया। लेकिन लड़के वालों की डिमांड थी और वैसे भी मैं, मेरी मम्मी, बहन, हम सब लोग भी इन सारी बातों पर यकीन नहीं करते थे। और अनुश्री से बढ़कर उसकी खुशी से बढ़कर हमारे लिए कुछ नहीं था। परंतु हम नहीं चाहते थे कि उस पर कोई जरा सी भी आंच आए। लेकिन यह भूत-प्रेत जैसी बातें हमें बेफिजूल और अंधविश्वासी लगती थीं।

मेरी मम्मी मॉडर्न ख्यालों की थी, शहर में ही बचपन से रही थी। और पापा की जब गवर्नमेंट जॉब लगी थी, वह यहां आए थे। तो पापा जिस ऑफिस में जॉब करते थे, उसी में मेरी मम्मी भी करती थी। पहले दोनों के बीच नॉर्मल बातें हुईं, फिर दोस्ती हुई और पापा को मम्मी पसंद आ गई थीं। फिर यही शादी हो गई थी। तो ऐसे में मम्मी गांव की इन बातों पर भरोसा नहीं करती थीं और गांव भी बहुत कम जाती थीं।

इसलिए पापा की बात सुनकर उन्होंने इन बातों को लोगों की बेफिजूल की बातें और अंधविश्वास बता दिया। ऐसे में हम लोगों के आगे पापा की एक न चली और वह भी मजबूर हो गए हमारी बात मानने के लिए। तो फिर अनुश्री की शादी से कुछ दिन पहले ही हम अपने दादा-दादी के पास गांव चले गए थे। हमारा भी गांव में भरा-पूरा परिवार था। उस वक्त जब अनुश्री की शादी के बारे में गांव के लोगों को पता चला, तो वे लोग भी मना करने लगे कि क्यों लड़की की जान दांव पर लगाने पर तुले हुए हो?

लेकिन मम्मी इन सबको बेफिजूल बता रही थीं, मेरे दादा-दादी भी गांव के लोगों की बातों को सही बता रहे थे। परंतु मम्मी बहुत ज्यादा जिद्दी थी, जिस काम को करने के बारे में सोच लेती थी, उसे करके ही रहती थी। जब दादा-दादी, चाचा-चाची ने ज्यादा मना किया, तो मम्मी ने उनसे यह बोल दिया कि वे लोग तो अनुश्री की खुशी को देखकर जलते हैं, इसलिए मना कर रहे हैं। जिसकी वजह से मम्मी की जिद को देखते हुए उनकी कड़वी बातें सुनकर अब लोग कुछ भी ना बोल पाए। परंतु हर किसी को अनुश्री की चिंता थी।

ऐसे में घर में शादी की तैयारी होने पर भी जैसे चारों तरफ एक मातम सा पसरा हुआ था। मैं इन सारी बातों पर यकीन नहीं करता था। मुझे भी सब कुछ अंधविश्वास लगता था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि अब मेरे साथ कुछ ऐसा होने वाला था कि मेरी सोच पूरी तरह बदलने वाली थी। उस वक्त गर्मियों के दिन थे और गांव में तो अधिकतर लोग गर्मियों के दिनों में ऊपर छत पर या बाहर आंगन में सोया करते हैं।

ऐसे ही मैं भी अपने चाचा, ताऊ, पापा, दादा जी सबके साथ बाहर आंगन में सोया हुआ था और घर की जो औरतें थीं, वे घर की छत पर सोई हुई थीं। तभी रात के लगभग एक बजे के आसपास मुझे प्यास लगने की वजह से मेरी नींद खुल गई और मैं कुछ ही दूरी पर जो मिट्टी की बनी हुई मटकी रखी हुई थी, वहां पर पानी पीने गया।

तो मेरी नजर पानी पीते वक्त हमारे घर का जो हमारा आंगन है, उसके गेट की तरफ गई। मैंने देखा कि गेट के पास सड़क पर कोई औरत खड़ी हुई थी। वैसे अंधेरे में साफ तरीके से तो नहीं दिखाई दे रही थी, लेकिन उसके कपड़ों को देखकर इतना तो समझ में आ रहा था कि कोई औरत है। यह देखकर मैं सोचने लगा कि इतनी रात गए कोई औरत हमारे घर के बाहर सड़क किनारे क्यों खड़ी है?

फिर सोचा, हो सकता है कि मेरी चाची, ताई या भाभी कोई हो, क्योंकि गांव में अधिकतर लेट बाथ बनने के बाद भी गांव की औरतें फ्रेश वगैरा होने के लिए खेतों में जाना ज्यादा पसंद करती हैं और खास करके बड़ी-बूढ़ी औरतों को तो बाहर खुले में जाना ही पसंद होता है। इसलिए मैंने सोचा कि रात को हो सकता है कि भाभी या चाची के साथ ताई या कोई गई हो और ऐसे में वहां पास के जंगल में ही गई हो और यह उसका इंतजार कर रही हो। यह सोचकर मैंने कोई ध्यान नहीं दिया और वापस आकर अपनी खाट पर लेट गया।

लेकिन मुझे लेटे हुए काफी वक्त भी हो गया था, नींद भी नहीं आ रही थी और मैं उस तरफ देखे जा रहा था कि वह औरत इसी तरह खड़ी हुई थी। अंधेरे में ज्यादा तो दिखाई नहीं दे रही थी। जब काफी देर तक हमारे घर की कोई भी औरत घर के अंदर नहीं आई, तो मुझे हैरानी हुई कि ऐसा कैसे हो सकता है? यह सोचते हुए मैंने उस तरफ देखा, तो अब मुझे कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। अब मुझे थोड़ी हैरानी हुई कि कौन हो सकती है? घर की कोई औरत होती, तो घर के अंदर आती। तो मैंने सोचा, हो सकता है कोई पड़ोस में से होगी।

वैसे भी हमारा जो घर था, वह गांव से बाहरी इलाके में खेतों के पास में ही था। उसके एक साइड में खेत ही खेत थे, सामने भी बिल्कुल खेत था और पीछे की साइड में भी खेत था। लेकिन दूसरी साइड जो गांव के बाहर की साइड पड़ती थी, वहां पर हमारे घर से दो खेतों को छोड़कर कभी बहुत सारे जंगली बबूल वगैरा थे। ऐसे में उस जगह को लोग जंगल के नाम से जानते थे।

लेकिन वहां पर अब हम लोग रहते थे और हमसे कुछ ही दूरी पर और लोग भी रहने आ गए थे। ऐसे में जो भी बबूल और जंगली पौधे थे, सबको काट दिया गया था। तो वहां पर वह जमीन ऐसे ही बंजर पड़ी हुई थी। छोटे-छोटे कटीली झाड़ियां जरूर थीं, जहां पर अधिकतर गांव की औरतें शौच वगैरा के लिए जाती थीं। उसके पास में ही होकर एक कच्चा रास्ता गांव की पहाड़ी की तरफ जाता था।

ऐसे में उस वक्त उस औरत के बारे में मैंने सोचा, हो सकता है गांव में से कोई औरतें आई हों फ्रेश होने के लिए। इसलिए ज्यादा इस बात पर ध्यान नहीं दिया और सो गया। अगले दिन वैसे भी इस बात को नॉर्मल समझकर मैंने एक बार भी इसके बारे में नहीं सोचा और अपनी बहन की शादी की तैयारी में जुट गया था। हम लोग चाहते थे कि बड़े ही धूमधाम से अनुश्री की शादी हो, किसी तरह की कोई कमी ना हो और तैयारी में जुटे हुए थे।

हमारे घर के सामने ही जो बड़ा सा खेत था, वहीं पर हमने बारात की व्यवस्था करने के बारे में सोच लिया था। मेरी बहन अनुश्री भी पढ़ी-लिखी काफी समझदार थी। वैसे गांव के लोगों की दुल्हन की मौत होने वाली बातें सुनने में तो उसे भी आई थीं, लेकिन उसने भी इन्हें बेफिजूल समझकर ज्यादा इन पर ध्यान नहीं दिया था। धीरे-धीरे वह दिन भी गुजर गया था। रात को खाना खाकर और दिन की तरह मैं सबके साथ सो गया था।

तो उस रात भी रात के लगभग अचानक एक बजे मेरी नींद खुल गई और जब मैंने अपनी आंखें खोलकर अपने मोबाइल में टाइम देखा, तो एक बज रहा था। यह देखकर मैंने सोचा थोड़ा सा पानी पी लेता हूं। वैसे भी गर्मियों के दिनों में प्यास कुछ ज्यादा ही लगती है, जिसकी वजह से गला सूख ही जाता है। तो मैं उठकर पानी पीने के लिए गया। जब पानी पी रहा था, तो कल की ही तरह वही औरत मुझे हमारे घर के आंगन के बाहर गेट के पास सड़क किनारे खड़ी हुई दिखाई दी।

उसे इस तरह खड़ी हुई देखकर मैं फिर हैरान रह गया कि यह औरत कौन है और आखिर हमारे घर के गेट पर क्या कर रही है? कल भी यहीं पर खड़ी हुई थी। घर की तो कोई औरत है नहीं। यह सोचते हुए उस तरफ देखने लगा और फिर मैंने सोचा कि हो सकता है कि होगी कोई गांव में से ही, किसी को दस्त या गैस की शिकायत होगी, इसलिए यह उसके साथ में रोज आ जाया करती होगी। यह सोचकर ज्यादा इस तरफ ध्यान नहीं दिया और वापस आकर अपनी खाट पर लेट गया। कुछ ही देर में मुझे नींद आ गई।

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