Inderwanshi (Complete) Ch. 2

Inderwanshi - Chapter 2

Posted by A.R writer • Oct 30, 2025 06:33 PM

राजकुमार वीरेंद्र क्रोध में अपने घोडे पर सवार होकर अपने अभ्यास स्तल पर चले जाते हैं और लगातार एक वृक्ष पर बाण चलाते हैं। अगर कोई इस वक्त उनको देख ले तो एक जगह पर डर के मारे स्तब्ध रह जाए क्योंकि क्रोध के कारण उनकी आंखों में खून उतर आया है, चेहरा अग्नि के भाती तप रहा है। लगातार अभ्यास करने की वजह से उनके हाथ छिल चुके हैं, पर फिर भी उनका क्रोध शांत नहीं होता है। अभ्यास की आड मे वो अपने हार जाने का क्रोध को कम कर रहे हैं।

अजय क्षेत्र

राजकुमार विक्रमादित्य जो कि महारानी से सैर पर जाने की आज्ञा मांगने आये थे, अपनी बडी मां को चिंता में देखकर पूछते हैं_ क्या हुआ बडी मां आप इतनी चिंतित क्यों हैं?

महारानी सुनैना- पुत्र कंवर वीरेंद्र प्रतियोगिता समाप्ति के पश्चात से ही हमें नहीं दिखाई दे रहे हैं। वह प्रतियोगिता में हार जाने के कारण दुखी ना हो जाए। राजकुमार विक्रमादित्य- बडी मां आप चिंता ना करें अभी हम उन्हें ढूंढ के लाते हैं। वह कहीं ना कहीं अपनी धनुर्विद्या का प्रयास कर रहे होंगे।

प्रयास स्थल राजकुमार वीरेंद्र का क्रोध अब कुछ हद तक शांत हो चुका है और वह सोचते हैं कि अभी भी उन्हें और प्रयास करने की आवश्यकता है।

राजमहल में राजकुमार विक्रमादित्य अपने घोडे पर सवार होकर राजकुमार वीरेंद्र को ढूंढने जाते हैं और कहते हैं- आज न जाने राजकुमार वीरेंद्र स्वयं को कितना को प्रताडित कर रहे होंगे उनको मैंने आखिरी बार बहुत ही क्रोध में देखा था।

प्रयास स्थल राजकुमार वीरेंद्र अपने घोडे पर संवार होते हैं और राजमहल की तरफ चल देते हैं तभी रास्ते में उन्हें राजकुमार विक्रमादित्य मिलते हैं।

राजकुमार वीरेंद्र- भ्राता विक्रम! आपने क्यों कष्ट उठाया हम आ ही रहे थे।

राजकुमार विक्रमादित्य- बडी मां आपकी वजह से कितनी परेशान थी आप उन्हें क्यों परेशान करते हैं?

राजकुमार वीरेंद्र: भ्राता विक्रम हम मां से क्षमा मांग लेंगे और आप भी हमें क्षमा कीजिएगा हमारी वजह से आपको आना पडा।

राजकुमार विक्रमादित्य उनके अंदर की उदासी और क्रोध को भाप गए, और उन्हें सामान्य करने के लिए कहते हैं- चलिए चलते हैं वैसे आप हमें बताइए की राजकुमारी सुकन्या का आपको कोई पत्र मिला? राजकुमार वीरेंद्र, अपनी होने वाली पत्नी/मंगेतर, सुकन्या का नाम सुनकर थोडा झेंप जाते हैं- भाईसा आप हमें छेड रहे हैं।

राजकुमार विक्रमादित्य: हां तो?

राजकुमार वीरेंद्र- जब आपका रिश्ता तय होगा तब हम भी आपको बहुत परेशान करेंगे और वैसे भी जब तक आपका विवाह तय नहीं हो जाता तब तक हम कैसे विवाह की बातें कर सकते हैं।

ऐसे ही हंसते- ठीठौली करते हुए राजकुमार विक्रमादित्य और राजकुमार वीरेंद्र राजमहल की तरफ प्रस्थान कर लेते हैं। राजमहल पहुंचकर राजकुमार वीरेंद्र अपनी मां के कक्ष में जाते हैं और उन्हें प्रणाम करते हैं।

राजकुमार वीरेंद्र- मां हमें क्षमा कीजिएगा हमारी वजह से आपको चिंता उठानी पडी।

महारानी सुकन्या- पुत्र वीर हम जानते हैं कि आप अपनी हार से बहुत दुखी हैं पर यह तो सिर्फ एक प्रतियोगिता थी। आपको इससे भी शिक्षा लेनी है कि अभी भी आपको और प्रयास करने की आवश्यकता है और अपना क्रोध को व्यर्थ न जाने दीजिए आप इसे अपनी धनुर्विद्या के प्रयास में लगाइए।

राजकुमार वीरेंद्र- ठीक है मां हम ऐसा ही करेंगे।

महारानी सुकन्या- पुत्र जाओ भोजन ग्रहण करो और विश्राम करो रात बहुत हो चुकी है।

राजकुमार वीरेंद्र- जी मां प्रणाम।

राजकुमार वीरेंद्र के जाने के बाद एक सेविका महारानी के कक्ष में आती है और कहती है कि, महारानी जी महाराज आपके कक्ष में पधार रहे हैं। तभी महाराज के आने की धूनी सुनाई देती है: महाराज पधार रहे हैं!

महारानी सुनैना- आईये महाराज बिराजिये।

महाराज- महारानी आज प्रतियोगिता में हमें ऐसा लगा कि हमारे पुत्र बडे हो चुके हैं और इंद्रप्रस्थ को भी एक नया उत्तराधिकारी देने का वक्त आ चुका है।

महारानी- किंतु महाराज आपको तो ज्ञात ही है हमारे कुल में उत्तराधिकारी घोषित करने से पूर्व उनका विवाहित होना जरूरी है।

महाराज- हमें ज्ञात है और राजकुमार वीरेंद्र का तो रिश्ता पहले से ही तय हो चुका है राजकुमारी सुकन्या के साथ परंतु राजकुमार विक्रम आदित्य के विवाह के लिए हमें कुछ सोचना होगा।

महारानी- किंतु महाराज हमें एक उलझन है। महाराज- कैसी उलझन महारानी?

महारानी- महाराज हमारे दोनों पुत्र सर्वश्रेष्ठ योद्धा है दोनों राजा बनने के योग्य है तो यह कैसे तय होगा कि दोनों में से भावी राजा कौन बनेगा? महाराज- सब्र रखिए महारानी समय के साथ इंद्रप्रस्थ अपना राजा स्वयं चुन लेगा, की कौन उस पर शासन करने योग्य है।

अस्तबल में राजकुमार विक्रमादित्य अपने घोडे अंबर को कहते हैं- अब तुम विश्राम करो तुमने आज बहुत परिश्रम किया है और हम से भी बहुत श्रम करवाया है, चलिए अब कल मिलते हैं।

राजकुमार वीरेंद्र के कक्ष में

राजकुमार वीरेंद्र भी अपने कक्ष में जाकर शाही बिस्तर पर लेट जाते हैं और आज जो हुआ उसके बारे में सोचते हैं और एक प्रण लेते हैं कि आज के बाद हम ऐसी किसी प्रतियोगिता में नहीं हारेंगे और अपनी धनुर्विद्या को और बेहतर बनाएंगे। यह सब सोचते हुए उनको पता ही नहीं चलता कब उनकी आंख लग जाती है और वह गहरी नींद में चले जाते हैं

प्रातः काल पक्षी चहचहा रहे हैं आसमान में मेघ अपनी अपने- अपने स्थान पर जा रहे हैं

राजकुमार विक्रमादित्य का कक्ष

राजकुमार विक्रमादित्य की नींद जल्दी खुल जाती है। वह सर्वप्रथम उठते ही भगवान भोलेनाथ को प्रणाम करते हैं और अपनी नीत्य क्रिया खत्म करके भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं। फिर वह महारानी सुनैना की कक्ष में जाते हैं

महारानी सुनैना का कक्ष

राजकुमार विक्रमादित्य अपनी बडी मां के पास आते हैं और उनके चरण स्पर्श करते हैं। महारानी सुनैना- चिरंजीवी भवः पुत्र! तभी एक सेवक अंदर आता है और कहता है, महारानी की जय हो! जोधाणा से एक दूत आया है और महाराज ने सभी को राजसभा में आने का आदेश दिया है।

तो चलिए देखते हैं दूत क्या संदेश लेकर आया है? और जोधाणा का ये संदेश क्या मोड लायेगा हमारी कहानी मे? जानने के लिए पढ़ते रहिये मेरी नोवेल" इंद्रवंशी स्टोरी मेनिया पर। जिसे लिखा है A R writer ने और सम्पादन भी( edit) Divya verma ने ही किया है।

Upcoming story.

रुद्रिका रॉय 22वीं सदी से एक सीक्रेट मिशन लेकर समय की सीमाओं को पार करके अतीत में आती है। उसका टारगेट बिल्कुल क्लियर है—उसे एक ऐसे इंसान तक पहुँचना है, जो उसके मिशन की key है। शुरुआत में सब कुछ उसके प्लान के अनुसार smoothly चलता है, लेकिन तभी उसकी ज़िंदगी में नील अरोरा की एंट्री होती है—एक रहस्यमयी और पावरफुल बिज़नेस टायकून। धीरे-धीरे उनकी दुनियाएँ टकराने लगती हैं, और रुद्रिका को एहसास होता है कि नील सिर्फ एक आम इंसान नहीं है, बल्कि उसके मिशन का सबसे अहम हिस्सा है। लेकिन इस पूरे खेल के पीछे छुपा सच अभी भी अंधेरे में है।

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