Deal of hearts Ch. 3

Deal of hearts - Chapter 3

Posted by VayuuA • Oct 05, 2025 10:01 AM

चौहान मैंशन की दूसरी सुबह भी उतनी ही ठंडी थी, जितनी पिछली रात की चुप्पी। बाहर बगीचे में हल्की हवा बह रही थी, लेकिन अंदर… हवा में एक अजीब सा तनाव था। Ritika ने खिड़की खोली, सुबह की धूप उसकी आँखों पर पड़ी, पर उसे गर्मी के बजाय ठंडक महसूस हुई।

वह अभी भी कल की बातें याद कर रही थी — Vanya की आँखों का वो confidence, उसकी ठंडी मुस्कान, और उसके हर शब्द में छिपी वो शक्ति, जो किसी को भी तोड़ दे। Ritika जानती थी कि आज भी उसे उसी ताक़त से टकराना है।

कमरे के बाहर से हल्के कदमों की आहट आई। वही तेज़ चाल, वही confident rhythm। Ritika ने सिर घुमाया — Vanya थी। आज उसने काला नहीं, बल्कि सफेद सूट पहना था। फिर भी, उस पर नर्मी के बजाय एक अजीब कठोरता झलक रही थी।

“Good morning, Mrs. Chauhan,” Vanya ने मुस्कुराते हुए कहा।

“Morning,” Ritika ने ठंडे स्वर में जवाब दिया।

Vanya ने उसके कमरे के अंदर झाँका — हर चीज़ अपनी जगह पर थी। “तुम्हारी आदतें जल्दी बन रही हैं,” उसने धीमे स्वर में कहा।

Ritika ने पलटकर कहा, “नियमों के लिए नहीं, बल्कि अपने survival के लिए।”

Vanya के होंठों पर एक हल्की मुस्कान आई। “Survival… interesting word. लेकिन याद रखना, यहाँ survive वही करता है, जो rules follow करता है।”

Ritika ने शांत स्वर में कहा, “या वो… जो खुद के लिए rules बना ले।”

Vanya कुछ पल के लिए रुकी। उसकी आँखों में हल्की चमक थी, जैसे उसे Ritika की हिम्मत पसंद आई हो।

“तुम्हारा attitude dangerous है, Ritika। पर शायद मुझे यही पसंद है।”

Ritika ने कुछ नहीं कहा, बस नजरें झुका लीं। भीतर से उसका दिल जोर से धड़क रहा था, लेकिन चेहरे पर वही संयम था।

Breakfast के लिए दोनों dining hall पहुँचीं। टेबल पर महंगे बर्तन, चाँदी के चम्मच, और बीच में एक गुलाब रखा था — शायद Vanya की किसी अनकही habit का हिस्सा। Ritika बैठी, और तभी Vanya ने कहा,

“आज तुम्हें मेरे साथ town चलना होगा। कुछ formalities बाकी हैं।”

“Formalities?” Ritika ने पूछा।

Vanya ने calmly कहा, “Marriage registration, signatures, and… media appearance.”

Ritika का चेहरा सख्त हो गया। “तुम्हें ये सब दिखावा करना है?”

Vanya ने उत्तर दिया, “दुनिया को दिखावा चाहिए, Ritika। सच्चाई उन्हें नहीं भाती।”

Vanya ने पास झुककर धीरे से कहा, “और अगर तुमने इंकार किया… तो तुम्हारे घरवालों तक सच्चाई पहुँचने में देर नहीं लगेगी।”

Ritika की साँसें भारी हो गईं, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। उसकी आँखों में आँसू नहीं थे — बस ठंडी आग थी।

“ठीक है, चलती हूँ,” उसने धीरे से कहा

कार के अंदर पूरा रास्ता सन्नाटा रहा। Vanya खिड़की के बाहर देख रही थी, और Ritika बस अपनी हथेलियाँ मरोड़ रही थी। बीच-बीच में Vanya की नजर उस पर पड़ती, जैसे वह उसके हर gesture को analyze कर रही हो।

“तुम्हें मुझसे डर नहीं लगता?” Vanya ने अचानक पूछा।

Ritika ने उसकी तरफ देखा। “डर लगता है… पर उससे ज़्यादा घुटन होती है।”

Vanya ने हल्की हँसी छोड़ी। “Interesting. तुम्हारी honesty शायद मुझे एक दिन नुकसान पहुँचा दे।”

Ritika ने जवाब दिया, “या फिर तुम्हें इंसान बना दे।”

Vanya ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उसकी आँखों में हल्का disturbance था — जैसे किसी ने उसके भीतर की दीवार पर एक हल्की दरार डाल दी हो।

शाम होते-होते वे महल वापस लौटीं। Ritika थकी हुई थी, पर Vanya में वही confidence था।

Vanya ने कहा, “तुमने आज अच्छा control दिखाया। Media में कोई गलत word नहीं बोला।”

Ritika ने शांत स्वर में कहा, “क्योंकि मैंने अपनी मर्यादा को दाँव पर नहीं लगाया।”

Vanya पास आई, उसकी आवाज़ गहरी हो गई —

“Marayada और ego में फर्क होता है, Ritika। एक इंसान को protect करती है… और दूसरी उसे अकेला कर देती है।”

Ritika ने धीरे से जवाब दिया, “और कुछ लोग अपने power के पीछे इतना छिप जाते हैं कि खुद को भी खो देते हैं

Vanya कुछ पल तक चुप रही। उसकी नजरों में पहली बार softness आई। उसने Ritika के पास झुककर कहा,

“तुम्हारी हिम्मत… मुझे डराती है।”

Ritika ने हल्की साँस ली। “और तुम्हारी ताक़त… मुझे चुनौती देती है।”

दोनों के बीच सन्नाटा फैल गया। हवा में एक अनकहा tension था — डर, आकर्षण और अहंकार का अजीब मिश्रण

रात को Ritika अपने कमरे में अकेली थी। उसने आईने में खुद को देखा — वही चेहरा, वही आँखें, पर आज उनमें एक नई जिद थी। उसने खुद से कहा,

“मैं अब डरूँगी नहीं। अगर इस खेल में मुझे खेलना है… तो मैं अपने तरीके से खेलूँगी।”

वहीं, महल के terrace पर Vanya खड़ी थी, चाँद की ओर देखती हुई। उसके मन में Ritika की बातें गूँज रही थीं।

“क्या सच में… मैं खुद को खो रही हूँ?” उसने खुद से पूछा।

उसकी उँगलियाँ railing पर टिकीं, और हवा के झोंके से उसके बाल उड़ रहे थे। उसने धीरे से whispered किया,

“Mrs. Chauhan

तुम जितना मुझसे लड़ोगी, मैं उतना तुम्हारे और करीब आऊँगी।”

अगली सुबह, Ritika ने महल के गलियारों में staff से कुछ बातें करने की कोशिश की, लेकिन सब डर से चुप थे। हर किसी की आँखों में वही भय था — Vanya का नाम सुनते ही सन्नाटा। Ritika समझ गई, ये महल केवल पत्थरों से नहीं, बल्कि डर से बना है।

उसने अपनी डायरी निकाली और लिखा

“अगर मैं यहाँ रहूँगी, तो मुझे इस डर के साम्राज्य को तोड़ना होगा। Vanya से नहीं भागना है… उसे समझना है, और शायद उसी के अंदर का इंसान खोज निकालना है।”

शाम को Vanya और Ritika फिर आमने-सामने थीं।

“आज रात dinner मेरे साथ नीचे हॉल में होगा,” Vanya ने ठंडे स्वर में कहा।

Ritika ने जवाब दिया, “मैं dinner करूँगी… पर डर के साथ नहीं।”

Vanya मुस्कुराई, “तुम्हारी ये बातें मुझे परेशान भी करती हैं और… आकर्षित भी।”

Ritika ने आँखों में सीधे देखा —

“शायद इसलिए कि तुम जानती हो, तुम्हारे अंदर कहीं न कहीं वो हिस्सा अब भी जिंदा है जो किसी से डरता है।”

Vanya के कदम रुक गए। कुछ पल की खामोशी के बाद उसने धीरे से कहा,

“शायद तुम सही हो, Ritika… शायद।”

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