Deal of hearts Ch. 2

Deal of hearts - Chapter 2

Posted by VayuuA • Oct 02, 2025 01:23 PM

चौहान मैंशन की सुबह हमेशा भारी और शांत होती थी। सूरज की हल्की रोशनी बड़े-बड़े झरोखों से आती, लेकिन हॉल में फैली गहरी छायाएँ Ritika के मन पर और ज्यादा दबाव डाल रही थीं। हर कोना उसकी आँखों में डर और अजीब curiosity की लहरें पैदा कर रहा था।

Ritika ने अपनी पलंग पर बैठकर गहरी साँस ली। उसे अब यकीन हो चुका था कि अब उसकी जिंदगी हमेशा बदल गई है। उसकी आँखों में determination थी, लेकिन साथ ही दिल में डर भी छुपा था। “मैं इस शेरनी के सामने अपनी मर्यादा नहीं खोऊँगी। चाहे जो भी हो, मैं अपनी सीमाओं को तोड़ने नहीं दूँगी।”

महल का हॉल अभी भी खाली था। Vanya के कदमों की गूंज दूर-दूर तक सुनाई दे रही थी। Ritika जानती थी कि हर आवाज़ उसे सताएगी। उसकी नजर खिड़की से बाहर पड़ी – बगीचे में सुबह की धूप की सुनहरी रौशनी थी, लेकिन हॉल में वही ठंडी छाया और दबाव था।

दरवाज़ा धीरे-धीरे खुला। Vanya का silhouette हॉल में दिखाई दिया। उसके काले सूट ने उसकी authority और भी बढ़ा दी थी। Ritika ने खुद को तुरंत संभाला।

“सुबह की सलामती, Mrs. Chauhan,” Vanya ने ठंडी मुस्कान के साथ कहा।

Ritika ने उसकी तरफ बिना ज़ोर दिए देखा।

“सुबह की सलामती, Vanya। लेकिन ये सलामती मेरे लिए… कुछ मायने नहीं रखती।”

Vanya ने हँसी के बजाय उसकी आँखों में सीधे देखा। उसकी नजरें Ritika को पढ़ रही थीं, उसकी हर कमजोरी, हर डर और हर हिम्मत। Ritika ने खुद को पीछे खींचा। “ये दुनिया मेरी नहीं है… और शायद कभी नहीं होगी।”

Vanya ने एक कदम आगे बढ़ाया।

“आज तुम मेरी तरफ से सीखोगी कि यहाँ कौन rule करता है। और मैं कोई हल्की ताक़त नहीं हूं। इस घर में मेरे नियम हैं, और तुम उन्हें मानोगी।”

Ritika ने ठोड़ी ऊँची की।

“मैं मानूँगी… लेकिन सिर्फ अपने dignity के लिए। तुम्हारा डर मुझे कभी नहीं रोक पाएगा।”

Vanya की आँखों में एक हल्की चमक आई। उसकी मुस्कान में एक अजीब सा threat और subtle amusement था।

“Very well, Mrs. Chauhan. तुम्हें जल्दी सीखना होगा।”

दिन बितता गया, लेकिन Ritika का मन भारी था। हर कमरे में कदम रखते हुए वह महसूस कर रही थी कि ये महल अब उसका prison बन गया है। Vanya की presence हर जगह थी – उसकी नजरें, उसकी बातें, और उसकी silent threat।

Lunch का समय आया। Chowkidar और कुछ staff सामने आए, लेकिन Vanya ने Ritika के लिए कुछ personal arrangement रखा। Ritika ने खुद को कोशिश कर के composed रखा, लेकिन हर बात में Vanya का subtle control उसे चुभ रहा था।

Ritika ने सोचा, “मैं खुद को रोकूँगी… पर क्या मैं कभी असली आज़ादी महसूस कर पाऊँगी?”

Vanya ने धीरे से कहा,

“ये खाना तुम अकेले खाओगी। मैं यहाँ नहीं बैठूँगी।”

Ritika ने उसकी तरफ देखा। “ये वही तरीका है डर पैदा करने का। हर पल मुझे याद दिलाना कि मैं powerless हूँ।”

Lunch के बाद Ritika अपने कमरे में बैठी, खिड़की से बाहर देख रही थी। उसने बगीचे के पेड़ों और सुबह की हवा में कुछ comfort पाया। लेकिन मन के भीतर डर, गुस्सा और curiosity की लहरें कम नहीं हुईं। “ये केवल शुरुआत है… और मैं अपनी boundaries नहीं छोड़ने दूँगी। चाहे जो भी हो, मैं अपनी story खुद लिखूँगी।”

Vanya ने कमरा खड़ा होकर दरवाज़े के पास खड़ा देखा। उसका हर movement Ritika के लिए tension बढ़ा रहा था।

“Ritika, तुम्हें मेरी जिंदगी में adjust करना होगा। यहाँ rules बदलते नहीं… और मेरी उम्मीद है कि तुम उन्हें जल्दी सीखो।”

Ritika ने धीरे से कहा,

“मैं adjust करूँगी… लेकिन कभी डर कर नहीं।”

Vanya ने उसकी तरफ मुस्कान भरी, जैसे उसकी हिम्मत उसे पसंद आई हो, लेकिन साथ ही उसकी authority को चुनौती देना भी उसे और ज्यादा खींच रहा हो।

“Good. तुम आज से मेरी rules सीखोगी… और believe me, तुम जल्दी सीख जाओगी।”

दिन खत्म होते-होते, Ritika के मन में emotions उभर आए। डर, गुस्सा, curiosity और attraction का अजीब मिश्रण। … ये दुनिया… और ये महल… सब मेरे लिए खतरा हैं। पर मुझे खुद को संभालना होगा। मैं कभी अपनी हिम्मत नहीं खोऊँगी।”

रात में, जब महल में silence छाया, Ritika ने अपने pillow को कसकर पकड़ लिया। उसकी आँखें खुली थीं, और दिमाग में questions की भारी लहरें थीं। “क्या मैं सच में survive कर पाऊँगी? क्या ये डर और tension कभी खत्म होंगे? और ये attraction… क्या ये सिर्फ़ illusion है या कुछ और?”

वहीँ, महल के बड़े हॉल में Vanya की silhouette खिड़की के पास खड़ी थी, चाँद की रौशनी में confident और dangerous। उसकी आँखों में वही गहरी intensity थी जो Ritika को घेर रही थी। Ritika ने धीरे से whispered किया,

“मैं कभी टूटूंगी नहीं चाहे कितनी भी ताक़त हो। मैं अपनी मर्यादा और dignity बचाऊँगी। और अगर ये दुनिया मुझे डराने आएगी, मैं उसे अपनी हिम्मत से जवाब दूँगी। ये शुरुआत है, और मेरी कहानी अब मेरी अपनी होगी।”

अगली सुबह, महल में हल्की हवा चली। Ritika ने सोचा कि आज वह खुद को और मजबूत बनाएगी। हर step में उसकी awareness बढ़ी थी। हर shadow, हर noise उसके मन में alertness पैदा कर रही थी। Vanya उसे observe कर रही थी, और Ritika जानती थी कि उसका mistake उसका weakness बन सकता है।

Vanya ने धीरे से कहा,

“Mrs. Chauhan, strength दिखाना easy है, पर control रखना… वो असली challenge है।”

Ritika ने जवाब दिया,

“Control भी तभी सच्चा होता है जब इंसान अपनी limits जानता हो। मैं अपनी strength और dignity दोनों बचाऊँगी

Vanya ने उसकी आँखों में चमक देखी। ये पहला पल था जब उसने महसूस किया कि Ritika केवल डर से नहीं, बल्कि intellect और courage से भी मुकाबला कर सकती है।

दिन भर, Ritika ने हर interaction में subtle resistance दिखाया। उसने देखा कि Vanya केवल physically नहीं, बल्कि mentally भी उसे test कर रही थी। हर command, हर glance, हर subtle threat का जवाब उसने अपनी intelligence और calmness से दिया।

Ritika ने खुद से कहा,

“ये महल और ये व्यक्ति मुझे तोड़ने की कोशिश कर रहे है पर मैं उनकी expectations से नहीं, अपनी boundaries से जीऊँगी

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