Chapter 63
Hukum sa ki mohabbat - Chapter 63
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हरिश जी उसके कंधे को थपथपाते हुए कहते हैं । अरे बरखुरदार हम किसी सर्वेंट के साथ भी चले जाएंगे आप अपनी रानी सा को यहां से लेकर जाए वैसे भी आज उनके लिए बहुत बड़ा दिन है। बोलते हुए वह