Chapter 4
बंदिशें - Chapter 4
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रात का सन्नाटा गहरा था। चाँदनी ज़मीन पर फैल चुकी थी और दूर कहीं झींगुरों की आवाज़ गूँज रही थी। अर्णव आग के पास बैठा था, तलवार की धार साफ़ करते हुए। उसकी आँखें आग की लपटों में चमक र