Trapped in your heart Ch. 2

Divorce

Posted by unicorngirl ✔️ • Sep 05, 2025 02:02 PM

विक्रांत अपनी कार में था और उसकी कार उसके घर के सामने खड़ी थी। वह अपनी लाल आंखों के साथ अपने घर को देख रहा था। उसका सर दर्द से फटा जा रहा था। उसे ऐसा लग रहा था , कि कोई उसके सर पर हथोड़ा मार रहा है।

कल रात वह होटल के कमरे में अपनी बिजनेस पार्टनर साईना अडानी के साथ था। साईना और विक्रांत पिछले 4 साल से एक साथ अफेयर में है। और इन चार सालों में उनकी कई रातें एक दूसरे के साथ होटल के कमरे में बीती है। 4 साल के लंबे अफेयर के बाद भी साईना विक्रांत को छोड़ना नहीं चाहती थी । उसे शायद विक्रांत से शादी की उम्मीद है।

विक्रांत ने कश के अपनी आंखें बंद की और अपना सर स्टीयरिंग व्हील पर रख लिया। कल रात उसे इतनी नहीं पीनी चाहिए थी। लेकिन साईना के साथ वह खुद को संभाल नहीं पाता है। और आज सुबह जब उसकी नींद बिस्तर पर साईना की बाहों में खुली तब उसे याद आया, कि कल रात आखिरकार हुआ क्या था।

( “ तुम अपनी बेवकूफ बीवी से कहो, कि वह तुम्हें तलाक दे। ना तो तुम दोनों के बीच प्यार है और ना ही तुम उसे पसंद करते हो । तो फिर क्यों शादी में रह रहे हो? तुम अपनी बीवी को देखना तक पसंद नहीं करते हो। फिर पता नहीं क्यों ? उसे अपने गले में बांध कर रखा है।”

राही को डायवोर्स देना पूरी तरह से बेवकूफी वाली बात है। ऐसा नहीं है , कि साईना ने पहली बार विक्रांत से यह बात कही है । लेकिन हर बार जब भी साईना राही को तलाक देने की बात करती थी, तो विक्रांत या तो उसकी बात टाल देता था, या फिर नजर अंदाज कर देता था।

आज भी विक्रांत ने वैसा ही किया। उसने गुस्से में साईना को देखते हुए कहा, “ बकवास मत करो । मैं राही को नहीं छोड़ सकता हूं । क्योंकि वह एक बहुत अच्छी मां है और मेरा घर बहुत अच्छे से संभालती है। वह पहले ऐसी नहीं थी। पर जब वह प्रेग्नेंट हुई और उसने चिक्की को जन्म दिया , उसके बाद उसका शरीर कुछ अजीब सा हो गया था। जिसकी वजह से मैंने उसे पसंद करना छोड़ दिया है।

लेकिन सबसे बड़ी बात यह है, कि पूरी दुनिया के सामने वह आज भी मेरी वाइफ है। अगर मैंने उसे डाइवोर्स दिया, तो यह बात मीडिया में जाएगी और मेरी बदनामी होगी।”

यह बात थोड़ी अजीब है। लेकिन जब भी साईना राही को कुछ भी गलत कहती थी, तो हमेशा विक्रांत उसका साइड लेता था। विक्रांत की यही बात साईना को पसंद नहीं आती थी। उसने अपनी एक आईब्रो चढ़ाते हुए कहा,

“ और अगर मैं हमारे अफेयर की बात प्रेस में बताऊंगी, तो यह भी तो अच्छी बात नहीं होगी ना।”

साईना के यह कहने पर विक्रांत ने खतरनाक नजरों से साईना को देखा। विक्रांत की नजरों को समझते हुए साईना ने जल्दी से अपनी बात को पलट दिया और हंसते हुए कहने लगी, “ अरे छोड़ो ना । तुम क्यों उसकी इतनी परवाह कर रहे हो? तुम मुझसे शादी कर लो। उसके बाद मैं तुम्हारी पत्नी बन जाऊंगी।

सोचो कल की मीडिया में कितनी बड़ी न्यूज़ छपेगी, जब तुम्हारी और मेरी शादी की खबरें लोगों के सामने आएगी। और यह हमारे बिजनेस के लिए भी अच्छा है। लेकिन अगर तुम सिर्फ अपनी वाइफ को इसीलिए रखना चाहते हो, क्योंकि वह तुम्हारे घर में साफ सफाई करती है। तो टू बी ऑनेस्ट उसके लिए मेड और सर्वेंट होते हैं। जाहिर सी बात है, इतने बड़े बिजनेस अंपायर के होने के बावजूद मैं घर के काम तो नहीं करूंगी ना। ऐसे काम तुम्हारी बीवी को शूट करते हैं..।”

उसके बाद साईना थोड़ी सी विक्रांत के पास और आती है और उसके सीने पर अपने हाथ रखकर उसे सहलाते हुए कहती है कमल विक्रम समझने की कोशिश करो हम दोनों चार साल से एक साथ हैं। मैं तुम्हें हर तरीके से सेटिस्फाई करती हूं। फिर क्या वजह है ? कि तुम अभी भी अपनी वाइफ को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हो।”

विक्रांत की आंखें बंद थी और उसका सर हेड रेस्ट से लगा हुआ था। लेकिन उसने साईना की बातों का कोई जवाब नहीं दिया । ऐसा नहीं था, कि उसने साईना की बात सुनी नहीं थी। लेकिन यह पहली बार नहीं था, जब वह इसे सुन कर अनसुना कर रहा था।

विक्रांत का जवाब न पाकर साईना चिढ़ जाती है। वह विक्रांत के सीने से अपने हाथ को हटाती है और गुस्से में उसे देखते हुए कहती है, “ मैं तुम्हें लास्ट टाइम बता रही हूं, विक्रांत में हमेशा तुम्हारे साथ इस अफेयर में नहीं रह सकती हूं। मुझे हमारे रिश्ते में कमिटमेंट चाहिए। मुझे तुम्हारी बीवी का टैग चाहिए। और अगर तुमने ऐसा नहीं किया ना, तो मैं प्रेस में जाऊंगी। याद रखना अगर मैंने आवाज उठाई, तो तुम्हारी कंपनी रातों-रात बर्बाद हो जाएगी।....)

और इसी के साथ गाड़ी में बैठा विक्रांत होश में आता है । कल रात उसकी और साईना के बीच जो भी बहस हुई थी, वह याद करके विक्रांत का सर और ज्यादा दर्द करने लगा था। वह अपने घर के सामने गाड़ी में बैठा हुआ था। लेकिन वह अपने घर नहीं जाना चाहता था । वो राही को देखना ही नहीं चाहता था। लेकिन चिक्की के लिए उसे घर जाना ही था।

विक्रांत ने गाड़ी स्टार्ट की और अपनी कार को पार्किंग में जा कर पार्क करता है। नशे में होने की वजह से उसकी कार एक पेड़ से टकरा जाती है। लेकिन विक्रांत को इस बात की परवाह नहीं थी। क्योंकि फिलहाल बस वो चिक्की को देखना चाहता था। उसे कल के लिए दोषी महसूस हो रहा था। वह कल चिक्की के जन्मदिन पर घर नहीं आ पाया था। उसकी छोटी सी बेटी कितनी मायूस हुई होगी। साईना के हुस्न के जाल में वह इतना फस गया था, कि बच्चे के बारे में भूल ही गया था।

हल्के लड़खड़ाते कदमों के साथ विक्रांत अपने घर में दाखिल होता है। लेकिन हॉल में इंटर करने के साथ ही वह चारों तरफ अपनी नज़रें दौड़ा कर चिक्की को ढूंढ रहा था। लेकिन उसे पूरे हॉल में चिक्की कहीं नजर नहीं आई। अगर कोई नजर आई थी, तो वह थी सोफे पर बैठी हुई राही । जो अपनी घूरती हुई निगाहों से विक्रांत को ही देख राही थी।

राही को देख कर विक्रांत का चेहरा गुस्से से भर जाता है वह अपना चेहरा दूसरी तरफ करता है और खुद को शांत करने की कोशिश करता है । क्योंकि राही की बदसूरत सी शक्ल देखना ही नहीं चाहता था।

“ वेलकम होम डियर हसबैंड..” राही ने विक्रांत को देखते हुए कहा। उसकी आवाज बिल्कुल शांत थी। राही सोफे से खड़ी होती है और अपने दोनों हाथ बजाते हुए विक्रांत से कहती है, “ क्या तुम्हें पता है इस समय टाइम क्या हो रहा है? क्योंकि तुम्हे इस वक्त घर पर देखकर मुझे बहुत हैरानी हो राही है । मुझे तो लगा, कि शायद तुम मुझे और चिक्की को भूल गए हो।”

राही की आवाज सुनकर विक्रांत का सर दर्द और बढ़ा जा रहा था। वह उसकी शक्ल नहीं देखना चाहता था और ना ही उसकी आवाज सुनना चाहता था । उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ किया और अपने सर दर्द को कंट्रोल करते हुए उसने बिना राही की तरफ देखते हुए कहा, “चिक्की कहां है? मैं उसे मॉल लेकर जा रहा हूं।”

“ नीरज ( राही का भाई ) चिक्की को अपने साथ लेकर गया है मेरी मम्मी के घर पर।” विक्रांत ने घूरते हुए राही को देखा। तो राही ने आगे कहा।

“ उसे उस तरीके का बर्थडे नहीं मिला जैसा कि उसने सोचा था। इसलिए वह थोड़ी सी उदास हो गई थी। और इसी वजह से मैंने उसे नीरज के साथ अपनी मम्मी के घर पर भेज दिया है। ताकि वहां पर वह मेरे भाई के बच्चों के साथ और मेरी मां के साथ रहकर थोड़ा सा एंजॉय कर सके और उसका मन हल्का हो।”

विक्रांत की आईब्रो चढ़ गई थी और उसने गुस्से में राही से कहा, “ तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या ? तुमने उसे अपनी मां के घर पर क्यों भेज दिया है? हम उसका जन्मदिन हर साल एक साथ मनाते हैं ना। मैं बस एक ही दिन तो लेट हूं।”

“ एक दिन?..” राही ने विक्रांत को घूरते हुए देखा। और फिर अपनी उंगलियों पर कुछ गिनने लगी। उसने दिन गिनते हुए कहा, “ तुम्हें याद नहीं विक्रांत, कि तुम एक दिन नहीं बल्कि 3 महीने लेट हो। तुम पिछले 3 महीने से कितनी बार घर आए हो ? और कितनी बार तुमने चिक्की के साथ समय बिताया है? क्योंकि तुम्हारा ज्यादातर समय तो तुम्हारी बिजनेस पार्टनर की बेड पर गुजरता है।”

“ अपनी बकवास बंद करो राही । मैं यह सब सुनने के लिए घर नहीं आया हूं ठीक है । मैं वैसे भी काम से बहुत ज्यादा थक गया हूं। मैं किसके साथ क्या करता हूं, इससे तुम्हारा कोई मतलब नहीं है। इसीलिए बात को ज्यादा बढ़ाने से बेहतर यही है, कि तुम इसे यहीं पर खत्म कर दो। तुम्हारे साथ झगड़ा करने के मूड में नहीं हूं। मेरा सर दर्द हो रहा है। और तुम्हें देख कर तो यह और ज्यादा बढ़ गया है।”

विक्रांत की बात सुन कर राही का सब्र टूट गया था । कैसे विक्रांत आसानी से इस बात को भूल जाने की बात कह सकता है ? जबकि कल पूरी रात राही विक्रांत की हरकतों से कितनी आहट हुई थी उसे यह भी याद नहीं, कि वह कितनी आहट हुई है । और उसके आंसू कितनी बार सूख चुके है यह भी याद नहीं । बाहर जब भी कोई गाड़ियों की आवाज सुनती तो राही को यही लगता था, कि विक्रांत घर वापस आया है। लेकिन हमेशा की तरह उसे निराशा ही हाथ लगती थी । और अब यह आदमी उससे कह रहा है, कि वह सारी बातों को आसानी से भूल जाए।

भले विक्रांत के लिए बड़ी बात नहीं है । वह चिक्की का पांचवा जन्मदिन भूल गया है। इससे पहले भी कई बार वह चिक्की के इंपोर्टेंट दिन पर शामिल नहीं हुआ है। वह भी सिर्फ इसीलिए क्योंकि वह अपने बिजनेस पार्टनर के साथ बेड पर रंगरलिया मना रहा था।

लेकिन शायद यह दर्द की इंतहा थी। इसके आगे शायद राही भी इन सबको बर्दाश्त नहीं कर सकती थी। उसने खुद के अंदर हिम्मत को बटोरा और एक गहरी सांस छोड़ी।

राही टेबल पर से वह पेपर उठाती है और उसे एक नजर देखती है, डाइवोर्स पेपर। राही उस पेपर को लेकर सीधे विक्रांत के पास जाती है। और उसके सीने पर वह पेपर रख देती है । विक्रांत लड़खड़ा जाता है और हैरानी से राही को देखने लगता है। उसने जल्दी से अपने सीने को संभालते हुए उस पेपर को अपने हाथों में लिया। और हैरानी से राही को देखकर कहा, “क्या है यह ?”

राही ने विक्रांत की आंखों में देखते हुए अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, “ मैं थक गई हूं इन सब चीजों से। और अब मुझे इन सब चीजों को यहीं खत्म करना है । तुमने ठीक कहा। मैं जितना इस बात को बढ़ाऊंगी यह बात उतनी ही बढ़ती जाएगी । इसीलिए मैं बात को यहीं खत्म करने जा राही हूं। हर वह बात जो तुम्हारे और मेरे बीच हुई थी, वह यहीं पर खत्म होती है।

मैंने साइन कर दिए हैं। मुझे उम्मीद है, कि तुम भी साइन कर दोगे। क्योंकि तुम नहीं चाहोगे कि तुम अपना कीमती बिजनेस छोड़ कर कोर्ट कचहरी के चक्कर काटो। इसीलिए सीधी तौर पर हम दोनों के बीच यह हो जाए तो ज्यादा बेहतर है।”

विक्रांत की आंखें छोटी हो जाती है और वह राही को घूर कर देखने लगता है। उसने अपने हाथ में पड़े हुए पेपर को सामने से देखा, तो उसकी आंखें एकदम से फटी की फटी रह गई। डाइवोर्स पेपर।

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