toxic relationship
मुंबई के सबसे पोर्स इलाके पाली हिल में बने एक खूबसूरत बंगले में इस वक्त उदासी छाई हुई थी। हालांकि उस बंगले की सजावट को देखकर कोई भी बता सकता था, कि यहां पर बर्थडे पार्टी की तैयारी की गई है। लेकिन उस कमरे में बैठी एक औरत और उसकी छोटी सी बच्ची उदासी के साथ दरवाजे पर टकटकी लगाए देख रहे थे।
30 साल की राही अपनी बेटी चिक्की के पांचवे जन्मदिन पर शाम से ही अपने पति विक्रांत मेहरा का इंतजार कर रही थी।
हालांकि विक्रांत मेहरा ने आज फोन कर के चिक्की से यह वादा किया था, कि वह आज रात को घर जरूर आएगा और चिक्की के जन्मदिन पर गिफ्ट भी जरूर लेकर आएगा।
चिक्की शाम से ही अपने पिता के घर आने की राह देख रही थी । और बड़ी आशाओं के साथ वह दरवाजे पर टकटकी लगाए बैठी थी। शाम से धीरे धीरे रात हो गई और धीरे धीरे चिक्की की आशाएं भी निराशा में बदल गई थी ।
अब रात के 11:00 बजने को आए थे। चिक्की को नींद आने लगी थी। उसकी आंखें ओझल हो रही थी। पर वह अपने पापा का इंतजार करना चाहती थी। लेकिन राही ने उसे डांट कर सुला दिया था। लेकिन उसकी डांट थोड़ी सौम्य थी वह बस चाहती थी, कि चिक्की और ज्यादा परेशान ना हो । और अपने पापा का ज्यादा इंतजार ना करें ।
इसीलिए उसने अपनी बेटी को गोद में उठाया और इधर से उधर टहलते हुए उसे सुला दिया। एक बार जब चिक्की सो गई, तो वह उसे उसके कमरे में बेड पर सुलाती है और उसे ब्लैंकेट से कवर कर देती है।
चिक्की के सोने के बाद राही के चेहरे पर गुस्सा आ जाता है। वो कमरे से बाहर आती है। और उसका डोर क्लोज कर देती है। ताकि उसके कमरे तक आवाज न जाए। वह सीधे लिविंग रूम में आती है और अपना फोन उठा कर सीधे विक्रांत को फोन कर देती है।
विक्रांत के फोन पर घंटी जा रही थी। विक्रांत के कॉल रिसीव करते ही राही ने गुस्से में भड़कते हुए कहा, “ तुमसे तो मैंने कोई उम्मीद करनी ही छोड़ दी है विक्रांत। लेकिन अब कम से कम अपनी बेटी को तो तुम वो दे ही सकते हो ना, जिसकी उसे उम्मीद है ।”
“ अपनी बकवास बंद करो। तुमने इस वक्त मुझे यह कहने के लिए फोन किया है क्या ? मैंने तुम्हें गोल्ड कार्ड दिया हुआ है ना। तो जाओ उसके लिए कुछ गिफ्ट खरीद लो या फिर कुछ भी ऐसा जो उसे पसंद आता हो। उसे जो चीज खुशी देती हो वह उसके लिए खरीद लो। और मुझे परेशान करना बंद करो...।” विक्रांत की हल्की सी लड़खड़ाती हुई जुबान के साथ राही को उसकी बातें सुनाई दे रही थी।
राही ने गुस्से में भड़कते हुए कहा, “सच में तुम्हें नहीं पता कि तुम्हारी बेटी को किस चीज से खुशी मिलेगी।”
राही का गुस्सा आउट ऑफ़ कंट्रोल हो गया था। पिछले 5 साल से वह विक्रांत की बेवफाई झेल रही थी । लेकिन उसने कभी सोचा नहीं था, कि विक्रांत का ऐसा रवैया कभी चिक्की के लिए भी होगा।
रही गुस्से में कुछ कहने ही वाली थी, कि तभी उस फोन पर दूसरी तरफ से किसी लड़की की आवाज सुनाई देती है,
“ क्या हुआ बेबी? तुम किस से फोन पर बात कर रहे हो ? कौन है जो हमारे इस प्राइवेट पल को खराब कर रहा है? कहीं यह तुम्हारी वह बदसूरत सी वाईफ तो नहीं है ना ?”
इस आवाज को सुनने के साथ ही राही की आंखें एकदम से बड़ी हो जाती है और उसकी आंखों में आंसू आ जाता है । लेकिन विक्रांत अपने साथ सोई उस लड़की को चुप रहने का इशारा करता है।
पर वह लड़की ब्लैंकेट को अपने सीने से ढलते हुए बेड पर बैठ जाती है और विक्रांत को घूर कर देखते हुए कहती है, “ कम ऑन बेबी। तुम किससे छुपाने की कोशिश कर रहे हो? तुम्हारी बीवी ने हम दोनों को एक साथ देख रखा है, ऑफिस बोर्ड रूम में। तुम्हें बॉडी मसाज दे रही थी और तुम्हारी बीवी ने वहां आकर भी हमारा मूड खराब कर दिया था।”
विक्रांत गुस्से में उस लड़की को देखने लगा। तो उस लड़की ने विक्रांत के हाथों से फोन छीन लिया और फोन स्पीकर पर रखते हुए राही से कहने लगी,
“ सुनो बेवकूफ औरत मैं और विक्रांत इस समय एक होटल के रूम में है और हम दोनों एक दूसरे के साथ एंजॉय कर रहे हैं। लेकिन फिलहाल तुम हमारे एंजॉयमेंट को खराब कर रही हो। तुम खुद तो इसे वो दे नहीं सकती हो। और जब यह मुझसे अपनी नीड फलफिल कर रहा है, तो तुम हमें परेशान कर रही हो।”
राही की आंखों से आंसू बह रहे थे और उसका चेहरा लाल हो गया था । वह गुस्से में कुछ बोलने वाली थी, कि सामने से उस लड़की ने आगे राही से कहा, “ तुम मुझे और विक्रांत को कई बार एक साथ देख चुकी हो और विक्रांत के केबिन में तो तुमने हम दोनों को बहुत अच्छी तरह से देखा था ना ? बिना कपड़ों के । तो तभी तुम्हे समझ नहीं आया, कि हम दोनों को प्राइवेसी चाहिए होती है। लेकिन इस कॉल के बाद तुम्हें अच्छी तरह से समझ में आ जाएगा, कि जब विक्रांत घर नहीं आता है तो वह मेरे साथ होता है । और तुम्हें उसे परेशान नहीं करना चाहिए और इस वक्त तुम हमें परेशान कर रही हो।
अब दोबारा कॉल करके हमें परेशान मत करना। वैसे भी तुम्हारी वजह से हमारा अच्छा भला एंजॉयमेंट का मूड खराब हो गया है।” यह कह कर उस लड़की ने कॉल काट दिया और फोन पर दूसरी तरफ से बीप की आवाज आने लगी।
राही का पूरा शरीर कांप रहा था। उसके हाथों की उंगलियां तक कांप रही थी । उसने फोन पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली और अगले ही पल उसने फोन को सोफे पर फेंक दिया। वह नीचे फर्श पर बैठ गई और अपने मुंह पर हाथ रख कर रोने लगी, ताकि उसके रोने की आवाज से चिक्की जाग न जाए।
वह नहीं चाहती थी, कि चिक्की को यह पता चले कि उसके माता-पिता के बीच कितने तनाव हैं। पर जितना वह इस बात को चिक्की से छुपाने की कोशिश करती थी राही का दिल उतना ही दुखता था। राही को पता था, कि विक्रांत से उम्मीद लगाना बेवकूफी है । लेकिन फिर भी बस वह चिक्की के लिए अपनी शादी को बचाना चाहती थी।
राही का मन भारी हो रहा था। उसकी आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे 10 साल पहले उसकी विक्रांत के साथ लव मैरिज हुई थी। लेकिन अब उनके रिलेशन में ना तो लव हे और ना ही मैरिज।
पिछले 1 साल से विक्रांत सिर्फ गिने-चुने दीनों पर ही घर आता था। राही ने उससे कई बार सवाल किए थे, तो विक्रांत उसे बिजनेस और काम का बहाना दे कर टाल देता था। लेकिन राही को अच्छी तरह से पता है, कि विक्रांत किसी बिजनेस मीटिंग या फिर बिजनेस ट्रिप पर नहीं जाता है । बल्कि उसने एक होटल के रूम को परमानेंट अपना कमरा बना कर रखा हुआ है। हर महीने राही के पास जब विक्रांत के क्रेडिट कार्ड का बिल आता है, तो उसमें होटल रूम का रेंट भी शामिल होता है।
राही अपनी टूटी हुई शादी को एक डोर के सहारे बांधने की कोशिश कर रही थी । लेकिन विक्रांत की बेवफाई उसे तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थी।
यह कोई पहली बार नहीं था, जब विक्रांत ने राही और चिक्की से किया हुआ अपना वादा तोड़ा है । चिक्की ने कई बार अपने स्कूल प्रोजेक्ट में फर्स्ट किया है। क्लास में टॉप किया है। और कई कंपटीशन में वह विनर रही है। लेकिन उन सब के बावजूद भी विक्रांत बस एक वादा कर देता है, कि वह जल्दी आ कर उसकी खुशियां सेलिब्रेट करेगा। पर वह कभी नहीं आता है। लेकिन आज राही ने अपनी बेटी का निराशा और मायूस चेहरा देखा है। जहां पर वह अपने पांचवे जन्मदिन पर अपने पिता का इंतजार करते करते सो गई थी।
राही अपना चेहरा उठाती है । जो बुरी तरह से हताशा से लाल हो गया था। उसने अपने आंसुओं को पौंछा और अपने मन में विचार करने लगी, “ विक्रांत एक अच्छा पति नहीं बन सका है। लेकिन अब वह एक अच्छा पिता भी साबित नहीं हो पा रहा है। अगर वह एक अच्छा नहीं बन सकता है, तो इस रिश्ते का वजूद ही खत्म हो गया है। क्योंकि इस रिश्ते को बांधने वाली सिर्फ एकमात्र डोर है चिक्की।”
राही भी शायद अब थक गई थी। उसे भी इन सब से आजादी चाहिए थी । उसे भी विक्रांत की बेवफाई से रिहाई चाहिए थी। शायद अब वक्त आ चुका था, कि राही अपने इस टॉक्सिक रिलेशनशिप से बाहर निकल जाये।
राही अपने कमरे में जाती है और अलमारी से एक फाइल निकालती है। वह उसमें से डाइवोर्स पेपर बाहर निकालती है। यह पेपर उसने 2 साल पहले बनवाया था। लेकिन कभी इस पर साइन करने की हिम्मत नहीं जुटा पाई थी। उसे लगा शायद विक्रम देर सवेर सुधर जाएगा और उनकी शादी बच जाएगी। लेकिन आज शायद यह आखिरी उम्मीद भी टूट चुकी थी।
राही चिक्की के बेड के किनारे पर बैठी हुई थी और उसके हाथों में वह डाइवोर्स पेपर था । जिसे वह पिछले 2 घंटे से घूर रही थी। राही ने इस पेपर पर साइन कर दिया, तो उसकी तरफ से यह शादी खत्म हो जाएग। और वह इस घुटन भरी जिंदगी से आजाद हो जाएगी।
लेकिन इंडिया में लव मैरिज करना जितना मुश्किल है, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल है उसे मैरिज को खत्म करना। समाज, लोग, परिवार, दोस्त, रिश्तेदार सबके ताने सुनने को मिलेंगे। हजारों उंगलियां उठेंगी। हजारों सवाल होंगे। शायद इन्हीं सबसे बचने के कारण आज भी हमारे समाज में कई ऐसी शादियां है, जो निभाई जा रही है।
राही के मन में भी यही डर था। लोग और समाज से पहले उसे अपने परिवार का डर था। क्योंकि उसके परिवार के लिए विक्रांत एक आदर्श पिता है और एक अच्छा पति है। और एक अच्छा दामाद साबित हुआ है।
लेकिन असल में वह कैसा है?, यह बात सिर्फ राही ही जानती थी। पर वह आज तक सिर्फ चिक्की की वजह से चुप रही थी। उसे खुद से ज्यादा चिक्की की चिंता थी। वह नहीं चाहती थी, कि चिक्की का इस बात पर गहरा असर पड़े।
मां-बाप का अलग हो जाना बच्चों के लिए बहुत बड़ा सदमा होता है। और यह बात राही अच्छी तरह से महसूस कर सकती थी। क्योंकि उसके माता-पिता का भी डायवोर्स उसके बचपन में हो गया था । और उसने अपनी मां को अकेले संघर्ष करते हुए देखा था।
लेकिन वह अपनी बेटी को इस माहौल में भी बड़ा नहीं कर सकती थी । जहां पर वह धीरे-धीरे उम्र के साथ अपने पिता की बेवफाई के बारे में जाने और वह अपने पिता से नफरत करने लगे।
राही ने एक नजर चिक्की को देखा और उसकी आंखों में आंसू आ गए । उसने धीरे से पेन उठाया और जहां उसे साइन करना था, वहां पर उस पेन की नॉक को रख दिया। लेकिन वह क्या लिखे ?क्या वह अब अपना नाम राही मेहरा लिखेगी? वो इस नाम से भी आजादी चाहती थी। वह विक्रांत का कुछ भी अपने पास नहीं रखना चाहती थी। उसने एक गहरी सांस ली और पेन की नॉक को डाइवोर्स पेपर पर रख कर उसने अपना नया नाम लिखा। जिससे वह पहचानी जाएगी और अब अपना नाम वह इसी नाम से बनाएगी।
“ राही शर्मा....।”