His love is a whitch - Chapter 3
रागनी की बात सुन के एक चुड़ैल ने कहा " शक्ति अभी इसके लिए ज्यादा है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है ये रात तक ठीक हो जाएगी सुबह होने से पहले सभी अपने अपने कब्र में चले जाओ और इस लड़की को पुराने महल लेके जाओ और वो वही से अपनी माजिल के लिए निकलेगी और हां एक बात सभी लोग खान खोल के सुन लो इसकी मदद कोई नही नही करना चाहिए अगर किसी ने गलती से भी किया उसकी शक्ति छीन लिया जायेगा और बीना शक्ति के भूतो का कोई अस्तित्व नही रहता है ये बात मुझे समझाने की जरूर नही है "
उसकी बात सुन के सभी ने अपना सर झुका दिया तो हेड चुड़ैल और उनके साथ चार और पीछे जींद सभी वहा से हवा की तरह गायब हो जाते है और बाकी सभी अपने अपने कब्र में चले जाते है बस रागनी और मधु जो की इस समसान की हेड है वो रिम को लेके पुराने महल जाती है जो समसान के पीछे के रास्ते पर है वहा न कोई आता है और ना कोई जाता है ।
दूसरी तरफ ...
सुबह के 6 बजे बिल्डिंग के 65 फ्लोर पर एक बड़ा सा कैबिन जिसमे दीवाल पर एक बड़ी सी पेंटिंग और एक तरफ सोफा दूसरी तरफ टेबल और चेयर रखा है जिसमे अध्वंश कांच के बाहर उगते हुए सूरज को देख रहा था सूरज जिस तरह से अपनी रंगे बिखेरते हुए निगल रहा था वैसे वैसे अध्वंश की मुठिया कस गई थी उसने सूरज को घूरते हुए कहा " आखिर तुम उगते क्यू है पूरी तरह इस दुनिया में अंधेरा क्यू नही रहने देते है तुम्हारी रोशनी से पता नही कितनो की जिंदगी बदल जाती है"
" और यही सूरज बहुतों की जिंदगी बना भी देता है मेरे दोस्त अगर सूरज से शिकायत करना हो गया हो तो चलो कॉफी पी लो " एक लड़के ने हाथों में दो कप कॉफी लेके अंदर आते हुए कहा ।
उस लड़के की बात सुन के अध्वंश ने पीछे मुड़ के देखा लेकिन कुछ कहा नही और आके सोफे पर बैठ गया उसके बैठते ही सामने खड़ा लड़का उसने अध्वंश को कॉफी दिया और उसके बगल में बैठते हुए कहा " मुझे पता है सुबह सुबह तू किसी से मिलना नही चाहता और न किसी की सकल देखना चाहता है लेकिन मैं तुझे अकेले नही छोड़ने वाला हूं मरते दम तक तेरे साथ रहूंगा और ऐसे ही सुबह सुबह अपना मुंह दिखाई करूंगा भले ही तू सगुन न दे लेकिन फिर भी मैं आऊंगा ऐसे ही "
लड़के की बात सुन के अध्वंश ने कॉफी का एक सिप लेते हुए कहा " मीटिंग कब से है "
इस बात पर लड़के ने अपना मुंह बना लिया और कॉफी का कप टेबल पर रखते हुए कहा " जब देखो तब काम काम सोचा था एक लड़की आयेगी तो मेरा दोस्त बदल जायेगा लेकिन आई तो चुड़ैल जो बस खून पीना जानती है और ये उसके आने से और खराब हो गया " वो लड़का खुद में बड़बड़ाने लगता है ।
" दक्ष मैं कुछ पूछ रहा हूं " अध्वांश ने अपनी काली आंखो से सामने बैठा लड़का जिसका नाम दक्ष है उसे घूरते हुए कहा ।
दक्ष ने अपना मुंह बनाते हुए कहा " हां बता रहा हूं इतना उतावला क्यू है काम तो पूरा दिन ही करना है मीटिंग 11 बजे से है और .... वो आगे कुछ बोलता उससे पहले ही गेट नॉक करने की आवाज आती है ।।
तो दक्ष गेट की तरफ देखते हुए कहता है " इतनी सुबह कौन है "
इतना कह के उसने अन्दर आने को कहता है तो दो लड़के अंदर आके अपना सर झुकाए खड़े हो जाते है । जिन्हे देख कर दक्ष कहता है तुम दोनो यहां क्या बात है । दक्ष की बाते सुन के दोनो अध्वंश की तरफ देखते है जो सिर्फ काफी पीने पर ध्यान दे रहा था ।।
दक्ष ने जब देखा दोनो कुछ बोल नहीं रहे है तो उसने अध्वंश के तरफ देखते हुए कहा " क्या बात है कुछ हुआ है क्या " कुछ देर तक कोई कुछ नही कहता है जिससे दक्ष बुरी तरह छिड़ जाता है और गुस्से से खड़ा होके कहता है "बात क्या है कोई कुछ कहेगा या फिर मैं खुद पता कर लूं ।
उसे इस तरह से चिल्लाते देख कर दोनो आदमी दो कदम पीछे होके खड़े हो जाते है वही दक्ष दोनो को गुस्से से घूरते हुए कहता है " श्याम , सुन्दर तुम दोनो मुझे बता रहे हो या नहीं या फिर मैं .. दक्ष आगे कुछ न बोल के दोनो को घूरने लगा वही श्याम सुंदर जो की दोनों ट्विंस है और अध्वंश के सबसे ईमानदार आदमी है जो कई सालो से उसके लिए काम करते है ।।
श्याम सुन्दर ने दक्ष की बात सुन वो अपना सर झुका लिया तभी श्याम ने कहा " बॉस को मिस्टर रघुवंशी ( यानी अधवंश के दादा जी ) बुला रहे है ये उनका ऑडर है की बॉस फॉरन विला आए .।।
" मुझे सक था ये बात दादा जी से जुड़ा ही होगा आखिर वो चाहते क्या है शादी करने को कहा अध्वंश ने कर लिया और अब उन्हें क्या चाहिए " दक्ष ने गुस्से से उबलते हुए कहा ।
वही सोफे पर बैठा अध्वंश जिसे इन सब से कोई फर्क नही पड़ रहा था वो बस अपनी कॉफी को इंजॉय कर रहा था मजे से ।।
तभी दक्ष ने अध्वंश के तरफ देखते हुए कहा " मुझे पता है उसी ने कहा होगा दादा जी को कुछ इस लिए तुझे जाने की जरूरत नही है मैं संभाल लूंगा उस लड़की को मैं ऐसी सब सिखाऊंगा की वो कभी भूल नही पाएगी बहुत सर पर चढ़ने लगी है "
कहते हुए दक्ष ने अपने शर्ट के कॉलर को ठिक कर फोन लिया और बाहर जाने के लिए मुड़ गया लेकिन वो आगे जाता उससे पहले उसके कानो के एक दम दार आवाज पड़ी" अकेले कहा जा रहा है "
ये आवाज अध्वंश की थी जो अपने जेब के पॉकेट में हांथ डाल के खड़ा था उसके चेहरे पर इस वक्त कोई भाव नहीं था ना दुख दर्द नफरत न कुछ प्यार जैसा कुछ नही था उसे देख ऐसा लगता वो कोई इंसान नही रोबर्ट हो ।।
अध्वंश की बात सुन के दक्ष ने पीछे मुड़ के उसे देखते हुए कहा " तेरे कहने का क्या मतलब है क्या तू चलेगा वहा "
अध्वंश ने अपने कदम आगे लेते हुए कहताहै " क्यू मैं नही जा सकता हूं ये मेरे और उसके बीच की बात है तू इन सब में मत पड़ मैं संभाल लूंगा आखिर मैं भी देखना चाहता हूं इस बार मेरे प्यारे दादा जी आखिर करना क्या चाहते है "
इस बार दक्ष ने कुछ नही कहा और अध्वंश के साथ बाहर निकल गया वही उनके पीछे घबराये हुए श्याम सुन्दर दोनो जाने लगे ।
जारी..✍️