His young little bride - Chapter 3
देवराज ठाकुर की पोती, शिवांशा ठाकुर की शादी राजावत परिवार के सबसे छोटे बेटे, मनन के साथ हो रही थी। मनन पच्चीस साल का होकर भी अपनी उम्र के हिसाब से मैच्योर नहीं था और बच्चों जैसा व्यवहार करता था। राजावत परिवार की मजबूरी थी कि जब तक देवराज जीवित था, तब तक उन्हें शिवांशा को चौहान फैमिली से प्रोटेक्ट करना था। जैसे ही उन्हें देवराज के मिलने की खबर मिली, राजावत परिवार के मुखिया, तेजेंद्र ने यह फैसला लिया कि शिवांशा को मार दिया जाए।
हालांकि, मनन के डैड, मिस्टर देवेश राजावत, इसके खिलाफ थे, लेकिन तेजेंद्र ने उनकी एक नहीं सुनी। उन्होंने अपने बेटे, अंकुश को शिवांशा को मारने के लिए भेज दिया था।
कुछ ही देर में शादी की रस्में शुरू होने वाली थीं। शिवांशा अपने कमरे में तैयार हो चुकी थी। अचानक, उसके कमरे की लाइट बंद हुई। अंकुश कमरे के अंदर आया और उसने शिवांशा का मुँह दबाकर पकड़ लिया। शिवांशा दिखने में बहुत खूबसूरत थी। अंकुश जैसे शख्स को जो चाहिए था, उसका मौका उसे आसानी से मिल गया था।
“तुम्हारा दादा मर गया है। अब तक वेद सिंह चौहान तुमसे अनजान है। पापा नहीं चाहते तुम्हारे चक्कर में हम मुसीबत में आए; वेद को सच पता चलने से पहले तुम्हारा मरना ही ठीक रहेगा। वैसे भी, उसने तुम्हें ढूँढ लिया तो वह भी तुम्हारी जान ही लेगा।” अंकुश ने शिवांशा के कान के पास आकर धीमी आवाज़ में कहा।
देवराज के मरने की खबर सुनकर शिवांशा को झटका लगा। उसकी आँखों से आँसू बह निकले। वैसे भी, परिवार के नाम पर उसका कोई नहीं था।
“प्ल...प्लीज़ मुझे जाने दो।” शिवांशा ने अटकती हुई आवाज़ में कहा।
“अभी नहीं, अभी तो तुम्हें बहुत कुछ करना है। यू नो व्हाट, तुम बड़ी होकर ओर भी खूबसूरत हो गई हो बेबी गर्ल.. मुझे छोड़ कर क्यों गई? हमारी फैमिली ने तुम्हारे लिए बहुत कुछ किए है; मरने से पहले उसका एहसान नहीं चुकाओगी।” अंकुश ने शिवांशा को पकड़ा और उसे पीछे के दरवाजे से खींचते हुए ले जाने लगा।
शादी का माहौल होने की वजह से हवेली में रौनक थी, लेकिन अंकुश ने पहले ही उस साइड की लाइट बंद करवा दी थी। उसके लिए यह सब करना कोई मुश्किल काम नहीं था। सबकी नज़रों से छुपाकर वह शिवांशा को ले जाने लगा। उसने शिवांशा को गाड़ी के अंदर धकेला और ड्राइविंग सीट पर आकर बैठ गया।
“मैं... मैं किसी को कुछ नहीं कहूँगी। आप लोग नहीं चाहते कि मैं मनन से शादी करूँ तो मैं चली जाऊँगी, पर प्लीज़ मुझे जाने दीजिए।” शिवांशा ने रोते हुए हाथ जोड़कर कहा।
अंकुश पर उसका कोई असर नहीं हुआ। उसे तो बस अपनी दिल की ख्वाहिश पूरी करने की लगी थी। वह ड्राइव करते हुए शिवांशा को जंगलों की तरफ़ ले जा रहा था। इस वक्त उसके चेहरे पर एक इविल स्माइल थी।
“पता है, तुम इस तरह रोती-गिड़गिड़ाती हुई बहुत अच्छी लग रही हो। लेकिन इन सब का कोई फायदा नहीं है। आज रात तुम मुझसे नहीं बच सकती, और ना ही अपनी मौत से...” अंकुश ने सख्त आवाज़ में कहा।
ऐसा नहीं था कि शिवांशा राजावत परिवार के मर्दों से अनजान थी, खासकर अंकुश के इरादों से। यही वजह थी कि अरमान उसे और मनन को लेकर दिल्ली गया था। इस वक्त शिवांशा बहुत लाचार महसूस कर रही थी। वो गाड़ी में बैठकर आँसू बहा रही थी।
शिवांशा अपनी किस्मत को कोस रही थी। वह लगभग 9 साल की थी, जब पहली बार राजावत परिवार में आई थी; डरी-सहमी सी। उसे तब भी अंकुश से बहुत डर लगता था। जब भी वह अकेली होती, अंकुश उसे अजीब तरीके से छूने की कोशिश करता; उसे बहुत बुरा लगता था, लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं था। एक बार अरमान ने अंकुश को ऐसा करते हुए देख लिया था, बस तभी किसी तरह से वो शिवांशा को उससे बचा रहा था।
“अरमान भाई कहाँ हो आप? आप ही मुझे इससे बचा सकते हो।” शिवांशा ने सहमी हुई आवाज़ में बड़बड़ाकर कहा।
वहीं दूसरी तरफ़, मनन के आगाह करने के बाद अरमान जल्दी से शिवांशा के कमरे की तरफ़ जाने लगा। उसे एक बार फिर अंकुश की पत्नी, गीतिका ने रोक लिया था।
“अरमान भैया, मैं आप ही को ढूँढ रही थी।” गीतिका उसके पास आते हुए बोली, “शिवांशा तैयार हो चुकी है, और मनन भैया अभी भी ऐसे ही घूम रहे हैं। कुछ ही देर में शादी की रस्में शुरू होने वाली हैं; वह आपके अलावा किसी की नहीं सुनते। प्लीज़, आप उन्हें तैयार होने के लिए बोल दीजिए।”
“ठीक है, बोल दूँगा, लेकिन पहले मुझे शिवांशा से बात करनी है।” अरमान ने सपाट लहजे में कहा।
“शिवांशा आराम कर रही होगी; थोड़ी देर पहले ही मेकअप आर्टिस्ट उसे तैयार करके गई है। इतनी रस्मो में थक जाएगी।” गीतिका ने जवाब दिया।
“मैं उससे बात करने जा रहा हूं, ना कि कोई मुश्किल काम देने, जो उसके आराम में खलल पड़ेगा। एंड प्लीज़, आगे से मेरा रास्ता मत रोकिएगा।” अरमान काफी बेरुखी से बोला और उसके रोकने के बावजूद शिवांशा के कमरे की तरफ़ बढ़ने लगा। वह मनन की बातों को ऐसे ही टाल नहीं सकता था।
वहीं अरमान के बदतमीज़ी से बात करने पर गीतिका ने पैर पटकते हुए कहा, “ये दोनों भाई खुद को क्या समझते हैं जो मुझसे इस तरह बदतमीज़ी से बात कर रहे हैं? मैं अभी अंकुश को सब बताती हूँ। वैसे, अंकुश कहाँ है? काफी देर से दिखाई नहीं दे रहे।”
गीतिका अंकुश को शिकायत करने के लिए चली गई, तो वहीं अरमान शिवांशा के कमरे में पहुँचा। कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद था, लेकिन अरमान दूसरे दरवाजे से अंदर चला गया। उसने लाइट ऑन करके देखा तो कमरे का सामान थोड़ा अस्त-व्यस्त था, और शिवांशा वहाँ पर नहीं थी। अरमान को समझने में देर नहीं लगी कि वहाँ क्या हुआ होगा।
गुस्से में अरमान की मुट्ठी बंध गई थी। उसने दाँत पीसते हुए कहा, “आई स्वेयर, अंकुश राजावत, अगर तुमने इस बार शिवांशा के साथ कुछ भी गलत किया, तो मैं अपने हाथों से तुम्हारी जान ले लूँगा। घटिया आदमी!”
अरमान तुरंत दौड़ते हुए बाहर पार्किंग एरिया में आया। उसने अपनी गाड़ी निकाली और अंकुश के पीछे जाने लगा। उसे अंकुश की लोकेशन का पता नहीं था, इसलिए उसने तुरंत अंकुश को कॉल किया।
वहीं, अरमान का कॉल देखकर शिवांशा का ध्यान टूटा; उसके चेहरे पर उम्मीद की किरण नज़र आ रही थी, जिसे अंकुश ने भी नोटिस कर लिया था।
अंकुश ने शिवांशा को धमकी देते हुए कहा, “अगर गलती से भी मुँह से एक शब्द भी निकाला, तो पता है ना मैं क्या कर सकता हूँ? तुम्हारी सबसे बड़ी कमज़ोरी मेरे पास है।”
शिवांशा ने रोते हुए हाँ में सिर हिलाया। अंकुश ने इस बीच अरमान का कॉल रिसीव किया।
“कहाँ हो तुम?” अरमान ने सीधे-सीधे पूछा।
“सबसे पहले तमीज़ से बात करो; मैं तुमसे उम्र में बहुत बड़ा हूँ।” अंकुश गुस्से में बोला।
“तुम जैसे लोग उम्र में कितने भी बड़े क्यों ना हो जाएँ, लेकिन हरकतें इतनी छोटी हैं कि तमीज़ से बात करने का दिल नहीं करता। मैं अभी बोल रहा हूँ, अगर शिवांशा के साथ कुछ भी ऐसा-वैसा किया, तो मैं तुम्हें ज़िंदा नहीं छोड़ूँगा।” अरमान गुस्से में चिल्लाकर बोला।
“तो तुम्हें पता चल गया है कि वह लड़की मेरे साथ है? बहुत अच्छी बात है। मुझे इसे मारने के ऑर्डर्स मिले हैं, तो मैं उसी काम के लिए जा रहा हूँ। अगर तुम्हें इस मामले में किसी से सवाल-जवाब करने हैं, तो जाकर पापा से पूछो।” अंकुश ने बेपरवाही से जवाब दिया।
उसे किसी का डर नहीं था। अंकुश की बेशर्मी देखकर अरमान को अफ़सोस हो रहा था। वह बोला, “अच्छा, तो तुम्हें उसे मारने के ऑर्डर्स मिले हैं? मैं अच्छे से जानता हूँ कि तुम उसे किस मक़सद से लेकर जा रहे हो। अपने गंदे हाथों से उसे छूने की कोशिश भी मत करना।”
“तुम बहुत इंटेलिजेंट हो; इसी वजह से मुझे अच्छे लगते हो। जब तक तुम हमारे पास पहुँचोगे, तब तक वह ज़िंदा नहीं मिलेगी। फिर क्या फ़र्क पड़ता है, मरने से पहले उसने मुझे थोड़ा-बहुत खुश कर भी दिया? वैसे भी तुम्हारा वो पागल भाई कभी इसे पति का प्यार नहीं दे पाता। अब ये बेचारी भी कुछ एक्सपेक्ट करती होगी ना।” अंकुश ने सिर हिलाकर कहा।
उसकी बात सुनकर शिवांशा और ज़ोर से रोने लगी। उसके रोने की आवाज़ अरमान के कानों में पड़ी, तो वह बोला, “मैं आ रहा हूँ शिवांशा, प्लीज़ तुम डरो मत; तुम्हें कोई कुछ नहीं कर सकता।”
“मुझे... मुझे बहुत डर लग रहा है।” शिवांशा हिचकियाँ लेते हुए बोली।
उसकी बात सुनकर अंकुश ने उसके गाल पर हाथ रखा। शिवांशा ने अपना मुँह दूसरी तरफ़ कर दिया, तो अंकुश ने उसका मुँह कसकर दबाते हुए कहा, “अच्छा, तो मेरी लिटिल बेबी को डर लग रहा है? उसे यह क्यों लगा कि बचपन में कोई उसे बचाकर दूर ले गया, तो मेरी लिटिल बेबी मुझे बच पाएगी? तुम उस पागल से भले ही शादी कर लो, लेकिन तुम्हें छूने का हक़ सिर्फ़ मेरा है।”
“दूर रहो उससे।” अरमान ने तेज आवाज़ में कहा। वह जानबूझकर अंकुश को बातों में उलझाए हुए था।
कॉल के ज़रिए वह अंकुश की लाइव लोकेशन निकालते हुए उसके पीछे जा रहा था। अंकुश आगे कुछ नहीं बोला और उसने कॉल डिस्कनेक्ट कर दी।
वहीं, अंकुश शिवांशा को लेकर जंगल में पहुँच गया था। वहाँ पहुँचते ही उसने गाड़ी को ब्रेक लगाया। अंकुश शिवांशा को बहुत ही बुरी नज़रों से देख रहा था। उसकी नजरें ही शिवांशा को असहज करवाने के लिए काफी थी। उसने खुद को ढकते हुए अपने दोनों हाथ आगे रख लिए थे।
“इन सब का कोई फ़ायदा नहीं है, लिटिल बेबी। बचपन में तुम कितनी अच्छी थीं; हर बात मान लेती थीं। चलो, अभी भी मेरी लिटिल बेबी बन जाओ; आओ मेरी गोद में आकर बैठो, जैसे बचपन में बैठती थीं।” अंकुश ने तिरछा मुस्कुराते हुए कहा।
उसकी हर एक बात शिवांशा के दिमाग में बुरी यादें ताज़ा कर रही थीं। अंकुश बचपन में जानबूझकर उसे गोद में बिठाया करता था; उसके साथ गलत हरकत करने की कोशिश करता था। जब भी वह अंकुश को देखती तो डरकर छुप जाती थी, लेकिन जब अंकुश उसे ढूँढ लेता, तो वह कुछ मिनट उसकी ज़िन्दगी के सबसे बुरे मिनट होते थे। सपनों में शिवांशा आज भी उसे देखकर डर जाती थी।
“अरमान और मनन के साथ रहते हुए बिलकुल उन्हीं की तरह ज़िद्दी हो गई हो; ऐसे नहीं मानोगी।” अंकुश ने हल्के गुस्से में कहा और फिर गाड़ी का दरवाज़ा खोलकर बाहर आ गया।
उसके बाद अंकुश ने शिवांशा की तरफ़ का दरवाज़ा खोला और फिर उसे खींचते हुए बाहर निकाला। वह उसे पीछे की सीट पर धकेल रहा था; उससे पहले ही शिवांशा ने थोड़ी हिम्मत दिखाई और वह उसे धकेलकर भागने लगी। उसका लहँगा काफी भारी था; शिवांशा को भागने में दिक्कत हो रही थी, और वह थोड़े ही दूर जाने पर नीचे गिर गई। अंकुश तब तक उसके पास पहुँच गया था; अगले ही पल वह उसके ऊपर था।
“प्लीज़, प्लीज़ मुझे जाने दो; प्लीज़, हाथ जोड़ती हूँ मैं तुम्हारे आगे।” शिवांशा काँपती हुई आवाज़ में बोली।
“अब तुम मेरी मुश्किलें बढ़ा रही हो। तुम अच्छे से जानती हो ना कि जब मुझे गुस्सा आता है तो क्या होता है? मार खानी है तुम्हें बचपन की तरह?” अंकुश उसे घूरते हुए बोला।
शिवांशा बिलकुल चुप हो गई थी। अंकुश के हाथ उसकी पीठ पर जा रहे थे। उसने शिवांशा के सिर पर लगा हुआ दुपट्टा निकालकर फेंका और फिर उसकी ब्लाउज़ के बटन खोलने लगा।
“हाँ, बिलकुल ऐसे ही शांत रहना है, लिटिल बेबी।” अंकुश बोला और फिर अपने होठों को शिवांशा की गर्दन पर लगा दिया।
शिवांशा को घबराहट महसूस हो रही थी। वह अपने हाथ-पैर मारकर उसे दूर करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अंकुश इतना भारी-भरकम और मज़बूत आदमी था, और शिवांशा नाज़ुक-सी दुबली-पतली लड़की। अंकुश अपनी हवस में इतना पागल हो चुका था कि उसे यह तक ख़्याल नहीं था कि वह जंगल के बीच में शिवांशा के साथ बदसलूकी कर रहा था।
इस बीच एक गाड़ी की तेज आवाज सुनाई दी। उसकी फ़्लैशलाइट से शिवांशा के अंदर कौन-सी हिम्मत आई कि उसने अंकुश को एक झटके में खुद से दूर कर दिया। वह दौड़ते हुए गाड़ी की तरफ़ भाग रही थी। वह जानती थी कि गाड़ी के आगे आने से उसका एक्सीडेंट भी हो सकता है या उसकी जान जा सकती है, पर अंकुश जैसे घटिया आदमी के हाथों गन्दा होने से अच्छा था कि वह अपनी जान दे दे।
अंकुश भी उसके पीछे भाग रहा था। वह पीछे से चिल्लाकर बोला, “आज तुम्हें मुझसे कोई नहीं बचा पाएगा, खुद तुम्हारी मौत भी नहीं। जितना भागना है भाग लो; तुम्हें क्या लगता है इस शहर में किसी की इतनी औक़ात है जो अंकुश राजावत के सामने अपना मुँह खोल सके?”
शिवांशा ने पीछे पलटकर भी नहीं देखा। अचानक सामने आ रही गाड़ी ने ब्रेक लगाया। शिवांशा को कुछ समझ नहीं आ रहा था। गाड़ी में से बाहर निकले शख्स के पास वह सीधे चिपक गई थी। आखिर इस घने सुनसान जंगल में कोई तो उसकी मदद करने के लिए वहाँ पर आया था।
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क्या लगता है कौन आया होगा? अरमान पहुँचा होगा या फिर कोई और? फिलहाल के लिए इतना ही; अगले चैप्टर पर मिलते हैं।