शादी : एक अनचाहा बंधन Ch. 2

शादी : एक अनचाहा बंधन - Chapter 2

Posted by Desire World • Aug 09, 2025 03:33 PM

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शेखावत मैनसन,

शेखावत मैनसन के अंदर इस वक्त आखिर चल क्या रहा था? वह जानने से पहले, आइए एक नज़र डालते हैं, शेखावत परिवार के सदस्यों पर –

शेखावत परिवार यानी कि लड़के वाले, मेरा कहने का मतलब है कि जिस घर से साइना के लिए रिश्ता आया है वो लोग.....

शेखावत ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के मालिक, दिल्ली शहर के जाने माने बिजनेसमैन है और अब इस परिवार इंट्रोडक्शन पर आते हैं, हेड ऑफ द फैमिली मिस्टर संजय शेखावत और उन की पत्नी मिसेज वीना शेखावत और उन के भी तीन बच्चे हैं।

सब से बड़ा बेटा, राजवीर शेखावत; जिसके लिए आज पूरा शेखावत परिवार आज लड़की देखने( यानी कि हमारी साइना को देखने) जा रहा है। राजवीर स्टडीज और एमबीए कंप्लीट करने के बाद अपने डैड की ही कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर काम करता है।

और फिर उस से छोटा एक और बेटा है मिस्टर संजय शेखावत का, आर्यन शेखावत ( जोकि बिजनेस स्टडीज के लिए इस वक्त लंदन गया हुआ है) और फिर सब से छोटी बेटी , संजना शेखावत ( जो अभी कॉलेज में है)!

कुल मिला कर शेखावत परिवार में भी साइना के परिवार की तरह ही 5 लोग ही है।

आज सुबह से शेखावत मैनसन में भी, कुछ शर्मा हाउस जैसी ही तैयारियां चल रही है।

राजवीर की मां, सुबह से ही बार बार सब को याद दिला रही है कि आज राजवीर के लिए लड़की देखने चलना है सब लोग टाइम से तैयार हो जाना, आर्यन तो यहां है नहीं, इसलिए बाकी बचे चारों लोग लड़की देखने के लिए जाने वाले थे और मिसेज शेखावत ने सुबह से बोल बोल कर आखिर सब को वक्त पर तैयार कर ही दिया था।

राजवीर का कोई भी लड़की देखने जाने का या फिर शादी करने का बिल्कुल भी मन नहीं था लेकिन उस के परिवार वाले रोज़ किसी ना किसी लड़की की फोटो दिखा कर उस से उस के मन की बात पूछते रहते थे और उस पर शादी के लिए पिछले 1 साल से कुछ ज्यादा ही दबाव बना रहे थे और अपने परिवार वालों की इन्हीं सब हरकतों से तंग आ कर एक दिन राजवीर ने एक दिन गुस्से में अपनी मां से बोल दिया की उसे नहीं करनी है यह शादी वादी!

अपने बेटे की ऐसी बातें सुन कर तो मिसेज शेखावत के सारे अरमान ही मिट्टी में मिल जाने की नौबत आने वाली थी, लेकिन फिर भी उन्होंने कोशिश करना नहीं छोड़ा और हर तरीके से राजवीर को समझाती रही और साथ ही शादी के लिए भी मनाती रही, राजवीर उन की बातें समझा तो नहीं लेकिन अपने घर वालों की बात मान कर उस ने बिना साइना की तस्वीर ध्यान से देखें आखिर उस के लिए हां कर दिया था, सिर्फ इसलिए कि उस की मां ये रोज़ रोज़ का तमाशा और रोज ही उसे परेशान करना बंद कर दें।

और इसीलिए आज अपने परिवार वालों की बात मान कर ही राजवीर उन के साथ लड़की देखने जा रहा था, नहीं तो राजवीर की मां ने आज से पहले भी उस के लिए कई रिश्ते देखे थे। लेकिन हर बार वो कोई ना कोई बहाना बना कर मना कर देता था या फिर टाल देता था। बस इस बार बेमन से ही सही लेकिन राजवीर ने जाने के लिए हां कर दी थी और उस की मां की तो खुशी का ठिकाना ही नहीं था।

रविवार दोपहर को जाने का प्लान था, राजवीर के घर वालों ने लड़की की तस्वीर देखी थी और साइना उन सभी को एक नज़र में ही भा गई थी, खास कर के राजवीर की मां को!

राजवीर ने तो साइना की तस्वीरें एक बार भी ठीक से नहीं देखी थी और बिना देखे ही हां बोल दिया था जाने के लिए।

राजवीर, अपने माता पिता और बहन के साथ लगभग 2:00 बजे शेखावत मैनसन से अपनी कार में बैठ कर निकला।

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शर्मा हाउस में,

साइना और राइमा दोनों जैसे ही कमरे से उतर कर किचन में आई, रोहिणी जी ने साइना से कहा - "तैयार हो गई ना तू ठीक से ?वह लोग आने ही वाले हैं , बस किसी भी वक्त आते होंगे।"

"हां, मां देखो ना नया सूट भी तो पहन लिया, आप के कहने से।" - साइना अपनी मां की बात पर बेमन से बोली

"बहुत अच्छा किया मेरी बच्ची, बहुत ही सुंदर लग रही है किसी की नज़र ना लगे।"- साइना की मां उसे कान के पीछे काला टीका लगाते हुए बोली

तभी उन के घर की डोर बेल बजी और साइना के पापा जो कि बाहर हाॅल में ही बैठे थे, उन्होंने दरवाजा खोला।

डोर बेल की आवाज सुन कर साइना की मां ने कहा - "वह लोग आ गए हैं शायद... तुम दोनों अभी यहीं रुकना मैं देख कर आती हूं।"

इतना बोल कर साइना की मां पानी के ग्लास की ट्रे ले कर हॉल में चली गई, और अपनी मां के जाते ही राइमा , किचन से झांक कर बाहर हॉल में देखने लगी।

साइना के पिता, नमस्ते करते हुए सभी को हाॅल में पड़े सोफे पर बैठा रहे थे और साइना का भाई आरव, वही किनारे खड़ा हुआ सब से नमस्ते कर रहा था और तभी साइना की मां पानी की ट्रे ले कर हॉल में पहुंची और नमस्ते करते हुए सभी को पानी का ग्लास देने लगी।

सभी को ‌पानी देने के बाद साइना की मां वापस किचन में आ जाती हैं, सभी के लिए नाश्ते का इंतजाम करने लगती हैं और फिर हाॅल में ही उन सभी के लिए नाश्ता लगवाती है, सब लोग नाश्ता कर रहे होते हैं तभी राजवीर की मां कहती है - "आप की बेटी साइना कहां है, हम उसे ही तो देखने आए हैं , जरा बुलाइए तो उसे..."

"हां, बस आ रही है आप सभी के लिए चाय ले कर।" - साइना की मां हंसते हुए बोलती है और फिर राइमा को इशारा करती है कि वो साइना को ले कर सब के सामने आए।

फिर थोड़ी देर बाद साइना अपनी बहन राइमा के साथ बिल्कुल ट्रेडिशनल स्टाइल में हाथों में चाय की ट्रे ले कर, उन लोगों के सामने आती है और सब को नमस्ते कर के चुपचाप सामने वाले सोफे पर बैठ जाती है।

साइना जब आती है तो राजवीर उस को बस एक बार नज़र उठा कर देखता है और देखता है तो नोटिस करता है कि उस का सुंदर चेहरा कुछ उदास लग रहा है और उस की आंखों में भी एक खालीपन है, उसे साइना काफी खोई खोई सी लगती है, इन सब के बावजूद वह मन में सोचता है कि देखने में तो सुंदर है लड़की, मगर इस के आगे वह कुछ भी नहीं सोचता और इधर उधर दूसरी तरफ देखने लगता है।

राजवीर की मां साइना से कुछ भी पूछती है तो साइना मुस्कुरा कर जवाब देती है लेकिन उस ने अभी तक एक बार भी ठीक से नज़रें उठा कर राजवीर को नहीं देखा था या फिर शायद वह देखना ही नहीं चाहती थी, राजवीर की मां और बहन दोनों ही साइना से बात करने में लगी हुई थी और बाकी के लोग भी आपस में कुछ ना कुछ बातें कर ही रहे थे।

इसी तरह आपस में कुछ देर बातचीत चलने के बाद दोनों परिवार एक दूसरे से बोलते हैं कि हमें यह रिश्ता मंजूर है, तो दूसरी तरफ से जवाब आता है कि हमें भी मंजूर है।

राजवीर के परिवार वालों को तो साइना की खूबसूरती और उस का स्वभाव दोनों ही पसंद आ जाते हैं और साइना के माता पिता को राजवीर और उस के परिवार के साथ अपनी बेटी साइना का भविष्य एकदम सुखमय नज़र आता है। इसलिए दोनों परिवारों के पास तो ना करने की कोई वजह ही नहीं रह जाती है।

तभी उन के पिता बोलते हैं - "एक बार बच्चों से भी तो उन की मर्जी पूछ लेते हैं आखिर शादी तो उन्हें ही करनी है आपस में।"

यह सुन कर साइना की मां जब साइना की मर्जी जानने की नज़र से उस की तरफ देखती हैं तो साइना कुछ भी नहीं बोलती और अपनी नज़रें नीचे कर लेती है, और इस तरह से नज़रें झुकाने का मतलब क्या होता है, वहां पर बैठा हर शख्स इसे लड़की की हां ही समझता है और ऐसे अनजान लोगों के सामने आखिर साइना बोल भी क्या सकती थी? उस से उस की मर्जी पूछना तो बस एक फॉर्मेलिटी अदा करना था बाकी फैसला तो उस के घर वाले ले ही चुके थे उस के हक में;

इस के बाद राजवीर की मां जब उस से पूछती है कि क्या उसे लड़की पसंद है? तू अपनी मां का सवाल सुन कर राजवीर अपने मन में सोचता है कि अगर उस ने यहां पर मना कर दिया तो फिर किसी और जगह कोई और लड़की देखने जाना पड़ेगा और फिर से यही सब रिपीट होगा तो यह सब सोच कर वह भी बोल देता है कि जैसा आप लोग ठीक समझे।

तो इतना सुनते ही दोनों परिवार खुश हो जाते हैं और आपस में एक दूसरे को मिठाई खिला कर बधाइयां देते हैं और गले मिलते हैं, संजना भी साइना को गले लगा कर कांग्रेचुलेशन बोलती है।

"तो फिर अब जब रिश्ता पक्का हो ही गया है तो रिश्ता जोड़ने में भी देर नहीं करनी चाहिए" - वीना जी (राजवीर की मां) बोलती हैं।

"हां, मैं कल ही पंडित जी से पूछ कर सगाई की तारीख निकलवाती हूं।" - रोहिणी जी (साइना की मां) ने कहा

"हां, यह ठीक रहेगा आप लोगों का सगाई का मुहूर्त निकलवा चाहिए हमें बता दीजिएगा।" - मिस्टर शेखावत (राजवीर के पापा) बोले

"वैसे इसी महीने सगाई की तारीख रखी जाए तो जल्दी तो नहीं हो जाएगा ना?" - राजवीर की मां बोली

"पंडित जी ने इस महीने की 22 तारीख बताई थी बहुत शुभ है किसी भी काम के लिए , अगर सभी उस तारीख के लिए राजी हो तो फिर वही तय कर लेते हैं।"- साइना के पापा बोले

"हां, 22 तारीख ठीक रहेगी सगाई के लिए, और शादी की तारीख सगाई के बाद तय कर लेंगे।" - मिस्टर शेखावत ने कहा

साइना अब तक उठ कर अपने कमरे में चली गई थी और राजवीर भी ऑफिस की एक कॉल पर बिजी हो गया था।

सगाई की तारीख तय करने के बाद साइना और राजवीर के परिवार वाले बहुत खुश होते हैं आपस में बात करते हुए बोलते हैं, 15 दिन बाद ही है 22 तारीख, सब इंतजाम तो हो जाएंगे ना, काफी कम टाइम है तैयारी के लिए!

"अरे सब हो जाएगा समधी जी, चिंता मत करिए आप, वैसे अब हम लोग चलते हैं।" - इतना बोल कर राजवीर के पिताजी सोफे से उठ गए और चलते वक्त उन की पत्नी वीना जी साइना के माता-पिता से बोली - "वैसे आप लोग चाहे तो सगाई से पहले हमारे घर भी आ सकते हैं, कोई संकोच नहीं करिएगा आप का अपना ही घर है अब शेखावत मैनसन भी!"

"जी बिल्कुल आएंगे, बहुत-बहुत आभार आप का, धन्यवाद!" - साइना की मां हाथ जोड़ कर बोली

और फिर में साइना के माता-पिता राजवीर और उसज्ञके पूरे परिवार को दरवाजे तक छोड़ने गए, अपनी कार में बैठज्ञकर शेखावत परिवार वहां से चला जाता है और उन सब के वहां से जाते ही साइना की मां उसे आवाज दे कर बुलाती है ; कुछ देर बाद साइना अपने कमरे से निकल कर मां के पास आती है और पूछती है - "अब क्या हुआ मां?"

साइना को देख कर उस की मां बहुत ज्यादा खुश हो जाती हैं और उस का माथा चूमते हुए बोलती है - "बहुत किस्मत वाली है तु मेरी बच्ची; इतना अच्छा परिवार मिला है सब लोग कितने अच्छे हैं, इतने ज्यादा अमीर और नामी होने के बाद भी पैसों का बिल्कुल घमंड नहीं है किसी में भी!"

यह सुनकर साइना की छोटी बहन राइमा भी उसे गले लगाते हुए कांग्रेट्स दी बोलती है और साथ ही बोलती है - "होने वाले जीजू तो बहुत ही हैंडसम हैं दी और नेचर भी बहुत अच्छा है, यू आर सो लकी दी, आई एम सो हैप्पी फाॅर यू!"

साइना का भाई आरव इन सब चीजों के बारे में ज्यादा नहीं समझ पाता क्योंकि वह छोटा है, लेकिन फिर भी अपनी दी को कांग्रेचुलेशन बोल कर गले लग जाता है।

साइना उन सब को अपने लिए इतना खुश और इमोशनल देख कर कहती है - "अरे! क्या हुआ आप सब को, आप लोग तो ऐसे बोल रहे हो जैसे कि कल ही मेरी शादी है।"

"शादी नही बेटा, लेकिन सगाई तो इसी महीने की 22 तारीख को तय हुई है ना।" - साइना के पापा बोले

"क्या इतनी जल्दी, इतनी जल्दी भी क्या थी आप लोगों को सगाई की डेट फिक्स करने की वह भी पहली ही मीटिंग में; बहुत जल्दी है आप लोगों को मुझे इस घर से भगाने की और खुद से दूर करने की।" - इतना बोल कर साइना गुस्से में अपने कमरे में चली गई और उस ने अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया।

"अरे नहीं बेटा ऐसा कुछ नहीं है, रिश्ता ही इतना अच्छा था कि इंकार करने की कोई वजह नहीं मिली।" - साइना के पापा उसे समझाते हुए बोले लेकिन कोई फायदा नहीं साइना अब तक अपने कमरे में जा चुकी थी।

"रहने दीजिए आप, कुछ नहीं है लड़कियों को अपने परिवार से लगाव होता है इसीलिए जल्दी शादी के नाम से चिढ़ जाती है, ठीक हो जाएगी वह सुबह तक।" - साइना की मां अपने पति को समझाते हुए बोली

उधर दूसरी तरफ़ साइना अपने कमरे के अंदर जा कर, अलमारी से अपनी डायरी निकाल कर , उसे अपने सीने से कुछ सोचती हुई, अपने बेड पर बैठी थी और उस की आंखों में आंसू थे , साथ ही वह आज राजवीर के साथ तय हुए अपने इस नए रिश्ते और अपने फ्यूचर के बारे में भी सोच रही थी।

क्रमशः

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