His Unwanted Dulhan Ch. 3

His Unwanted Dulhan - Chapter 3

Posted by Simran Ansari • Aug 02, 2025 02:09 PM

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तारा को कमरे के अंदर लाकर छोड़ने के बाद निवेदिता वहां उस कमरे से बाहर चली गई और उसके जाने के बाद तारा बेड के एक साइड में कॉर्नर पर बैठ गई और जैसे ही वह वहां पर बैठे उसकी नज़र वही साइड टेबल पर रखे हुए एक फोटो फ्रेम पर पड़ी और उस फोटो फ्रेम में आरांश की तस्वीर लगी हुई थी!

जिसे देखते ही तारा ने अपने हाथ में उठा लिया और उस फोटो फ्रेम की तरफ देखते हुए बोली, "आपने ऐसा क्यों किया आरांश जी! मुझे मंडप में अकेले छोड़ कर चले गए इतनी भी क्या जल्दी थी वहां से भागने की, बताइए ज़रा! और आपने तो एक बार मेरी तरफ़ देखा तक नहीं और ना ही शादी से पहले मुझसे मिलने के लिए हां नहीं की थी, ऐसा क्यों? ऐसा क्यों करते हैं आप?"

तारा यह सब कुछ बोल ही रही थी इस तरह से जैसे कि वह फोटो सच में उसे कोई जवाब देने वाली है उसकी बातों का लेकिन तभी दरवाजा खुलने की आहट हुई और उसका ध्यान दरवाज़े की तरफ़ हुआ और एकदम ही लड़खड़ाते हुए आरांश एकदम से अंदर आया जैसे कि कमरे के बाहर से अंदर उसे किसी ने धक्का दिया हो।

वह गिरते गिरते बचा, उसने साइड की दीवार पर अपना हाथ लगाया और फिर दरवाजे की तरफ़ गुस्से में घूर कर देखते हुए बोला, "क्या बदतमीजी है यह? मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है यह सब और आप लोग?"

इसके आगे वह कुछ भी बोल पाता इससे पहले ही दरवाजा एकदम से ही बाहर से बंद कर लिया गया और दरवाजा बंद होने की एक तेज़ आवाज़ हुई।

दरवाजा बंद होते ही उसने कसकर अपनी आंखें बंद की और गुस्से में अपने दांत पीस लिए क्योंकि वह आगे कुछ बोल नहीं पाया और दरवाजा भी बाहर से लॉक कर दिया गया था!

दरवाजे के हैंडल पर हाथ रखते ही जैसे उसने दरवाजा खोलने की कोशिश की वैसे ही उसे की बात समझ आ गई कि दरवाजा बाहर से लॉक है जो की अंदर से तो नहीं खुलने वाला।

आरांश को वहां दरवाजे पर खड़ा देखकर तारा भी तुरंत अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और वह फोटो फ्रेम उसने वहीं बेड पर छोड़ दिया, इतना ध्यान नहीं दिया क्योंकि आरांश अभी भी दरवाजे की तरफ मुंह करके खड़ा हुआ था।

तारा ने सोचा कि वह उसकी तरफ देखकर कुछ तो बोलेगा लेकिन आरांश पीछे मुड़कर उसकी तरफ आया और एक पल के लिए वहां पर रुक गया क्योंकि तारा के चेहरे पर इस वक्त हल्की सी स्माइल थी और उसे तरह स्माइल करते हुए वह उसकी तरफ ही देख रही थी और बहुत ही खूबसूरत लग रही थी, आरांश ने आज पहली बार ही उसकी तरफ देखा था और कुछ पल के लिए जैसे उसके खूबसूरती में खो गया था।

तारा भी एकदम कंफ्यूज होकर उसकी तरफ देख रही थी और उसके एकदम सामने ही खड़ी हुई थी आरांश पहले से ही गुस्से में था और तारा के इस तरह रास्ते में खड़े होने पर उसने गुस्से में दांत पीसकर उसकी तरफ देखा और बिना कुछ बोले साइड से निकलकर जाने लगा, लेकिन तभी तारा ने खुद ही पहल करते हुए बोला, "आरांश जी! अब आपकी तबीयत कैसी है वह निवेदिता दीदी ने बताया कि आपकी तबीयत ठीक नहीं थी इसलिए आप वैसे ही वहां पर मुझे मंडप में छोड़कर चले गए थे।"

आरांश काफी देर से खुद को कंट्रोल कर रहा था क्योंकि उसे गुस्सा आ रही थी खुद पर वह जब तारा की तरफ देखते हुए अपने मन में उसके बारे में सोचने लगा था वह ऐसा नहीं चाहता था और इसीलिए उसे इग्नोर करके साइड से निकाल कर जा रहा था जिससे कि उसे अवॉयड कर पाए।

लेकिन जैसे ही तारा ने यह बात बोली वह भी अब और चुप नहीं रह पाया और उसने एकदम से कहा, "कुछ नहीं हुआ है मुझे, मेरी तबीयत बिल्कुल ठीक है और निवेदिता दीदी ने तुमसे झूठ बोला है क्योंकि वह लोग नहीं चाहते कि तुम सच जानो। मैं जानबूझकर वहां से चला गया था क्योंकि मुझे यह शादी नहीं करनी थी मैंने बस अपने घर वालों के प्रेशर में आकर यह शादी की है और मैं बिल्कुल भी तुमसे ये शादी नहीं करना चाहता था।"

जैसे अपनी फ्रस्ट्रेशन निकलते हुए आरांश ने एकदम से यह सारी बात बोल दी तो तारा के चेहरे पर जो प्यारी सी स्माइल थी, वह एकदम ही गायब हो गई और उसने कहा, "क्या.. क्या मतलब है आपकी इस बात का आप.. आप मजाक कर रहे हैं ना हां, मज़ाक ही कर रहे होंगे क्योंकि अगर आपको शादी नहीं करनी होती तो फिर आप ये शादी करते ही क्यों और शादी तो अपने की है ना, लेकिन आप उसके बाद तुरंत ही चले गए थे।"

तारा उसकी बात मानने को तैयार नहीं थी इसलिए आरांश का गुस्सा और बढ़ गया और उसने इस बार थोड़ी तेज आवाज में चिल्लाते हुए कहा, "तुम्हें कम समझ में आता है क्या या फिर सुनाई नहीं देता है मैं सितम साफ-साफ शब्दों में तुम्हें बताया है कि मैंने तुमसे शादी की नहीं मुझे शादी करनी पड़ी और तुम बस मेरे लिए एक अनचाही बीवी हो जिसे मेरे पल्ले बांध दिया गया है और यह शादी भी मेरे लिए उतनी जबरदस्ती की है जितनी कि तुम। मैं ना तो यह शादी चाहता था और ना ही तुम्हें अपनी पत्नी के रूप में। इसलिए इस बात को याद रखना और मुझसे जितना हो सके दूर रहना।"

तारा उसकी बात मानने को तैयार नहीं थी इसलिए आरांश का गुस्सा और बढ़ गया और उसने इस बार थोड़ी तेज आवाज में चिल्लाते हुए कहा, "तुम्हें कम समझ में आता है क्या या फिर सुनाई नहीं देता है मैंने सब साफ-साफ शब्दों में तुम्हें बताया है कि मैंने तुमसे शादी की नहीं मुझे शादी करनी पड़ी और तुम बस मेरे लिए एक अनचाही बीवी हो जिसे मेरे पल्ले बांध दिया गया है और यह शादी भी मेरे लिए उतनी जबरदस्ती की है जितनी कि तुम। मैं ना तो यह शादी चाहता था और ना ही तुम्हें अपनी पत्नी के रूप में। इसलिए इस बात को याद रखना और मुझसे जितना हो सके दूर रहना।"

वह इतना बोल कर आरांश उसके साइड से निकाल कर अपनी अलमारी की तरफ बढ़ गया और अपने रात में चेंज करने वाले कपड़े निकाल कर तुरंत ही वॉशरूम में चला गया और वॉशरूम का दरवाजा उसने एक तेज आवाज के साथ पटक कर बंद किया, जिसकी वजह से तारा का ध्यान टूटा और उसने सामने की तरफ देखा और उसे अभी भी आरांश की कही बातों पर यकीन नहीं हो रहा था लेकिन उसकी कहीं बातें तारा के कानों में गूंज रही थी।

"तुम मेरे लिए बस एक अनचाही पत्नी हो, एक जबरदस्ती का रिश्ता जिसमें मुझे बांध दिया गया है!" - यह शब्द बार-बार उसे सुनाई दे रहे थे उसे ऐसा लग रहा था जैसे अभी भी कोई उसके कानों में यह बातें बोल रहा हो।

तारा ने ऐसा कुछ कभी सपने में भी इमेजिन नहीं किया ताकि उसके साथ ऐसा कुछ होने वाला है इसलिए वह एकदम ही अपना सिर पकड़ कर दम से वही बेड पर बैठ गई और उसने खुद से कहा, "नहीं, नहीं मेरे साथ इतना बुरा नहीं हो सकता। मैं किसी की अनचाही पत्नी नहीं बनना चाहती थी क्योंकि मैं तो पूरे दिल से इस रिश्ते को चाहती थी और इस शादी को भी तो फिर क्यों? क्यों मेरे साथ ही ऐसा हुआ! नहीं आरांश जी आप मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते।"

कुछ देर के बाद आरांश अपने रात में पहनने वाले कपड़े चेंज करके वॉशरूम से बाहर निकाला और उसने देखा कि तारा अपने ही ख्यालों में डूबी हुई वहीं बैठ के साइड में बैठी हुई थी, उसकी तरफ देखकर आरांश एक ठंडी सांस छोड़ी और बेड की दूसरी साइड पर आकर खड़ा हो गया और बेड पर पड़े हुए सारे फूलों की पंखुड़ियां को अपने हाथ से झाड़ कर हटाने लगा क्योंकि उसे वह सारी सजावट फूल और कैंडल्स सब बहुत इरिटेट कर रहे थे अपने बेड के साइड पर रखे हुए साइड टेबल पर वाले कैंडल्स जो जल रहे थे वह भी उसने फूंक मार कर बुझा दिए।

कैंडल्स की डेकोरेशन की वजह से कमरे की सारी लाइट्स पहले ही ऑफ थी सिर्फ नाइट लैंप ही जल रहे थे इस वजह से अब कमरे में काफी ज्यादा अंधेरा हो गया लेकिन फिर भी कुछ रोशनी थी।

आरांश ने एक नज़र तारा की तरफ देखा और अपने मन में कहा, "पता नहीं क्या चल रहा होगा इसके मन में, लेकिन मैं इसे कोई झूठी उम्मीद नहीं देना चाहता लेकिन क्योंकि जब उम्मीद टूटती है तो दर्द और ज्यादा होता है। वो दर्द तुम कभी बर्दाश्त नहीं कर पाओगी और ना ही मैं तुम्हें उस दर्द में देखना चाहता हूं। अपनी गलतियों की सजा सिर्फ मैं खुद को जो देना चाहता हूं और किसी को अपने साथ जोड़कर और किसी पर उन अंधेरों का साया भी नहीं पड़ने देना चाहता।"

अपने मन में इतना बोलते हुए बेड की दूसरी साइड पर बैठ गया क्योंकि वह तारा से कोई भी बात या बहस नहीं करना चाहता था, उसे लगा था कि उसने अपनी बात कह दी है जो कि तारा को समझ में भी आ गई होगी इसलिए अभी फिलहाल वह थोड़ा सा रिलैक्स था।

To Be Continued

क्या लगता है आपको तारा विश्वास करेगी आरांश की बातों का और आरांश क्यों सबका गुस्सा निकल रहा है बेचारी तारा पर इसके बाद कैसी होने वाली है उनकी फर्स्ट नाइट क्या लगता है आप लोगों को क्योंकि आरांश ने तो पहले ही बोल दिया है उससे दूर रहने को लेकिन क्या तारा उसकी बात मानेगी, जैसी अब तक तारा की पर्सनैलिटी रही है उस हिसाब से क्या लगता है आप लोगों को क्या करेगी अब वो, बताइए कमेंट में 👇👇

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