His Unwanted Dulhan Ch. 2

His Unwanted Dulhan - Chapter 2

Posted by Simran Ansari • Aug 01, 2025 10:27 PM

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आरांश की मां, और निवेदिता दोनों ही काफी देर से उसके कमरे का दरवाजा खटखटा रहे थे और लगभग 10 मिनट के बाद उन दोनों को एक रिस्पांस मिला।

हल्की सी क्लिक के साउंड के साथ दरवाजा हल्का सा खुला और जैसे ही दरवाजा थोड़ा सा खुला निवेदिता ने तुरंत ही दरवाजे पर हाथ रखा और पूरा दरवाजा खोल कर वह कमरे के अंदर चली गई और उसके पीछे ही उसकी मां भी कमरे के अंदर गई।

कुछ देर के बाद, क्रीम कलर की शेरवानी जिस पर गोल्डन वर्क था पहने हुए एक लड़का उसी कमरे सेबाहर आया जिसके गले में शेरवानी पर पहनने वाला दुपट्टा पड़ा हुआ था शेरवानी की जेब के ऊपर काफी महंगा डायमंड का ब्रोच लगा हुआ था। उस लड़के के ब्राउन बाल और डार्क ब्राउन कलर की आंखें थी वह बहुत ही ज्यादा हैंडसम लग रहा था लेकिन उसका फेस एकदम एक्सप्रेशन लैस था, उसे देखकर यह भी समझ नहीं आ रहा था कि वह खुश है या फिर दुखी गुस्से में है या फिर इरिटेट।

वह उस कमरे से बाहर निकाला और उसके साथ ही उसके पीछे एक और लड़का जो लगभग भागते हुए उसके पीछे आया क्योंकि दूल्हा भी काफी स्पीड से चलता हुआ मंडप तक आया और आकर दुल्हन के बगल में चुपचाप ही बैठ गया। उसने ना किसी से कुछ बोला और ना ही कुछ कहा यहां तक उसने साइड में बैठी हुई दुल्हन की तरफ एक नज़र भी नहीं देखा और बस सामने की तरफ देखा हुआ वहां पर किसी पत्थर की तरह बैठा रहा।

तारा को उसका बर्ताव बहुत ही अजीब लगा लेकिन वह पहले ही दो बार डांट खा चुकी थी इसलिए उसकी बिल्कुल भी हिम्मत नहीं हुई कि वह आगे जाकर झांकते हुए उसका चेहरा या एक्सप्रेशन देखने की कोशिश करें या फिर कुछ भी बोले इसलिए वह भी चुपचाप सारी रस्मों को निभाने लगी।

पंडित ने मंदिर पढ़ने शुरू किया और एक-एक कर सारी रस्में शुरू हुई और वह लड़का यानी कि हमारा दूल्हा आरांश बिना अपनी होने वाली दुल्हन की तरफ देखे ही सारी रस्में करता गया और आखिर में सात फेरे पूरे होने के बाद पंडित जी ने जैसे ही कहा, "विवाह संपन्न होता है, अब से आप दोनों पति-पत्नी हैं। घर के बड़ों का आशीर्वाद लेकर अपने नए जीवन की शुरुआत करिए।"

इतना बोलते हुए पंडित जी ने अपने हाथ में पकड़े हुए बेलपत्र से गंगाजल उन दोनों के ऊपर छिड़का लेकिन आरांश एकदम ही अपनी जगह से उठकर खड़ा हो गया और उसके खड़े होते ही तारा को भी उठकर खड़े होना पड़ा क्योंकि वह इस तरह बैठे नहीं रह सकती थी उन दोनों का गठबंधन हुआ था और तारा के दुपट्टे को आरांश के गले में पड़े हुए साफा से बांध दिया गया था।

लेकिन आरांश ने तुरंत ही उसे अपने गले से निकाल कर वहीं जमीन पर फेंक दिया और इससे पहले की कोई कुछ बोल पाता या उसे रोक पाता वह तुरंत ही वहां से चला गया।

आरांश हो इस तरह से जाते देख उसकी मां ने उसके पीछे आते हुए कहा, "अरे बेटा रुको तो..."

लेकिन उसने अपनी मां की एक बात भी नहीं सुनी और बाकी सारे लोग एकदम ही हैरान रह गए। उसका ऐसा बर्ताव देखकर क्योंकि कितनी देर इंतजार करने के बाद तो वह वहां पर मंडप में आया था दुल्हन के आने के आधे घंटे के बाद और शादी की रस्मों में आधा घंटा लगा होगा और फेरे खत्म होते ही वह इस तरह तुरंत वहां से चला गया तो सब लोग आपस में बातें करने लगे इस बीच को लेकर और तारा को भी आरांश का ऐसा बर्ताव बहुत अजीब लगा, उसका खिला हुआ चेहरा एकदम ही उतर गया क्योंकि उसने ऐसा कुछ बिल्कुल भी नहीं सोचा था।

तारा का उतरा हुआ चेहरा आरांश की बहन ने नोटिस कर लिया और बात संभालने के लिए वह तुरंत ही तारा के बगल में आकर खड़ी हुई और उसके कंधे पर हाथ रखते हुए बोली, "भाभी! आप ज्यादा मत सोचिए वह भाई की ना तबीयत ठीक नहीं है कल रात से ही उन्हें सर में दर्द था शायद इसीलिए जल्दी चले गए क्योंकि तबीयत की वजह से शादी तो कैंसिल नहीं कर सकते थे ना, आई होप आप समझोगी इस बात को और मेरे भाई को भी।"

निवेदिता ने बहुत ही उम्मीद से यह बात कही तो तारा ने भी हल्की सी मुस्कुराहट के साथ बस अपना सिर हिला दिया और फिर उसने अकेले ही सब लोगों का आशीर्वाद लिया और बाकी की बची हुई रस्में भी उसने अकेले ही निभाई।

विदाई के वक्त, उसका पूरा परिवार ही उसे वहां छोड़कर चला गया क्योंकि शादी लड़के वालों के घर में ही हो रही थी और तारा बस थोड़ा सा उदास थी लेकिन वह बिल्कुल भी रोई नहीं क्योंकि अपनी नई जिंदगी शुरू करने को लेकर वह बहुत खुश थी और उसे लगा था कि जैसे उसका सपना पूरा हो गया हमेशा से ही उसे शादी करने का शौक था और आज जब से वह दुल्हन बनी थी तब से ही उसे ऐसा लग रहा था जैसे वह अपना सपना जी रही है लेकिन आरांश के बर्ताव ने अब उसे थोड़ा सोचने पर मजबूर कर दिया था लेकिन फिर भी अपने स्वभाव के हिसाब से उसने इस बारे में ज्यादा नहीं सोचा और इस बात को भी सीरियस नहीं लिया उसे लगा कि शायद उसकी बहन ठीक कह रही थी उसकी तबीयत ठीक नहीं होगी।

कुछ देर के बाद, निवेदिता ही तारा को उसके कमरे में छोड़कर गई और इस बीच आरांश उसे कहीं भी नहीं दिखा। तारा जब उस कमरे के अंदर आए तो उसने देखा वह कमरा बहुत ही बड़ा था, उस के घर के तो दो तीन कमरे उसके अंदर आ जाए। इतना बड़ा कमरा देख कर वह काफी एक्साइटेड हो गई थी।

कुछ देर के बाद, निवेदिता ही तारा को उसके कमरे में छोड़कर गई और इस बीच आरांश उसे कहीं भी नहीं दिखा। तारा जब उस कमरे के अंदर आए तो उसने देखा वह कमरा बहुत ही बड़ा था, उस के घर के तो दो तीन कमरे उसके अंदर आ जाए। इतना बड़ा कमरा देख कर वह काफी एक्साइटेड हो गई थी।

पूरे कमरे का इंटीरियर पिक और गोल्ड कलर का था जो कि एकदम नया लग रहा था जैसे कि अभी कुछ दिनों पहले ही सब कुछ चेंज करवाया गया हो दीवारों के कलर से लेकर पूरा इंटीरियर बेड फर्नीचर सब कुछ एकदम नया और ब्रांड न्यू लग रहा था इसके अलावा कमरे के बीच में रखे हुए उसे किंग साइज बेड पर भी व्हाइट और पिक फ्लोरल बेडशीट बिछी हुई थी और पूरे बेड पर बहुत ही खूबसूरत मोगरा और गुलाब के फूलों से सजावट की गई थी।

वह सजावट देख कर तारा के चेहरे पर प्यारी सी मुस्कुराहट आ गई और सब कुछ सोचते हुए उसका चेहरा भी एकदम लाल हो गया था और उसे ऐसे देखकर उसके साइड में खड़ी हुई निवेदिता ने उसे छेड़ते हुए कहा, "क्या हुआ भाभी? क्या सोच कर लाल हुई जा रही हो?"

निवेदिता की बात सुनकर अपनी मुस्कुराहट छुपाते हुए तारा ने धीरे से बस नहीं में अपना सिर हिला दिया।

निवेदिता भी तारा को ज्यादा अनकंफरटेबल नहीं करना चाहती थी इसलिए उसने बात बदलते हुए कहा, "अच्छा ठीक है भाभी! वैसे आप यह बताओ आपके कमरे की डेकोरेशन और इंटीरियर सब कुछ आपको पसंद तो आया ना बस एक हफ्ते पहले ही सब कुछ चेंज करवाया है हमने और आपको पिंक कलर पसंद है ना बस इसीलिए ये सब कुछ हमने आपकी पसंद का करवा दिया क्योंकि ज्यादातर तो अब आपको ही रहना है ना यहां पर।"

तारा को तो जैसे अपने कानों पर यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसके ससुराल वाले सच में इतने अच्छे थे उसके आने से पहले उन्होंने उसकी पसंद और ना पसंद का इतना ध्यान रखा हुआ था।

कमरे की सजावट और सुंदरता देखकर पहले ही उसका मुंह खुला का खुला रह गया था और अभी अपनी ननद की बातें सुनकर वह और भी ज्यादा हैरान रह गई।

उसने उसकी बात का जवाब देते हुए कहा, "हां दीदी! यह सब कुछ बहुत अच्छा है, मुझे तो बहुत पसंद आया लेकिन सब कुछ आपने सिर्फ मेरी पसंद का क्यों करवा दिया! आपके भाई को यह सब पसंद नहीं आया तो.."

निवेदिता ने उसकी बात का जवाब देते हुए कहा, "अरे क्यों नहीं आएगा अब आप आ गई हो ना तो आप उनकी पसंद चेंज करवा देना और उन्हें भी थोड़ा चेंज कर देना अपनी तरह बना देना हमेशा पॉजिटिव और खुश रहने वाला।"

निवेदिता की इस बात पर तारा कंफ्यूज हो गए और उसने कहा, "क्या मतलब है आपका?"

निवेदिता ने हंसते हुए कहा, "नहीं, कुछ नहीं भाभी! मैं बस मज़ाक कर रही थी, अभी मैं चलती हूं भाई आते ही होंगे।"

इतना बोलकर निवेदिता वहां उसके कमरे से बाहर चली गई और उसके जाने के बाद तारा बेड के एक साइड में कॉर्नर पर बैठ गई और जैसे ही वह वहां पर बैठे उसकी नज़र वही साइड टेबल पर रखे हुए एक फोटो फ्रेम पर पड़ी और उस फोटो फ्रेम में आरांश की तस्वीर लगी हुई थी!

To Be Continued

कैसा लगा आज का एपिसोड और कैसी लगी ये शादी? वैसे Unwanted शादी है तो दूल्हे का ऐसा रिएक्शन तो बनता ही है क्योंकि हमारी दुल्हन तो पहले से ही इतनी खुश थी लेकिन अब आप लोग बताइए कमेंट में अपने ओपिनियन 🥰 तारा को कब पता चलेगा आरांश का सच, क्या वह खुद बताएगा उसे या फिर उस की फैमिली में से कोई और तारा के परिवार वालों ने कुछ भी रिएक्शन क्यों नहीं दिया क्या उन लोगों को पहले से ही पता था इस बारे में, जब तारा को पता चलेगा तो क्या होगा उसका रिएक्शन क्या आप लोगों को पता है आरांश के ऐसे बर्ताव के पीछे की वजह अगर नहीं पता तो डिस्क्रिप्शन पढ़ लीजिए आपको पता चल जाएगा।

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