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Chapter 123

रस्म-ए-वफ़ा ! - Chapter 123

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कपड़ों की तह करती हुई मृणाल किसी गहरी सोच में डूबी हुई थी जब अच्युत कमरे में आया। दरवाज़ा बंद करता हुआ वह उसके पास ही बिस्तर पर बैठ गया। मृणाल अभी भी किसी गहरी सोच में डूबी हुई थी।

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