Force marriage - Chapter 2
चैप्टर 2
तुम्हारी औकात सिर्फ एक मिस्ट्रेस की.......
करन उस पेपर को पढ़ते हुए कुमुद से कहता है।
"लिटिल खरगोश, 1 रूल्स,
कि तुम मेरी बीवी तो होगी, लेकिन सिर्फ और सिर्फ नाम के लिए, लेकिन मेरी नज़रों में तुम्हारी औकात सिर्फ एक मिस्ट्रेस की होगी, जो मेरे बेड को गरम करने के काम आएगी और मेरी जरूरतों को पूरा करेगी। उसके सिवा कुछ भी नहीं।"
"2 रूल्स,
कि तुम पर, तुम्हारे जिस्म पर, तुम्हारी रूह पर, तुम्हारी साँसों पर, सब पर सिर्फ और सिर्फ मेरा हक़ होगा, पर तुम्हारा मुझ पर कोई हक़ नहीं होगा।"
"3 रूल्स,
तुम्हे अपनी जुबान मेरे सामने कभी नहीं खोलनी है। तुम बिलकुल वैसा ही करोगी जैसा मै करने को कहूंगा, बिल्कुल किसी कठपुतली की तरह, तुम्हे मेरे इशारों पर नाचना है।"
"4 रूल्स,
तुम्हारा मेरे घर पर कोई हक़ नहीं होगा, और ना ही मेरी जिंदगी में। तुम बस इस घर में एक नौकरानी की हैसियत से रहोगी और मेरा जब मन चाहे, तुम्हारे करीब आने को, तो मै तुम्हारे करीब आऊंगा और तुम मुझे रोक नहीं सकती।"
"5 रूल्स,
तुम मेरे सिवा किसी भी गैर मर्द के करीब नहीं जा सकती, ना ही किसी भी मर्द को छू सकती हो। अगर गलती से भी तुमने ऐसा करने को सोचा, तो तुम सोच भी नहीं सकती कि मै तुम्हारी क्या हालत करूंगा।"
करन ने इतना ही बोला था कि कुमुद जोर से चीखते हुए कहती है, "बस बस बस, चुप हो जाइए और कितना नीचे गिरेंगे आप मेरे सामने? मुझे तो अब भी विश्वास नहीं हो रहा है कि कोई इंसान इतना भी बेदिल हो सकता है। मुझे तो आपसे घिन्न आ रही है। क्या आपकी माँ बहन नहीं है जो आप मुझसे इतनी घटिया बातें बोल रहे हैं?"
कुमुद ने इतना ही कहा था कि करन उसके बालों को अपनी मुट्ठियों में मजबूती से जकड़ कर बोलता है, "मेरी माँ बहन हो या ना हो पर वे तुम्हारी तरह घटिया नहीं हो सकती हैं। तुम्हारी तरह कुछ पैसों के लिए लोगों का बिस्तर नहीं गरम करती हैं। लोगों को अपनी इन खूबसूरती की जाल में फंसा लोगों की जान नहीं लिया करती हैं।"
"आह््ह्ह्ह, छोड़ो मुझे, दर्द हो रहा है। तुम ये क्या बकवास किए जा रहे हो? मै वैसी लड़की बिल्कुल नहीं हूँ, जैसा तुम समझ रहें हो। प्लीज मुझे छोड़ दो। मै तो तुम्हे जानती भी नही हूँ। देखो जरूर तुम्हे कोई गलतफहमी हुई होगी। प्लीज मुझे छोड़ दो, मुझे यहाँ से जानें दो। मैने तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगाड़ा है। प्लीज जानें दो मुझे।"
"तुमने मेरा क्या बिगाड़ा है, ये तुम्हे बहुत जल्द पता चल जायेगा। तूने मेरी सबसे कीमती चीज मुझसे छीनी है और उसके लिए अब मै तुझे मौत से भी बदतर सजा दूंगा। पर चिंता मत करो लिटिल खरगोश, तुम्हे कभी भी मे मौत नहीं आने दूंगा, क्योंकि तुम्हे तड़प तड़प कर ही सही लेकिन तुम्हे रहना मेरे पास ही होगा। मै तुम्हे कभी भी खुद से दूर नहीं जानें दूंगा। तुम्हे अपनी गलती की सजा सारी उम्र झेलनी होगी, खासकर अपने इस नाज़ुक बदन पर।"
"बस बहुत हो गया आपका, मै आपसे साथ कभी भी नही रहूंगी। मैं आपकी कोई बात नहीं मानूंगी, ना ही आपकी कभी नौकरानी बनूंगी, ना ही आपकी कोई कठपुतली। मेरा नाम कुमुद सिन्हा है और मेरी यही पहचान है, समझ में आया आपको।"
उसकी बात सुनकर करन जोर-जोर से हंसने लगा। उसकी हंसी नॉर्मल हंसी की तरह तो बिलकुल नहीं थी। कुछ देर यूं ही हंसने के बाद वे कुमुद के बालों को पकड़ उसके चेहरे के क़रीब झुकते हुए बोला, "लिटिल खरगोश, जो तुम्हे ना जानें, वे सच में तुम्हे मासूम ही समझेगा, लेकिन मै करन राठौड़ तुम्हारी असलियत बहुत अच्छे से जानता हूं। इसलिए तुम ये अपनी मासूमियत का नाटक मेरे सामने तो बिलकुल भी मत करो। क्या कहा तुमने लिटिल खरगोश कि सब तुम्हारे नाम से जानेंगे, और तुम्हारा नाम ही तुम्हारी पहचान है।
लेकिन अब से तो तुम्हारी पहचान तुमसे छिनने वाली है, क्योंकि अब तुम्हारी बस एक ही पहचान होगी, मेरी नौकरानी की और दुनिया भी तुम्हे मेरी नौकरानी के नाम से ही जानेगी। और चिंता मत करो लिटिल खरगोश, बहुत जल्द ही मै तुम्हारे इस अकड़ को तोड़ने वाला हु, जिससे दुनिया के साथ साथ तुम खुद को भी मेरी नौकरानी ही समझने लगोगी। जस्ट वेट एंड वॉच माय लिटिल खरगोश। अब चलो जल्दी से इस पेपर पर साइन करो।"
"नही, कभी नहीं, मै कभी भी इन पेपर पर साइन नही करूंगी और ना ही कभी तुम्हारी इन घटिया शर्तो को मानूंगी, समझ में आया तुम्हे।"