वो एक मुलाक़ात - Chapter 2
वृंदा की पकड़ अपनी सारी के पल्लू पर कस चुकी थी उसके माथे पर हल्की पसीने की बूंदे झलक रही थी.....
सपना ने अंदर आते हुए खुन्नस मै कहा
" अब यहां कब तक खड़ी रहोगी दी, लड़के वाले गए अब कपड़े बदल लीजिए "
वृंदा ने अपने आंसु छुपाते हुए अपना चेहरा घुमाया और तेज कदमों से चलते हुए अपने कमरे मै चली गई
जाते ही उसने दरवाजा बंद किया और उससे टेक लगा कर बैठते हुए बोली
" हे शिव ये सब क्या हो रहा है मेरे साथ , उन्हें मेरे अतीत का व सबसे काला पन्ना मालूम है फिर क्यों वो इस शादी की लिए जा कह रहे हैं?
क्या मैने जो नफरत भरे शब्द कहे थे उन शब्दों की वजह से?"
" क्या कोई चंद शब्दों के बदले के लिए किसी से 3शादी तक कर सकता है ?"
इतना बोल कर उसने अपनी आंखे बंद कर ली और याद करने लगी उस पहली मुलाकात को.......
कुछ यही हाल तेजस का था वो ड्राइविंग सीट की बगल वाली सीट पर बैठा था उसने वृंदा का वो मासूम गोल चेहरा याद करते हुए अपने मन मै कहा
" आखिर तुम मुझे मिल ही गई ज़ुल्मिया कितने जुल्म ढाए हैं तुम्हारी उस एक दिन के याद ने इन बीते 2 सालों में एक बिगड़ल अमीरजादे से सरफिरा आशिक बने घूम रहा था तुम्हारे पीछे तुम्हे ढूंढ़ने के लिए, मन वो पहली मुलाकात बहुत वाहियात थी पर........."
इतना बोलते हुए उसने अपनी आंखे बंद की और पीछे सीट पर सर टिका लिया
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2 साल पहले
बनारस अस्सी घाट
मंदिर मै घंटियां बज रही थी एक लड़की लाल अनारकली पहने सर पर दुपट्टा लिए मंदिर के बरामदे में खड़ी हो कर भगवान से अपने आने वाले कल की प्रार्थना कर रही थी
आज उसका बॉय फ्रेंड उससे शादी करने आने वाला है इस मंदिर मै..... उसने अपने घर वालों से ये बात छुपाई थी और अब डरते हुए भगवान से शरण मांग रही थी कि सब अच्छा हो जाए....
वहां आस पास ओर भी लोग थे जो अपना अपना काम कर रहे थे तो कुछ शिव का आशीर्वाद ले रहे थे.....
वो एक कोने में खड़ी हो कर अपने बॉय फ्रेंड यतीक्ष का इंतजार कर रही थी
और वो इंतजार खत्म भी हुआ जब एक लड़का व्हाइट कोट पहने अपनी गाड़ी से उतर कर बाहर आया और उसके साथ ही उसके 4 बाउंसर्स भी बाहर निकले.....
उसके बाद एक औरत ने जिसने जॉर्जेट वाइन कलर साड़ी और हेवी ज्वेलरी पहनी थी
" यतीक्ष चलिए पहले पूजा कर 4लेते हैं बाद 3मै सब को खाना भी खिला देंगे "
" जी मां " बोलते हुए यतीक्ष उसके पीछे पीछे आने लगा
उसके आते ही वृंदा भागते हुए आई और यतीक्ष के साथ आई औरत के पांव छूते हुए बोली
" पाए लागू आंटी जी आखिर आप मान गए इस शादी के लिए "
वो औरत आंखें छोटी करते हुए बोली कौन सी शादी और हैरियत से यतीक्ष की तरफ देखने लगी जो खुद आंखों में कंफ्यूजन लिए वृंदा को देख रहा था और उसने एकदम से वृंदा का चेहरा देखते हुए कहा
" किसकी शादी हो रही है ?"
और वृंदा का चेहरा पीला पड़ गया वह उठी और यतीक्ष हाथ पकड़ते हुए बोली
" हमारी शादी यतीक्ष तुमने मुझसे वादा किया था एक महीने पहले की आज के दिन हमारी शादी होगी इस शिवरात्रि के दिन हम दोनों हमेशा के लिए एक हो जाएंगे और तुम मेरे घर वालों को भी मनाओगे "
यह सुन कर यतीक्ष ने उसका हाथ झटकते हुए उसे हल्का सा धक्का दिया और वृंदा पीछे किसी शख्स से टकरा गई और यह शख्स और कोई नहीं बल्कि तेजस था
तेजस ने उसे संभालते हुए कहा
" अरे संभल कर इतनी भी क्या जल्दी है आराम से बैठकर मसाला सुलझाओ "
इतना बोल कर उसने वृंदा को वहीं छोडा और दो कदम आगे बढ़ाए की उसके कानों में वृंदा के रोने की आवाज आई
" यतिक्ष तुम मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हो तुमने कहा था तुम मुझसे शादी करोगी "
तेजस ने हैरानी से पीछे मुड़ के देखा वृद्धा की उम्र उसे 18 19 साल लग रही थी और उसके होठों पर अचानक की एक हंसी गिर गई जैसे वह वृंदा का मजाक उड़ा रहा हूं इस उम्र में उसे शादी करनी है वह भी अपने बॉयफ्रेंड से क्योंकि यह लड़का कहीं से भी उसके परिवार की पसंद तो नहीं लग रहा था
वही यतीक्ष की मां ने भी वृंदा को फटकारते हुए कहा
" अमीर लड़का देखा नहीं की आ जाती है कहा कहां से उन पर डोरे डालने के लिए "
इतना बोल कर वह आगे बढ़ गई वहीं उसके जाते ही यतीक्ष वृंदा के करीब जाते हुए बोला
" देखो वृंदा अभी मेरी मां नहीं मान रही है जब वह मान जाएगी तब मैं तुमसे शादी कर लूंगा अभी तुम जाओ प्लीज यहां से कोई तमाशा मत बनाना "
वृंदा ने रोते हुए कहा
" नहीं यह कोई तमाशा नहीं है यह मेरी फिलिंग्स है तुम मुझे पिछले 1 साल से यही बोल रहे हो कि आज हमारी शादी आज हमारी शादी है जब एक महीने पहले तुमने मुझे कहा था कि शिवरात्रि के दिन हमारी शादी पक्की हो चुकी है तो आज तुम कैसे मुकर सकते हो मैं सारा सामान लेकर आई हूं अपने घर से भाग के आई हूं तुम्हारे लिए और तुम बोल रहे हो कि तुम्हें मुझसे शादी नहीं करनी है मैं और इंतजार करूं और कितना इंतजार ? "
यतीक्ष ने गुस्से में जाट पीसते हुए कहा तो सच सुनो मुझे तुमसे शादी नहीं करनी है कभी शक्ल देखी अपनी आईने में मुझसे शादी करोगी तुम सीरियसली तुम्हें लगता है मैं तुमसे शादी करूंगा?"
यह सुना था कि वृंदा के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई और तेजस वही ताहा के मर के हंसते हुए बोला
" आ गई बेटा अक्ल ठिकाने , अब अपने घर जाओ "
यतीक्ष ने घूरते हुए तेजस को देखकर कहा आप अपने काम से कम रखिए हम अपना देख लेंगे
इतना बोल कर उसने वृंदा को वहीं छोड़ा और चला गया
वृंदा वही घुटनों के बल गिरते हुए रो पड़ी
तेजस ने भी अफसोस भरे लहजे में वृंदा को देखा और वहां से स्नान के लिए घाट पर चला गया
आधा घंटा बीता था तेजस वहां वापस आया तो उसने देखा सड़क पर जाम लगा हुआ था यह देखते ही उसे फिर से वृंदा की याद आई और वह तेज कदमों से भीड़ को चीरते हुए आगे की तरफ गया त वहां का नजारा देख कर उसकी आंखें फैल गई वृंदा यतीक्ष की गाड़ी के सामने खड़ी थी और चिल्लाते हुए बोल रही थी कि वह उसे छोड़कर आज नहीं जाएगी क्योंकि उसके घर वाले उसे जान से मार देंगे अगर वह आज वापस चली गई आज अगर यतीक्ष ने उसका साथ छोड़ा तो उसके घर वाले भी उसका साथ नहीं देंगे
तेजस ने तेज कदमों से चल कर वृंदा के पास जाकर कहा
" क्या तमाशा है ये? चलो यहां से !"
तेजस के साथ कुछ और पंडित भी आए जिन्हें लग रहा था वृंदा की वजह से घाट की शांति भंग हो रही है
और उन्होंने भी तेजस का साथ दिया सब गुस्से में सिर्फ वृंदा को घुर रहे थे
वृंदा ने तेजस की तरफ देख कर जाड़ पीसते हुए कहा
" आपको यह तमाशा लग रहा है मेरा प्यार मुझे छोड़ कर जा रहा है और आप कह रहे हो मैं तमाशा कर रही हूं "
तेजस ने थोड़ा आराम भरे लहजे में कहा
" देखो अभी तुम्हारी उम्र कम है तुम अपने घर वापस चली जाओ तुम्हें कोई कुछ नहीं कहेगा मैं खुद तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ कर आऊंगा पर यहां तमाशा मत करो वह लड़का वह तुमसे प्यार नहीं करता है यह साफ-साफ दिखाई दे रहा है सबको तुम अंधी हो क्या? "
इतना बोल कर तेजस ने वृंदा का हाथ पकड़ने की कोशिश की और वृंदा ने एक थप्पड़ उसके गाल पर जड़ते हुए कहा
" मुझे छूने की कोशिश भी मत करना और वह मुझसे प्यार करता है या नहीं यह सिर्फ मुझे पता है आपको नहीं "
तेजस ने गुस्से में अपनी मुठिया कस ली पर उसने मुड़कर वृंदा को कुछ नहीं कहा और वहां से अपने कदम पीछे बढ़ा दिए
कार में बैठी यतीक्ष की मां अब गुस्से से लाल हो चुकी थी उनकी बनारस में अलग पहचान थी वह बनारस का सबसे अमीर खानदान था उसके बावजूद उनकी इतनी इंसल्ट हो रही थी उन्होंने यदि उन्होंने ड्राइवर की तरफ देखते हुए कहा
" चलो ड्राइवर घर चलते हैं अगर रास्ते में कीड़े मकोड़े मरते हैं तो इसमें हमारी गलती नहीं है क्योंकि रास्ता उनके बाप का नहीं है "
ड्राइवर ने डरते हुए अपना सलाइवा ग़टका और हा मै सर हिलाते हुए कार स्टार्ट कर दी कर स्टार्ट होते ही सारी भीड़ रास्ते से हट गई पर वृंदा बेसूद सी वही खड़ी थी
उसकी लाल आंखें या अब भी यतीक्ष के चेहरे पर टिकी थी शायद वह एक बार उसे प्यार से देख कर कहे कि वह उससे प्यार करता है और उससे शादी करेगा अभी करेगा
पर उसके साथ उल्टा हुआ गाड़ी फुल स्पीड से आई और उसे एक टक्कर मारते हुए आगे चली गई वृंदा की एक चीख गूंजी और अगले ही पल वो खून से लथपथ सड़क के किनारे गिर पड़ी और सारी भीड़ में हंगामा मच गया लोगों ने एंबुलेंस को कॉल किया और वृंदा को अस्पताल में एडमिट करवाया
पर इन सब में तेजस ने मुड़कर वृंदा को नहीं देखा वह गुस्से से वापस जयपुर के लिए निकल गया उसके दिमाग में वृंदा का वह चेहरा बस चुका था और उसका वह थप्पड़ अब भी उसके कानों में गूंज रहा था
" वो लड़की यही डिजर्व करती है, अब अक्ल आ जाएगी उसे "
पर एक सवाल उसके जहन में घूम गया
" क्या वो जिंदा बच पाएगी?"
Flash back end
राजवंश मेंशन के सामने गाड़ी एक ब्रेक के साथ रुकी और इसी के साथ तेजस अपने अतीत से बाहर आ गया