Reborn a magical son Ch. 3

Reborn a magical son - Chapter 3

Posted by Evil queen era.. Dora • May 15, 2025 10:17 PM

आर्यन अपनी माँ की over-the-top क्यूटनेस को एंजॉय कर रहा था। "चलो, भगवान ने माँ तो अच्छी दी है!"

लेकिन असली मज़ा तो अब शुरू होने वाला था।

"आर्यन, आज मैं तुम्हें कुछ खास सिखाने वाली हूँ। चलो ध्यान करते हैं। शायद तुम भी मेरी तरह पृथ्वी तत्व के मास्टर बन जाओ!"

"ओह! अब यह दिलचस्प हो रहा है।"

उसकी माँ ने उसे उठाया और खुद पालथी मारकर जमीन पर बैठ गईं। फिर उन्होंने उसकी कमर में गुदगुदी की।

"मॉम! हद है, पहले जादू सिखाओ, बाद में खेल लेंगे!"

फिर अचानक उनकी आँखें बंद हो गईं। और माहौल बदल गया।

कमरा अचानक चमकने लगा। छोटे-छोटे हरे कण, रेत के कणों की तरह, हवा में तैरने लगे। ये कण उसकी माँ के चारों ओर घूमते रहे और उनकी त्वचा में समा गए।

"ओ माई गॉड! यह क्या मैजिक चल रहा है?"

"[ये पृथ्वी तत्व के कण हैं। तुम्हारी माँ इन्हें अपने शरीर में खींच रही हैं।]"

आर्यन की आँखें चमक उठीं। "भाईसाहब, यह तो ड्रैगन बॉल Z जैसा लग रहा है!"

करीब एक घंटे तक उसकी माँ ने कण को अपनी कोर में इकट्ठा किया। फिर उसने आँखें खोलीं, मुस्कुराते हुए आर्यन के माथे पर किस किया और उसे वापस पालने में सुला दिया।

लेकिन आर्यन अब रुकने वाला नहीं था।

"क्या मैं भी यह कर सकता हूँ?" उसने अपने सिस्टम से पूछा।

"[बिल्कुल। सिद्धांत डाउनलोड किया जा रहा है… हो गया!]"

आर्यन ने अपनी आँखें बंद कीं और तुरंत ध्यान लगाना शुरू कर दिया।

तुरंत, पूरा कमरा रंग-बिरंगे कणों से भर गया। हरा, नीला, लाल, और चांदी का… सबकुछ आर्यन की ओर खिंचने लगा।

"भाई, यह तो RGB लाइटिंग जैसा लग रहा है। शक्ति के साथ गेमिंग कंप्यूटर मिल गया!"

धीरे-धीरे, उसके शरीर में चार छोटे पत्थर बनने लगे—हरे, नीले, लाल और चांदी के।

"तो इसका मतलब है कि मैं चारों तत्वों का मास्टर बन सकता हूँ? सुपरहीरो मूवी तैयार!"

"[सही कहा। लेकिन शायद यह सबकुछ नहीं है। इस दुनिया में और भी तत्व हो सकते हैं।]"

आर्यन अब पूरी तरह से pumped up था। "भगवान ने पूरे VIP पास दे दिए हैं। मजा आ गया!"

लेकिन थोड़ी देर में…

"भाई, यह तो बहुत थकाने वाला है।"

"[कोई दिक्कत नहीं। सोते वक्त स्वचालित माना संग्रहण चालू कर दिया जाएगा।]"

आर्यन ने चैन की नींद ली, लेकिन कण उसके अंदर धीरे-धीरे खिंचता रहा।

इस बीच, उसकी माँ कमरे में वापस आईं। उन्होंने देखा कि कमरे में पृथ्वी तत्व का कण कम हो गया है।

"हम्म, यह कैसे हो गया?" उन्होंने सोचा। फिर कंधे उचका कर चली गईं।

"हेहे, मॉम को पता ही नहीं कि उनका बेटा पहले से ही मास्टर प्लान पर काम कर रहा है!"

कुछ महीने बीत गए, और आर्यन अपने 'बेबी ड्यूटीज़' में फंसा रहा – मतलब, दिनभर सिर्फ सोना और रोना। लेकिन भाई, सिर्फ इतना ही करना हर दिन? बोरियत की तो हद हो गई!

आर्यन को अगर कुछ बचा रहा था तो वो था "कण कलेक्शन"। हर दिन वो अपने आस-पास की एनर्जी को खींचता, जैसे कोई वैक्यूम क्लीनर ऑन कर दिया हो। और फिर वो उस एनर्जी से अपने शरीर के अंदर के "एलिमेंटल पत्थरों" को मजबूत करता।

धीरे-धीरे आर्यन को समझ आने लगा कि जैसे-जैसे वो ज्यादा कणों को खींच रहा था, उसकी "माना सेंसिंग पावर" सुपरहीरो की तरह तेज हो रही थी। अब तो वो आराम से बता सकता था कि हवा में कौन-कौन से एलिमेंट घूम रहे हैं और कितनी मात्रा में। मतलब, हवा का पूरा एक्स-रे स्कैन!

लेकिन बस इतना ही नहीं। माना कलेक्ट करते-करते उसके नन्हे शरीर में ऐसी तगड़ी एनर्जी आ गई कि अब वो लगभग खड़ा होने की कोशिश करने लगा। सोचो, एक बेबी जो साइड में एक्शन हीरो की तरह पोज़ दे रहा हो!

लेकिन यह उसके लिए सिर्फ शुरुआत थी!

कण को अपने शरीर में लगातार इकट्ठा करना सिर्फ एक साधारण फायदा नहीं था। किसी जादुई चमत्कार की तरह, उसने अपने नन्हे शरीर को इतना मजबूत बना लिया था कि वो अब लगभग खड़ा होने की हालत में था!

हालाँकि, वो इस एक्सरसाइज़ को तब ही करता, जब उसे पूरा अकेला टाइम मिलता। और सच कहें तो, अकेले टाइम का तो ऐसा अकाल पड़ा हुआ था कि पूछो मत!

अगर वो अपनी माँ की गोद में झूलता न मिलता, तो यकीन मानिए, वो किसी नौकरानी की गोद में चुटकी खाता हुआ मिलता। पूरे महल में सबको जैसे उसकी क्यूटनेस का खुमार चढ़ गया था। नौकरानियां उसे इधर-उधर घुमाते-घुमाते सबकुछ दिखा देतीं, और बीच-बीच में उसकी प्यारी गालों पर चुटकी काटने से बाज़ नहीं आतीं।

ऐसा लग रहा था जैसे भगवान ने उसे क्यूटनेस और चार्म का परफेक्ट कॉम्बो पैक बनाकर भेजा था। ऊपर से हैंडसमनेस का ऐसा टच दिया था कि कोई भी उसे गोद में लेने के लिए बेताब हो जाता।

वो, जैसा कहते हैं, "खुशियां भी दुःख की शक्ल में आ सकती हैं" वाली सिचुएशन में था। और हाँ, जितना अजीब ये लगता है, उतना ही सच्चा था कि क्यूटनेस के इस करिश्मे के साथ उसे सुकून का एक सेकेंड तक नहीं मिलता था!

और सोचो, ये बात कितनी अजीब है कि आर्यन को अपने मम्मी-पापा का नाम जानने में पूरे दो महीने लग गए! अब ऐसा क्यों? क्योंकि उनकी मम्मी ने उन्हें सिर्फ "मॉमी" कहने की इजाज़त दी थी। और उनके पापा? वो तो जैसे घर में आने का रास्ता भूल ही गए थे!

आर्यन ने उनकी छोटी-मोटी नोकझोंक से ये समझ लिया था कि पापा किसी ऐसे बिज़नेस में बिज़ी थे जो उन्हें दिन-रात घर से बाहर रखता। पर मम्मी को ये बिल्कुल पसंद नहीं था। मम्मी अक्सर गुस्से में भुनभुनाते हुए कुछ बोलतीं - "क्रिस्टल पैलेस" या ऐसा ही कुछ। पर बेचारा आर्यन, उसे तो ये भी नहीं पता था कि ये क्रिस्टल पैलेस कौन सी जगह है!

आखिरकार, आर्यन को अपनी मम्मी और पापा का नाम तब पता चला, जब उसने नौकर-चाकरों की गपशप पर ध्यान दिया। पता चला कि उनकी मम्मी का नाम था "शालिनी," और पापा का "समर।"

और रही बात आर्यन की, तो उसका पूरा नाम था - आर्यन समर बजाज। सुनने में ऐसा लगता था जैसे किसी राजा-रजवाड़े का वारिस हो।

वैसे, बजाज खानदान का दावा था कि वो दुनिया के सबसे अमीर खानदानों में से एक हैं। लेकिन आर्यन के दिमाग में तो सिर्फ एक सवाल घूम रहा था – "पापा को आखिर ये क्रिस्टल पैलेस वाले काम से कब छुट्टी मिलेगी?"

भले ही बजाज परिवार अमीरों के राजा हों, लेकिन सोचने वाली बात ये है कि उनके पास एक भी एयर-कंडीशनिंग यूनिट नहीं थी। आर्यन का पूरा भरोसा बस इस बात पर था कि बड़ा होकर उसे अपने खानदान से मोटी-मोटी जायदाद मिलने वाली है। और वो उस पैसे से अपनी ज़िंदगी को एकदम मस्त और आरामदायक बना सकता है।

लेकिन अभी तो उसे इंतजार करना था, जब तक वो बड़ा नहीं हो जाता। फिलहाल, उसके पास कोई ऑप्शन नहीं था सिवाय अपने "बेबी लाइफ" को जीने के।

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