गृह प्रवेश
दुल्हन धीरे-धीरे कदमों से ऋषि के पास आ रही थी। उसे इतना धीरे चलता देख ऋषि चिढ़ गया।
ऋषि: "पूरा दिन नहीं है मेरे पास इंतज़ार करने के लिए। प्लीज थोड़ा जल्दी आओ।"
दुल्हन जल्दी-जल्दी ऋषि के पास पहुँची। एक नौकर आकर मेन डोर खोला।
जैसे ही दोनों अंदर आने वाले थे, एक महिला की आवाज़ आई, "वहीं रुक जाओ!"
जब दोनों ऊपर की तरफ़ देखे तो एक पचपन वर्षीय महिला सीढ़ियों से नीचे आ रही थी। वह महिला सीधे ऋषि और दुल्हन की तरफ़ आई और गुस्से भरी नज़र से ऋषि को देखते हुए बोली,
"मतलब जो न्यूज़ में सुन रही थी, वो सही थी! 😡 तुमने सच में किसी की शादी में जाकर उसी की दुल्हन से शादी कर ली! ऋषि, तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? 😠"
ऋषि: "बड़ी माँ, मैं आपको सब बताता हूँ। बात वैसी नहीं है जैसा आप समझ रही हैं।"
बड़ी माँ: "और क्या समझना बाकी है? बोलो! आज सुबह की ताज़ा खबर यही है कि नामी बिज़नेसमैन ऋषि नंदा ने किसी की शादी में जाकर जबरदस्ती उसकी दुल्हन से शादी कर ली। सारे न्यूज़ चैनल, अख़बार, मैगज़ीन में यही टॉपिक चल रहा है। इसके बारे में क्या कहोगे तुम?"
ऋषि सूरज को घूरकर देखता है।
सूरज: "सर, वहाँ इतने सारे लोग थे, हो सकता है किसी ने चुपके से फ़ोटो लेकर मीडिया में लीक कर दी हो। आप परेशान मत होइए, मैं पता करता हूँ।"
ऋषि: "बड़ी माँ, मैं इस न्यूज़ को रुकवाता हूँ। आप परेशान मत होइए।"
बड़ी माँ: "ऋषि, मैं उस न्यूज़ से नहीं, इस बात से परेशान हूँ कि तुमने शादी कर ली, वो भी ऐसे।"
ऋषि: "बड़ी माँ, इस बारे में बाद में बात करेंगे, फ़िलहाल हमें अंदर आने दीजिए।"
बड़ी माँ: "बेटा, हर चीज़ का एक तरीका होता है। शादी तुमने अपनी मनमानी से कर ली है, कम से कम बहू का घर प्रवेश तो ठीक से करने दो।"
ऋषि: "बड़ी माँ, आपको जो करना है, थोड़ा जल्दी कीजिए, मेरी मीटिंग है।"
बड़ी माँ ने घर की एक नौकरानी, नीमो, को आवाज़ दी, "नीमो, आरती का सामान लेकर आओ।"
नीमो आरती का सामान और गृह प्रवेश का सामान वहाँ रख देती है।
बड़ी माँ ने ऋषि और दुल्हन की आरती की और दुल्हन से कहा,
बड़ी माँ: "बहू, अपने दाएँ पैर से इस कलश को गिराओ और कुंकुम से पैर रखकर इस घर में प्रवेश करो।"
दुल्हन वैसा ही करती है जैसा उसे कहा जाता है। अंदर आने के बाद बड़ी माँ सबको सोफ़े पर बिठा देती है। और घर के सभी नौकर वहाँ मौजूद हो जाते हैं। नीमो बड़ी माँ से कहती है, "मालकिन, दुल्हन का चेहरा तो दिखाओ।"
बड़ी माँ: "अरे, अभी तक तो मैंने खुद अपनी बहू का चेहरा नहीं देखा है। पहले मैं तो देख लूँ।"
बड़ी माँ धीरे से जाती है और दुल्हन का घूँघट, जो उसके चेहरे पर आधा ढँका हुआ था, उठाकर उसका चेहरा देखती है।
सब लोग दुल्हन का चेहरा देखकर दंग रह जाते हैं। इतनी प्यारी सी गुड़िया थी कि जिसे कोई एक बार देख ले तो नज़र न हटा सके। ऐसा लग रहा था जैसे आसमान से एक नाज़ुक सी परी लाल जोड़े में उनके सामने आकर बैठी है। एकदम दूधिया रंग का चेहरा, झील सी आँखें (रोने की वजह से थोड़ी लाल हो गई थीं), गुलाबी होंठ। इतनी प्यारी सी लड़की को देखकर सबका मन खुश हो गया। तभी नीमो बड़ी माँ से कहती है,
नीमो: "मालकिन, दुल्हन तो लाखों में एक है। अब इतनी प्यारी बहू मिली है, तो नेग तो बनता है।"
बड़ी माँ: "अरे, चुप करो! सब मेरी बहू को नज़र मत लगाओ।"
बड़ी माँ ने अपने हाथ से कंगन उतारकर दुल्हन के हाथ में पहनाया। दुल्हन कंगन को देखकर अपना सर झुकाती है, तो बड़ी माँ कहती है, "बहू, ये मुँह-दिखाई का है, खाली हाथ बहू का मुँह नहीं देखूंगी..." दुल्हन कंगन पहनने के बाद बड़ी माँ के पैर छूती है, तो बड़ी माँ उसे गले लगा लेती है।
तभी नीमो पूछती है, "मालकिन, बहू का नाम क्या है?" इस पर बड़ी माँ ऋषि की तरफ़ देखती है, तो वह चुप रहता है और कहता है,
ऋषि: "मुझे नहीं पता, और न मैंने पूछा। आप खुद ही पूछ लीजिए।"
बड़ी माँ दुल्हन की तरफ़ देखकर कहती है, "बेटा, तुम्हारा नाम क्या है?"
ये सुनकर दुल्हन परेशान हो जाती है, उसके चेहरे पर घबराहट साफ़ दिख रही थी।
बड़ी माँ: "परेशान होने की ज़रूरत नहीं, हम बस तुम्हारा नाम जानना चाहते हैं।"
दुल्हन फिर भी ख़ामोश रहती है।
बड़ी माँ: "बेटा, अगर नाम नहीं बताओगी तो हम बुलाएँगे कैसे?"
दुल्हन फिर भी परेशान और ख़ामोश खड़ी रहती है।
इतने में ऋषि भी परेशान हो जाता है। वह सोफ़े से उठकर खड़ा होता है और चिल्लाते हुए दुल्हन से कहता है,
ऋषि: "सब इतनी देर से नाम पूछ रहे हैं, आपका नाम नहीं बताया जा रहा है!"
ऋषि की इतनी रौबदार आवाज़ सुनकर दुल्हन पूरी तरह से काँप जाती है और उसकी आँखों से मोटे-मोटे आँसू निकलने लगते हैं।
दुल्हन को रोता देख बड़ी माँ ऋषि को डाँट लगाती है।
बड़ी माँ: "पागल हो गया क्या? कैसे बातें कर रहा है बहू से? एक तो जबरदस्ती से शादी करके ले आया है और अब चिल्ला रहा है। ख़बरदार, जो बहू से ऊँची आवाज़ में बात की! देख नहीं रहा, बेचारी कितनी डरी हुई है।"
ऋषि बड़ी माँ को कुछ कहने वाला होता है कि बड़ी माँ उसे उंगली दिखाकर चुप रहने का इशारा करती है और दुल्हन के पास जाकर उसे प्यार से पूछती है,
बड़ी माँ: "बेटा, इसकी बातों का बुरा मत मानो, ये है ही ऐसा। ये बचपन से मेरे साथ है, आज तक मैं ही नहीं समझ पाई इसे, फिर तुम तो अभी आई हो। धीरे-धीरे से पहचान जाओगी।"
"पर बात तो ऋषि की भी गलत नहीं है, तुम अपना नाम ही नहीं बताना चाह रही हो। सब कितने प्यार से पूछ रहे हैं, तुम्हारा नाम बता दो।"
तभी पीछे से नीमो आती है और कहती है, "अरे क्या बात है? दुल्हन, सब इतनी देर से नाम पूछ रहे हैं, नाम बता दो, क्या बात है? बोल नहीं सकती हो क्या?"
दुल्हन अपना सिर हाँ में हिलाती है।
यह देखकर सभी चौंक जाते हैं।😳
दुल्हन के सिर हिलाने पर सब एकदम से चौंक जाते हैं।😳😳
बड़ी माँ दुल्हन के पास आती है और कहती है,
बड़ी माँ: "बेटा, नीमो तो बस यूँ ही पूछ लिया था, कि तुम बोल नहीं सकती हो, तुम अपना सिर हाँ में क्यों हिला रही हो?"
दुल्हन अपनी एक उंगली अपने होठों पर रखती है और अपने सिर को ना में हिलाती है; वह इशारे में बताने की कोशिश करती है कि वह बोल नहीं सकती।
बड़ी माँ, ऋषि, सूरज, नीमो और सारे नौकर यह देखकर पूरी तरह से चौंक जाते हैं।
दो मिनट के लिए तो बड़ी माँ भी किसी सदमे में पहुँच जाती है, फिर वह खुद को संभालती है और फिर से पूछती है,
बड़ी माँ: "तुम बोल नहीं सकती? 😳"
दुल्हन अपना सिर हाँ में हिलाती है।
ऋषि दुल्हन के सामने आता है और चिल्लाते हुए कहता है, "क्या तुम बोल नहीं सकती? यह बात तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताई?"
बड़ी माँ: "जब बोल ही नहीं सकती तो कहाँ से बताएगी?"
इस पर सूरज बोलता है, "सॉरी सर, बीच में बोलने के लिए। आपने मैडम से बात ही नहीं की थी, आप तो सीधे शादी करके ले आए हैं। पूरे रास्ते आपने मैडम से कोई बात नहीं की, और न ही इनके बारे में कुछ जानने की कोशिश की। मैंने देखा था, शादी के मंडप पर आपने तो बंदूक की नोक पर इनसे शादी की है। और मैडम उस समय जितनी घबराई हुई थीं, वो क्या ही अपने बारे में बताती आपको।"
सूरज की बात सुनकर ऋषि एकदम खामोश हो गया, क्योंकि कहीं न कहीं सूरज सच ही तो बोल रहा था।
सूरज की बात सुनकर बड़ी माँ ऋषि की तरफ़ देखती है और कहती है, "ऋषि, बहू के सामने हटो, मैं बात करती हूँ।"
ऋषि सामने से हट जाता है। बड़ी माँ दुल्हन को अपने पास बुलाती है और उसे सोफ़े पर बिठाती है। प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहती है,
"देखो बेटा, हमें अफ़सोस हुआ ये जानकर कि तुम बोल नहीं सकती। हमें तुम्हारे बारे में कुछ तो जानना होगा ना। अब तुम ही बता दो, तुम अपना नाम हमें किस तरीके से बताओगी?"
दुल्हन कुछ सोचती है, फिर इधर-उधर नज़र दौड़ाती है। उसे सामने की टेबल पर कुछ डॉक्यूमेंट के साथ एक पेन नज़र आता है और सामने ही एक न्यूज़पेपर है जिसमें ऋषि और उसकी शादी की एक फ़ोटो छपी हुई है। दुल्हन वो पेन उठाती है और उस पेपर पर अपनी फ़ोटो के बगल में अपना नाम लिखती है और बड़ी माँ को पकड़ा देती है। बड़ी माँ उस नाम को पढ़ती है और प्यार से बोलती है,
"...आराध्या..."
दुल्हन अपना चेहरा हाँ में हिलाती है। ऋषि, सूरज और सभी ये नाम सुनकर उसकी तरफ़ देखने लगते हैं।
बड़ी माँ: "बहुत प्यारा नाम है तुम्हारा।"
दुल्हन उसी नाम के बगल में कुछ और लिख देती है, जिसे बड़ी माँ फिर पढ़ती है, "...आरू... तुम्हें प्यार से आरू बुलाते हैं।"
आराध्या अपना सिर हाँ में हिलाती है।
बड़ी माँ आरू की तरफ़ देखती है और फिर कहती है, "आरू, तुम थक गई होगी इतने लम्बे सफ़र से। ऊपर से इतना हैवी जोड़ा... मुझे लगता है अब तुम्हें जाकर आराम करना चाहिए। नीमो, बहू को कमरे में ले जाओ। इसका नाश्ता भी कमरे में भेज देना।"
फिर बड़ी माँ आस-पास देखती है और कहती है, "सामान तो तुम अपना कुछ लाई नहीं होगी, क्या पहनोगी?"
आराध्या अपना सर नीचे कर लेती है। बड़ी माँ प्यार से उसके सर पर हाथ रखती है और कहती है, "अरे, परेशान क्यों हो रही हो? मैं हूँ ना यहाँ पर। तुम रूम में जाओ, जाकर फ़्रेश हो जाओ, मैं तुम्हारे लिए कपड़े भेजती हूँ। नीमो, इसे कमरे में ले जाओ।"
नीमो आराध्या को लेकर ऊपर कमरे में चली जाती है। उसके जाते ही बड़ी माँ के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ जाती है और वह ऋषि की तरफ़ देखते हुए कहती है, "तुम्हें नहीं पता था ना, वो बोल नहीं सकती?"
ऋषि: "नहीं बड़ी माँ, मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं पता था। मैं इसका नाम भी नहीं जानता था। अभी उसने जब आपको बताया तब जाकर पता चला कि इसका नाम आराध्या है।"
बड़ी माँ हँसते हुए कहती है, 😃😂 "भाई वाह! क्या ढूँढ़ कर मेरे लिए बहू लाए हो! दुनिया की हर सास ये चाहती है कि वो अपनी बहू से कुछ भी सुनाई उसकी बहू से पलट कर जवाब ना दे। 😄 और मेरी बहू तो सच में मुझे पलट कर जवाब नहीं देगी। 😂"
(यह सुनकर सभी हँसने लगते हैं।)
ऋषि: "आप परेशान मत होइए बड़ी माँ, मैं जल्दी इसके किसी फैमिली मेंबर का पता लगाकर इसे उसके पास भेज दूँगा।"
बड़ी माँ हैरानी से ऋषि को देखती है और कहती है, "पागल हो गए हो क्या? कहाँ भेज दोगे? शादी की है या मज़ाक किया है? पूरी दुनिया को पता है तुमने इससे शादी की है। अब ऐसे छोड़ दोगे तो कहाँ जाएगी बेचारी?"
ऋषि: "बड़ी माँ, मैंने शादी सिर्फ़ एक मकसद के लिए की है। इसके साथ घर नहीं बसाना है मुझे। मेरा मकसद सिर्फ़ गौतम अग्रवाल को सड़क पर लाना है, उसे उसकी कर्मों की सज़ा देनी है। जिस दिन मेरा मकसद पूरा हो जाएगा, मैं इस लड़की को उसके परिवार के पास छोड़ दूँगा। टेंशन मत लो, मैं इसके बदले इतने पैसे दूँगा कि इसे और इसके परिवार को ज़िंदगी भर काम करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। बस एक बार गौतम से मेरा बदला पूरा हो जाएगा, उसे सज़ा दिलवा दूँगा।"
बड़ी माँ: "गौतम अग्रवाल? ये तो वही लड़का है ना..."
ऋषि: "हाँ बड़ी माँ, वही है... और आराध्या की शादी इसी से हो रही थी। लेकिन तभी मैं पहुँच गया और मैंने इससे शादी कर ली, और इसके बदले गौतम को जो उसके दादा जी की प्रॉपर्टी मिलनी थी, उसमें से उसे कुछ भी नहीं मिला।"
बड़ी माँ ये सुनकर एकदम दंग रह जाती है।
उधर नीमो आराध्या को ऋषि के कमरे में छोड़कर जाती है। आराध्या जब कमरे में पहुँचती है तो उस कमरे को गौर से देखने लगती है। कमरा बहुत ही सुंदर और कीमती चीज़ों से सजा हुआ था। आराध्या की नज़र दीवार पर जाती है जहाँ ऋषि और प्रियंका की बहुत सारी फ़ोटोएँ हैं।