Silent heartbeat Ch. 1

गन पॉइंट पर शादी

Posted by unicorngirl ✔️ • May 14, 2025 07:33 AM

देहरादून की सड़कों पर सात गाड़ियों का काफिला जा रहा था। तीसरी कार की पिछली सीट पर एक हैंडसम आदमी बैठा था, सिर सीट पर टिकाए। उसकी आँखें बंद थीं, पर चेहरे पर गुस्सा साफ झलक रहा था। उसका गुस्सा इतना भड़का हुआ था कि वह पूरी दुनिया जला देना चाहता था। यह था ऋषि नंदा।

ऋषि नंदा, नंदा ग्रुप ऑफ़ इंडस्ट्रीज का इकलौता वारिस था। उसकी ऊँचाई छह फीट थी; मस्कुलर बॉडी, सिक्स पैक एब्स, गहरे भूरे रंग की आँखें और चेहरे पर तेज की चमक। एक कान में डायमंड की बाली और दाहिने हाथ पर महादेव का टैटू था।

ऋषि उस समय काफी गुस्से में था। ऋषि की कार में आगे उसका मैनेजर, सूरज, बैठा था।

"और कितना समय लगेगा?" ऋषि ने चिल्लाया।

"सर, बस बीस मिनट और," सूरज घबराते हुए बोला।

सूरज ऋषि के साथ कई सालों से काम करता था, इसलिए वह ऋषि के शॉर्ट टेंपर से अच्छी तरह वाकिफ़ था।

ऋषि ने जेब से अपना फ़ोन निकाला और गैलरी से एक फ़ोटो खोली। इस फ़ोटो में ऋषि और एक लड़की एक-दूसरे के गले में हाथ डाले हुए थे, और दोनों बहुत खुश लग रहे थे। उसने उस तस्वीर को बड़े प्यार से निहारा और मन में सोचा, "प्रियंका, आज मैं वह करने जा रहा हूँ, जिसके लिए शायद भगवान मुझे कभी माफ़ न करें, और मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता, भगवान मुझे माफ़ करें या न करें, पर आज मैं तुम्हें इंसाफ़ दिलाने जा रहा हूँ। काश तुम मेरे साथ होतीं, तो तुम खुद अपने हाथों से उसे सज़ा देतीं। तुम न सही, मैं तो हूँ। मैं उस इंसान को ऐसी सज़ा दूँगा कि वह सारी ज़िन्दगी नहीं भूल पाएगा।"

दूसरी तरफ, देहरादून के एक मैरिज हॉल में एक शादी का समारोह चल रहा था। पंडित जी अग्नि के पास बैठे मंत्र पढ़ रहे थे। "दूल्हे को बुलाइए," उन्होंने आवाज़ दी। एक पचपन वर्षीय महिला जाकर एक लड़के से बोली, "गौतम, चलो, पंडित जी बुला रहे हैं।"

गौतम अपने दोस्तों के बीच से उठकर सीधे मंडप पर पंडित जी के पास पहुँचा और बैठ गया। पंडित जी गौतम के साथ कुछ मंत्र उच्चारण कर रहे थे। कुछ देर बाद, उन्होंने कहा, "कन्या को बुलाइए..." कुछ लड़कियाँ ऊपर हॉल के कमरे में गईं। वहाँ एक बाईस-तेईस साल की लड़की लाल शादी के जोड़े में सजी-धजी बैठी हुई थी। लड़कियाँ उसके पास आईं और कहने लगीं, "चलो, पंडित जी तुम्हें बुला रहे हैं।"

दुल्हन ने नज़रें उठाकर आईने में देखा। उसकी आँखों में आँसुओं का सैलाब था, उसका चेहरा मुरझाया हुआ था।

एक लड़की दुल्हन के पास आई और हैरानी से पूछा, "अरे यार, तुम रो क्यों रही हो? यह तो कितनी अच्छी बात है कि तुम्हारी शादी इतने बड़े घराने में हो रही है। वरना कौन तुम जैसी लड़की से शादी करता?"

"तुम्हें तो उन लोगों का एहसानमंद होना चाहिए। तुम्हें बिना दहेज़, बिना किसी समझौते, बस तुमसे शादी कर रहे हैं। सारी ज़िन्दगी उनके पैर धोओगी, तब भी कम पड़ेगा..."

लड़कियाँ दुल्हन को लेकर नीचे मंडप पर आईं और उसे गौतम के बगल में बिठा दिया। गौतम ने एक नज़र दुल्हन को देखा और मुस्कुराते हुए सामने देखने लगा।

जैसे ही पंडित जी दुल्हन की मांग भरने के लिए सिंदूर उठाने लगे, बाहर गाड़ियों के रुकने की आवाज़ आई। सब उस शोर से चौंक गए। कुछ ही समय में कई बॉडीगार्ड अंदर आ गए और हवा में फायरिंग शुरू कर दी। सब लोग फायरिंग से डर गए। गौतम के हाथ-पैर काँपने लगे और सिंदूर उसके हाथ से छूट गया। उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है।

तभी हॉल में ऋषि की एंट्री हुई। वह हॉल में आया और सब लोगों को एकटक देखने लगा। उसने अपने चश्मे उतारे। सब लोग ऋषि को देखकर हैरान हो गए, क्योंकि ऋषि नंदा कोई आम इंसान नहीं था; इंडिया के टॉप टेन बिज़नेसमैन में से एक। भीड़ में दबी आवाज़ें आने लगीं, "अरे, ये तो ऋषि नंदा है ना... हाँ, ये तो वही है... ऋषि नंदा यहाँ क्या कर रहा है...?"

ऋषि सीधे मंडप के सामने आकर खड़ा हुआ और एक नज़र गौतम को देखा। ऋषि की आँखों में गुस्सा साफ़ नज़र आ रहा था। ऋषि को देखकर गौतम और दुल्हन दोनों घबरा गए।

ऋषि ने सबकी तरफ़ देखा और कहा, "आप सबका यहाँ आने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, पर क्या है ना, अब Mr. गौतम की शादी तो होने से रही। आप लोग आ ही गए हैं, तो खाना खाकर जाइए।"

गौतम गुस्से में उठा और उसकी तरफ़ उंगली करके बोला, "Mr. नंदा, ये क्या हरकत है? आप मेरी शादी में आकर ये क्या तमाशा कर रहे हैं?"

ऋषि ने गौतम की तरफ़ देखा और कहा, "तुम्हारी शादी अभी तक हुई नहीं है, और अब मैं आ गया हूँ, तो नहीं होने दूँगा।"

"आप चाहते क्या हैं? मेरी तो आपसे कोई दुश्मनी भी नहीं है," गौतम ने कहा।

"दुश्मनी तो तुम्हारी मेरी बहुत गहरी है। वक़्त आने पर तुम्हें सब पता चल जाएगा। और बात रही कि मैं चाहता क्या हूँ, तो फ़िलहाल के लिए तो मुझे तुम्हारी दुल्हन चाहिए," ऋषि ने कहा।

ऋषि के ये शब्द सुनकर गौतम गुस्से से उसकी तरफ़ बढ़ा, पर ऋषि को छूने से पहले ही सारे बॉडीगार्ड ने उसे घेर लिया और गौतम के सिर पर बंदूक रख दी।

गौतम एकदम से डर गया। उसे अपनी मौत सामने नज़र आ रही थी।

ऋषि गौतम के सामने आया और उसकी आँखों में आँखें डालकर बोला, "गुनाहगार तुम हो, इस लड़की की कोई गलती नहीं है। जिसे तुम शादी करना चाहते थे, उससे मैं शादी करूँगा। वैसे, तुम्हारी गलतियों की सज़ा मैं बाद में दूँगा..."

यह बोलकर ऋषि मंडप की तरफ़ जाने लगा। एक बॉडीगार्ड ने दुल्हन के सिर पर बंदूक रख दी। दुल्हन पहले से ही घबराई हुई थी, अब ये बंदूक देखकर उसकी हालत और भी ख़राब हो गई।

ऋषि आया और मंडप पर बैठ गया और पंडित जी से मंत्र शुरू करने के लिए कहा। डर के मारे पंडित जी ने मंत्र शुरू कर दिए।

पंडित जी ने ऋषि को फेरों के लिए खड़ा होने को कहा। ऋषि खड़ा हो गया, पर दुल्हन इतनी डरी हुई थी कि उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था, और वह फेरों के लिए खड़ी नहीं हुई। ऋषि ने देखा कि वह लड़की डर के मारे खड़ी नहीं हो रही है, तो उसने उस लड़की को अपनी गोद में उठा लिया और उसे गोद में लेकर फेरे पूरे कर लिए।

थोड़ी ही देर में ऋषि और दुल्हन की शादी संपन्न हो गई। दुल्हन की मांग भरकर और उसके गले में मंगलसूत्र पहनाकर, ऋषि उसका हाथ पकड़कर गौतम के सामने आया और बोला, "Mr. गौतम, आपकी शादी तो होने से रही, पर अब मेरी हो गई है। अब ये मेरी पत्नी है। ये तो सिर्फ़ एक सरप्राइज़ था आपके लिए, दूसरा सरप्राइज़ अभी बाकी है।"

ऋषि के इतना कहने पर वहाँ कुछ लोग आ गए।

ऋषि उनकी तरफ़ देखा और गौतम से कहा, "...दूसरा सरप्राइज़ सामने से आ रहा है।"

गौतम ने नज़रें उठाईं तो वकील थे; कई वकील। इतने सारे वकीलों को एक साथ देखकर गौतम पूरी तरह से चौंक गया।

तभी वे वकील ऋषि के सामने आये और उनमें से एक वकील ने गौतम से कहा, "Mr. गौतम, आपके दादा जी की वसीयत के मुताबिक, आपको अपने 25वें जन्मदिन से पहले शादी करनी थी। तभी उनकी सारी प्रॉपर्टी आपके नाम होती। और समय के मुताबिक, अभी 12 बज चुके हैं, और आप अपने 26वें साल में प्रवेश कर चुके हैं। और जहाँ तक हमें दिख रहा है, आपकी शादी नहीं हुई है। इसलिए वसीयत के मुताबिक आपको आपके दादा जी की प्रॉपर्टी और जायदाद में से कुछ नहीं मिलेगा।"

गौतम यह सुनकर तिलमिला गया। वह गुस्से में बोला, "क्या बकवास कर रहे हो? मैं यहाँ शादी करने ही आया था, पर मेरी शादी होने वाली थी उससे पहले ही Mr. ऋषि नंदा ने शादी कर ली है। अब आप कह रहे हैं कि मुझे उनकी विरासत नहीं मिलेगी? ये तो मेरे साथ धोखा हुआ है ना! मैंने उस जायदाद के लिए बहुत इंतज़ार किया है। अब मैं उसे ऐसे ही नहीं जाने दूँगा। कोई और उपाय बताइए।"

"सॉरी Mr. गौतम, पर हम कुछ नहीं कर सकते," वकील ने कहा।

गौतम गुस्से में आकर वकील का गिरेबान पकड़ लिया। वकील उसे छुड़ाते हुए धमकी भरे लहजे में बोले, "अपनी हद में रहिए Mr. गौतम, आप कानून को अपने हाथ में ले रहे हैं। अगर हमने कोई कार्रवाई कर ली तो आपको जमानत नहीं मिलेगी।"

वकील गौतम के हाथ में एक कागज़ थमाकर चले गए।

गौतम आँखें फाड़े उस कागज़ को देख रहा था।

इतने में ऋषि गौतम के सामने आया और मुस्कुराया। "क्या बात है गौतम जी? जिस प्रॉपर्टी के लिए इतनी मेहनत की, वो तो आपको मिली नहीं, और शादी करने आए थे, दुल्हन भी नहीं मिली।"

गौतम ऋषि की तरफ़ देखा और बोला, "आपका ये सब करने का क्या मकसद था? मेरी तो आपसे कोई दुश्मनी भी नहीं है, मैं आपको पर्सनली जानता भी नहीं हूँ। तो फिर आपने मेरे साथ ऐसा क्यों किया?"

"ऐसा तुम्हें लगता है कि मेरी तुम्हारी कोई दुश्मनी नहीं है? और मैं ऐसे लोगों की शादी में जाकर उनकी दुल्हन से शादी कर लेता हूँ? Mr. गौतम, दुश्मनी तो आपसे बहुत गहरी है। और ये तो बस शुरुआत है। फ़िलहाल तो तुम्हें तुम्हारे दादा जी की विरासत नहीं मिली है और न ही तुम्हें दुल्हन मिली है। अभी भी तुम्हारे पास बहुत कुछ है जो मुझे चाहिए; तुम्हारा वो एम्पायर जो तुमने खड़ा किया है, मैं उसे सड़क पर ला दूँगा। मेरा नाम भी ऋषि नंदा नहीं है।"

ऋषि गौतम को सरेआम धमकी देकर जाने लगा, पर इससे पहले कि वह जा पाता, उसके गले में पड़े शादी के जोड़े से, जिसमें दुल्हन की चुनरी बंधी हुई थी, वह छूट गई।

ऋषि पलटकर देखा तो दुल्हन वहीं बर्फ की तरह जमी हुई थी, अपनी जगह से हिल नहीं पा रही थी, और वह गहरे सदमे में पहुँच गई थी।

ऋषि धीरे से उसके पास आया और उसका हाथ पकड़कर उसे अपने साथ ले गया। उसके पीछे उसके सारे बॉडीगार्ड भी बाहर आ गए। ऋषि अपनी कार के पास पहुँचा। एक बॉडीगार्ड ने कार का दरवाज़ा खोला। ऋषि ने दुल्हन को कार में बिठाया और खुद दूसरी तरफ़ जाकर बैठ गया। ऋषि के बाद सारी गाड़ियों का काफिला दिल्ली के लिए रवाना हो गया।

कार में सन्नाटा छाया हुआ था। करीब एक घंटा बीत गया; गाड़ी में पिन ड्रॉप साइलेंस था। ऋषि ने दुल्हन को देखा। उसकी आँखें आँसुओं से भरी हुई थीं, रोने की वजह से पूरा चेहरा लाल हो गया था। उसके मुँह से कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी, पर आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे।

उसे इस तरह रोता देख ऋषि को बुरा लगा। उसने जल्दी से पानी की बोतल निकाली और दुल्हन को दी।

"पानी पी लो, इतना रोओगी तो तबीयत ख़राब हो जाएगी," ऋषि ने कहा।

लड़की ने धीरे से पानी की बोतल ली और थोड़ा-थोड़ा करके पानी पीने लगी। उसने अपने पास रखे रुमाल से आँसू पोछने लगी।

करीब छह घंटे के सफ़र के बाद सब दिल्ली पहुँच गए। गाड़ियों का काफिला दिल्ली के एक पॉश इलाके में आकर रुका। सब इतने थक गए थे कि गाड़ियों में ही सो गए। जैसे ही गाड़ी को ब्रेक लगा, ऋषि की नींद खुली। उसने आँखें खोलीं तो पाया कि वह अपने घर के गार्डन में है। वह गाड़ी से उतरने वाला था कि उसका ध्यान अपने बगल में बैठी दुल्हन पर गया, जो गाड़ी के शीशे पर सिर रखकर सो रही थी। ऋषि ने दुल्हन को देखा, फिर सामने बैठे सूरज से कहा,

"इसे उठाओ, बोलो घर आ गए," ऋषि ने कहा।

सूरज गाड़ी से उतरा और दुल्हन के दरवाज़े पर जाकर धीरे से बोला, "भाभी जी..."

दुल्हन को "भाभी" कहने पर ऋषि ने उसे घूरकर देखा।

सूरज ने अपने शब्दों को वापस लेते हुए फिर कहा, "मैडम... मैडम, उठिए, घर आ गए।"

दुल्हन की आँख खुली। धीरे-धीरे उसने आँखें खोलीं और बाहर देखा। बाहर का नज़ारा देखकर वह दंग रह गई। वह एक बहुत बड़े बंगले के सामने खड़ी थी। आस-पास फूलों से बना एक बहुत बड़ा बगीचा था, जहाँ पर फाउंटेन भी लगा हुआ था। बंगला देखने में किसी महल से कम नहीं लग रहा था।

ऋषि दरवाज़े के पास खड़ा था। उसने देखा कि दुल्हन पूरे घर को देख रही है, तो उसने थोड़े गुस्से में कहा, "बाद में आराम से देख लेना, घर कहीं भाग नहीं जा रहा है। अभी अंदर चलो।"

ऋषि के ऐसा कहने पर दुल्हन थोड़ी डरी हुई सी ऋषि की तरफ़ चलने लगी।

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