My professer is my husband - Chapter 3
उनकी बात मानकर प्रिया सीढ़ियाँ चढ़ती हुई अपने कमरे में चली गई। कमरे में पहुँचते ही उसने बैग एक तरफ रखा, कपड़े लेकर बाथरूम में चली गई। कुछ देर बाद फ्रेश होकर बाहर आई और सीधे बेड पर आकर लेट गई। दिनभर की थकान और नए-नए ख्यालों के बीच कब उसकी आँख लग गई, उसे खुद भी पता नहीं चला… और कुछ ही पलों में वह गहरी नींद में सो गई।
“अब आगे…”
दूसरी तरफ…
शान अपने कमरे में पहुँचा और बिना वक्त गंवाए बाथरूम की ओर बढ़ गया। उसने गर्म पानी से शावर लिया, जैसे पूरे दिन की थकान को धो देना चाहता हो। कुछ देर बाद वह सिर्फ तौलिया लपेटे बाहर निकला और क्लोसेट रूम में जाकर आरामदायक टी-शर्ट और ट्राउज़र पहनकर वापस आया।
कमरे में हल्की सी खामोशी थी। शान ने अपना लैपटॉप उठाया और बेड के पास बैठकर काम में लग गया। उसकी उंगलियाँ तेजी से कीबोर्ड पर चल रही थीं, जैसे हर काम में परफेक्शन उसका नियम हो।
काफी देर तक काम करने के बाद उसने लैपटॉप बंद किया और घड़ी की तरफ देखा—रात के 9 बज चुके थे।
वह नीचे डिनर के लिए आया तो देखा कि पूरा परिवार उसी का इंतज़ार कर रहा था।
वह भी बिना कुछ कहे उनके साथ बैठ गया।
शान के पापा, अर्जुन ओबरॉय ने प्लेट उठाते हुए पूछा, “शान, ओबरॉय ग्रुप ऑफ कंपनी में काम कैसा चल रहा है?”
शान ने शांत स्वर में जवाब दिया, “बहुत अच्छा चल रहा है, डैड।”
अर्जुन जी ने फिर कहा, “वो कपूर इंडस्ट्री के साथ जो पार्टनरशिप होने वाली थी… उसका क्या हुआ?”
शान के होंठों पर हल्की सी मुस्कान आई, लेकिन वह मुस्कान सीधी नहीं थी… उसमें कुछ अलग ही ठंडापन था।
उसने कहा, “डैड, उन्होंने मना कर दिया… लेकिन चिंता मत कीजिए। मैं कुछ ऐसा करूँगा कि वो खुद हमारे पास आएँगे पार्टनरशिप के लिए…”
यह कहते हुए उसके चेहरे पर एक खतरनाक, डेविल जैसी स्माइल आ गई।
अर्जुन जी कुछ और कहने ही वाले थे कि तभी लक्ष्मी दादी ने गुस्से में टोक दिया, “बस करो तुम दोनों! घर पर भी ऑफिस की बातें लेकर बैठ गए हो। अर्जुन, शान कितने दिन बाद घर आया है और तुम हो कि वही बिज़नेस की बातें…”
अर्जुन जी ने तुरंत सिर झुकाते हुए कहा, “ठीक है माँ, अब नहीं करूँगा।”
इसके बाद सब चुपचाप अपना डिनर करने लगे। कुछ देर में खाना खत्म हुआ और सभी अपने-अपने कमरों में चले गए।
शान का कमरा…
शान अपने कमरे में आया और सीधे अपने अटैच्ड स्टडी रूम में चला गया।
स्टडी रूम की एक दीवार पर एक खूबसूरत पेंटिंग लगी थी… और वो पेंटिंग किसी और की नहीं, बल्कि प्रिया की थी।
शान धीरे-धीरे उस पेंटिंग के पास गया। उसकी उंगलियाँ उस तस्वीर को हल्के से छूने लगीं… जैसे वो सिर्फ तस्वीर नहीं, कोई एहसास हो।
उसने धीमी आवाज़ में कहा,
“तुम आखिरकार मुझे मिल ही गई… बहुत ढूंढा है मैंने तुम्हें… अब मेरा इंतज़ार खत्म हुआ…”
उसके होंठों पर एक रहस्यमयी मुस्कान फैल गई।
कुछ देर वहीं खड़ा रहने के बाद वह वापस अपने काम में लग गया। फिर देर रात वह अपने कमरे में आकर सो गया।
सुबह…
शान की आँख खुली तो घड़ी में 5 बज रहे थे।
वह तुरंत उठ गया, बाथरूम में जाकर फ्रेश हुआ और फिर अपने प्राइवेट जिम में चला गया।
करीब एक घंटे तक उसने वर्कआउट किया। पसीने से भीगा हुआ वह फिर बाथरूम में गया, शावर लिया और फ्रेश होकर बाहर आया।
इसके बाद वह कुछ देर बैठकर अपना ऑफिस का काम करने लगा।
तभी उसका फोन बजा।
वह फोन लेकर बालकनी में चला गया और धीमी आवाज़ में बात करने लगा। कुछ देर बाद कॉल खत्म करके वह वापस अंदर आया।
घड़ी में 8 बज रहे थे।
वह तैयार हुआ और नीचे डाइनिंग एरिया में आ गया।
डाइनिंग टेबल पर पूरा परिवार मौजूद था—दादी, राज, डैड, उसकी मॉम , कीर्ति... ।
सब उसके आने का इंतज़ार कर रहे थे।
शान ने आते ही सबको “हाय” कहा और सबसे पहले अपनी माँ के पास जाकर उन्हें गले लगाया।
कीर्ति ने मुस्कुराकर कहा, “हाय भाई…”
शान ने भी हल्के से मुस्कुराकर जवाब दिया।
इसके बाद सबने साथ में नाश्ता किया।
नाश्ते के बाद सभी अपने-अपने काम के लिए निकल गए—कीर्ति कॉलेज, अर्जुन और चाचा ऑफिस… और शान भी तैयार होकर कॉलेज के लिए निकल गया।
अब इधर…
मेहरा हाउस…
पायल घर के बाहर स्कूटी पर बैठी हॉर्न बजा रही थी।
तभी प्रिया जल्दी-जल्दी बाहर आई, और उसके मुँह में सैंडविच था।
वह खाते-खाते बोली, “चल जल्दी… कॉलेज चलते हैं, वरना लेट हो जाएंगे…”
पायल ने उसे घूरते हुए कहा, “लेट होंगे नहीं… हो चुके हैं!”
दोनों रास्ते भर ऐसे ही नोक-झोंक करते हुए कॉलेज पहुँच गईं।
पायल ने स्कूटी पार्क की और जैसे ही दोनों अंदर जाने लगीं…
तभी एक लग्ज़री कार कॉलेज के अंदर आकर रुकी।
कार का दरवाज़ा खुला… और उसमें से एक हैंडसम लड़का बाहर निकला।
वह था—करण सहगल।
उसे देखते ही प्रिया और पायल दोनों शॉक्ड रह गईं।
पायल ने धीरे से कहा, “ये यहाँ क्या कर रहा है… क्या इसने भी यहीं एडमिशन लिया है?”
फिर उसने प्रिया की तरफ देखा—जो पूरी तरह से चुप और शॉक में खड़ी थी।
पायल ने उसके कंधे हिलाते हुए कहा, “तुझे क्या हो गया? तू इतनी शॉक में क्यों है… कहीं तू उसे अभी भी पसंद तो नहीं करती?”
प्रिया ने धीरे से नज़रें झुका लीं।
पायल ने तुरंत कहा, “फिर बता क्यों नहीं देती उसे?”
प्रिया ने धीमे स्वर में कहा, “मैं चाहती हूँ… वो खुद मुझे प्रपोज करे…”
पायल ने सिर हिलाया, “तो फिर भूल जा…”
असल में, करण, पायल और प्रिया एक ही स्कूल में पढ़ते थे। वे एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे। भले ही ज्यादा बात नहीं होती थी, लेकिन प्रिया दिल ही दिल में करण को पसंद करती थी।
प्रिया ने अपनी सोच को किनारे किया और करण की तरफ बढ़ गई।
उसके पास जाकर उसने मुस्कुराते हुए कहा, “हाय…”
करण ने उसे देखा और हैरानी से बोला, “प्रिया? तुम भी इसी कॉलेज में हो?”
प्रिया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “हाँ…”
पायल भी पीछे से आई और बोली, “हाय करण…”
करण ने उसे देखकर कहा, “पायल, तुम भी?”
“हाँ, मैं भी…”
कुछ देर उन्होंने बातें कीं, फिर करण अपने दोस्तों के पास चला गया और प्रिया-पायल अपनी क्लास की तरफ बढ़ गईं।
आज उनका पहला पीरियड मैथ का था।
दोनों जल्दी-जल्दी क्लास में पहुँचीं और अपनी सीट पर बैठ गईं।
थोड़ी ही देर में मैथ सर आ गए।
प्रिया ने राहत की सांस लेते हुए कहा, “अच्छा हुआ टाइम पर आ गए… वरना आज फिर लेट हो जाते…”
पायल ने उसे घूरकर कहा, “सिर्फ तेरी वजह से…”
प्रिया ने मुँह बनाकर “हम्म” कहा।
तभी मैथ सर के पीछे-पीछे करण भी क्लास में आ गया।
उसे देखते ही सारी लड़कियाँ उसे घूरने लगीं—क्योंकि वो बेहद हैंडसम था… हालांकि शान से कम।
प्रिया ने फिर से हैरानी से कहा, “ये यहाँ क्या कर रहा है?”
पायल ने भी कहा, “लगता है इसने भी मैथ ली है…”
प्रिया के चेहरे पर हल्की खुशी साफ दिख रही थी।
तभी मैथ सर बोले,
“स्टूडेंट्स, आज आपकी क्लास में एक नया स्टूडेंट आया है—करण सहगल।”
करण ने मुस्कुराकर सबको “हाय” कहा।
उसका “हाय” सुनते ही पूरी क्लास, खासकर लड़कियाँ, तालियाँ बजाने लगीं।
अब आगे क्या होगा?
क्या करण की एंट्री से प्रिया की लाइफ बदल जाएगी?
और शान… जो पहले से ही प्रिया को ढूंढ रहा है… वो क्या करेगा?
जानने के लिए पढ़ते रहिए… 💕