My professer is my husband - Chapter 2
पायल ने हँसते हुए प्रिया की तरफ देखा और शरारती अंदाज़ में बोली, “तेरे सपनों में आए होंगे सर, तभी तो तूने उन्हें देखा होगा…”
प्रिया ने तुरंत आँखें नचाईं, जैसे उसकी बात उसे चुभ गई हो, और थोड़ा गुस्से में बोली, “बकवास बंद कर पायल, ऐसा कुछ भी नहीं है… सर क्यों आएँगे मेरे सपनों में?”
पायल ने अपनी भौंहें उठाईं और मुस्कुराते हुए बोली, “ये तो तुझे ही पता होगा ना कि तूने उन्हें कहाँ देखा है…”
प्रिया कुछ पल के लिए चुप हो गई। उसके चेहरे पर हल्की उलझन साफ झलक रही थी। वो खुद भी यही सोच रही थी कि आखिर उसने शान सर को पहले कहाँ देखा था। उसका दिल बार-बार कह रहा था कि ये पहली मुलाकात नहीं है… लेकिन दिमाग मानने को तैयार ही नहीं था।
“अब आगे क्या सोचना…” प्रिया ने खुद को समझाने की कोशिश की, लेकिन तभी पायल ने उसकी सोच पर ब्रेक लगा दिया—
“ओए मैडम, अब ज़्यादा मत सोच और चुपचाप नोट्स लिख,” पायल ने हँसते हुए कहा।
पायल की बात सुनकर प्रिया ने अनमने मन से अपनी कॉपी खोली और नोट्स लिखने लगी। हालांकि उसके हाथ चल रहे थे, लेकिन उसका ध्यान कहीं और ही था।
कुछ ही देर में क्लास खत्म हो गई।
शान सर ने अपनी फाइल बंद की, पूरे क्लास पर एक नजर डाली और बोले, “तो स्टूडेंट्स, अगली क्लास में मिलते हैं…”
इतना कहकर उन्होंने एक पल के लिए प्रिया की तरफ देखा—एक गहरी, ठहरी हुई नजर—और फिर बिना कुछ कहे क्लास से बाहर निकल गए।
उनके जाते ही क्लास का माहौल पूरी तरह बदल गया।
एक लड़की ने अपने बाल ठीक करते हुए कहा, “यार, शान सर कितने हैंडसम हैं…”
दूसरी लड़की ने तुरंत उसकी बात पकड़ी, “सिर्फ हैंडसम नहीं, बहुत ही ज्यादा हैंडसम… और ऊपर से इतने हॉट…” यह कहते हुए वह खुद ही शर्माकर मुस्कुरा दी।
पास बैठी तीसरी लड़की ने थोड़ा झुककर धीरे से कहा, “तुम लोगों को पता है? आज उनका भी कॉलेज में पहला दिन है…”
“क्या? सच में?” दोनों लड़कियों ने एक साथ हैरानी से पूछा।
“हाँ… और सबसे खास बात—वो सिंगल हैं… अभी तक उनकी शादी नहीं हुई,” तीसरी लड़की ने जैसे कोई बड़ी खबर सुना दी हो।
तीनों लड़कियाँ एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराईं और बातें करते हुए क्लास से बाहर निकल गईं।
धीरे-धीरे पूरी क्लास खाली हो गई।
पायल ने प्रिया का हाथ पकड़ते हुए कहा, “चल, कैंटीन चलते हैं… मुझे तो बहुत भूख लग रही है।”
प्रिया ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “हाँ, चल…”
दोनों क्लास से निकलकर कॉलेज की कैंटीन की तरफ बढ़ गईं।
कैंटीन में हलचल थी—स्टूडेंट्स की आवाजें, हँसी-मज़ाक, और खाने की खुशबू… सब कुछ एक अलग ही माहौल बना रहे थे।
प्रिया ने काउंटर पर जाकर पिज्जा और कोल्ड ड्रिंक ऑर्डर किया, जबकि पायल ने सैंडविच और मिल्कशेक लिया।
दोनों एक टेबल पर बैठ गईं और खाने लगीं।
पायल बीच-बीच में प्रिया को छेड़ती रहती, “वैसे सच-सच बता… सर को देखकर दिल कुछ ज्यादा ही नहीं धड़क रहा था?”
प्रिया ने उसे घूरते हुए कहा, “पायल, तू ना एकदम पागल है…”
लेकिन अंदर ही अंदर, उसे खुद भी महसूस हो रहा था कि कुछ तो अलग था… कुछ ऐसा, जिसे वो समझ नहीं पा रही थी।
खाना खत्म करने के बाद उन्होंने बिल पे किया और कॉलेज से बाहर निकल गईं।
पायल पार्किंग से अपनी स्कूटी लेकर आई, और दोनों घर के लिए निकल पड़ीं।
लेकिन…
उनके जाते ही थोड़ी दूरी पर खड़ा एक आदमी फोन पर किसी से बात करने लगा—
“सर… प्रिया मैम कॉलेज से निकल चुकी हैं…”
दूसरी तरफ से एक ठंडी, सख्त आवाज आई, “उन पर नजर रखना…”
“जी, सर…”
कॉल कट होते ही उस आदमी ने फोन जेब में रखा और धीरे-धीरे वहाँ से चलता बना।
दूसरी तरफ…
शान अपने कॉलेज के ऑफिस में बैठा कुछ फाइल्स देख रहा था। कमरे में सन्नाटा था, बस पन्ने पलटने की आवाज आ रही थी।
तभी उसका फोन बजा।
उसने कॉल उठाया, “हेलो…”
दूसरी तरफ से आवाज आई, “बॉस… आपका पीछा करते-करते कोई कॉलेज तक पहुँच गया है…”
शान की आँखों में एक पल के लिए ठंडापन उतर आया।
फिर उसने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा—
“मार डालो…”
उसकी आवाज में ना गुस्सा था, ना डर… बस एक खामोश खतरनाक ठंडक थी।
“ओके बॉस…”
कॉल कट गया।
शान की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गई और उसके होंठों पर एक हल्की, डेविल जैसी मुस्कान उभर आई—जैसे किसी की मौत का फैसला अभी-अभी हुआ हो।
कुछ देर बाद उसने फाइल्स बंद कीं और ऑफिस से निकलकर अपने घर की तरफ रवाना हो गया।
शाम ढल चुकी थी।
एक विशाल और शानदार मेंशन, जो बाहर से जितना खूबसूरत था, अंदर से उतना ही भव्य और शाही…
हॉल में एक सत्तर साल की औरत और एक बीस साल का लड़का सोफे पर बैठे बातचीत कर रहे थे।
लड़के ने थोड़ा चिंतित होकर कहा, “दादी, आपको पता है ना… अगर शान भैया को पता चल गया कि आप उनके पीछे क्या खिचड़ी पका रही हैं, तो वो इस बार सच में घर छोड़ देंगे… पिछली बार भी इसी बात पर नाराज़ होकर चले गए थे…”
दादी ने गहरी सांस लेते हुए कहा, “शान ने बहुत मनमानी कर ली है… अब और नहीं। सत्ताईस साल का हो गया है… उसे अब शादी करनी ही पड़ेगी।”
वो आगे बोलीं, “मैंने उसके लिए बहुत अच्छी लड़कियाँ देखी हैं… इस बार वो मना नहीं कर पाएगा…”
तभी बाहर गाड़ी रुकने की आवाज आई।
दरवाज़ा खुला… और शान अंदर आया।
उसे देखते ही लड़का खुशी से उछल पड़ा, “भाई! आप आ गए!”
यह था शान का छोटा भाई—राज ओबरॉय।
सोफे पर बैठी थीं—लक्ष्मी ओबरॉय, उसकी दादी।
शान के पिता अर्जुन ओबरॉय, माँ अनिया ओबरॉय, बहन तानिया ओबरॉय और सबसे छोटी बहन कीर्ति ओबरॉय—जो राज की ट्विन थी—यही उसका पूरा परिवार था।
शान ने राज को हल्के से दूर किया और पूछा, “तू आ गया लंदन से?”
राज ने मुस्कुराकर कहा, “घर की बहुत याद आ रही थी… तो आ गया।”
शान आगे बढ़ा, दादी के पैर छुए और उनके पास बैठ गया।
लक्ष्मी दादी ने प्यार से कहा, “बेटा, अब तुम सत्ताईस साल के हो गए हो… शादी की उम्र है तुम्हारी। मैं बूढ़ी हो गई हूँ… अपने परपोते देखना चाहती हूँ…”
इतना कहकर उन्होंने कुछ लड़कियों की तस्वीरें निकालकर उसे दिखानी चाहीं।
लेकिन शान ने बिना देखे ही मना कर दिया।
उसने शांत लेकिन सख्त लहजे में कहा, “दादी, जब सही वक्त आएगा, मैं खुद शादी कर लूंगा… आप चिंता मत कीजिए।”
इतना कहकर वह उठ गया और सीढ़ियाँ चढ़कर अपने कमरे में चला गया।
दादी और राज उसे जाते हुए देखते रह गए।
राज ने धीरे से कहा, “दादी… आपको सच में लगता है कि भाई शादी करेंगे? मुझे तो नहीं लगता…”
दादी ने उसे घूरते हुए डांटा, “चुप कर! हमेशा उल्टी-सीधी बातें करता रहता है… कभी कुछ अच्छा भी बोल लिया कर!”
दूसरी तरफ…
पायल प्रिया को घर छोड़कर अपने घर चली गई।
प्रिया घर में दाखिल हुई तो देखा—उसका भाई टीवी देख रहा था, पापा अखबार पढ़ रहे थे और मम्मी किचन में व्यस्त थीं।
प्रिया दौड़कर अपने पापा के गले लग गई, “पापा! मैं आ गई…”
पापा ने मुस्कुराकर उसके सिर पर हाथ फेरा, “कैसी है मेरी गुड़िया? और कैसा रहा कॉलेज का पहला दिन?”
प्रिया ने खुशी से कहा, “बहुत अच्छा था, पापा…”
उन्होंने कहा, “अच्छा, अब जाओ… फ्रेश हो जाओ। थक गई होगी।”
प्रिया अपने कमरे में गई, फ्रेश हुई और फिर बिस्तर पर लेट गई।
लेकिन जैसे ही उसने आँखें बंद कीं…
उसके सामने फिर वही चेहरा आ गया—
शान…
उसकी गहरी आँखें… उसका शांत चेहरा…
प्रिया खुद भी नहीं समझ पा रही थी कि आखिर क्यों वो बार-बार उसी के बारे में सोच रही है…
इन्हीं ख्यालों में खोई हुई वो कब नींद की आगोश में चली गई, उसे खुद भी पता नहीं चला।
अब आगे क्या होगा प्रिया की जिंदगी में?
कौन है जो उस पर नजर रख रहा है?
और क्या शान सच में शादी करेगा… या उसकी जिंदगी में कोई और कहानी छिपी है?
जानने के लिए पढ़ते रहिए…
My Professor is My Husband 💕 ✨