Ribirth of Arrogant wifey and mother Ch. 3

Rebirth of Arrogant wifey and mother - Chapter 3

Posted by moon light • May 04, 2025 09:10 PM

तारा ने जैसे ही रेहान को देखा, वह रोते हुए रेहान के गले लग गई और पागलों की तरह रेहान के पूरे चेहरे को चूमते हुए बोली,

"रेहान, प्लीज़ माफ़ कर दो मुझे! मुझे छोड़कर मत जाओ, वरना मैं जी नहीं पाऊंगी! रेहान, आई रियली लव यू, आई नीड यू! रेहान, प्लीज़!"

"तुम्हारी ये चुप्पी मुझसे और सहन नहीं होती। प्लीज़, रेहान, प्लीज़ उठ जाओ ना!"

तारा की बात पर उसकी मां, जो कब से वहीं छिपकर बैठी थी, उसने जब देखा कि रेहान उसकी बात का जवाब नहीं दे रहा है, तो उसने अपनी बंदूक तारा के सिर पर पॉइंट करते हुए कहा,

"जब तेरा पति मर गया है, तो तू जीकर क्या करेगी? हां, अब चल, तेरी ये इच्छा मैं पूरी कर देती हूं, तुझे तेरे पति के पास पहुंचाकर!"

तारा ने रेहान को अपनी बाहों में भरते हुए अपनी नम आवाज़ में पूछा, "क्यों, मां? क्यों? आपने मेरे साथ ऐसा क्यों किया? मेरे पति और मेरी बच्ची का क्या दोष था?"

यह सुनकर उसकी मां ने नफ़रत से उसे देखते हुए कहा, "मैं नफ़रत करती हूं, तेरे बाप से और तुमसे! मैं तो उससे शादी भी नहीं करना चाहती थी, लेकिन तुम्हारे कारण मुझे उस करन से शादी करनी पड़ी! अगर तुम मेरी पेट में ना होतीं, तो आज मैं विशाल के साथ अच्छी ज़िंदगी जी रही होती!"

"नफ़रत है तुम दोनों बाप-बेटी से! तुम्हारे बाप को मेरे और विशाल के बारे में सब कुछ पता चल गया, और यह भी कि अनुष्का उसकी नहीं, बल्कि मेरी और विशाल की बेटी थी! इसलिए उसने अपनी सारी प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर दी। फिर हम लोगों ने सोचा कि चलो, तुम्हें प्यार से अपने जाल में फँसाकर सब कुछ अपने नाम करवा लेंगे, लेकिन तुम्हारा वो बाप, वो कुछ ज़्यादा ही चालक निकला।" इतना कहते हुए उसके चेहरे पर नफ़रत साफ़ दिखाई दे रही थी।

उसने नफ़रत से फिर आगे कहा, "उस बूढ़े ने तुम्हारी शादी उस पागल रेहान से करवा दी और सब कुछ तुम दोनों मियां-बीवी के नाम कर दिया, और मेरे और मेरी बेटी के नाम एक फूटी कौड़ी तक नहीं रखी!"

फिर कुछ पल रुककर तारा की तरफ़ देखते हुए कहा, "और तुम, तारा, तुम तो अपने बाप से भी ज़्यादा तेज़ निकली! जैसे ही तुम्हारी शादी उस पागल रेहान से हुई, मेरे बार-बार समझाने पर तुम... तुम उस रेहान के आगे-पीछे घूमती रहती! जिस पागल रेहान को ठीक करने के लिए पूरी डॉक्टरों की टीम ने अपने हाथ खड़े कर दिए, तुमने उस रेहान को बस एक साल में ही ठीक कर दिया! जैसे ही तुमने उस रेहान को ठीक किया, वैसे ही उस रेहान का तुम्हारे लिए प्यार और भी गहरा हो गया, और आज देखो, कैसे मौत की नींद सो गया ये!"

यह सुनकर तारा ने अपनी नम आवाज़ में कहा, "कहते हैं, 'एक पुत कपूत हो सकता है, पर एक माता कभी कुमाता नहीं हो सकती!' पर तुमने आज ये कहावत झूठ साबित कर दी! तुमने अपनी ही बेटी को मारने की कोशिश की! मुझ तक तो ठीक था, पर मेरी बेटी, उस मासूम का क्या कसूर था?" यह सुनकर उसकी मां ने तारा के बालों को अपनी मुट्ठी में भरते हुए कहा,

"क्योंकि उस सपूत को ज़िंदा रखकर मैं अपनी लाइफ़ हैल नहीं बनाना चाहती थी। तुम तो मर जाओगी, पर तुम्हारी वो बेटी कल को मेरे से बदला ले सकती है, इसलिए मैं कोई रिस्क नहीं ले सकती! भले ही मेरी बेटी और होने वाले दामाद को कुछ हो जाए, पर मैं तुम्हें और तुम्हारी फैमिली को खुश नहीं रहने दे सकती!"

अपनी मां की कड़वी बातों को सुनकर तारा का दिल एक बार फिर से टूट चुका था। तारा को खुद पर ही हंसी आ रही थी। उसने अपनी मां के लिए क्या कुछ नहीं किया! खुद को चोट पहुंचाई, अपने पति और अपनी छोटी सी प्यारी सी बेटी से दूर हो गई! अपनी मां को खुश करने के लिए उसने अपने पापा से बात करनी बंद कर दी और यहां तक कि उनको खुश करने के लिए जेल तक चली गई, पर उसकी मां, उसकी मां ने उसका त्याग कभी नहीं देखा!

उसकी मां ने आगे कहा, "इस रेहान को मेरे बारे में सब कुछ पता चल गया था। ये बार-बार मेरे रास्ते में आ रहा था, इसलिए आज देखो, ये कैसे पड़ा है!"

फिर अपने गुंडों को बुलाते हुए कहा, "इससे पहले यहां इसका वो बॉडीगार्ड समीर आ जाए, जल्दी से इन दोनों को खाई में फेंक दो!"

वो बॉडीगार्ड जैसे ही रेहान को उठाने के लिए आगे आने वाले थे, वैसे ही उसने उन लोगों को रोकते हुए कहा, "रुको! तुम लोग रेहान को छोड़ो, पहले इस तारा को ठिकाने लगाओ। ये रेहान तो पहले से ही मरा पड़ा है, ये क्या ही बिगाड़ सकता है हमारा!"

यह सुनकर उन लोगों ने तारा को खाई की ओर ले जाना शुरू कर दिया। उन लोगों ने तारा को उसके बालों से पकड़ा हुआ था। वो लोग किसी जालिम कसाई की तरह उसे घसीटते हुए ले जाने लगे। तारा बार-बार उन लोगों से रहम की भीख मांग रही थी, पर उन लोगों को उस पर ज़रा सा भी तरस नहीं आ रहा था!

उन लोगों ने तारा को खाई में फेंक दिया। तारा की चीख, उसका रोना, जैसे ही रेहान के कानों में पड़ा, एक ज़ोरदार आवाज़ उस पूरे इलाके में गूंज उठी!

रेहान की आँखें लाल, खून से सनी हुई लग रही थीं। उसकी पीठ पर काले पंख निकल आए, और उसके दांत किसी वैम्पायर के जैसे निकले हुए थे!

रेहान इस वक्त एक नरक के शैतान की तरह लग रहा था। उसके इस रूप को देखकर उन बॉडीगार्ड की हालत इतनी खराब हो गई कि उन लोगों ने बीच में ही एक-एक करके भागना शुरू कर दिया!

वो बॉडीगार्ड जैसे ही वहां से भागने लगे, वैसे ही रेहान ने उड़ते हुए एक-एक की गर्दन को ऐसे तोड़ना शुरू कर दिया, जैसे वो गाजर-मूली काट रहा हो!

अंत में सब लोगों को बेरहमी से मौत देने के बाद उसने अपनी सास को गर्दन से पकड़कर उसे ऊपर उठाते हुए अपनी डरावनी आवाज़ में कहा,

"कहा था ना तुम्हें मेरी तारा से दूर रहो! कितना मना किया था मैंने!"

यह सुनकर उसने डरते हुए कहा, "मुझे माफ़ कर दो, रेहान बेटा! मेरा वो मतलब नहीं था!"

रेहान ने एक डेविल स्माइल के साथ कहा, "बेटा खुद पर बन आई तो अब मैं बेटा, हां? पर चलो, कोई बात नहीं। आपने मुझे बेटा कहा है, तो मेरा भी तो कुछ फ़र्ज़ बनता है ना!" इतना बोलकर उसने तारा की मां की गर्दन में नाखून गड़ा दिए, जिससे उसकी जान वहीं निकल गई!

उसके बाद रेहान जल्दी से खाई की तरफ़ बढ़ा। उसने देखा तारा काफी नीचे पहुँच गई थी। रेहान ने खाई में एक छलांग लगाई और तारा को अपनी बाहों में भर लिया। उसने अपनी पीठ को नीचे की तरफ़ कर दिया और तारा को अपनी छाती पर रख लिया!

उसने तारा को अपने पंखों में छुपाकर रखा। तारा ने रोते हुए रेहान से कहा, "रेहान, अगर मुझे फिर से एक मौका मिले, तो मैं फिर ये सब नहीं होने दूंगी!"

यह सुनकर रेहान ने कहा, "सच में, छोटी गिलहरी?"

तारा ने उसकी बात पर कहा, "हां, रेहान, सच में!"

रेहान के कानों में एक आवाज़ गूंज रही थी, "जैसे आज मैंने अपने प्यार को खोया है, वैसे ही एक दिन तुझसे तेरा प्यार दूर होगा, और तू बेबस-लाचार होकर उसे मरता हुआ देखेगा!"

इस आवाज़ को याद करने के बाद रेहान ने तारा के सिर पर अपना एक हाथ रखा और प्यार से कहा,

"इसके बाद में शायद अब कभी अपने इस रूप में ना आ पाऊं, पर तुम्हें एक बार फिर से समय में पीछे जाकर सब कुछ ठीक करने का मौका मिलेगा। अब ये तुम्हारे हाथ में होगा, छोटी गिलहरी। तुम इस नए जीवन में पुरानी गलतियां दोहराओगी या एक नई ज़िंदगी शुरू करोगी मेरे साथ?" इतना कहकर रेहान नीचे पड़े एक बड़े से पत्थर पर जा गिरा। रेहान की मौत का सदमा तारा सहन ना पा सकी, और वहीं उसने भी अपना दम तोड़ दिया!

उन दोनों के मरते ही समीर ने अपनी लाल आँखों से आशीष और अनुष्का की लाश को देखा। फिर उसने आसमान की तरफ़ देखते हुए कहा,

"मालिक, जब आप नहीं दुनिया में, तो मैं क्या करूंगा इस दुनिया में?" इतना बोलकर उसने भी अपनी जेब से बंदूक उठाई और अपनी आँखें बंद करते हुए खुद को गोली मार ली!

एक दास्तां जो आज ख़त्म हुई, कल फिर से शुरू होगी। आप लोगों को मेरी स्टोरी कैसी लगती है? प्लीज़ कमेंट करें, और हां, आप लोग मेरी दूसरी नॉवेल "बेदर्दी से प्यार का" और "बर्निंग डिजायर" को भी पढ़ें और कमेंट करें!

100%