Ribirth of Arrogant wifey and mother Ch. 2

Ribirth of Arrogant wifey and mother - Chapter 2

Posted by moon light • May 03, 2025 11:18 PM

तारा जैसे ही खाई के पास पहुँची, उसके पीछे उसकी छोटी बहन अनुष्का अपने बॉयफ्रेंड आशीष के साथ गाड़ी में बैठ उसकी तरफ़ आ रही थी। तारा ने अपनी आँखें बंद कर लीं, तभी एक तेज़ आवाज़ उसके कानों में पड़ी, "दूर हट जाओ उससे!" यह आवाज़... यह आवाज़ तो कुछ सुनी-सुनी सी लग रही थी। तारा ने जब सामने नज़रें उठाकर देखा, तो पाया कि उसका पति रेहान अपने असिस्टेंट समीर के साथ खड़ा था! रेहान की आवाज़ सुनकर आशीष की तो जैसे रूह ही काँप उठी। उसकी तो जैसे हिम्मत ही नहीं हुई कि वह रेहान की बात का अनुसरण कर सके! पर अनुष्का ने यह देख नफ़रत से कहा, "आशीष, क्या हो गया है? तुमने गाड़ी क्यों रोक दी?" यह सुन आशीष ने गुस्से में अपने दाँत पीसते हुए कहा, "बेवकूफ़ औरत! वह रेहान कोई छोटी-मोटी हस्ती नहीं, बल्कि देश के जाने-माने बिज़नेसमैन में से एक है! तुझे फ़िल्मों में रोल और मेरी कंपनी की ग्रोथ के लिए पैसे इसने ही इन्वेस्ट किए हैं!"

यह सुन अनुष्का ने मुँह बनाते हुए कहा, "तो क्या कर सकते हैं हम? हाँ, उसने जो कुछ भी किया, वह तारा के कारण किया था!" यह सुन आशीष उसे ऐसे देखने लगा जैसे किसी पागल को देख रहा हो। उसने अपनी आँखें बंद कर धीरे से कहा, "पागल औरत! अगर उसे पता चला न कि हम दोनों के कारण उसके परिवार की यह हालत हुई है, तो वह हम दोनों को ज़िंदा नहीं छोड़ेगा, समझी! रेहान के साथ समीर भी है, जो अकेले 200 लोगों के बराबर है।" अनुष्का ने उसकी बातों को अनसुना कर दिया और उसने गाड़ी को तारा की तरफ़ मोड़ दिया। इससे पहले कि वह आगे बढ़ पाती, रेहान ने अपना एक हाथ उसकी गाड़ी की तरफ़ किया! जिससे उसकी गाड़ी वहीं रुक गई। यह देख अनुष्का शॉक होते हुए खुद से बोली, "ओह गॉड! यह कैसे हो सकता है?" आशीष ने जब उसे इस तरह परेशान देखा, तो उसने कहा, "क्या हुआ अनु? तुम इतनी परेशान क्यों हो गई?" यह सुन अनु ने कहा, "आशीष, गाड़ी अपने आप रुक गई। यह उस रेहान के हाथ रखने के कारण हुआ!"

उसकी बात सुन आशीष अपनी आँखें छोटी करते हुए बोला, "सीरियसली अनु? तुम्हें इस वक्त मज़ाक सूझ रहा है और यहाँ रेहान और समीर नाम की तलवार मेरी गर्दन पर आ लटकी है!" यह सुन अनुष्का ने गाड़ी से गन निकालते हुए कहा, "आज मैं इन दोनों लैला-मजनू का किस्सा ही ख़त्म कर दूँगी!" आशीष ने उसे रोकने की बहुत कोशिश की, पर वह नहीं मानी और गाड़ी से उतर तारा की ओर चलने लगी। पीछे से आशीष उसे रोकते हुए आ ही रहा था कि समीर ने उन दोनों का रास्ता रोकते हुए कहा, "इतनी जल्दी भी क्या है तुम दोनों को? पहले तुम दोनों से पुराना हिसाब-किताब तो निपटा दूँ।" यह सुन वे दोनों डर से काँप गए!

वहीं दूसरी तरफ़, रेहान को अपने सामने सही-सलामत देख तारा की आँखों में आँसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा! तारा रोते हुए रेहान के गले लग गई। रेहान तारा से नाराज़ था कि वह इतने सालों तक क्यों उससे दूर रही! रेहान ने मुँह मोड़ते हुए कहा, "अब क्यों रो रही हो? तुम्हें तो खुश होना चाहिए मेरी ऐसी हालत देखकर!" रेहान की बातें सुनने के बाद तारा ने गौर से रेहान को देखा, तो पाया कि रेहान के कपड़े काफ़ी फटे हुए लग रहे थे, रेहान की बड़ी सी दाढ़ी निकल गई थी! तारा को अपने डैड से इस बात का गुस्सा था कि उन्होंने उसकी शादी रेहान से, जो कि एक पागल था, उससे करवा दी! पर तारा इतनी पागल नहीं थी कि वह रेहान से नफ़रत करने लगे। उसने शादी के बाद रेहान का काफ़ी ध्यान रखा, जिसके कारण रेहान ठीक हो सका!

तारा ने दर्द भरी आवाज़ में कहा, "रेहान, मेरा साथ तुम्हारे साथ यहीं तक का था। हो सके तो मुझे माफ़ कर दो, लेकिन मैं मजबूर थी तुमसे और अपनी बेटी से दूर रहने के लिए! क्योंकि अगर मैं तुम दोनों से दूर नहीं रहती, तो लोगों की नज़रों में तुम दोनों का पता चल जाता और मेरे दुश्मन तुम दोनों को मेरी कमज़ोरी बनाते या तुम दोनों को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करते! इसलिए मैंने अपनी बहन के बॉयफ्रेंड के साथ सालों पहले यह खेल रखा, जिससे तुम मुझसे नफ़रत करने लग जाओ! मुझे आज समझ में आ रहा है कि मैं तो बस एक मोहरा थी इनके खेल का! आज जब मैं मौत की देहलीज़ पर आ खड़ी हूँ, तो मेरी हिम्मत नहीं है तुम्हारी आँखों में नफ़रत देख सकूँ!"

ये सारी बातें सुनने के बाद रेहान के तो होश ही उड़ गए। उसे यह लगता था कि तारा आशीष को थोड़ा-थोड़ा पसंद करती है और उसके साथ अपनी मर्ज़ी से रह रही है, इसलिए वह तारा की खुशी के लिए उससे दूर हो गया था। पर आज सब कुछ सच जानने के बाद उसने तारा की तरफ़ देखा, जिसकी आँखें बंद होने लगीं! रेहान ने यह देखकर तारा के माथे पर किस करते हुए कहा, "नहीं तारा, यह सच नहीं है। भले ही तुम सौ गुनाह कर दो, तब भी मैं तुमसे नफ़रत नहीं कर सकता! हाँ, मैं कुछ पल नाराज़ तो ज़रूर हुआ हूँ, लेकिन तुम्हारी यह हालत देखकर, ना कि तुम्हारे दूर होने से!"

तारा ने जैसे ही रेहान की बात सुनी, वह फूट-फूट कर रेहान के गले लग रोने लगी! रेहान ने उसे चुप करवाते हुए कहा, "प्लिज, चुप हो जाओ, रेबिट!" वहीं दूसरी तरफ़, समीर ने अनुष्का और आशीष की हालत बुरी कर दी। वे दोनों किसी भिखारी से अब कम नहीं लग रहे थे! अनुष्का की माँ ने दूर से जब यह नज़ारा देखा, तो उसकी आँखें गुस्से से लाल हो गईं और उन्होंने तारा की तरफ़ गन करते हुए खुद से कहा, "आज मैं इस लड़की को ज़िंदा नहीं छोड़ूँगी। इसके कारण मेरी बेटी और उसके होने वाले पति की यह हालत हुई है!" ऐसा बोलकर उसने जैसे ही गन चलाई, एक तेज़ आवाज़ के साथ तारा की चीख गुंज उठी! तारा ने रेहान की आँखों में देखते हुए कहा, "नहीं, यह नहीं हो सकता। तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकते!" वहीं उसे यूँ रोता देख आशीष और अनुष्का कुटिल मुस्कान के साथ खुद से बोले, "हमारा काम तो हो गया। अब बस इस तारा को मौत की नींद सुला दे एक बार।" यह सोचकर उन्होंने अपनी माँ को इशारा किया। समीर को अभी तक रेहान के बारे में नहीं पता चला था क्योंकि उसने गन पर साइलेंसर लगा रखा था! और समीर की पीठ उन लोगों की तरफ़ थी और काफ़ी दूर था। तो समीर ने आशीष और अनुष्का को गाड़ी में बिठाते हुए कहा, "तुम लोगों का खेल ख़त्म!"

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