नाता तेरा-मेरा - Chapter 3
कार्तिक किसी से फ़ोन पर बात कर रहा था और अशोक आलीशान कुर्सी पर बैठा था। कुछ देर बाद कार्तिक ने कॉल काट दिया और अशोक की ओर मुड़कर बोला, "सर! मि. जिंदल ने शाम को विंटर नाईट क्लब में मीटिंग रखी है।"
ये सुनकर अशोक ने बिना उसकी ओर देखे कहा, "आखिरकार इसे हमारे बिज़नेस में पार्टनर बनना ही पड़ा। खैर, ये मीटिंग तो हम कर ही लेंगे। अब तुम बताओ कि तुम्हारी खोज कहाँ तक पहुँची?"
"खोज? किसकी खोज?" कार्तिक ने नासमझी भरे भाव से कहा। अशोक अपनी सर्द निगाहों से उसे देखने लगा। इसे देख कार्तिक को ध्यान आ गया और वह जल्दी से बोला, "हाँ, वो रुद्रांश के लिए डॉक्टर की खोज...वो बस चल ही रही है। कोई ना कोई पागल डॉक्टर... मेरा मतलब पागलों का इलाज करने वाला डॉक्टर मिल ही जाएगा।" वह जबरदस्ती की मुस्कुराहट अपने चेहरे पर लाकर बोला।
"तुम्हारे बाप को मैं जरा सा हुक्म देता था तो वह उस काम में अपनी जान लगा देता था, लेकिन तुम बड़े ही ढीले हो।" अशोक ने कार्तिक से सख्ती भरे लहजे में कहा। लेकिन कार्तिक पर कुछ खास असर नहीं हुआ और वह धीमी सी आवाज़ में बुदबुदाया, "तभी तो जान ही निकल गई मेरे बाप की।"
"क्या कहा तुमने?" अशोक उसकी तरफ देखते हुए बोला। इसे देख कार्तिक फिर से जबरदस्ती मुस्कुराया और कहने लगा, "यही कि मैं भी अपनी पूरी जान लगा दूँगा आपके पागल बेटे के लिए। ओह सॉरी, मेरा मतलब रुद्रांश के लिए।"
ये सुनकर अशोक ने फिर उससे ज़्यादा कुछ नहीं कहा और वहाँ से उठकर चला गया। कार्तिक अपने मन ही मन में कहने लगा, "मेरा बाप तो पागल था जो इसका हुक्म मानता था, लेकिन मैं नहीं। मुझे तो अपनी लाइफ़ खुलकर जीनी है। वैसे इस मीटिंग के बहाने ही सही, क्लब में जाने का मौका तो मिलेगा और मौज-मस्ती करने का भी।" ये कहकर वह मन ही मन बहुत खुश हुआ।
इधर, कोकून बॉयज़ हॉस्टल के रूम नंबर 202 में मौज-मस्ती चल रही थी। म्यूज़िक ऑन था और तीन लड़के हाथ में शराब की बोतल लिए उस म्यूज़िक पर थिरक रहे थे।
"आबरा का डाबरा मोरा सांवरा है बावरा
धोती कुर्ता पहन के घूमे दिल्ली हो या आगरा
बरेली वाले झुमके पे जिया ललचाये
कमर लचकाए तो लाखों गिर जाए"
तभी कमरे की बेल बजी। तीनों ने जल्दी से म्यूज़िक बंद किया और शराब की बोतलों को छिपाने लगे। तभी उनमें से एक लड़के ने अपने साथी से कहा, "जा नील, देख तो सही कौन आया है हमारे रंग में भंग डालने।"
"नील को ऑर्डर दे रहा है तू, चुपचाप खोल दरवाज़ा, वरना इस शराब की बोतल में ही घुसा दूँगा तुझे।" नील ने शराब की बोतल उसे दिखाते हुए कहा, जिसे वह अलमारी में छिपाने जा रहा था।
उसकी यह बात सुनकर उस लड़के ने ना में सिर हिलाते हुए दरवाज़ा खोला। सामने अनंत खड़ा था। अनंत अकेला ही आया था क्योंकि शांतनु एक इमरजेंसी केस को हैंडल करने हॉस्पिटल चला गया था।
अनंत को देखकर वो लड़का बोला, "कौन हो तुम?"
"क्या यह नील गुप्ता का रूम है?" अनंत ने पूछा। उस लड़के के बोलने से पहले ही नील उसे हटाते हुए खुद अनंत के सामने आ गया और हैरानी और खुशी के मिले-जुले भावों से बोला, "ब्रो आप! लंदन से कब आए?" यह कहते हुए वह अनंत के गले से लिपट गया। उन्हें देखकर वो दोनों लड़के आपस में कहने लगे, "लगता है नील का साइकैट्रिस्ट भाई है ये।" वो दोनों अनंत को पहचान गए थे।
"आज ही आया हूँ।" अनंत भी मुस्कुराते हुए नील से बोला।
नील अनंत से दूर हुआ और उन दोनों लड़कों की तरफ़ इशारा करके बोला, "ये दोनों मेरे बेस्ट बडी हैं, शमन और वैदिक।"
शमन और वैदिक ने भी मुस्कुराकर अनंत से हाथ मिलाया और नील से बोले, "अच्छा नील, अब तू अपने ब्रो से बातें कर। और शाम को चलना है ना हमारे साथ...भूल मत जाना।" शमन ने कहा।
"नो, मैं नहीं भूलूँगा।" नील ने भी कहा। फिर वैदिक और शमन वहाँ से चले गए। उनके जाने के बाद अनंत ने नील से पूछा, "ये शाम को कहाँ जाने का प्लान है?"
"कुछ नहीं ब्रो, वो तो आज शमन का हैप्पी बर्थडे है ना, इसलिए हम उसे सेलीब्रेट करने जाएँगे। बस वही कह रहा था वो।" नील ने मुस्कुराकर कहा। इसे सुनकर अनंत भी मुस्कुरा दिया।
फिर अनंत उससे कहने लगा, "पढ़ाई कैसी चल रही है?"
"फर्स्ट क्लास।" नील बड़ी ही शान से बोला।
"अच्छा, अब तुझे इस हॉस्टल में रहने की कोई ज़रूरत नहीं। अब मैं आ गया हूँ तो तू अब से मेरे ही साथ रहना, ओके!" अनंत ने कहा। तो नील कुछ सोचते हुए बोला, "लेकिन ब्रो, पहले एग्ज़ाम ख़त्म हो जाने दो। उसके बाद मैं आपके साथ घर में सैटल हो जाऊँगा।" ये सुनकर अनंत कुछ देर तो चुप रहा, लेकिन फिर कुछ सोचकर वह मुस्कुराया और उसने नील की बात मान ली।
नील की उम्र 19 साल है। यह थोड़ा आवारा टाइप का है, अपने आवारा और लम्पट दोस्तों के साथ मौज-मस्ती ही करता रहता है। कितनी अजीब बात है ना, जो लंदन से आया है वह सीधे और सरल स्वभाव का है और जो इंडिया में रहता है वह आवारा है। पर यह भी सच है कि जिसे बिगड़ना होता है वह कहीं भी बिगड़ जाता है और जिसे नहीं बिगड़ना होता वह कहीं भी नहीं बिगड़ता।
कुछ देर बाद अनंत वहाँ से चला गया। उसके जाते ही नील ने अपना फ़ोन निकाला और कान पर लगाते हुए बोला, "अबे झंडु, मेरे ब्रो के सामने ये शाम वाली बात करने की क्या ज़रूरत थी...हाँ हाँ, अब ज़्यादा सफ़ाई मत दे, वरना तेरे जन्मदिन को मरमदिन बना दूँगा, समझा।" यह कहकर उसने फ़ोन जेब में रखा और उछलता हुआ बाथरूम में घुस गया।
वैसे उन लोगों के पास वोदका शराब थी जिससे स्मेल नहीं आती, इसलिए अनंत को पता नहीं चला। 😅
जारी है......