साजन बेइंतहा इश्क सीजन 2 Ch. 3

साजन बेइंतहा इश्क सीजन 2 - Chapter 3

Posted by Riya Sharma • Apr 10, 2025 10:23 PM

अक्षय ने जब उनके हँसने की आवाज़ सुनी, तो उसने उनकी ओर देखा। प्राची, सांझ, मौलवी जी और युवानिका सभी हँस रही थीं। "मैंने कोई जोक तो नहीं मारा था?" अक्षय ने सबको देखते हुए उठते हुए कहा।

"जोक नहीं मारा डैड, जोक के खानदान को ही मार दिया!" "आपको मालूम भी नहीं होगा, लेकिन आप पिछले सात महीनों से हमसे यही बोल रहे हैं कि बच्चों, मुंबई तुम्हारे लिए नया है!" इतना बोल प्राची ने पास बैठी सांझ को हाई-फाइव दिया और हँसने लगी।

अक्षय ने सबको देखते हुए कहा, "हाँ, मालूम है, लेकिन ज़रूरी नहीं है कि तुमने सात महीनों में मुंबई घूम लिया हो। कई बार हम वर्षों एक जगह रहकर भी किसी को नहीं जान पाते और तुम शहर की बात कर रही हो।" अक्षय के बोले गए शब्दों के साथ उसके चेहरे के भाव अलग थे।

मौलवी जी और युवानिका ने अक्षय की बात सुनी, तो उनके चेहरों पर भी अजीब भाव आ गए। "चलो, चलो, जल्दी से ब्रेकफास्ट करो!" युवानिका ने सबको देखकर आरती देते हुए कहा।

"आप भी आ रहे हैं ना, पापा?" सांझ ने बड़े प्यार से पीछे से अक्षय का हाथ पकड़कर कहा। सांझ का हाथ अचानक पकड़ते ही अक्षय के चेहरे के भाव बदल गए। उसके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई। उसने पीछे पलटकर सबको देखा और सांझ के सर पर हाथ रखकर कहा, "तो तुम दोनों को यह लगा कि मैं ऐसा सीरियस वाला डैड बनकर घूमूँगा?" इतना बोल अक्षय खुद जोर-जोर से हँसने लगा।

"इतनी उम्मीद हम सबको आपसे शुरू से ही है, जिंदल साहब।" इतना बोल युवानिका ने अक्षय के सर पर आरती दी और उसके हाथ में प्रसाद रख दिया।

अक्षय ने युवानिका को देखा और कहा, "चलो, सब नाश्ता कर लो।" इतना बोल अक्षय ने प्रसाद खाया और वहाँ से डाइनिंग टेबल की ओर चला गया।

अक्षय के पीछे-पीछे सब लोग उठकर डाइनिंग टेबल पर आ गए। युवानिका सबको नाश्ता लगा रही थी। सांझ ने जल्दी से आगे बढ़कर टेबल पर रखे बाउल का ढक्कन उठाकर देखा। "भिंडी! भिंडी कौन खाता है?" सांझ का मुँह बन गया।

"अब इसे भिंडी पसंद नहीं तो क्या कोई भी ना खाए?" प्राची ने मुँह बनाते हुए सांझ को देखते हुए कहा।

"तुम दोनों बस करो। सांझ, तेरे लिए मैंने राजमा बनाया है, वह खा लो, लेकिन झगड़ा नहीं हाँ!" युवानिका ने टेबल पर बैठते हुए कहा।

कुछ देर में सब लोग खाना खाकर फ्री हो गए। मौलवी जी ने सोफे पर बैठते हुए कहा, "बस एक संडे ही होता है जो पूरी फैमिली को एक साथ जोड़े रखता है, एक साथ मिला देता है। वरना तो तुम चारों ऑफिस में होते हो और मुझे यहाँ अकेला छोड़ देते हो। तुम लोग बस आज का दिन ही तो मिलता है तुम सब के साथ। तो इसी बहाने चलो ना आज घूम आते हैं और साथ प्राची का वादा भी पूरा हो जाएगा।"

अक्षय ने मौलवी जी के बगल में जाकर उन्हें गले लगाया और कहा, "मैं किसी को नहीं बोलता मां, लेकिन ये तीनों खुद से बिज़नेस संभाल रही हैं। प्राची और सांझ ने अपनी काबिलियत पर वह पोस्ट ली है और युवानिका तो मेरी पार्टनर है, तो उसका क्या ही बोलूँ।"

"मेरे पास एक आइडिया है।" सांझ ने सबको देखते हुए कहा।

"ज़रूर कोई बकवास सा आइडिया ही होगा।" प्राची ने अपने चेहरे पर हाथ रख गर्दन नीचे करके कहा। लेकिन प्राची की बात सबने सुन ली थी।

"क्यों ना दादी मां, आप भी हमारे साथ ही ऑफिस ज्वाइन कर लो।" इतना बोल सांझ जोर-जोर से हँसने लगी। "अब आपने ही कहा ना आपका मन नहीं लगता, पापा आपके लिए वहाँ एक अलग सी चेयर देंगे, वहाँ बैठकर सब पर दादी वाले ऑर्डर लगाना।"

सांझ की बात सुनकर मौलवी जी ने मुँह बनाया और सांझ के सर पर चपत लगाते हुए कहा, "पागल लड़की!"

"हाय भगवान! पागल है सच में यह लड़की!" दादी ने सांझ को एक नज़र देख अक्षय की ओर देखकर कहा।

अक्षय ने प्राची को देखा और कहा, "जाओ प्राची, रेडी हो जाओ और तुम भी सांझ, हम मंदिर चलेंगे ना।"

"अभी, डैड?" प्राची ने सबको देखते हुए कहा।

"हाँ, बेटा, अभी। क्या प्रॉब्लम है? हम बाहर अच्छे से घूम के आएंगे। वैसे भी आज संडे है, मां का मन भी है।" युवानिका ने सबको देखते हुए कहा।

"प्रॉब्लम नहीं है। मुझे लगा शाम तक चलते तो मैं मेरा थोड़ा ऑफिस वर्क रह गया, वही कर लेती। बाकी ऐसी कोई प्रॉब्लम नहीं है।" सांझ ने सबको देखकर कहा।

"सो कम ऑन एवरीवन।" जल्दी से रेडी हो जाओ, आज तो डैड की तरफ से डिनर होगा, है ना डैड?" प्राची ने मुस्कुराते हुए कहा।

"सांझ, इसे याद दिलाओ कि इसका प्रॉमिस क्या था।" अक्षय ने सांझ को देखकर कहा।

"प्रॉमिस? अरे बताओ कोई तो, कि ऐसा कौन सा प्रॉमिस था?" प्राची ने सोफे से उठकर अपने हाथों को हिलाते हुए सब से पूछा।

"यही कि आपकी सैलरी आते ही आप हम सबको अच्छे बच्चे की तरह डिनर करवाएंगी, हमें घुमाएंगी, एंड एंड, शॉपिंग करवाएंगी।" सांझ ने उठकर अक्षय के कंधे पर हाथ रखकर उसकी ओर देखते हुए कहा।

"हैं? यह कब बोला मैंने? ऐसे थोड़ा ना होता है। मॉम, दादी आप दोनों तो बोलो, वैसे ही बॉस इतनी सी सैलरी देता है, उसमें से भी आप चारों को इतना कुछ दूँ, मेरे पास क्या बचेगा? ना ना, डिनर हम डैड के पैसों से करेंगे।"

"अच्छा तो तेरा वह खड़ूस बॉस तुझे इतनी सी सैलरी देता है? क्यों अक्षय? बताओ कोई अपने एम्प्लॉयी से इतना काम करवाता है और सैलरी नहीं देता?" मौलवी जी ने अक्षय को देखकर कहा।

तुम खुद से बात कर लेना। वैसे भी कल से तुम सबका नया बॉस आ रहा है, तुम्हें पता है ना प्राची और सांझ? तो सैलरी की भी तुम उससे ही बात कर लेना। अक्षय ने दोनों को देखते हुए कहा।

"तो कंपनी तो आपकी है ना?" प्राची ने मुँह बनाते हुए कहा।

क्रमशः...

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