साजन बेइंतहा इश्क सीजन 2 - Chapter 2
20 साल बाद
मुंबई।
सुबह का समय था। दो मंजिला बड़ा सा घर। उसके सेकंड फ्लोर पर एक कमरे में एक लड़की सोई हुई थी। कमरे की खिड़की से आती धूप उसके चेहरे पर गिर रही थी। सुबह की सीधी धूप की वजह से वह लड़की बार-बार करवट बदल रही थी। लेकिन जब वह धूप बर्दाश्त नहीं कर पाई, तो उसने अपने पास रखे तकिये को अपने ऊपर डालकर वापस सो गई।
"हे भगवान! इनके कमरे के पर्दे हटाओ, चाहे एक बार को पूरे कमरे की छत ही हटा दो, लेकिन इनकी नींद इतनी सी भी अधूरी नहीं रहनी चाहिए।" सुबह के आठ बज गए थे, लेकिन मजाल है कि प्राची ने आँखें खोली हों! एक लड़की, जिसने बहुत प्यारी सी छोटी, सफ़ेद रंग की कट शोल्डर गाउन पहना हुआ था, जो उसके घुटनों तक आ रहा था। उसके कमर तक आते बालों को एक ऊँची पोनी बना हुआ था। बिना मेकअप के भी वह बहुत प्यारी लग रही थी। उसने अपने कदम बिस्तर पर सोई प्राची की ओर बढ़ाए और उसके चेहरे से तकिया खींच लिया।
"ओहो दी! उठो ना, यार! कुंभकर्ण भी आपसे अच्छा है।" इतना बोलकर उस लड़की ने कमरे में नज़र दौड़ाई और आगे बढ़कर खिड़की के सारे पर्दे हटा दिए।
"यार सांझ! तुझे मैं सोती हुई अच्छी नहीं लगती क्या? जब देखो मेरी नींद में तेरी इस आवाज़ और इस धूप की आहुति दे देती है।" इतना बोलकर बिस्तर पर सोई प्राची ने अपने चेहरे से तकिया हटाया। मोटी-मोटी आँखें, बालों का जुड़ा जो आधे से ज़्यादा खुला हुआ था, ढीला सा सफ़ेद शर्ट और हल्का नीला शॉट्स। दिखने में प्राची बहुत प्यारी थी।
"अब जब मैंने आपकी नींद की आहुति दे ही दी है, तो आप उठने का कष्ट करें। आप अपना वादा तो नहीं भूल गईं ना?" सांझ ने प्राची की ओर आँखें छोटा करके देखते हुए कहा।
"वादा...? " इतना बोलकर प्राची ने मुस्कुराते हुए सांझ की ओर देखा जो उसे ही घूर रही थी। "मन में ओह गॉड! कौन सा वादा किया था मैंने?" प्राची ने जल्दी से अपने ऊपर से कम्बल हटाया और बिस्तर के दूसरी तरफ़ से उठकर कमरे से बाहर निकलते हुए कहा, "अच्छा तेरा वो वादा... हाँ हाँ, याद है मुझे। तू रेडी हो जा। हम चलेंगे।" इतना बोलकर प्राची तुरंत नीचे चली गई।
सांझ को समझ आ गया था कि प्राची फिर भूल गई। उसने रोने सी सूरत बनाई और प्राची के पीछे नीचे भाग गई। प्राची सीढ़ियों पर जल्दी-जल्दी उतर रही थी। उसने जल्दी से हॉल में नज़र दौड़ाई जहाँ हॉल में लगे बीचों-बीच सोफ़े पर अक्षय बैठा अख़बार पढ़ रहा था।
प्राची ने उन्हें देखा और वापस इधर-उधर देखकर नीचे आ गई। पूजा करके मंदिर से बाहर आई युवानिका, जिसने बाल खुले छोड़े हुए थे, लाल रंग की सादी साड़ी, एक हाथ में चूड़ियाँ और मांग में सिंदूर लगाए, बहुत प्यारी लग रही थी। प्राची ने जैसे ही युवी को देखा, तो वह तुरंत उनके पीछे आकर छुपते हुए बोली, "जल्दी बताओ ना मैंने सांझ से कौन सा वादा किया था?"
सांझ भी तब तक युवानिका के आगे आकर खड़ी हो गई थी। उसने हाथ हिलाते हुए कहा, "देखो दी! बाहर आओ। हर बार ऐसा नहीं चलेगा। बाहर आओ और आप मम्मी, साइड हटो!"
सांझ के इतना बोलते ही प्राची ने युवानिका की दोनों बाहों को कसकर पकड़ा और कहा, "नहीं मॉम..." इतना बोलकर प्राची ने युवानिका को घुमाया और खुद भी घूम गई क्योंकि सांझ उसे पकड़ने की कोशिश कर रही थी।
दोनों बहनों का यूँ सुबह-सुबह शोर मचाने से अक्षय के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। तभी किसी ने उसके कंधे पर आकर हाथ रखा तो अक्षय ने अपने बगल में देखा तो एक औरत खड़ी उसे ही बड़े प्यार से देख रही थी।
अक्षय ने उस औरत को देखा और सोफ़े से उठते हुए कहा, "प्रणाम माँ..." इतना बोलकर अक्षय ने उनके पैर छू लिए। उस औरत ने अक्षय को आशीर्वाद दिया और प्राची और सांझ की नोकझोंक देखने लगी।
"ये लो, फिर शुरू हो गया इन दोनों का। पर कुछ भी कहो, जब तक दोनों ऐसे शैतानियाँ नहीं करतीं, ना घर का माहौल खुशनुमा नहीं बनता।" इतना बोलकर वह औरत अक्षय की ओर देखने लगी।
(ये हैं मौलवी जिंदल, जिंदल खानदान की इकलौती बहू।)
"ये तो हैं, इनकी वजह से इस घर में इतनी रौनक रहती है।" अक्षय ने अपनी माँ को देखते हुए कहा। (अक्षय जिंदल, जिंदल इंडस्ट्रीज़ के सीईओ। दिल्ली में इनका जाना-माना नाम था और अभी ये अपनी फैमिली के साथ मुंबई में हैं। मुंबई में भी इनकी काफी कंपनी है।)
"अरे मॉम! बताओ ना..." कौन सा वादा है जिस पर ये सांझ, सांझ ना बनकर आग बनकर बैठी है? प्राची ने युवानिका को पकड़कर सोफ़े की ओर ले जाते हुए कहा।
"तुमने वादा किया था, तुम्हें याद नहीं...?" युवानिका ने प्राची की ओर देखकर कहा।
"इन्हें कैसे याद होगा... इन्हें तो वो..." इतना बोलकर सांझ चुप हो गई और रोने सी शक्ल बनाकर मौलवी जी के बगल में आकर बैठ गई। "यू नो दादी! दी हर बार भूल जाती है, बोलो ना इन्हें!"
"उसे जाने दो। चलते हैं। हमारे साथ चलोगी ना?" मौलवी जी ने सांझ के चेहरे पर हाथ रखकर कहा।
"येस बेटा! हम सब साथ चलेंगे।" वैसे भी तुम दोनों अभी मुंबई में नई ही हो। अक्षय ने इतना कहा ही था कि प्राची और सांझ दोनों जोर-जोर से हँसने लगीं।
अक्षय ने उनके हँसने की आवाज़ सुनी तो उसने उन दोनों की ओर देखा, तो प्राची और सांझ के साथ-साथ मौलवी जी और युवानिका दोनों हँस रही थीं। अक्षय ने सबको देखा और उठते हुए कहा, "मैंने कोई जोक तो नहीं मारा था?"
"जोक नहीं मारा डैड... जोक के खानदान को ही मार दिया।" आपको मालूम भी नहीं होगा, लेकिन आप पिछले सात महीनों से हमसे यही बोल रहे हैं कि बच्चो! मुंबई तुम्हारे लिए नया है। इतना बोलकर प्राची ने पास में बैठी सांझ को हाई-फाइव दिया और हँसने लगी।
क्रमशः