My unknown billionaire husband Ch. 2

My unknown billionaire husband - Chapter 2

Posted by Aarya Rai • Apr 03, 2025 01:51 PM

"सम्यक…" चीखते हुए अन्विका ने अपना चेहरा अपनी हथेलियों से ढँक लिया था। कार उसके बेहद करीब आकर एक झटके से रुकी थी। उस कार में बैठे शख्स की आँखें ये नज़ारा देखकर खतरनाक अंदाज़ में सिकुड़ गई थीं।

अन्विका भले ही अंदर बैठे शख्स को न देख सकी हो, पर कार की फ्लैश लाइट जैसे ही उसके चेहरे से टकराई थी, अंदर बैठे शख्स के चेहरे के बदलते एक्सप्रेशन ये ज़ाहिर कर रहे थे कि वो उसे पहचान चुका था।

इस बात से अनजान कि कार रुक चुकी थी, अन्विका अब भी अपने चेहरे को अपनी हथेलियों में छुपाए खड़ी थी और उसकी आँखों से बहते आँसू बारिश की बूंदों में घुलती जा रही थीं।

कार का दरवाज़ा खुला और ब्लैक बूट्स पहने एक शानदार शख़्सियत का हैंडसम लड़का उससे बाहर निकला था। बारिश की परवाह न करते हुए वो अन्विका की ओर बढ़ गया था।

"क्या कर रही हो तुम, इस वक्त यहां?" हल्के गुस्से भरी कठोर आवाज़ वहाँ गूँजी थी जिससे बारिश की बूंदें भी थरथरा गई थीं। जानी-पहचानी सी आवाज़ सुनकर अन्विका ने चौंकते हुए अपने चेहरे पर से अपनी हथेलियों को हटाया, भीगी पलकें उठाईं तो नज़र सीधे सामने खड़े उस हैंडसम लड़के पर पड़ी, जो कोई और नहीं, रुद्रांश था। भीगे बाल उसके माथे पर बिखर गए थे और इस वक्त वो पहले से भी कहीं गुना ज़्यादा attractive लग रहा था।

अपने सामने रुद्रांश को देखकर अन्विका स्तब्ध थी।

"गाड़ी में बैठो।" एक बार फिर रुद्रांश की आवाज़ उसके कानों से टकराई थी और वो चौंकते हुए होश में लौटी थी, नज़र अब भी रुद्रांश के सर्द चेहरे पर टिकी थी। इस लम्हे में इस दुनिया में खुद को कितना तन्हा और अकेला महसूस कर रही थी, वो पर अचानक ही रुद्रांश उसके सामने आकर खड़ा हो गया था और उसे देखते ही, अन्विका की आँखों में रुके हुए आँसू उसके गालों पर फिसलने लगे थे।

"वो मर चुका है… अब कभी वापस नहीं आएगा…"

उसके कानों में ये शब्द गूँज रहे थे और उसका पूरा शरीर काँप रहा था, आँखों से आँसू बह रहे थे। उसके आँसू देखकर रुद्रांश के दिल में अजीब सी बेचैनी का एहसास हुआ था, चेहरे के कोल्ड एक्सप्रेशन भी कुछ बदले थे और लहज़े में नर्मी झलकने लगी थी।

"गाड़ी में बैठो अन्विका।"

अन्विका के लिए इस वक्त रुद्रांश का उसके पास होना ऐसा था जैसे तूफान से अकेले लड़ते किसी इंसान को किसी का सहारा मिल गया हो। इस वक्त उसके मन में भी भावनाओं का सैलाब उमड़ रहा था, जो उसे अपने साथ बहाकर ले जाता, पर रुद्रांश उसका सेवियर बनकर उसे बचाने आ गया था।

अन्विका बिना कुछ कहे, बोझिल कदमों से घसीटते हुए जाकर कार में बैठ गई थी। उसने अपने घुटनों में सिर छुपाया था और दर्द से आँखों से आँसू बनकर बह निकले थे।

रुद्रांश के कानों में उसकी सिसकियों की आवाज़ गूँज रही थी, जो उसे बेचैन कर रही थी। उसने हल्के से आँखें बंद की थीं, जैसे अपनी भावनाओं को कंट्रोल कर रहा हो और ड्राइवर से कहा था, "मेंशन चलो।"

उसकी बात सुनकर ड्राइवर एक पल के लिए चौंका था, फिर चुपचाप गाड़ी आगे बढ़ा दी थी। रुद्रांश ने अपनी बैक सीट से लगाते हुए अपनी आँखों को बंद कर लिया था। इस वक्त उसके दिमाग में सिर्फ और सिर्फ वो पल घूम रहा था जब कार अन्विका के बेहद करीब पहुँच गई थी, पर वो हटने के बजाय वहीं खड़ी थी, उसके वो आँसुओं से भीगी आँखें, सिसकियाँ… उसे इफेक्ट कर रही थीं, पर क्यों, इससे वो खुद अनजान था।

कुछ ही देर बाद, अचानक ही उसे अपनी गोद में किसी भारी चीज़ के गिरने का एहसास हुआ था तो उसने चौंकते हुए अपनी आँखें खोली थीं। अन्विका का सर उसके गोद में था और बाँह नीचे लटक रही थी। उसका पूरा चेहरा लगातार रोने से लाल हो गया था और गालों पर आँसुओं के निशान मौजूद थे। उस हसीन, दिलकश चेहरे पर अजीब सी उदासी और दुख झलक रहा था।

रुद्रांश कुछ देर खामोशी से उसके चेहरे को देखता रहा, फिर उसके चेहरे पर बिखरे बालों को अपनी उंगलियों से समेटकर कान के पीछे खोंस दिया। उसे थामते हुए उसने वापस सीट से सर लगाते हुए अपनी आँखों को बंद कर लिया था।

जब अन्विका को होश आया, तो उसने खुद को एक शानदार विला के खूबसूरत से कमरे में पाया था। वो तुरंत झटके से उठकर बैठ गई थी। आँखें बड़ी-बड़ी करके उसने चारों तरफ नज़रें घुमाई थीं, पर ये जगह उसके लिए बिल्कुल ही अनजान थी। उसका सर अब भी भारी हो रहा था, रुद्रांश से मिलने वाली बात उसके दिमाग से बिल्कुल ही स्किप हो गई थी।

"ये कौन सी जगह है?… किसका कमरा है और मैं यहां कैसे आई?"

खुद से सवाल करते हुए अन्विका बेड से नीचे उतर गई थी। नज़रें झुकाकर खुद को देखा था, फिर सर हिलाते हुए गेट की ओर बढ़ गई थी।

कमरे से बाहर निकलते ही उसके सामने बड़ा सा लिविंग एरिया आ गया था। अभी वो नज़रें घुमाकर गेट ढूंढ ही रही थी कि पीछे से एक जानी-पहचानी आवाज़ आई थी।

"भागने के लिए रास्ता ढूंढ रही हो?"

आवाज़ सुनकर अन्विका की आँखों की पुतलियाँ आश्चर्य से फैल गई थीं। पहचान गई थी वो इस आवाज़ को। अचानक ही उसकी आँखों के आगे वो सीन आ गया था जब बारिश में भीगते रुद्रांश को उसने अपने सामने देखा था।

"तो क्या रुद्रांश मुझे अपने घर ले आए हैं?" अन्विका मन ही मन बड़बड़ाते हुए पलटी थी। सामने ही रुद्रांश खड़ा था।

वी-नेक ग्रे टी-शर्ट, जो उसकी फिट बॉडी को परफेक्टली हग कर रही थी, हल्की भीगी हुई थी, जिससे उसकी मस्क्युलर बॉडी की आउटलाइन और भी उभर आई थी। सफेद लोअर उसकी लंबी, एथलेटिक टांगों पर ढीले-ढाले अंदाज़ में टिका था, लेकिन उसकी चाल में जो कॉन्फिडेंस था, उसने उस कैजुअल लुक को भी बेहद चार्मिंग बना दिया था।

भीगे बाल उसके माथे पर कुछ लटों की तरह बिखरे हुए थे, जिनमें से पानी की कुछ बूंदें उसके जबड़े की शार्प लाइन से होकर नीचे गिर रही थीं। उसकी गहरी, इंटेंस आँखें जैसे किसी अनकहे राज़ को छुपाए हुए थीं, और होंठों पर हल्की-सी स्माइल थी, जो उसे और भी आकर्षक बना रही थी।

वो लापरवाही से अपनी हथेली से बालों को झटकता हुआ उसकी ओर बढ़ रहा था, दूसरा हाथ लोअर की पॉकेट में था। उसकी मूवमेंट में एक नेचुरल ग्रेस थी। उसकी बॉडी लैंग्वेज में एक ऐसा मैगनेटिक चार्म था, जो सामने खड़े किसी को भी बेसाख्ता उसकी तरफ देखने पर मजबूर कर देता था।

अन्विका की नज़र जब उस पर पड़ी थी तो वो अपनी पलकें तक झपकाना भूल गई थी। ये नज़ारा देखते ही रुद्रांश के होंठों पर एक शैतानी मुस्कान खेल गई थी।

"व्हाट आर यू लूकिंग एट?"

अन्विका के शब्द कानों में पड़ते ही चौंकते हुए होश में लौटी थी और हड़बड़ाते हुए कुछ कदम पीछे हट गई थी क्योंकि रुद्रांश उसके बेहद करीब था। रुद्रांश उसके चेहरे का उड़ा हुआ रंग देखकर हल्के से हँसा, फिर दोनों हाथ अपने पॉकेट में डालते हुए इंटेंस निगाहों से उसे देखने लगा था।

"पहले तुमने मेरी दो-दो शर्ट खराब की, फिर अचानक मेरी कार के सामने आकर खड़ी हो गई। तुम्हारे बेहोश होने पर मैं तुम्हें अपने मेंशन में लेकर आया, तुम्हारे लिए डॉक्टर को बुलाया और होश में आते ही तुम छुपकर यहां से भागने लगी… एक दिन में तुम्हारे वजह से कितनी प्रॉब्लम्स हुई हैं मुझे, इसके बावजूद मैंने तुम्हारी हेल्प की… डोन्ट यू थिंक कि तुम्हें पहले मुझे थैंक्यू एंड सॉरी कहना चाहिए।"

रुद्रांश की बात सुनकर अन्विका को अपनी गलती का एहसास हुआ था और उसने हड़बड़ाते हुए कहा था,

"मैं भाग नहीं रही थी और मेरा आपको परेशान करने का कोई इंटेंशन भी नहीं था।… आई एम वेरी वेरी सॉरी एंड थैंक्स अ लॉट. नाउ आई हैव टू गो…"

"जाना है तुम्हें?" रुद्रांश ने उसकी ओर कदम बढ़ाते हुए सवाल किया था। उसके चेहरे के एक्सप्रेशन देखकर अन्विका ने घबराते हुए सर हिला दिया था।

उसका जवाब सुनकर रुद्रांश के होंठों पर कुटिल मुस्कान फैल गई थी।

"इतनी भी क्या जल्दी है जाने की?… याद नहीं तुम्हें आज तुमने मेरी दो-दो शर्ट खराब की है, तुम्हें मुझे उसके पैसे देने थे। उससे पहले तो तुम यहां से नहीं जा सकती।"

रुद्रांश के चेहरे पर मिस्टिरियस लुक्स मौजूद थे, शायद उसके शैतानी दिमाग में कुछ चल रहा था। उसकी बात सुनकर अन्विका कुछ परेशान हो गई थी, पर उसने ज़ाहिर नहीं होने दिया था और पूरे कॉन्फिडेंस के साथ जवाब दिया था,

"सॉरी सर, पर अभी मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं, पर मैं बहुत जल्द आपकी शर्ट का कॉम्पेन्सेशन पे कर दूंगी। बस मुझे थोड़ा सा टाइम चाहिए।"

उसका लहजा आत्मविश्वास से भरा था। रुद्रांश ने पलटकर कुछ जवाब नहीं दिया था, बस इंटेंस नज़रों से उसे देखते हुए धीरे-धीरे अन्विका की ओर बढ़ने लगा था। उसे यूँ अपनी ओर आता देखकर अन्विका घबरा गई थी। उसके कोल्ड एक्सप्रेशन और डरावनी आँखें…

अन्विका का दिल जोरों से धड़क उठा था। वो अपने कदमों को पीछे की ओर घसीटने लगी थी और अचानक ही पीछे रखे सोफे पर गिर पड़ी थी। रुद्रांश के होंठों पर तिरछी मुस्कान फैल गई थी। अन्विका हड़बड़ाते हुए उठने लगी थी, पर रुद्रांश उसके बेहद करीब पहुँच गया था और अचानक ही अन्विका की ओर झुक गया था, जिससे घबराकर अन्विका ने पीछे हटते हुए उनके दरमियान दूरी बनाई थी।

अगले ही पल रुद्रांश ने कुछ ऐसा किया था जिससे अन्विका बुरी तरह चौंक गई थी और उसने घबराकर अपनी आँखों को कसके बाँध लिया था।

To be continued...

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