Rebirth: pyar ya mout? Ch. 2

Rebirth: pyar ya mout? - Chapter 2

Posted by Zarna Parmar • Mar 03, 2025 11:01 PM

कॉफी कप के टूटने की आवाज़ पूरे कैफ़े में गूंज गई। लोग पलटकर देखने लगे, लेकिन नायरा के लिए इस वक्त दुनिया की सारी आवाज़ें फीकी पड़ गई थीं।

अविक की आँखें उसके चेहरे पर टिकी थीं, जैसे वह उसकी आत्मा के अंदर तक झाँक रहा हो।

"मैंने तुम्हें मरने नहीं दिया…"

ये शब्द उसके दिमाग में गूँज रहे थे।

"तुम बकवास कर रहे हो," नायरा ने खुद को सँभालते हुए कहा। "मैंने तुम्हें पहले कभी नहीं देखा। और तुम मेरे बचपन के बारे में कुछ भी नहीं जानते।"

अविक मुस्कुराया। "शायद तुम्हें याद नहीं… लेकिन मैं तुम्हें अच्छे से जानता हूँ, नायरा।"

वह थोड़ा आगे झुका और धीरे से फुसफुसाया—

"या फिर मैं तुम्हें ओविया बुलाऊँ?"

नायरा के पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई।

ओविया।

ये नाम सिर्फ उसे और उसके माता-पिता को पता था। यह उसका असली नाम था, लेकिन एक हादसे के बाद उसके परिवार ने उसे छुपाने के लिए "नायरा" नाम दे दिया था।

"त… तुम्हें ये नाम कैसे पता?" उसकी आवाज़ काँप गई।

अविक ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने बस एक गहरी, अजीब मुस्कान दी और कहा—

"तुम्हें सच्चाई जाननी होगी, नायरा। लेकिन अभी नहीं… सही वक्त पर।"

फिर वह उठकर जाने लगा।

"रुको!" नायरा ने घबराकर कहा।

अविक पलटा, उसकी भूरी आँखें चमक उठीं।

"मुझे जवाब चाहिए," नायरा ने कहा।

अविक कुछ देर उसे देखता रहा, फिर धीरे से बोला—

"अगर सच जानना चाहती हो, तो आज रात 12 बजे पुराने चर्च के पास आना। लेकिन याद रखना… वहाँ से वापस लौट पाना तुम्हारे हाथ में नहीं होगा।"

नायरा के शरीर में एक ठंडक सी दौड़ गई।

अविक ने उसकी तरफ एक आखिरी नज़र डाली और फिर भीड़ में गायब हो गया।

रात का बुलावा

रिया, जो अब तक चुप थी, अचानक बोली, "नायरा, मुझे ये लड़का बिल्कुल ठीक नहीं लग रहा।"

"मुझे भी," नायरा ने कहा।

"तू चर्च नहीं जाएगी, ठीक है?"

नायरा ने कोई जवाब नहीं दिया।

क्योंकि उसका दिल कह रहा था कि उसे जाना ही होगा।

---

रात गहरी होती जा रही थी। ठंडी हवा ने पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले लिया था।

नायरा चर्च की ओर बढ़ रही थी। हर कदम के साथ उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था।

जैसे ही वह चर्च के पास पहुँची, हवा एकदम ठहर गई। चारों ओर एक अजीब सन्नाटा था।

फिर अचानक—

घड़ी ने 12 बजाए।

और उसी पल, चर्च की घंटी खुद-ब-खुद बज उठी।

टन्न… टन्न… टन्न…

नायरा की साँसें तेज़ हो गईं।

और तभी—

पीछे से किसी ने उसका नाम पुकारा।

"ओविया…"

वह झटके से मुड़ी।

अविक वहाँ खड़ा था।

लेकिन अब वह वैसा नहीं लग रहा था जैसा दिन में था।

उसकी आँखें अब हल्की लाल चमक रही थीं।

उसकी परछाई अजीब तरीके से हिल रही थी, जैसे वह इंसान नहीं… कुछ और हो।

"अब मैं तुम्हें सच्चाई दिखाने वाला हूँ," अविक ने कहा।

और फिर, नायरा की आँखों के सामने अंधेरा छा गया।

चर्च की घंटियों की आवाज़ अब धीमी पड़ गई थी, लेकिन नायरा के कानों में अब भी गूंज रही थी।

अविक उसके सामने खड़ा था, पर अब वह पहले जैसा नहीं लग रहा था।

उसकी आँखें हल्की लाल चमक रही थीं, जैसे उसके अंदर कोई अजीब सी शक्ति थी।

नायरा ने घबराकर एक कदम पीछे लिया। "त… तुम क्या हो?"

अविक हल्का मुस्कुराया, लेकिन उसकी मुस्कान में कुछ था… कुछ ऐसा जिसने नायरा के अंदर तक सिहरन दौड़ा दी।

"मैं तुम्हारी भूली हुई यादें हूँ, ओविया।"

"मेरा नाम नायरा है!" वह चिल्लाई।

अविक ने धीरे से सिर हिलाया। "नहीं… तुम्हारा असली नाम ओविया है, और तुम्हें ये नाम देने वाला मैं ही था।"

नायरा का दिमाग जैसे सुन्न पड़ने लगा।

"झूठ…" वह बड़बड़ाई। "मैंने तुम्हें पहले कभी नहीं देखा।"

अविक ने एक गहरी साँस ली, और फिर धीरे से अपना हाथ बढ़ाया।

"अगर तुम सच देखना चाहती हो, तो मेरा हाथ पकड़ो।"

नायरा के पैर जम गए।

वह जानती थी कि अगर उसने उसका हाथ पकड़ लिया, तो कुछ भयानक होने वाला था।

लेकिन साथ ही, उसका दिल यह भी कह रहा था कि यही एक रास्ता था सच तक पहुँचने का।

थरथराते हाथों से उसने अविक का हाथ थाम लिया।

और फिर…

अंधकार में गिरती एक लड़की

एक झटके में, सब कुछ घूमने लगा।

नायरा की आँखों के सामने अंधेरा छा गया, जैसे वह किसी गहरे कुएँ में गिर रही हो।

और फिर… अचानक…

वह एक पुराने महल में खड़ी थी।

चारों ओर अंधेरा था, सिर्फ दीवारों पर जलती हुई टॉर्च की हल्की रोशनी थी।

"ये… कहाँ हूँ मैं?"

फिर उसने किसी के रोने की आवाज़ सुनी।

वह धीरे-धीरे आगे बढ़ी।

और सामने जो दिखा, उससे उसकी साँसें थम गईं।

एक लड़की ज़मीन पर पड़ी थी, खून से लथपथ।

नायरा की आँखें चौड़ी हो गईं। "ये… कौन है?"

लड़की के कपड़े फटे हुए थे, उसकी कलाई पर चोट के निशान थे… और उसके चेहरे पर वही काला निशान था, जो अब नायरा की कलाई पर था।

"नायरा…!"

उसने चौंककर देखा।

अविक उसके पास खड़ा था, लेकिन इस बार वह वैसा नहीं दिख रहा था।

उसके कपड़े पुराने जमाने के थे, उसकी आँखों में अजीब सी बेचैनी थी।

"अविक, ये सब क्या है?" नायरा ने घबराकर पूछा।

अविक ने गहरी साँस ली और धीरे से कहा—

"तुम्हें याद नहीं… लेकिन ये लड़की तुम ही हो।"

"क्या?"

नायरा का सिर चकराने लगा।

"यह तुम्हारा ही अतीत है, ओविया। सौ साल पहले, तुम यहीं मरी थीं। और मैं… मैं तुम्हें बचा नहीं सका।"

नायरा की आँखें फटी की फटी रह गईं।

"तुम… सौ साल पहले भी थे?"

अविक की आँखें भर आईं। "हाँ… और मैं आज भी तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हूँ।"

नायरा की साँसें तेज़ हो गईं।

"तुम कौन हो, अविक?"

अविक ने उसकी आँखों में गहराई से देखा और धीरे से कहा—

"मैं तुम्हारा प्रेमी था, ओविया… और आज भी हूँ।"

नायरा को ऐसा लगा जैसे उसका दिल धड़कना बंद कर देगा।

"मैं… मैं तुम्हारी प्रेमिका थी?"

अविक की गहरी भूरी आँखें उस पर टिकी थीं। उनमें एक अजीब सा दर्द था, एक अधूरी चाहत…

"हाँ, ओविया," उसने धीरे से कहा। "तुम मेरी थी… और अब भी हो।"

नायरा का दिमाग जैसे सुन्न पड़ गया था।

"ये सब सच है? क्या मैं सच में किसी पिछले जन्म में थी?"

उसकी नज़र उस खून से लथपथ लड़की पर पड़ी—जो खुद उसकी ही शक्ल की थी।

"मैं… मरी थी?" उसकी आवाज़ काँप गई।

अविक की मुट्ठियाँ कस गईं। "हाँ… और मैं तुम्हें बचा नहीं सका।"

उसके शब्दों में एक ऐसा दर्द था जिसने नायरा की आत्मा तक को झकझोर दिया।

सौ साल पहले…

चारों ओर अंधेरा छाने लगा। अचानक, पूरा महल किसी चलचित्र की तरह जीवंत हो उठा।

अब वह एक अलग समय में थी—सौ साल पहले।

महल के भव्य गलियारे, जलते हुए मशालों की हल्की रोशनी, और दूर से आती संगीत की आवाज़…

नायरा ने देखा—वह एक खूबसूरत राजकुमारी की तरह सजी हुई थी।

उसने खुद को शीशे में देखा—वही चेहरा, लेकिन आँखों में मासूमियत और होठों पर एक हल्की मुस्कान।

तभी दरवाज़ा खुला, और अंदर एक शख्स आया—

अविक।

लेकिन वह अब वैसा नहीं लग रहा था जैसा आज है। वह एक योद्धा की पोशाक में था, आँखों में जुनून, और चेहरे पर वही रहस्यमयी मुस्कान।

"ओविया," उसने धीमे से कहा।

नायरा—या कहें ओविया—ने उसे देखकर मुस्कुरा दिया।

"तुम फिर से बिना इजाज़त के महल में आ गए," उसने शरारती लहजे में कहा।

अविक हँस पड़ा। "और तुम फिर से मुझसे भागने की कोशिश कर रही हो?"

ओविया ने सिर झुका लिया। "अगर मेरे पिता को पता चला कि मैं एक साधारण सैनिक से प्यार करती हूँ, तो वो मुझे मार डालेंगे, अविक।"

अविक की आँखों में दर्द झलकने लगा।

"तो भाग चलो मेरे साथ," उसने धीरे से कहा। "हम कहीं दूर चले जाएँगे, जहाँ कोई हमें अलग न कर सके।"

ओविया की आँखें भर आईं। "काश ये इतना आसान होता…"

लेकिन भाग्य ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था।

विश्वासघात और मृत्यु

महल के गलियारों में साज़िशें बुनने लगी थीं।

ओविया का प्रेम उसके पिता को कबूल नहीं था। उन्होंने उसे किसी और राजा से शादी के लिए तय कर दिया था।

लेकिन… अविक को हटाने के लिए उन्होंने एक और घिनौनी चाल चली।

उस रात, जब अविक और ओविया भागने की योजना बना रहे थे, तभी अचानक महल के सैनिकों ने उन पर हमला कर दिया।

अविक ने तलवार खींच ली और बहादुरी से लड़ा, लेकिन संख्या बहुत अधिक थी।

ओविया चिल्लाई, "उसे मत मारो!"

पर तभी—

एक तलवार उसकी छाती के पार हो गई।

अविक की आँखों के सामने उसका प्यार दम तोड़ रहा था।

"ओविया!"

उसने उसे अपनी बाहों में पकड़ लिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

उसकी आँखों से आँसू गिरने लगे।

"मैंने तुम्हें बचाने की कसम खाई थी…" उसकी आवाज़ टूट गई।

ओविया ने उसकी आँखों में देखा और धीरे से मुस्कुराई।

"मैं… फिर लौटूँगी, अविक।"

और फिर, उसकी आँखें हमेशा के लिए बंद हो गईं।

भूतकाल से वर्तमान तक

नायरा की आँखों के सामने सब कुछ घूमने लगा।

वह झटके से वर्तमान में लौट आई।

वह अभी भी चर्च के बाहर खड़ी थी, लेकिन अब उसकी आँखों में आँसू थे।

"मैं… वो लड़की थी?" उसकी आवाज़ काँप रही थी।

अविक ने धीरे से सिर झुका लिया। "हाँ, नायरा। तुम ही ओविया थी।"

"और तुम…" नायरा ने धीरे से पूछा, "तुम इंसान हो या…"

अविक की आँखें चमकीं।

"मैं आज भी वही हूँ, नायरा," उसने धीरे से कहा। "मैंने तुम्हारा इंतज़ार किया… सौ साल तक।"

नायरा की साँसें तेज़ हो गईं।

"पर तुम ज़िंदा कैसे हो?"

अविक मुस्कुराया। "क्योंकि मैंने तुम्हें खोने के बाद… अपनी आत्मा बेच दी थी।"

to be continued 💫🦋💙

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